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स्टेट पी.सी.एस.

  • 29 Nov 2025
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उत्तराखंड Switch to English

उत्तराखंड में पुनर्स्थापन हेतु बंजर भूमि चिह्नित

चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड वन विभाग ने पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन के लिये 30,000 हेक्टेयर बंजर वन भूमि को चिह्नित किया है तथा इस पहल को राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं और RECAP4NDC परियोजना से जोड़ा गया है।

मुख्य बिंदु 

पुनर्स्थापना अभियान के बारे में:

  • वन विभाग ने 30,000 हेक्टेयर बंजर वन भूमि का मानचित्रण किया है, जो पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ तथा कुमाऊँ में स्थित है, जहाँ चराई दबाव, बारंबार वनाग्नि, आक्रामक प्रजातियों तथा मृदा अपरदन के कारण वन गुणवत्ता में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
  • पुनर्स्थापन योजना में सहायक प्राकृतिक पुनर्जनन (ANR), वृक्षारोपण, मृदा–आर्द्रता संरक्षण संरचनाएँ तथा लैंटाना और पार्थेनियम जैसी आक्रामक प्रजातियों को हटाने की गतिविधियाँ शामिल होंगी।
  • प्राथमिकता वाले स्थलों में रिज़ क्षेत्र, जलग्रहण क्षेत्र तथा वन्यजीव गलियारे शामिल हैं, विशेष रूप से वे क्षेत्र जो गंगा और यमुना नदी घाटियों को प्रभावित करते हैं।
  • यह कार्यक्रम भारत की UNFCCC बॉन चैलेंज के तहत की गई प्रतिबद्धता को पूरा करने में योगदान देता है, जिसके अंतर्गत भारत ने वर्ष 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि के पुनर्स्थापन का लक्ष्य रखा है।
  • उत्तराखण्ड उन राज्यों में शामिल है, जो LiDAR-आधारित वन मानचित्रण को पायलट रूप में लागू कर रहे हैं, जिसके माध्यम से 3D भू-आकृति और वनस्पति डेटा का उपयोग कर बंजर परिदृश्य क्षेत्रों की पहचान की जा रही है।

RECAP4NDC परियोजना:

  • RECAP4NDC (Restoring, Conserving and Protecting Forest & Tree Cover for NDC Implementation) एक राष्ट्रीय जलवायु-वानिकी कार्यक्रम है, जो भारत के वन पुनर्स्थापन लक्ष्यों को समर्थन प्रदान करता है।
  • यह भारत को अपने NDC लक्ष्य की पूर्ति में सहायता करता है, जिसके अंतर्गत अतिरिक्त 2.5–3 बिलियन टन CO₂-समतुल्य कार्बन सिंक का सृजन, विस्तारित वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से किया जाना है।
  • यह MoEFCC द्वारा GIZ India (जर्मन सरकार के स्वामित्व वाली संस्था) के सहयोग से भारत–जर्मनी विकास सहयोग के अंतर्गत कार्यान्वित किया जाता है।
  • इसके प्रमुख कार्यक्षेत्रों में लैंडस्केप पुनर्स्थापन योजना, सामुदायिक आधारित वन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री का संवर्द्धन, सहायक प्राकृतिक पुनर्जनन तथा पारिस्थितिकी-आधारित पुनर्स्थापन शामिल हैं।

बिहार Switch to English

बिहार में वन और इको-टूरिज़्म अवसंरचना का उन्नयन

चर्चा में क्यों?

बिहार सरकार ने अनेक ज़िलों में वन अवसंरचना तथा इको-टूरिज़्म सुधार परियोजनाओं के लिये 10 करोड़ रुपये की मंज़ूरी दी है, जिसका उद्देश्य संरक्षण प्रयासों, आगंतुक सुविधाओं तथा वन सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करना है।

मुख्य बिंदु 

वन अवसंरचना परियोजनाओं के बारे में:

  • इस वित्तीय सहायता से विशेष रूप से वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व (VTR), गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य तथा रोहतास और कैमूर के वन क्षेत्रों में वन मार्गों, विश्राम गृहों, व्याख्या केंद्रों तथा निगरानी टावरों के उन्नयन को गति मिलेगी।
  • मुख्य उद्देश्य गश्ती मार्गों, शिकार-रोधी बुनियादी ढाँचे तथा वन कर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ बनाना है।
  • डिजिटल निगरानी प्रणालियों, कैमरा-आधारित मॉनिटरिंग तथा वन्यजीव संरक्षण के लिये नए फील्ड स्टेशनों की स्थापना हेतु भी धनराशि स्वीकृत की गई है।

इको-पर्यटन विकास के बारे में:

  • इस योजना का उद्देश्य वाल्मीकि नगर, कैमूर पहाड़ियों और रोहतास पठार के आसपास इको-टूरिज़्म को सशक्त बढ़ाना है, जिसके अंतर्गत आगंतुक सुविधाओं, साइनेज एवं व्याख्या तंत्र, प्रकृति मार्ग, पर्यावरण-अनुकूल कॉटेजों तथा सौर-आधारित सुविधाओं का उन्नयन शामिल है।
  • सरकार का लक्ष्य समुदाय-प्रबंधित पारिस्थितिकी-पर्यटन को प्रोत्साहित करना है, जिसमें आजीविका सृजन के लिये वन-किनारे के स्थानीय गाँवों को शामिल किया जाएगा।

वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व (VTR)

  • यह बिहार के पश्चिम चंपारण ज़िले में तराई क्षेत्र में स्थित है और एक प्रमुख ईको-टूरिज़्म तथा जैवविविधता हॉटस्पॉट है।
  • यह रिज़र्व भारत–नेपाल सीमा पर स्थित है और प्रत्यक्ष रूप से चितवन राष्ट्रीय उद्यान से संबद्ध है, जिससे यह एक महत्त्वपूर्ण अंतर-सीमावर्ती संरक्षण क्षेत्र बन जाता है।
  • इसके नदी तंत्र पर मुख्यतः गंडक (नारायणी) नदी का प्रभुत्व है, जो विस्तृत बाढ़ के मैदान, घास के मैदान, साल वन और तराई आर्द्रभूमि का निर्माण करती है।
  • वनस्पति में आर्द्र पर्णपाती वन, नदी-तटीय वन तथा सवाना-जैसी घास भूमियाँ शामिल हैं।
  • यह रिज़र्व बाघ, तेंदुआ, भारतीय गौर, भालू, सांभर, चीतल, हिरन, लकड़बग्घा तथा उपयुक्त नदी खंडों में गंगेटिक डॉल्फ़िन जैसी प्रजातियों को आश्रय प्रदान करता है।

उत्तर प्रदेश Switch to English

प्रतिबिंब प्लेटफॉर्म

चर्चा में क्यों?

प्रयागराज पुलिस ने उच्च सटीकता के साथ धोखाधड़ी का पता लगाने के लिये एक उन्नत डिजिटल पुलिस प्लेटफॉर्म 'प्रतिबिंब' का उपयोग करके साइबर अपराध पर अपनी कार्रवाई तीव्र कर दी है।

मुख्य बिंदु

  • प्रतिबिंब एक डेटा-संचालित अपराध-मानचित्रण एवं विश्लेषण मंच है, जो साइबर धोखाधड़ी समूहों का पता लगाने हेतु FIR, मोबाइल टॉवर डेटा, IP पते, वित्तीय लेनदेन डेटा तथा व्यवहार पैटर्न को एकीकृत करता है।
  • यह प्रणाली पुलिस को साइबर अपराध-प्रवण क्षेत्रों के वास्तविक समय हीट मैप तैयार करने की सुविधा देती है, जिससे लक्षित फील्ड अभियान संभव हो पाता है।
  • प्लेटफॉर्म बार-बार साइबर धोखाधड़ी करने वालों, घोटालों में प्रयुक्त सिम कार्डों तथा धन हस्तांतरण के लिये प्रयुक्त उच्च जोखिम वाले डिजिटल मार्गों की पहचान करने में मदद करता है।
  • यह गृह मंत्रालय के तहत 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS)' जैसे राष्ट्रीय उपकरणों के साथ मिलकर काम करता है, ताकि संदिग्ध लेनदेन को समय रहते ब्लॉक किया जा सके।

नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS)

  • यह वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग हेतु एक राष्ट्रीय ऑनलाइन प्रणाली है, जिसे नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (1930 हेल्पलाइन + ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म) के माध्यम से संचालित किया जाता है।
  • यह पीड़ितों को धोखाधड़ी लेनदेन की तुरंत रिपोर्ट करने में सक्षम बनाती है, जिससे बैंकों और भुगतान मध्यस्थों को 'गोल्डन ऑवर' में धन फ्रीज या वसूलने की अनुमति मिलती है।
  • प्रणाली का समन्वय गृह मंत्रालय के अधीन इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा किया जाता है।
  • यह बैंकों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को एक ही वास्तविक समय प्रतिक्रिया तंत्र पर जोड़ती है।

बिहार Switch to English

हेरिटेज सर्किट हेतु अल्ट्रा-लक्ज़री कारवाँ सेवा

चर्चा में क्यों?

बिहार सरकार ने राज्य के प्रमुख विरासत स्थलों पर फाइव स्टार अनुभव प्रदान करने हेतु अल्ट्रा-लक्ज़री कारवाँ सेवा की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य उच्च स्तरीय घरेलू और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना है।

मुख्य बिंदु

  • इस पहल के तहत राज्य के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर प्रीमियम यात्रा की सुविधा प्रदान करने के लिये अल्ट्रा-लक्ज़री पर्यटक जहाज़ (Fleet) लॉन्च किया गया है, जिसका उद्देश्य उच्च स्तरीय देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना है।
  • कारवाँ फाइव स्टार सुविधाओं से सुसज्जित हैं, जिनमें सुखद इंटीरियर्स, निजी सुइट, किचनेट, आधुनिक शौचालय, मनोरंजन इकाइयाँ और पर्यटक अनुभव को बढ़ाने के लिये मनोरम खिड़कियाँ शामिल हैं।
  • यह कारवाँ क्यूरेटेड हेरिटेज सर्किट पर संचालित होंगे, जिससे पर्यटकों को नालंदा, राजगीर, बोधगया, वैशाली, विक्रमशिला और पटना के गांधी सर्किट जैसे स्थलों का अवलोकन करने का अवसर मिलेगा।
  • यह पहल बिहार की विस्तृत पर्यटन-विकास रणनीति के तहत शुरू की गई है, जो विरासत संरक्षण के साथ-साथ उच्च-मूल्य, कम-प्रभाव वाले पर्यटन के माध्यम से राजस्व वृद्धि पर केंद्रित है।

उत्तर प्रदेश Switch to English

ऊपरी यमुना समीक्षा समिति की बैठक

चर्चा में क्यों?

ऊपरी यमुना समीक्षा समिति (UYRC) की 9वीं बैठक केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश के नोएडा में आयोजित की गई, जिसमें छह राज्यों के मंत्री और अधिकारी शामिल हुए।

मुख्य बिंदु

समिति के बारे में:

  • इसकी स्थापना ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (UYRB) के कार्यों की निगरानी हेतु की गई थी।
  • केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता वाली यह समिति, जिसमें बेसिन राज्यों के मुख्यमंत्री/मंत्री शामिल हैं, ऊपरी यमुना नदी बोर्ड के लिये पर्यवेक्षी और उच्च-स्तरीय नीति-निर्माण निकाय का काम करती है।
  • यह नदी प्रवाह, जलाशय संचालन, जल आवंटन और अंतरराज्यीय समन्वय की नियमित समीक्षा करती है।

यमुना नदी:

  • यमुना, गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है, जो उत्तराखंड के उत्तरकाशी में यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है।
  • ऊपरी बेसिन के प्रमुख राज्य उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान हैं।
  • इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ टोंस (सबसे लंबी), हिंडन, चंबल, बेतवा और केन हैं।
  • हथिनीकुंड बैराज हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यमुना के प्रवाह को नियंत्रित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Upper Yamuna Review Committee Meeting


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