अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत-फिनलैंड संबंध
प्रिलिम्स के लिये: फिनलैंड, 5G, 6G, क्वांटम कम्युनिकेशंस, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन, बाल्टिक सागर
मेन्स के लिये: भारत-नॉर्डिक देशों के संबंध, भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक और सामरिक सहयोग
चर्चा में क्यों?
फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब ने 11वें रायसीना संवाद में मुख्य अतिथि के रूप में भारत की राजकीय यात्रा की, जिसके दौरान भारत-फिनलैंड संबंधों को 'डिजिटलीकरण और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी' के रूप में उन्नत किया गया और पर्यावरण सहयोग समझौतों का नवीनीकरण किया गया।
सारांश
- रायसीना संवाद के लिये राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा के दौरान भारत और फिनलैंड ने अपने संबंधों को 'डिजिटलीकरण और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी' के रूप में उन्नत किया। इस अवसर पर प्रवासन, हरित ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कि 5G, 6G, AI और क्वांटम संचार पर महत्त्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए।
- दोनों देशों का लक्ष्य व्यापार का विस्तार करना, स्टार्टअप सहयोग को बढ़ावा देना और पर्यावरण सहयोग को मज़बूत करना है, जिसमें 'विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच 2026' की सह-मेज़बानी करना शामिल है। साथ ही वे व्यापार असंतुलन और भू-राजनीतिक मतभेदों जैसी चुनौतियों के समाधान पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
फिनलैंड के राष्ट्रपति के भारत दौरे के मुख्य नतीजे क्या हैं?
- द्विपक्षीय संबंधों का उन्नयन: दोनों देशों के बीच संबंधों को आधिकारिक तौर पर 'डिजिटलीकरण और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी' के रूप में उन्नत किया गया है। यह एक हरित और तकनीकी रूप से उन्नत भविष्य के साझा दृष्टिकोण को स्वीकार करता है।
- भारत और फिनलैंड अपने संबंधित विदेश मंत्रालयों के बीच एक 'समर्पित कांसुलर संवाद' स्थापित करने पर सहमत हुए हैं। इस तंत्र का उद्देश्य कांसुलर मुद्दों, गतिशीलता और नागरिकों के कल्याण पर समन्वय को मज़बूत करना है।
- प्रमुख समझौता ज्ञापन (MoUs) और समझौते हस्ताक्षरित:
- प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी: फिनलैंड भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिये एक प्रमुख गंतव्य बन रहा है। यह समझौता ज्ञापन (MoU) कुशल भारतीय प्रतिभा के फिनलैंड में आवागमन को सुगम बनाने के लिये एक संस्थागत ढाँचा स्थापित करता है।
- पर्यावरण सहयोग (नवीनीकरण): वर्ष 2020 के समझौते को आधार बनाते हुए यह संधारणीयता की पहलों को कवर करता है, जिसमें बायो-एनर्जी, 'वेस्ट-टू-एनर्जी' (अपशिष्ट से ऊर्जा) समाधान, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ (पवन, सौर, लघु जलविद्युत) शामिल हैं।
- सांख्यिकी में सहयोग: आधिकारिक सरकारी सांख्यिकी के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और सहयोग के लिये एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए।
- डिजिटलीकरण, प्रौद्योगिकी और नवाचार
- 6G पर संयुक्त कार्य बल: उन्नत 6G अनुसंधान को गति देने के लिये इसकी स्थापना की गई है, जिसमें फिनलैंड के ओलू विश्वविद्यालय और 'भारत 6G अलायंस' के बीच रणनीतिक साझेदारी की गई है।
- डिजिटलीकरण पर अंतर-क्षेत्रीय संयुक्त कार्यसमूह: भारत और फिनलैंड के बीच उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिये यह समूह बनाया गया है। इसका उद्देश्य उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC), 5G, 6G, क्वांटम संचार/कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करना है।
- संयुक्त अनुसंधान आह्वान: भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और फिनलैंड की नवाचार वित्तपोषण एजेंसी 'बिजनेस फिनलैंड' के बीच एक कार्यान्वयन व्यवस्था स्थापित की गई है।
- भारत-फिनलैंड स्टार्टअप कॉरिडोर: इसका उद्देश्य दोनों देशों के स्टार्टअप ईकोसिस्टम के बीच जुड़ाव को बढ़ावा देना है। इसके तहत फिनलैंड के 'स्लश' कार्यक्रम में भारतीय स्टार्टअप्स की और भारत के 'स्टार्टअप महाकुंभ' में फिनिश स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
- व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग
- द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य: दोनों राष्ट्रों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है, जिसके लिये हाल ही में संपन्न हुए 'भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते' (India-EU FTA) का भरपूर लाभ उठाया जाएगा।
- विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF): भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) तथा फिनलैंड के नवाचार कोष 'सिट्रा' (SITRA) ने घोषणा की है कि वे 2026 में भारत में WCEF की सह-मेज़बानी करेंगे।
भारत-फिनलैंड संबंध कैसे हैं?
- व्यापार और आर्थिक संबंध: भारत और फिनलैंड के बीच वर्ष 2023–24 में भारत का फिनलैंड को निर्यात लगभग 582.65 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि फिनलैंड से आयात लगभग 913.48 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इसके परिणामस्वरूप भारत को लगभग 330.83 मिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।
- फिनलैंड को भारत के प्रमुख निर्यातों में औषधीय और फार्मास्युटिकल उत्पाद, वस्त्र और परिधान, धातु के उत्पाद और इलेक्ट्रिकल मशीनरी एवं उपकरण शामिल हैं।
- भारत मुख्यतः फिनलैंड से विशिष्ट औद्योगिक मशीनरी, विद्युत उपकरण, कागज़ और पेपरबोर्ड उत्पाद, धातुमय अयस्क और धातु का स्क्रैप आयात करता है।
- फिनलैंड के साथ भारत के व्यापार में हेटरोसाइक्लिक यौगिकों (जो फार्मास्यूटिकल्स और विशेष रसायनों में उपयोग होने वाले प्रमुख मध्यवर्ती पदार्थ हैं) का निर्यात तेज़ी से बढ़ा है। यह वर्ष 2022 में 1% से बढ़कर 2025 में 28% हो गया, जिससे यह सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गया है।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): वर्ष 2023 में फिनलैंड का भारत में निवेश करने वाले देशों में 40वाँ स्थान रहा।
- हालाँकि वास्तविक निवेश कहीं अधिक होगा क्योंकि नोकिया (Nokia) जैसी कई फिनिश कंपनियाँ 1990 के दशक से ही भारत में मौजूद हैं और उनके द्वारा किये जाने वाले आगामी विस्तार को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के रूप में नहीं गिना जाता है।
- प्रौद्योगिकी और डिजिटल सहयोग: वर्ष 2019 में दोनों देशों के बीच डिजिटलीकरण पर एक आशय की संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये गए थे।
- दोनों देश 5G और 6G संचार, साइबर सुरक्षा, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और स्टार्टअप ईकोसिस्टम जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग कर रहे हैं।
- फिनलैंड के वास्तुकारों के समर्थन से भारत ने चिनाब नदी पर विश्व के सबसे ऊँचे रेलवे सेतु का निर्माण किया और असम में नुमालीगढ़ में सबसे बड़ी बाँस-से-जैव इथेनॉल रिफाइनरी स्थापित की।
- भारतीय प्रवासी: फिनलैंड में लगभग 20,000 भारतीय रहते हैं, जो फिनलैंड की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विविधता में महत्त्वपूर्ण योगदानकर्त्ता हैं, हालाँकि फिनलैंड की जनसंख्या लगभग 5.6 मिलियन अपेक्षाकृत कम है।
भारत-फिनलैंड संबंधों में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
- व्यापार घाटा: व्यापार संतुलन निरंतर रूप से फिनलैंड के पक्ष में बना हुआ है। भारत के निर्यात मुख्यतः पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित हैं (वस्त्र, परिधान, मशीनरी), हालाँकि यह उच्च-मूल्य प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आयात करता है।
- गहन लॉजिस्टिकल कनेक्टिविटी का अभाव: प्रमुख यूरोपीय आर्थिक केंद्रों (जर्मनी, फ्राँस, यूनाइटेड किंगडम) के विपरीत, भारत एवं हेलसिंकी (फिनलैंड की राजधानी) के मध्य प्रत्यक्ष लॉजिस्टिकल कनेक्टिविटी तुलनात्मक रूप से कमज़ोर है।
- कनेक्टिविटी का यह अभाव मालवाहन लागत एवं परिवहन समय में वृद्धि करता है, जो स्वाभाविक रूप से उच्च-आवृत्ति व्यवसाय-से-व्यवसाय (B2B) लेन-देन एवं सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला एकीकरण को निरुत्साहित करता है।
- रूसी कारक (Russia Factor): रूस के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले फिनलैंड ने दशकों की सैन्य असंलग्नता त्यागकर नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाईज़ेशन (नाटो) में प्रवेश किया है तथा रूस के विरुद्ध कठोर पश्चिमी प्रतिबंधों का समर्थन करता है।
- भारत तथापि रणनीतिक स्वायत्तता नीति का पालन करता है, मॉस्को के साथ आर्थिक, ऊर्जा एवं रक्षा संबंध बनाए रखता है, जिससे रणनीतिक दृष्टिकोण में भिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।
भारत-फिनलैंड संबंधों को सुदृढ़ करने के लिये क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
- यूरोपीय संघ - भारत मुक्त व्यापार समझौता: हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के साथ, भारतीय निर्यात क्षेत्र (जैसे– वस्त्र, औषधि एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ) को 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार के दोगुने करने के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु फिनलैंड बाज़ार का दोहन करना चाहिये।
- कौशल पारिस्थितिक तंत्र: कौशल भारत मिशन के अंतर्गत भारत को अपने व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण मानकों को यूरोपीय मानकों के साथ सक्रिय रूप से संरेखित करना चाहिये ताकि नवीन हस्ताक्षरित प्रवास एवं गतिशीलता समझौता ज्ञापन का पूर्ण उपयोग हो सके।
- हरित संक्रमण का नेतृत्व: वर्ष 2026 में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था फोरम (WCEF) के सह-आयोजन से भारत को चक्रीय अर्थव्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्थायी विकास में वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व स्थापित करने का अद्वितीय मंच प्राप्त हुआ।
- वैश्विक शांतिदूत की भूमिका: वैश्विक आपूर्ति शृंखला को अस्थिर करने वाले संघर्षों की निरंतरता के बीच भारत को फिनलैंड/यूरोपीय संघ जैसे पश्चिमी देशों एवं वैश्विक दक्षिण दोनों के साथ अपने सुदृढ़ संबंधों का लाभ उठाकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिये।
फिनलैंड से संबंधित प्रमुख बिंदु
- भौगोलिक स्थिति: फिनलैंड उत्तरी यूरोप में स्थित है तथा फेनोस्केनेडियन प्रायद्वीप के महत्त्वपूर्ण भाग का निर्माण करता है।
- यह रूस (पूर्व), स्वीडन (पश्चिम) तथा नॉर्वे (उत्तर) के साथ स्थलीय सीमाएँ साझा करता है।
- यह देश पश्चिम में बोथनिया की खाड़ी, दक्षिण में फिनलैंड की खाड़ी तथा दक्षिण-पश्चिम में बाल्टिक सागर से घिरा हुआ है।
- भौतिक भूगोल: फिनलैंड को "हज़ार झीलों का देश" की उपाधि से नवाज़ा गया है, यहाँ 188,000 से अधिक झीलें हैं, जिनमें साइमा झील सबसे बड़ी है।
- उत्तरी क्षेत्र लैपलैंड अधिकांशतः आर्कटिक वृत्त के भीतर अवस्थित है तथा यह स्वदेशी सामी लोगों का निवास स्थान है।
- भूराजनीतिक एवं सामरिक महत्त्व: फिनलैंड ने अप्रैल 2023 में नाटो की सदस्यता ग्रहण की, जिससे रूस–यूक्रेन युद्ध के पश्चात दशकों से चली आ रही उसकी सैन्य असंलग्नता की नीति समाप्त हो गई और इसके परिणामस्वरूप रूस के साथ नाटो की स्थलीय सीमा में उल्लेखनीय विस्तार हुआ।
- यह वर्ष 1995 से यूरोपीय संघ तथा नॉर्डिक परिषद का सदस्य है, जो नॉर्डिक देशों में क्षेत्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करती है।
- आर्कटिक शासन में भूमिका: फिनलैंड आर्कटिक परिषद के आठ स्थायी सदस्यों में से एक है (भारत पर्यवेक्षक), जिससे इसे आर्कटिक शासन, जलवायु अनुसंधान तथा ध्रुवीय सहयोग में महत्त्वपूर्ण भूमिका प्राप्त है।
- यह भारत की आर्कटिक नीति एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये महत्त्वपूर्ण साझेदार है।
- पर्यावरणीय एवं आर्थिक विशेषताएँ: फिनलैंड यूरोप का वानिकी-प्रधान देश है, जिसमें 70% से अधिक वन आवरण टैगा (उष्णकटिबंधीय) वनों से आच्छादित है।
- इसने वर्ष 2035 तक कार्बन तटस्थता का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है तथा वर्ष 2016 में राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था मार्गदर्शिका अपनाने वाला प्रथम देश बना और वर्ष 2017 में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) का आयोजन किया।
- सामाजिक एवं शासन सूचकांक: फिनलैंड विगत आठ वर्षों (2018–25) से वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में विश्व का सबसे सुखी देश रहा है, जो मज़बूत सामाजिक कल्याण व्यवस्था एवं संस्थाओं में उच्च विश्वास को दर्शाता है।
- यह विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक एवं भ्रष्टाचार बोध सूचकांक में शीर्ष देशों में सम्मिलित है, जो सुदृढ़ शासन एवं पारदर्शिता को प्रतिबिंबित करता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. डिजिटल नवाचार और स्थिरता के क्षेत्रों में नॉर्डिक देशों, विशेष रूप से फिनलैंड के साथ भारत की साझेदारी के सामरिक महत्त्व पर चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. डिजिटलीकरण और स्थिरता में भारत-फिनलैंड सामरिक साझेदारी का क्या महत्त्व है?
यह उभरती प्रौद्योगिकियों, हरित ऊर्जा, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और नवाचार पारिस्थितिक तंत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करती है, जिससे दोनों देश प्रौद्योगिकी-संचालित और सतत भविष्य की ओर अग्रसर होते हैं।
2. भारत और फिनलैंड के बीच प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी क्या है?
यह कुशल भारतीय पेशेवरों, विशेषकर श्रम की कमी का सामना कर रहे प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में, के फिनलैंड आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिये एक रूपरेखा प्रदान करती है।
3. विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) क्या है?
WCEF एक वैश्विक मंच है जो चक्रीय अर्थव्यवस्था की अवधारणा और प्रथाओं को बढ़ावा देता है, वर्ष 2026 के संस्करण की सह-मेज़बानी भारत फिनलैंड के इनोवेशन फंड SITRA के साथ मिलकर करेगा।
4. भारत की आर्कटिक नीति के लिये फिनलैंड सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों है?
फिनलैंड आर्कटिक परिषद का स्थायी सदस्य है, जो इसे आर्कटिक अनुसंधान, जलवायु अध्ययन और ध्रुवीय शासन सहयोग के लिये एक महत्त्वपूर्ण भागीदार बनाता है।
5. कौन-सी चुनौती भारत-फिनलैंड व्यापार संबंधों को प्रभावित करती है?
व्यापार संतुलन फिनलैंड के पक्ष में है, क्योंकि भारत मुख्य रूप से पारंपरिक वस्तुओं का निर्यात करता है जबकि फिनलैंड से उच्च मूल्य वाली प्रौद्योगिकी और औद्योगिक उपकरणों का आयात करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
मेन्स
प्रश्न. 'नाटो का विस्तार एवं सुदृढीकरण और एक मज़बूत अमेरिका-यूरोप रणनीतिक साझेदारी भारत के लिये अच्छा काम करती है।' इस कथन के बारे मे आपकी क्या राय है? अपने उत्तर के समर्थन में कारण और उदाहरण दीजिये। (2023)

भारतीय राजव्यवस्था
भारत में डिजिटल परिवर्तन और उसका विकास
प्रिलिम्स के लिये: डिजिटल इंडिया प्रोग्राम, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), भारतनेट, ऑप्टिकल फाइबर केबल, आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस, नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM), मेघराज, प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA), DIKSHA (डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग), SWAYAM (स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव-लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स), PM-WANI (प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस), अटल इनोवेशन मिशन (AIM), इंडियाAI कोष, इंडियाAI मिशन, स्टार्टअप इंडिया, CoWIN, एंक्रिप्शन, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP), 2020।
मेन्स के लिये: डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से संबंधित प्रमुख तथ्य, भारत की डिजिटल विकास गाथा में प्रमुख चुनौतियाँ और भारत में डिजिटल ईकोसिस्टम को बढ़ावा देने एवं सुरक्षित करने के लिये आवश्यक कदम।
चर्चा में क्यों?
डिजिटल इंडिया प्रोग्राम (2015) में निहित भारत का डिजिटल परिवर्तन एक कनेक्टिविटी मिशन से एक व्यापक सशक्तीकरण यात्रा के रूप में विकसित हुआ है, जो डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी अभियानों और लक्षित कौशल विकास पहलों का लाभ उठाकर डिजिटल विभाजन को व्यवस्थित रूप से समाप्त करता है और प्रत्येक नागरिक को डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाता है।
सारांश
- भारत के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम ने डिजिटल कनेक्टिविटी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेवाओं का महत्त्वपूर्ण रूप से विस्तार किया है, जिससे लाखों लोग डिजिटल अर्थव्यवस्था में एकीकृत हुए हैं।
- भारतनेट, UPI, आधार और पीएम-वाणी जैसी पहलों ने शासन और वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ किया है।
- हालाँकि, डिजिटल विभाजन, साइबर सुरक्षा जोखिम और बुनियादी ढाँचे की कमियाँ महत्त्वपूर्ण चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के अंतर्गत भारत की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
- सार्वभौमिक डिजिटल कनेक्टिविटी: भारतनेट ने 2.15 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को जोड़ा और ऑप्टिकल फाइबर केबल विस्तार को 19.35 लाख रूट किलोमीटर (2019) से बढ़ाकर 42.36 लाख रूट किलोमीटर (2025) कर दिया। 99.9% ज़िलों में 5G कवरेज है, जिसमें 5.18 लाख से अधिक बेस ट्रांसीवर स्टेशन शामिल हैं (दिसंबर 2025)।
- डेटा लागत 269 रुपये प्रति गीगाबाइट (2014) से घटकर 8-10 रुपये प्रति गीगाबाइट (2025-26) हो गई है।
- नवंबर 2025 में ब्रॉडबैंड सब्सक्रिप्शन 100 करोड़ तक पहुँच गया, जो एक दशक पहले के 13.15 करोड़ से छह गुना अधिक है।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): 143 करोड़ से अधिक यूनिक डिजिटल ID (आधार) जारी की गईं, जिससे लक्षित कल्याण वितरण और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) संभव हुआ।
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) मासिक संव्यवहार में लगभग 28.33 लाख करोड़ रुपये संसाधित करता है और मासिक रूप से 21.7 बिलियन के संव्यवहार को संचालित करता है।
- डिजिलॉकर में 62 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्त्ता हैं, जो आधिकारिक दस्तावेज़ों का सुरक्षित, कागज़ रहित भंडारण और साझाकरण प्रदान करता है।
- हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग: नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) ने देश भर के संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु मॉडलिंग, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण का समर्थन प्राप्त 44 पेटाफ्लॉप्स की संयुक्त क्षमता वाले 38 सुपरकंप्यूटर तैनात किये।
- 2,170 से अधिक मंत्रालय और विभाग सुरक्षित और स्केलेबल सरकारी क्लाउड प्लेटफॉर्म मेघराज पर एप्लिकेशन होस्ट कर रहे हैं।
- डिजिटल साक्षरता: प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) ने 6 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 6.39 करोड़ ग्रामीण परिवारों को प्रशिक्षित किया (मार्च 2024 तक), जिससे प्रति ग्रामीण परिवार के एक व्यक्ति को डिजिटल कौशल से सशक्त बनाया गया।
- डिजिटल शिक्षण मंच: DIKSHA (डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग) स्कूली शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण के लिये 19,698 से अधिक पाठ्यक्रम होस्ट करता है। इसके अंतर्गत 18.23 करोड़ नामांकन हुए, जबकि 14.57 करोड़ पूर्ण हुए।
- SWAYAM (स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव-लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स) के अंतर्गत प्रमुख संस्थानों द्वारा उच्च शिक्षा के लिये 18,500+ पाठ्यक्रम प्रदान किया जाता है, अभी तक इसके अंतर्गत 53.7 लाख प्रमाणन प्रदान किये जा चुके हैं।
- इंस्पायर-मानक (मिलियन माइंड्स ऑगमेंटिंग नेशनल एस्पिरेशन्स एंड नॉलेज) ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मार्गदर्शन के साथ 10,000 रुपये के प्रोटोटाइप अनुदान प्रदान करता है। 2025-26 में इसने 11.47 लाख विचारों को प्रेरित किया है, जिनमें से 52% लड़कियों से और 84% ग्रामीण स्कूलों से हैं।
- अधिकार-आधारित डिजिटल समावेशन: यूनिक डिसेबिलिटी ID (UDID) उप-योजना (दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत) ने 1.34 लाख से अधिक डिजिटल दिव्यांगता कार्ड जेनरेट किये हैं, जिससे देश भर में दिव्यांग व्यक्तियों के लिये कल्याणकारी लाभों तक पहुँच सुव्यवस्थित हुई है।
- भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र ने 3,189 ई-सामग्री वीडियो के साथ विश्व का सबसे बड़ा भारतीय सांकेतिक भाषा डिजिटल भंडार विकसित किया।
- अंतिम-मील डिजिटल पहुँच: 6.5 लाख से अधिक ग्राम स्तरीय उद्यमी (VLE) डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का संचालन करते हैं, जो उन नागरिकों के लिये डिजिटल विभाजन को कम करते हैं जिनके पास डिवाइस, विश्वसनीय कनेक्टिविटी या डिजिटल साक्षरता का अभाव है।
- PM-WANI (प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस) ने देश भर में 4,09,111 वाई-फाई हॉटस्पॉट तैनात किये हैं, जो विकेंद्रीकृत, लाइसेंस-मुक्त सार्वजनिक वाई-फाई मॉडल को बढ़ावा देते हैं और स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करते हैं।
- डिजिटल कौशल विकास और नवाचार: अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के अंतर्गत 722 ज़िलों में 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब (ATL) स्थापित की गईं, जिनमें 1.1 करोड़ छात्रों को रोबोटिक्स, AI और IoT में व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा रहा है।
- फ्यूचरस्किल्स प्राइम, जो यूरोपीय आयोग की पैक्ट फॉर स्किल्स रिपोर्ट 2024 में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है, शिक्षार्थियों को AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स में उद्योग-प्रासंगिक कौशल से लैस करता है।
- इंडियाAI मिशन देश भर के स्टार्टअप, शोधकर्त्ताओं और नवोन्मेषकों को समर्थन देने के लिये एक व्यापक पारिस्थितिक तंत्र प्रदान करता है। इस पहल के तहत इंडियाAI कोष, 20 क्षेत्रों में 9,500 से अधिक डेटासेट और 273 AI मॉडल उपलब्ध कराता है।
- स्टार्टअप और उद्यमिता: स्टार्टअप इंडिया के तहत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 2016 के 400 से बढ़कर 2025 में 2 लाख से अधिक हो गई, जिससे 21 लाख रोज़गार सृजित हुए। अब 50% स्टार्टअप टियर-II और टियर-III शहरों में कार्यरत हैं, जो स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।
- 72 अटल इनक्यूबेशन सेंटर्स (AIC) ने 3,500 से अधिक स्टार्टअप्स का पोषण किया है। इसके अलावा, इन सेंटरों ने 1,000 से अधिक महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को भी सफलतापूर्वक समर्थन प्रदान किया है।
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम
- परिचय: यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित एक प्रमुख पहल है। इसे जुलाई 2015 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है।
- यह कार्यक्रम सरकारी सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रदान करने, कनेक्टिविटी बढ़ाने, डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने और नवाचार और दक्षता के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देने के लिये विभिन्न डिजिटल प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करता है।
- मूल अवधारणा: तीन आपस में जुड़ी हुई परिकल्पनाओं पर आधारित है:
- डिजिटल अवसंरचना: प्रत्येक नागरिक के लिये एक मूलभूत सुविधा के रूप में।
- शासन और सेवाओं की ऑन-डिमांड उपलब्धता: जिसका उद्देश्य निर्बाध, पारदर्शी और पेपरलेस वितरण सुनिश्चित करना है।
- नागरिकों का डिजिटल सशक्तीकरण: यह साक्षरता, कौशल और डिजिटल संसाधनों तक पहुँच के माध्यम से हासिल किया जाएगा।
- 9 स्तंभ: कार्यान्वयन ढाँचा 9 स्तंभों पर आधारित है:
भारत के डिजिटल विकास के मार्ग में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
- लगातार बनी हुई डिजिटल असमानता: NSSO के आँकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के केवल 24% घरों में इंटरनेट की सुविधा है, जबकि शहरों में यह आँकड़ा 66% है, जो समावेशी विकास, ई-स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुँच में बाधा उत्पन्न करता है।
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-21) के आँकड़ों से पता चलता है कि भारत में केवल एक-तिहाई (33%) महिलाओं ने ही इंटरनेट का उपयोग किया है। इंटरनेट के उपयोग में इस व्यापक अंतर को देखते हुए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि वर्ष 2025 में भारत में ऑनलाइन AI पाठ्यक्रम लेने वाले लोगों में महिलाओं की भागीदारी मात्र 31.2% थी।
- आदिवासी आबादी और पिछड़े वर्ग वंचित बने रहते हैं, जिससे एक ‘डिजिटल निम्न वर्ग’ का निर्माण होता है।
- साइबर सुरक्षा चुनौतियाँ: वर्ष 2022 में देश में 13.91 लाख साइबर सुरक्षा घटनाएँ दर्ज की गईं और यह साइबर हमलों के लिये विश्व स्तर पर दूसरा सबसे अधिक लक्षित देश बनकर उभरा। इसके अलावा, भारत में लगभग 7,90,000 साइबर सुरक्षा पेशेवरों की भारी कमी है।
- बुनियादी अवसंरचना और संचार संबंधी बाधाएँ: भारत में डिजिटल सेवाओं तक प्रभावी पहुँच सीमित है, जिसका मुख्य कारण बुनियादी अवसंरचना और संचार संबंधी बाधाएँ हैं। देश का डिजिटल ढाँचा वैश्विक मानकों से मेल नहीं खाता। नवंबर 2024 तक मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर 25वें स्थान पर रहा। दूरदराज़ के क्षेत्रों में विशेष रूप से निम्न ब्रॉडबैंड स्पीड, 5G रोलआउट की असमानता और फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क की अपर्याप्तता डिजिटल समावेश में प्रमुख बाधाएँ हैं।
- उदाहरण के लिये, भारतनेट परियोजना में बार-बार समय सीमा में देरी (2014-15 से 2025 के बाद तक), भारी लागत वृद्धि (20,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.39 लाख करोड़ रुपये से अधिक) जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर डाउनटाइम हुआ है।
- सार्वजनिक डिजिटल प्रणालियों में अक्षमताएँ: प्रमुख सार्वजनिक प्लेटफॉर्म स्केलेबिलिटी (विस्तार क्षमता), डेटा की सटीकता और तकनीकी खामियों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उदाहरण के लिये आधार में पहचान संबंधी धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं, जबकि कोविन (CoWIN) जैसी प्रणालियों ने गैर-शहरी आबादी के लिये उपयोगिता के स्तर पर कमियों को उजागर किया है।
- डिजिटल साक्षरता और कौशल अंतर: NSS के 78वें दौर के सर्वेक्षण (2020–21) के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों में कंप्यूटर साक्षरता दर केवल 24.7% है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2.9 करोड़ (29 मिलियन) कुशल श्रमिकों की कमी का अनुमान है। यह कमी विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT), बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) जैसे उच्च-मांग वाले क्षेत्रों में देखी गई है।
- डिजिटल विस्तार का पर्यावरणीय प्रभाव: तेज़ी से हो रहे डिजिटलीकरण के कारण ई-अपशिष्ट में तीव्र वृद्धि हुई है, जो वर्ष 2019–20 के 1.01 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2023–24 में 1.751 मिलियन मीट्रिक टन हो गया है। इसके अलावा डेटा सेंटरों की उच्च ऊर्जा खपत भी पर्यावरणीय स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न करती है।
भारत की डिजिटल ग्रोथ स्टोरी को बढ़ावा देने हेतु कौन-से कदम आवश्यक हैं?
- साइबर सुरक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना: स्वदेशी साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकियों और एंक्रिप्शन मानकों के अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना चाहिये, ताकि डेटा संप्रभुता को मज़बूत किया जा सके। साथ ही राष्ट्रीय स्तर के साइबर खतरों से निपटने के लिये अन्य सिविल सेवाओं की तरह एक समर्पित साइबर सुरक्षा सेवा कैडर भी स्थापित किया जाना चाहिये।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को सुदृढ़ बनाना: सभी DPI घटकों, जैसे– आधार, UPI, डिजीलॉकर और GSTN का स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा नियमित और अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिये, ताकि प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही आपात स्थितियों के दौरान सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिये सभी महत्त्वपूर्ण DPI प्रणालियों हेतु भौगोलिक रूप से वितरित बैकअप और आपदा पुनर्प्राप्ति केंद्र स्थापित किये जाने चाहिये।
- डिजिटल साक्षरता और साइबर जागरूकता: प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान 2.0 (PMGDISHA 2.0) को साइबर सुरक्षा जागरूकता, सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार और वित्तीय धोखाधड़ी से सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए शुरू किया जाना चाहिये। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर ‘साइबर जागरूकता चैंपियंस’ का एक नेटवर्क बनाया जाना चाहिये और राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के ढाँचे के तहत स्कूल पाठ्यक्रम में अनिवार्य साइबर स्वच्छता को शामिल किया जाना चाहिये।
- कानूनी और विनियामक ढाँचे का सुदृढ़ीकरण: डीपफेक, AI-जनित गलत सूचना और क्रिप्टो-संबंधित अपराधों जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिये 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000' में व्यापक संशोधन करना। उभरती प्रौद्योगिकियों (AI, ब्लॉकचेन, IoT) के सुरक्षा निहितार्थों के परीक्षण हेतु 'रेगुलेटरी सैंडबॉक्स' स्थापित करना।
- ग्रामीण डिजिटल ईकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण: बैंडविड्थ में निरंतर वृद्धि, PM-WANI हॉटस्पॉट के लिये मज़बूत सुरक्षा मानकों को लागू करने और ज़िला इकाइयों से जुड़े ब्लॉक-स्तरीय साइबर सुरक्षा सेल (Cybersecurity Cells) स्थापित करके ग्रामीण डिजिटल बुनियादी ढाँचे को मज़बूत किया जाना चाहिये।
निष्कर्ष
भारत की दशक भर की डिजिटल इंडिया यात्रा ने विश्व स्तरीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का सफलतापूर्वक निर्माण किया है, जिसने एक अरब से अधिक लोगों को जोड़ा और नवाचार को बढ़ावा दिया। हालाँकि इस गति को बनाए रखने के लिये देश को तात्कालिक रूप से लगातार बने डिजिटल अंतर को कम करना, बढ़ते साइबर सुरक्षा खतरों से निपटना और मज़बूत डेटा सुरक्षा ढाँचे लागू करना आवश्यक है। एक समग्र रणनीति जो डिजिटल साक्षरता, स्वदेशी प्रौद्योगिकी और समावेशी पहुँच पर केंद्रित हो, सभी के लिये सुरक्षित और न्यायसंगत डिजिटल भविष्य सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. तेज़ी से डिजिटल विस्तार के बावजूद भारत में डिजिटल डिवाइड बना हुआ है। चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए और उन्हें दूर करने के लिये नीतिगत उपाय सुझाइये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना है, जिसे डिजिटल अवसंरचना, ई-गवर्नेंस और डिजिटल सशक्तीकरण के माध्यम से हासिल किया जाएगा।
2. भारतनेट क्या है और यह क्यों आवश्यक है?
भारतनेट (2011) एक ग्रामीण ब्रॉडबैंड परियोजना है, जो 2.15 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से जोड़ती है। इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट कनेक्टिविटी को सुलभ बनाना है।
3. PM-WANI क्या है?
PM-WANI (2020) यह योजना सार्वजनिक डेटा ऑफिस के माध्यम से लाइसेंस-मुक्त सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट को बढ़ावा देती है, जिससे सस्ती ब्रॉडबैंड पहुँच और स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित पर विचार कीजिये: (2022)
- आरोग्य सेतु
- कोविन
- डिजीलॉकर
- दीक्षा
उपर्युक्त में से कौन-से ओपेन-सोर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बनाए गए हैं ?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2,3 और 4
(c) केवल 1,3 और 4
(d) 1,2,3 और 4
उत्तर: (d)
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा/से भारत सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ योजना का/के उद्देश्य है/हैं? (2018)
- भारत की अपनी इंटरनेट कंपनियों का गठन, जैसा कि चीन ने किया।
- एक नीतिगत ढाँचे की स्थापना जिससे बड़े आँकड़े एकत्रित करने वाली समुद्रपारीय बहु-राष्ट्रीय कंपनियों को प्रोत्साहित किया जा सके कि वे हमारी राष्ट्रीय भौगोलिक सीमाओं के अंदर अपने बड़े डेटा केंद्रों की स्थापना करें।
- हमारे अनेक गाँवों को इंटरनेट से जोड़ना तथा हमारे बहुत से विद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों एवं प्रमुख पर्यटक केंद्रों में वाई-फाई की सुविधा प्रदान करना।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
प्रश्न: कभी-कभी समाचारों में दिखने वाले 'डिजीलॉकर' के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2016)
- यह डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के अंतर्गत सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक डिजिटल लॉकर सिस्टम है।
- यह आपके ई-दस्तावेज़ों तक आपकी पहुँच को संभव बनाता है चाहे भौतिक रूप से आपकी उपस्थिति कहीं भी हो।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
मेन्स
प्रश्न. "चौथी औद्योगिक क्रांति (डिजिटल क्रांति) के प्रादुर्भाव ने ई-गवर्नेंस को सरकार का अविभाज्य अंग बनाने में पहल की।" चर्चा कीजिये। (2020)
प्रश्न. 'डिजिटल भारत' कार्यक्रम कृषि उत्पादकता और आय को बढ़ाने में किसानों की किस प्रकार सहायता कर सकता है? सरकार ने इस संबंध में क्या कदम उठाए हैं? (2015)


