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स्टेट पी.सी.एस.

  • 19 May 2026
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मध्य प्रदेश Switch to English

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला को संस्कृत शिक्षण केंद्र घोषित किया

चर्चा में क्यों? 

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला विवाद मामले में फैसला सुनाया कि धार में स्थित भोजशाला परिसर मूल रूप से संस्कृत शिक्षा का एक केंद्र और देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर था। 

मुख्य बिंदु:

  • फैसला: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने घोषणा की कि धार ज़िले में स्थित भोजशाला परिसर एक हिंदू मंदिर है और ऐतिहासिक रूप से यह संस्कृत शिक्षा तथा ज्ञान के केंद्र के रूप में कार्य करता था। 
  • विवादित स्थल: इस स्थल को हिंदू 'भोजशाला' और मुस्लिम 'कमल मौला मस्जिद' के नाम से जानते हैं, जिसके कारण यह लंबे समय से एक धार्मिक तथा कानूनी विवाद का विषय रहा है। 
  • न्यायालय की टिप्पणी: उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि इस स्थल पर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर मौजूद था और समय के साथ वहां हिंदू पूजा-पाठ की परंपराएँ जारी रही थीं। 
  • ASI रिपोर्ट: यह फैसला पुरातात्त्विक साक्ष्यों और भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सौंपी गई रिपोर्टों पर आधारित था। 
  • वर्ष 2003 का आदेश रद्द: न्यायालय ने भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के 2003 के उस आदेश को रद्द (खारिज) कर दिया, जिसने मुस्लिमों को परिसर में शुक्रवार की नमाज़ अदा करने की अनुमति दी थी। 
  • प्रशासन: उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि भोजशाला परिसर का प्रशासन और प्रबंधन केंद्र सरकार तथा ASI के अधीन रहेगा। 
  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण:
    • इसकी स्थापना वर्ष 1861 में सर अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा की गई थी।
    • मुख्यालय: नई दिल्ली।
    • यह संस्कृति मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
    • स्वतंत्रता के बाद, ASI को 'प्राचीन स्मारक तथा पुरात्त्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958' (AMASR अधिनियम) के तहत एक वैधानिक निकाय बनाया गया था।
    • यह 'पुरावशेष और कला खजाना अधिनियम, 1972' को भी प्रशासित करता है।

और पढ़ें: भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, भोजशाला परिसर


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

भारत का पहला AI लड़ाकू विमान ‘काल भैरव’ यूरोप में निर्मित किया जाएगा

चर्चा में क्यों? 

भारत का पहला AI-संचालित स्वायत्त लड़ाकू विमान, 'काल भैरव', पहली बार यूरोप में निर्मित होने जा रहा है, जो भारत के रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक एयरोस्पेस विस्तार में एक बड़ी उपलब्धि है। 

मुख्य बिंदु:

  • प्लेटफॉर्म: 'काल भैरव' भारत का पहला AI-सक्षम स्वायत्त लड़ाकू विमान है, जिसे एक भारतीय रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी 'फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस' (FWDA) द्वारा विकसित किया गया है। 
  • निर्माण स्थल: इस विमान का निर्माण यूरोपीय प्रौद्योगिकी फर्म KETCHPIXEL के साथ साझेदारी के माध्यम से पुर्तगाल (यूरोप) में किया जाएगा। 
    • इस समझौते के तहत, SKETCHPIXEL उन्नत सिमुलेशन सिस्टम, AI एकीकरण, संचार प्रौद्योगिकियों और इंटरऑपरेबिलिटी समाधानों में योगदान देगी, जबकि FWDA मुख्य डिज़ाइन तथा स्वायत्त प्रणालियों पर अपने बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) सुरक्षित रखेगी। 
  • काल भैरव:
    • तकनीकी विशेषताएँ: AI-संचालित लक्ष्य पहचान, झुंड समन्वय क्षमता, एंक्रिप्टेड (सुरक्षित) संचार प्रणाली और विस्तारित परिचालन सीमा के साथ मध्यम-ऊँचाई लंबी-अवधि (MALE) प्लेटफॉर्म।
    • रेंज: खबरों के मुताबिक, इस विमान की मारक क्षमता (रेंज) लगभग 3,000 किलोमीटर और उड़ान अवधि 30 घंटे से अधिक है, जो इसे लंबी अवधि के मिशनों के लिये उपयुक्त बनाती है।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह परियोजना स्वायत्त युद्ध प्रणालियों में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों के तहत स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी के वैश्विक विस्तार को प्रदर्शित करती है। 

और पढ़ें: AI, लड़ाकू विमान


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

अमित शाह ने अहमदाबाद में 'मिलियन माइंड्स टेक पार्क' और 'GREMI सिटी कैंपस' का उद्घाटन किया

चर्चा में क्यों? 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में ₹1,600 करोड़ के 'मिलियन माइंड्स टेक पार्क' और 'GREMI सिटी कैंपस' का उद्घाटन किया, जो गुजरात के उभरते प्रौद्योगिकी एवं नवाचार पारितंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। 

मुख्य बिंदु:

  • उद्घाटन: अमित शाह ने अहमदाबाद में नए विकसित 'मिलियन माइंड्स टेक पार्क' और ‘GREMI सिटी कैंपस' का उद्घाटन किया। 
  • निवेश: गणेश हाउसिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा विकसित इन दोनों परियोजनाओं का कुल निवेश लगभग ₹1,600 करोड़ है। 
    • मिलियन माइंड्स टेक पार्क: इस टेक पार्क को ₹1,100 करोड़ की लागत से विकसित किया गया है और इसे एक प्रमुख ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) हब के रूप में डिज़ाइन किया गया है।
    • GREMI सिटी कैंपस: रियल एस्टेट और शहरी विकास के क्षेत्र में शिक्षा एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिये ₹500 करोड़ के निवेश के साथ 'GREMI सिटी कैंपस' की स्थापना की गई है।
  • फोकस/मुख्य क्षेत्र: यह परियोजना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, फाइनेंस और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) जैसे उभरते क्षेत्रों को बढ़ावा देगी।
  • रोज़गार सृजन: उम्मीद है कि यह टेक पार्क अत्यधिक कुशल पेशेवरों के लिये बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा करेगा और गुजरात की सेवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करेगा।

और पढ़ें: AIसाइबर सुरक्षा


छत्तीसगढ़ Switch to English

छत्तीसगढ़ ने 'जन भागीदारी - सबसे दूर, सबसे पहले' अभियान शुरू किया

चर्चा में क्यों? 

छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे राज्य के दूरदराज़ के जनजातीय  गाँवों में कल्याणकारी योजनाओं और आवश्यक सेवाओं की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिये ‘जन भागीदारी - सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान शुरू किया। 

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: इस अभियान की शुरुआत मई 2026 में की गई थी।
  • उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी कल्याणकारी योजनाएँ और सार्वजनिक सेवाएँ छत्तीसगढ़ के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली दूरदराज की जनजातीय आबादी तक पहुँचें।
  • कवरेज (दायरा): यह अभियान पूरे राज्य के 8,000 से अधिक गाँवों में लागू किया गया था।
  • कार्यान्वयन विभाग: यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के जनजातीय विकास विभाग द्वारा संचालित किया गया था।
  • शामिल गाँव: इस अभियान के तहत प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत चिन्हित गाँवों को शामिल किया गया था।
  • प्रदान किये गए लाभ: पात्र लाभार्थियों को स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और पेयजल सुविधाओं से संबंधित लाभ प्रदान किये गए।
  • प्रशासनिक पहुँच: सरकारी अधिकारियों ने सीधे जनजातीय गाँवों का दौरा किया, जनसुनवाई की और 'आदिम सेवा केंद्रों' के माध्यम से शिकायतों का निवारण किया।

और पढ़ें: PM-JANMAN, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान


बिहार Switch to English

नालंदा विश्वविद्यालय ने प्राचीन 'शास्त्रार्थ' परंपरा को पुनर्जीवित किया

चर्चा में क्यों? 

नालंदा विश्वविद्यालय ने ‘शास्त्रार्थ 2026’ के आयोजन के माध्यम से ‘शास्त्रार्थ’ की प्राचीन भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित किया, जिसका उद्देश्य भारत की शास्त्रीय ज्ञान परंपराओं में निहित बौद्धिक बहस और विद्वत्तापूर्ण संवाद को बढ़ावा देना है। 

मुख्य बिंदु:

  • कार्यक्रम: विश्वविद्यालय ने ‘शास्त्रार्थ 2026’ का आयोजन किया, जो मई 2026 में निर्धारित दो-दिवसीय कार्यक्रम था। 
    • पहली बार शास्त्रार्थ को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर में शामिल किया गया था। 
  • उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य सुनियोजित शैक्षणिक बहसों के माध्यम से तार्किक सोच, सार्वजनिक बौद्धिक सहभागिता और पारंपरिक गुरु-शिष्य शिक्षण प्रणाली को मज़बूत करना था। 
  • शामिल विषय (थीम्स): बहसों और शोध-प्रबंध रक्षा सत्रों में बौद्ध अध्ययन, पुरातत्व, पारिस्थितिकी, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, दर्शनशास्त्र, साहित्य तथा सतत विकास जैसे विषयों को शामिल किया गया था। 
    • ये चर्चाएँ पारंपरिक ‘पूर्वपक्ष’ और ‘उत्तरपक्ष’ ढाँचे के अनुसार आयोजित की गई थीं, जो अनुशासित तर्क तथा सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देती हैं। 
  • शुरू किये गए पुरस्कार: विश्वविद्यालय ने बौद्धिक संवाद में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिये शिक्षकों के लिये "नालंदा शास्त्रार्थ सम्मान" और छात्रों के लिये "नालंदा शास्त्रार्थ पुरस्कार" की स्थापना की घोषणा की। 
  • नालंदा विश्वविद्यालय: 
    • कुमारगुप्त प्रथम, जिन्हें शक्रादित्य के नाम से भी जाना जाता है, ने गुप्त काल के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
    • इस विश्वविद्यालय को 1193 ईस्वी में बख्तियार खिलजी द्वारा नष्ट कर दिया गया था।
    • नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेषों को वर्ष 2016 में UNESCO विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

और पढ़ें: नालंदा विश्वविद्यालय


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