नीतीश कुमार राज्यसभा पहुँचे, बिहार में 20 वर्ष का मुख्यमंत्री कार्यकाल समाप्त | बिहार | 07 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिये अपना नामांकन पत्र दाखिल किया, जिससे बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उनके लगभग 20 वर्ष के लंबे कार्यकाल के समाप्त होने की संभावना व्यक्त होती है।
मुख्य बिंदु:
- राज्यसभा नामांकन: नीतीश कुमार ने 16 मार्च, 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिये अपना नामांकन पत्र दाखिल किया, जो राज्य की कार्यपालिका में नेतृत्व से निकलकर राष्ट्रीय संसदीय राजनीति की ओर उनके संभावित बदलाव का संकेत देता है।
- मुख्यमंत्री के रूप में लंबे कार्यकाल का अंत: इस निर्णय के साथ ही बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री के रूप में उनका लगभग 20 वर्षों का कार्यकाल प्रभावी रूप से समाप्त हो जाता है। वे वर्ष 2005 से कई कार्यकालों में इस पद पर रहे।
- प्रारंभिक पार्टी: जनता दल।
- सह-स्थापित पार्टी: समता पार्टी (1994), जिसकी स्थापना उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस के साथ की।
- समता पार्टी बाद में वर्ष 2003 में जनता दल (यूनाइटेड) में विलय हो गई।
- नीतीश कुमार पहली बार वर्ष 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने।
- 20 नवंबर, 2025 को उन्होंने रिकॉर्ड दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
- नीतिगत विरासत: अपने नेतृत्व के दौरान नीतीश कुमार ने कई महत्त्वपूर्ण सुधार लागू किये, जिनमें कानून-व्यवस्था में सुधार, शराबबंदी, आधारभूत संरचना का विकास और सामाजिक कल्याण कार्यक्रम शामिल हैं। शासन और प्रशासनिक अनुशासन पर ज़ोर देने के कारण उन्हें ‘सुशासन बाबू’ की उपाधि भी मिली।
- समर्थन: नामांकन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में दाखिल किया गया।
- नीतीश कुमार ने कहा कि वे हमेशा संसद के दोनों सदनों में सेवा करना चाहते थे और इस कदम को वे अपनी विधायी यात्रा की पूर्णता के रूप में देखते हैं, क्योंकि वे पहले विधायक (MLA), विधान परिषद सदस्य (MLC) और लोकसभा सांसद रह चुके हैं।
- महत्त्व: यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जो लंबे समय से चले आ रहे नेतृत्व के एक युग के अंत का संकेत देता है और साथ ही संसद के उच्च सदन में नीतीश कुमार की नई भूमिका की संभावना प्रस्तुत करता है, जिससे भविष्य में राष्ट्रीय तथा राज्य की राजनीतिक दिशा प्रभावित हो सकती है।
राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के लिये दो बच्चों का नियम खत्म | राजस्थान | 07 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
राजस्थान ने लगभग 30 वर्ष पुराने उस नियम को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया था। इसके साथ ही कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के आधार पर होने वाली अयोग्यता को भी समाप्त कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु:
- विधायी परिवर्तन: राजस्थान विधानसभा ने राज्य के पंचायती राज तथा नगरपालिका कानूनों में संशोधन पारित करते हुए स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों के लिये दो-बच्चों की पात्रता शर्त तथा कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के आधार पर अयोग्यता को समाप्त कर दिया है।
- यह नीति वर्ष 1995 में जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई थी, जिसके तहत दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाता था।
- प्रावधान को हटाना: राज्य सरकार का तर्क है कि यह नियम भेदभावपूर्ण और जनसंख्या नियंत्रण के दृष्टिकोण से प्रभावी नहीं था तथा इससे कई योग्य नागरिकों को स्थानीय स्तर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने से रोका जाता था।
- कुष्ठ रोग आधारित अयोग्यता: पहले कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाता था।
- इस संशोधन के माध्यम से इस प्रतिबंध को आधुनिक चिकित्सीय समझ तथा कुष्ठ रोग से संबंधित भेदभाव-विरोधी सिद्धांतों के अनुरूप समाप्त कर दिया गया है।
- केंद्रीय कानून के अनुरूप: यह परिवर्तन दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की भावना और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारों के अनुरूप है, जो कुष्ठ रोग से मुक्त हुए या उसके साथ जीवन जी रहे व्यक्तियों के प्रति किसी भी प्रकार के भेदभाव को हतोत्साहित करते हैं।
- प्रभाव: इस सुधार से पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में लोकतांत्रिक भागीदारी के विस्तार की उम्मीद है, जिससे अधिक नागरिक परिवार के आकार या पूर्व बीमारी की स्थिति की परवाह किये बिना चुनाव लड़ सकेंगे।
झारखंड में 54वीं शोध यात्रा | झारखंड | 07 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
सोसाइटी फॉर रिसर्च एंड इनिशिएटिव्स फॉर सस्टेनेबल टेक्नोलॉजीज़ एंड इंस्टीट्यूशंस (SRISTI) द्वारा आयोजित 54वीं शोध यात्रा झारखंड में संपन्न हुई। इस यात्रा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर के नवाचारों, पारंपरिक ज्ञान और स्वदेशी खाद्य परंपराओं का दस्तावेज़ीकरण किया गया।
मुख्य बिंदु:
- शोध यात्रा: यह SRISTI द्वारा आयोजित एक स्थानीय स्तर के नवाचारों की खोज पहल है, जिसमें ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पैदल यात्रा कर स्थानीय नवाचारों, पारंपरिक ज्ञान तथा समुदायों द्वारा विकसित सतत प्रथाओं की पहचान की जाती है।
- यह यात्रा SRISTI के संयोजक और स्थानीय स्तर के नवाचारों को बढ़ावा देने के अग्रणी व्यक्तित्व अनिल कुमार गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित की गई।
- यह फरवरी 2026 में आयोजित हुई, जिसमें झारखंड के डुमरी के औरापाथ से चैनपुर के बेंदोर तक लगभग 125 किमी की दूरी तय की गई
- शामिल किये गए गाँव: इस यात्रा के दौरान 27 गाँवों से होकर गुजरते हुए ग्रामीण समुदायों के साथ संवाद किया गया तथा स्थानीय प्रथाओं और नवाचारों का दस्तावेज़ीकरण किया गया।
- यात्रा के दौरान शोधकर्त्ताओं ने खाद्य पौधों की लगभग 53 विभिन्न प्रजातियों, स्वदेशी फसलों और स्थानीय समुदायों द्वारा उपयोग की जाने वाली पारंपरिक खाद्य प्रथाओं का भी दस्तावेज़ीकरण किया।
- समुदाय सम्मान: इस अवसर पर स्थानीय नवप्रवर्तकों और शतायु व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया, जिससे पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण में उनके योगदान को मान्यता दी जा सके।
- महत्त्व: शोध यात्रा स्थानीय स्तर के नवाचारों की पहचान करने, स्वदेशी ज्ञान के संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने में सहायक है। साथ ही यह ग्रामीण रचनात्मकता को शोधकर्त्ताओं, नीति-निर्माताओं और संस्थानों से जोड़ने का कार्य भी करती है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिला | उत्तर प्रदेश | 07 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) को आधिकारिक रूप से एयरोड्रोम लाइसेंस प्रदान कर दिया है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: जेवर, गौतम बुद्ध नगर ज़िला, उत्तर प्रदेश।
- विकासकर्त्ता/संचालक: यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (यह ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी है)।
- एयरोड्रोम लाइसेंस की स्वीकृति: यह लाइसेंस प्रमाणित करता है कि हवाई अड्डा अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों तथा DGCA द्वारा निर्धारित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) के अनुरूप पूर्णतः सक्षम है।
- संचालनात्मक तैयारी: यह स्वीकृति कैलिब्रेशन उड़ानों के सफल समापन, इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) के सत्यापन तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यासों के बाद प्रदान की गई है।
- अवसंरचना और अर्थव्यवस्था: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का एक प्रमुख घटक है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश (विशेषकर जेवर–ग्रेटर नोएडा औद्योगिक क्षेत्र) की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने तथा दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
- शहरी नियोजन: यह हवाई अड्डा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र का प्रमुख आधार है, जो प्रस्तावित फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क और अपैरल पार्क के विकास को गति देगा।
- संघवाद और PPP मॉडल: यह परियोजना विदेशी निवेशक (ज्यूरिख एयरपोर्ट) और राज्य तथा केंद्र सरकार की एजेंसियों के बीच सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के सफल उदाहरणों में से एक है।