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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026

  • 17 Feb 2026
  • 114 min read

प्रिलिम्स के लिये: इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंडिया AI मिशन, पैक्स सिलिका पहल, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर

मेन्स के लिये: समावेशी विकास और शासन में AI की भूमिका, भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना, ग्लोबल साउथ में AI और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन।

स्रोत: पीआईबी 

चर्चा में क्यों? 

इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 की शुरुआत नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुई, जिसका आयोजन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने किया। यह ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला प्रमुख वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सम्मेलन है, जो समावेशी और विकास-केंद्रित AI में भारत की नेतृत्व भूमिका को प्रदर्शित करता है।

  • इस समिट का आयोजन इंडिया AI मिशन के अंतर्गत किया गया है, जो वैश्विक दृष्टिकोण को “AI सुरक्षा” से बदलकर “विकास और प्रभाव के लिये AI” की दिशा में ले जाता है।

सारांश

  • इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 भारत को ग्लोबल साउथ में अग्रणी नेतृत्वकारी देश के रूप में स्थापित करता है, जहाँ फोकस AI सुरक्षा से बदलकर विकास और प्रभाव के लिये AI पर केंद्रित है। यह पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस के सिद्धांतों से संचालित है तथा समावेशी एवं ज़िम्मेदार AI शासन को प्रोत्साहित करता है।
  • इंडिया-AI मिशन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से यह समिट स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु सहनशीलता, शासन तथा आर्थिक विकास के लिये AI-संचालित समाधान को आगे बढ़ाता है, साथ ही डिजिटल संप्रभुता एवं कार्यबल की तैयारियों को भी मज़बूत करता है।

इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

  • विषयवस्तु एवं दार्शनिक आधार: यह समिट भारतीय मूल्यों पर आधारित है, विशेष रूप से “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” (सभी के कल्याण और सभी की खुशी) के आदर्श पर। इसे दो सैद्धांतिक ढाँचों के आधार पर संरचित किया गया है:
    • तीन सूत्र (स्तंभ): पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस
      • ना।
    • सात चक्र (कार्य समूह): स्वास्थ्य, कृषि, सुरक्षित और विश्वसनीय AI, विज्ञान, समावेशन, AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण तथा आर्थिक विकास सहित विशेष विषयों पर केंद्रित।

  • मुख्य संस्थागत ढाँचे: इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 को प्रमुख संस्थागत ढाँचे द्वारा समर्थित किया गया है, जिसमें MeitY, इंडियाAI मिशन, भारतीय सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क (STPI) और डिजिटल इंडिया पहल शामिल हैं।
    • ये सभी मिलकर नीति निर्धारण, ईकोसिस्टम समर्थन, नवाचार अवसंरचना और डिजिटल आधार प्रदान करते हैं, ताकि AI को अपनाना राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, समावेशी शासन तथा स्केलेबल कार्यान्वयन के अनुरूप हो सके।
  • अपेक्षित परिणाम: AI शासन, नवाचार और समावेशी विकास पर केंद्रित कम-से-कम 15 ठोस परिणाम हासिल किये जाने की उम्मीद है।
    • भारत का US-नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में प्रवेश, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर  एक लचीली आपूर्ति शृंखला का निर्माण करना है।
    • AI शासन और नैतिकता पर वैश्विक सहयोग, संभवतः बहु-पक्षीय ढाँचों के माध्यम से, बजाय किसी औपचारिक संधि निकाय के।
    • नौकरियों और सार्वजनिक सेवा वितरण के लिये AI को सुदृढ़ करना जिसमें रोज़गार सृजन तथा शासन दक्षता में AI की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
    • भारत के AI सुरक्षा संस्थान मॉडल का विस्तार, जो AI सुरक्षा और मानकों पर सहयोगात्मक शोध को बढ़ावा देता है।

भारत-AI इंपैक्ट समिट 2026 का महत्त्व

  • ग्लोबल साउथ की आवाज़: पहले के वैश्विक AI सम्मेलनों के विपरीत, जो विकसित देशों के लिये जोखिम और नियमन पर केंद्रित थे, भारत का समिट विकासात्मक परिणामों पर ज़ोर देता है। यह प्रदर्शित करता है कि AI कैसे ग्लोबल साउथ की चुनौतियों, जैसे– स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, कृषि उत्पादन तथा भाषा बाधाओं को दूर करने में सहायक हो सकता है।
  • प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण: भारत अपने  डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल (जैसे– UPI और आधार) को AI के लिये ब्लूप्रिंट के रूप में प्रदर्शित कर रहा है।
    • समिट “AI कॉमंस” को बढ़ावा देता है—जिसका उद्देश्य है कि कंप्यूटिंग शक्ति, डेटा सेट और मॉडल केवल कुछ टेक दिग्गजों के पास न रहकर विकासशील देशों के लिये उपलब्ध हों।
  • ‘नियमन’ से ‘नवाचार’ की ओर बदलाव: नई दिल्ली समिट में Applied AI पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
    • ध्यान उपयोग के मामलों पर है—कैसे AI को वास्तव में ज़मीन पर उतारा जा सकता है ताकि मानव विकास सूचकांक (HDI) के संकेतकों में सुधार हो सके।
  • रणनीतिक कूटनीति: इस समिट की मेज़बानी करके भारत स्वयं को विकसित पश्चिम (जिसके पास टेक्नोलॉजी है) और विकासशील दक्षिण (जिसे टेक्नोलॉजी की आवश्यकता है) के बीच एक ब्रिज पावर के रूप में स्थापित करता है, जिससे प्रौद्योगिकी शासन में उसके कूटनीतिक प्रभाव को सुदृढ़ किया जाता है।

नोट: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मशीनों की वह क्षमता है, जो सामान्यतः मानव बुद्धि की आवश्यकता वाले कार्यों को संपन्न करने में सक्षम बनाती है। यह प्रणालियों को अनुभव से सीखने, नई परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित होने और जटिल समस्याओं का स्वतंत्र समाधान खोजने में सक्षम बनाती है।

  • AI डेटासेट, एल्गोरिद्म और लार्ज लैंग्वेज मॉडल का उपयोग करके जानकारी का विश्लेषण करती है, पैटर्न की पहचान करती है और प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करती है।
  • समय के साथ, ये प्रणालियाँ अपनी कार्यकुशलता में सुधार करती हैं, जिससे वे तर्क कर सकती हैं, निर्णय ले सकती हैं और मानवों के समान संवाद कर सकती हैं।

Artificial_Intelligence

भारत के लिये AI का क्या महत्त्व है?

फॉर पीपल: ब्रिजिंग सोशल इन्क्विटीज़

  • स्वास्थ्य सेवा: AI-संचालित निदान प्रणाली डॉक्टर-रोगी अनुपात (वर्तमान में भारत में लगभग 1:834) को संतुलित करने में सहायता कर रही है।
    • उपकरण: Qure.ai (रेडियोलॉजी) और स्वचालित रक्त/मूत्र विश्लेषण जैसे उपकरण ग्रामीण क्लिनिकों में ‘लैब-ग्रेड’ परिणाम प्रदान कर रहे हैं।
  • शिक्षा: DIKSHA जैसे प्लेटफॉर्म और अनुकूलनशील लर्निंग सिस्टम विभिन्न गति से सीखने वाले छात्रों के लिये पाठ्यक्रम को व्यक्तिगत बनाते हैं, जबकि AI अनुवाद ग्रामीण शिक्षार्थियों के लिये ‘अंग्रेज़ी बाधा’ (इंग्लिश बैरियर) को समाप्त करता है।
    • YUVAi: यूथ फॉर उन्नति एंड विकास विद एआई एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को AI और सामाजिक कौशल के साथ समावेशी ढंग से सक्षम बनाना है।
  • भाषायी समावेशन: भाषिणी के माध्यम से AI 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में वास्तविक समय अनुवाद सक्षम करता है, जिससे डिजिटल शासन भाषा द्वारा प्रतिबंधित नहीं रहता।
    • सर्वम विज़न स्वदेशी मॉडल है, जिसे भारतीय भाषाओं और उच्च-सटीकता दस्तावेज़ प्रसंस्करण (OCR) के लिये अनुकूलित किया गया है, जो विदेशी स्वामित्व वाले मॉडलों पर निर्भरता को कम करता है।

फॉर द प्लैनेट: प्रिसीज़न एंड सस्टेनेबिलिटी

  • Kisan E-Mitra (AI चैटबॉट) किसानों को उर्वरक उपयोग अनुकूलित करने में सहायता करता है, जिससे लागत और पर्यावरणीय बहाव कम होता है।
    • MausamGPT, एक AI-संचालित चैटबॉट, वर्तमान में विकासाधीन है, जो किसानों को क्षेत्रीय भाषाओं में व्यक्तिगत और संवादात्मक जलवायु तथा मौसम चेतावनी प्रदान करेगा।
    • कृषि: AI मॉडल उपग्रह चित्र और मृदा डेटा का विश्लेषण करके स्थानीय मौसम चेतावनी और कीट-भक्षण पूर्वानुमान प्रदान करते हैं।
  • ऊर्जा प्रबंधन: AI ‘क्लाइमेट-स्मार्ट’ विकास के लिये एक उपकरण के रूप में कार्य करता है, जो भारत के 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
    • AI स्मार्ट ग्रिड के साथ एकीकृत होकर चरम भार का पूर्वानुमान लगाता है और अक्षय ऊर्जा (सौर/पवन) की अस्थिरता को प्रबंधित करता है, जिससे भारत के हरित ऊर्जा संक्रमण की दक्षता बढ़ती है।
  • बाढ़ पूर्वानुमान: BrahmaSATARK जैसे सिस्टम AI-संयुक्त भौतिक मॉडलिंग का उपयोग करके ब्रह्मपुत्र और गंगा बेसिन के लिये प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान प्रदान करते हैं।

फॉर प्रोग्रेस: इकोनॉमिक एंड गवर्नेंस ट्रांसफॉर्मेशन 

  • शासन: अनुमानित है कि AI उत्पादकता बढ़ोतरी के माध्यम से वर्ष 2030 तक भारत की GDP में 500-600 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देगा।
    • भारत अपने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Aadhaar, UPI, DigiLocker) में AI को एकीकृत कर रहा है।
    • उदाहरण के लिये, MuleHunter.AI बैंकिंग में ‘मूल खाते’ (Mule Accounts) की पहचान करके धोखाधड़ी को रोकता है और जटिल न्यायालयीन निर्णयों का अनुवाद स्वचालित रूप से करता है, जिससे कानूनी पहुँच में सुधार होता है।
  • डिजिटल संप्रभुता: IndiaAI मिशन के माध्यम से भारत अपनी स्वयं की कंप्यूट क्षमता (38,000+ GPU) और स्वदेशी मॉडल, जैसे– भारतजेन का निर्माण कर रहा है, यह विश्व की पहली सरकारी वित्तपोषित मल्टीमॉडल LLM पहल है, जो AI-संचालित सार्वजनिक सेवाओं के लिये है।
    • इससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत का डेटा उसकी सीमाओं के भीतर रहे और AI मॉडल सांस्कृतिक रूप से प्रतिनिधित्वशील हों।

भारत में वर्तमान AI ईकोसिस्टम

  • तकनीक और AI ईकोसिस्टम में 6 मिलियन से अधिक लोग कार्यरत हैं। अनुमान है कि भारत में AI दक्ष कार्यबल वर्ष 2027 तक 12.5 लाख से अधिक हो जाएगा, जो डेटा साइंस, AI इंजीनियरिंग और एनालिटिक्स के क्षेत्र में मज़बूत मांग को दर्शाता है।
    • MeitY के फ्यूचर स्किल्स प्राइम कार्यक्रम में 18.56 लाख से अधिक पंजीकरण इस दिशा में सहयोग को रेखांकित करते हैं और 3.37 लाख से अधिक लोगों द्वारा इस कोर्स को पूर्ण कर लिया गया है, जिससे भारत की AI-दक्ष कार्यशक्ति सुदृढ़ हुई है।
  • वर्ष 2025 तक भारत में 1,800+ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) हैं, जिनमें से 500 से अधिक AI पर केंद्रित हैं।
  • देश में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप्स हैं और पिछले वर्ष लॉन्च हुए नए स्टार्टअप्स में लगभग 89% ने अपने उत्पादों या सेवाओं में AI का उपयोग किया।
  • NASSCOM AI Adoption Index में भारत का स्कोर 2.45/4 है, जो दर्शाता है कि 87% उद्यम सक्रिय रूप से AI समाधानों का उपयोग कर रहे हैं।
    • AI को अपनाने में अग्रणी क्षेत्र हैं: औद्योगिक और ऑटोमोटिव, उपभोक्ता वस्तुएँ और रिटेल, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ और बीमा तथा स्वास्थ्य सेवा। ये क्षेत्र मिलकर AI के कुल मूल्य का लगभग 60% योगदान करते हैं।
  • बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 26% कंपनियों ने बड़े पैमाने पर AI परिपक्वता प्राप्त कर ली है।

इंडिया AI मिशन क्या है?

  • परिचय: मार्च 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10,371 करोड़ रुपये के बजट के साथ स्वीकृत इंडिया AI मिशन, "मेकिंग AI इन इंडिया एंड मेकिंग AI वर्क फॉर इंडिया" के विज़न के माध्यम से भारत को AI में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से एक परिवर्तनकारी पहल है।
    • यह मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन एक स्वतंत्र व्यवसाय प्रभाग, इंडिया AI, द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
  • इंडिया AI मिशन के सात स्तंभ:
    • इंडिया AI कंप्यूट: उच्च-स्तरीय GPU तक किफायती पहुँच प्रदान करता है, इसके अंतर्गत 38,000 से अधिक GPU शामिल किये गए हैं और पात्र उपयोगकर्त्ता इंडिया AI मिशन के तहत 40% तक कम लागत पर AI कंप्यूट प्राप्त कर सकते हैं।
    • इंडिया AI अनुप्रयोग के विकास: हैकथॉन और स्वीकृत अनुप्रयोगों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शासन, जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत-विशिष्ट चुनौतियों हेतु AI के समाधानों को बढ़ावा देता है।
    • AI कोश (डेटासेट प्लेटफॉर्म): डेटासेट और AI मॉडलों का एक राष्ट्रीय भंडार प्रदान करता है, जो AI के विकास में तेज़ी लाने हेतु 20 क्षेत्रों में 3,000+ डेटासेट और 243 मॉडल होस्ट करता है।
    • इंडिया AI आधारभूत मॉडल: भारतीय भाषाओं और डेटा का उपयोग करते हुए स्वदेशी बहु-विधा AI मॉडल के विकास का समर्थन करता है, जिसके प्रथम चरण में सर्वम AI और ज्ञानी AI जैसे स्टार्टअप का चयन किया गया है।
    • इंडिया AI फ्यूचरस्किल्स: फेलोशिप, शैक्षणिक कार्यक्रमों और टियर 2 एवं टियर 3 शहरों में AI लैब्स के माध्यम से AI दक्ष कार्यबल का विस्तार होता है।
    • इंडिया AI स्टार्टअप वित्तपोषण: AI स्टार्टअप को वित्तपोषण और वैश्विक विस्तार के लिये सहायता प्रदान करता है, जिसमें यूरोप में बाज़ार पहुँच पहल शामिल हैं।
    • सुरक्षित और विश्वसनीय AI: यह 'इंडिया AI सुरक्षा संस्थान' और पूर्वाग्रह कम करने, गोपनीयता, स्पष्टीकरण तथा शासन परीक्षण से संबंधित परियोजनाओं के माध्यम से ज़िम्मेदार AI अपनाने को सुनिश्चित करता है।

निष्कर्ष

इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 अस्तित्व संबंधी जोखिमों के बजाय विकासात्मक परिणामों को प्राथमिकता देकर वैश्विक प्रौद्योगिकी शासन को परिभाषित करती है, जो ग्लोबल साउथ की ओर से इस प्रकार का पहला नेतृत्व है। अंततः यह भारत को एक "सेतु शक्ति" के रूप में स्थापित करती है जो AI नवाचार को 'पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस' के मानव-केंद्रित सिद्धांतों के साथ जोड़ता है।

दृष्टि मेन्स  प्रश्न:

प्रश्न. "इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 'AI सुरक्षा' से 'AI फॉर डेवलपमेंट' की ओर एक बदलाव का प्रतीक है।" ग्लोबल साउथ के लिये इसके निहितार्थों की चर्चा कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 का मूल उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य विकास, समावेशी वृद्धि और उत्तरदायी शासन के लिये AI को बढ़ावा देना है, जो जोखिम-केंद्रित विनियमन से हटकर व्यावहारिक कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करता है।

2. सम्मेलन के "तीन सूत्र" क्या हैं?
पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस — AI के माध्यम से सामाजिक सशक्तीकरण, स्थिरता और आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित।

3. इंडिया AI मिशन क्या है?
स्वदेशी AI क्षमताओं के निर्माण हेतु 10,371 करोड़ रुपए के लागत वाली पहल (2024), जो कंप्यूट एक्सेस, डेटासेट, स्वदेशी मॉडल, कौशल विकास और उत्तरदायी AI ढाँचों के माध्यम से कार्य करती है।

4. AI भारत में समावेशी विकास का समर्थन कैसे करता है?
AI डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा निदान, व्यक्तिगत शिक्षा, भाषा अनुवाद और वित्तीय समावेशन में सुधार करता है।

5. वैश्विक दक्षिण के लिये भारत का AI दृष्टिकोण क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह किफायती पहुँच, AI कॉमंस और विकासात्मक उपयोग के मामलों पर बल देता है, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिये एक विस्तार योग्य मॉडल प्रदान करता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स 

Q. विकास की वर्तमान स्थिति में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है?

  1. औद्योगिक इकाइयों में विद्युत् की खपत कम करना
  2.  सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना
  3.  रोगों का निदान
  4.  टेक्स्ट से स्पीच (Text-to-Speech) में परिवर्तन
  5.  विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1,2, 3 और 5
(b) केवल 1,3 और 4
(c) केवल 2,4 और 5
(d) 1,2,3,4 और 5

उत्तर: (b)


प्रश्न. 'वानाक्राई, पेट्या और इटरनलब्लू', जो हाल ही में समाचारों में उल्लिखित थे, निम्नलिखित में से किससे संबंधित हैं? (2018)

(a) एक्सोप्लैनेट्स
(b) क्रिप्टोकरेंसी
(c) साइबर आक्रमण
(d) लघु उपग्रह

उत्तर: (c)


मेन्स:

प्रश्न.  कृत्रिम बुद्धि (एआई) की अवधारणा का परिचय दीजिये। एआई क्लिनिकल निदान में कैसे मदद करता है? क्या आप स्वास्थ्य सेवा में एआई के उपयोग में व्यक्ति की निजता को कोई खतरा महसूस करते हैं? (2023)

प्रश्न. भारत के प्रमुख शहरों में आईटी उद्योगों के विकास से उत्पन्न होने वाले मुख्य सामाजिक-आर्थिक प्रभाव क्या हैं ? (2022)

प्रश्न. “चौथी औद्योगिक क्रांति (डिजिटल क्रांति) के प्रादुर्भाव ने ई-गवर्नेंस को सरकार अविभाज्य अंग बनाने में पहल की है।” विवेचना कीजिये। (2020)

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