जगदलपुर दौरे के दौरान अमित शाह ने भारत को नक्सल-मुक्त घोषित किया | छत्तीसगढ़ | 20 May 2026
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर के अपने दौरे के दौरान घोषणा की कि भारत ‘नक्सल मुक्त’ हो गया है।
मुख्य बिंदु:
- दौरा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर का दौरा किया तथा शहीदों के परिवारों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों और नक्सली हिंसा से प्रभावित पीड़ितों से मुलाकात की।
- घोषणा: अमित शाह ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दशकों की हिंसा और उग्रवाद के बाद भारत अब ‘नक्सल मुक्त’ हो गया है।
- बस्तर के विकास के बिना ‘2047 तक विकसित भारत’ का सपना साकार नहीं हो सकता।
- उन्होंने बस्तर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों से नक्सलवाद को समाप्त करने में उनकी भूमिका के लिये सुरक्षा बलों, विशेष रूप से DRG के जवानों और COBRA कमांडो को श्रेय दिया।
- परियोजना: अमित शाह ने क्षेत्रीय विकास और सार्वजनिक सेवा वितरण के लिये बस्तर में 'शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा परियोजना' की शुरुआत की।
- छत्तीसगढ़ में लगभग 70 CAPF कैंपों को विकास-उन्मुख केंद्रों में बदला जाएगा ताकि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं तक लोगों की पहुँच आसान हो सके।
- पुनर्वास उपाय: सरकार लगभग 3,000 आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लौटने में मदद करने के लिये पुनर्वास और कौशल विकास सहायता भी प्रदान कर रही है।
नॉर्वे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 20 May 2026
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी ओस्लो की आधिकारिक यात्रा के दौरान नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मान, ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया।
मुख्य बिंदु:
- पुरस्कार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया।
- यह 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की पहली यात्रा और उनकी नॉर्वे की पहली आधिकारिक यात्रा थी।
- प्रदानकर्त्ता: यह सम्मान ओस्लो में आयोजित एक समारोह के दौरान नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम (King Harald V) द्वारा प्रदान किया गया।
- मान्यता/सराहना: यह पुरस्कार प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारत-नॉर्वे संबंधों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में दिये गए योगदान के सम्मान में प्रदान किया गया।
- प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान किसी विदेशी देश द्वारा पीएम मोदी को दिया जाने वाला यह 32वाँ अंतर्राष्ट्रीय सम्मान बन गया है।
- स्थापना: 'द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' की स्थापना वर्ष 1985 में राजा ओलाव पंचम (King Olav V) द्वारा की गई थी।
- द्विपक्षीय संबंध: इस यात्रा के दौरान, भारत और नॉर्वे ने स्वच्छ ऊर्जा, ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था), नवीकरणीय ऊर्जा, आर्कटिक सहयोग, व्यापार, प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन की दिशा में बदलाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपने संबंधों को ‘ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के रूप में आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
कामी रीता शेरपा ने रिकॉर्ड 32वीं बार माउंट एवरेस्ट फतह किया | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 20 May 2026
चर्चा में क्यों?
नेपाली पर्वतारोही कामी रीता शेरपा ने विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट को 32वीं बार फतह (चढ़ाई) कर इतिहास रच दिया और विश्व के सबसे ऊँचे पहाड़ पर सबसे अधिक बार चढ़ने का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
मुख्य बिंदु:
- उपलब्धि: कामी रीता शेरपा ने मई 2026 में 32वीं बार माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की और एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।
- राष्ट्रीयता: कामी रीता शेरपा नेपाल में एक प्रसिद्ध पर्वतारोहण गाइड हैं, जिन्हें लोकप्रिय रूप से ‘एवरेस्ट मैन’ के नाम से जाना जाता है।
- अभियान: उन्होंने '14 पीक्स एक्सपेडिशन' कंपनी के पर्वतारोहियों का मार्गदर्शन करते हुए शिखर पर कदम रखा।
- आयु: कामी रीता शेरपा 56 वर्ष की हैं और वर्ष 1994 में अपनी पहली सफल चढ़ाई के बाद से लगातार एवरेस्ट फतह कर रही हैं।
- महिला रिकॉर्ड: उसी दिन, ल्हाकपा शेरपा ने 11वीं बार एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचने में सफलता हासिल की, जो किसी भी महिला पर्वतारोही द्वारा की गई सबसे अधिक चढ़ाई है।
- माउंट एवरेस्ट:
- माउंट एवरेस्ट 8,849 मीटर (29,032 फीट) की ऊँचाई के साथ विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी है, जो नेपाल-चीन सीमा पर हिमालय में स्थित है।
- तेनज़िंग नोर्गे और एडमंड हिलेरी 1953 में माउंट एवरेस्ट के शिखर पर सफलतापूर्वक पहुँचने वाले पहले पर्वतारोही बने थे।
पलामू में ह्यूमन एलीफैंट कनफ्लिक्ट के लिये भारत का पहला AI सेंटर बनाया जाएगा | झारखंड | 20 May 2026
चर्चा में क्यों?
झारखंड, ह्यूमन एलीफैंट कनफ्लिक्ट के वैज्ञानिक अध्ययन और उन्हें कम करने के लिये पलामू टाइगर रिज़र्व (PTR) में भारत का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित 'ह्यूमन एलीफैंट कनफ्लिक्ट रिसर्च सेंटर' स्थापित करने के लिये तैयार है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: देश का पहला समर्पित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ह्यूमन एलीफैंट कनफ्लिक्ट रिसर्च सेंटर झारखंड के पलामू टाइगर रिज़र्व (PTR) में स्थापित किया जाएगा।
- इसके लिये पलामू टाइगर रिज़र्व के भीतर लगभग 15–20 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।
- उद्देश्य: प्रस्तावित केंद्र का उद्देश्य ह्यूमन एलीफैंट कनफ्लिक्ट की बढ़ती घटनाओं के कारणों का अध्ययन करना तथा जनहानि और आवासीय दबाव को कम करने के लिबा वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान विकसित करना है।
- प्रौद्योगिकी: हाथियों के व्यवहार, झुंडों की आवाजाही, आवासीय दबाव और संघर्ष के पैटर्न का विश्लेषण करने के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा वैज्ञानिक निगरानी प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा।
- यह केंद्र हाथियों की ध्वनियों, संचार संकेतों, प्रवासन मार्गों, प्रजनन व्यवहार, शावकों के जन्म पैटर्न, मौसमी गतिविधियों तथा खतरे या पर्यावरणीय दबाव के प्रति उनकी प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करेगा।
पलामू टाइगर रिज़र्व (PTR):
- स्थापना: इसे वर्ष 1974 में प्रोजेक्ट टाइगर (बाघ परियोजना) के तहत स्थापित किया गया था।
- स्थान: यह झारखंड में छोटानागपुर पठार पर स्थित है।
- संरक्षित क्षेत्र का दर्जा: यह रिज़र्व (आरक्षित क्षेत्र) बेतला राष्ट्रीय उद्यान का एक हिस्सा है।
- बाघ गणना: यह रिज़र्व विश्व का पहला ऐसा क्षेत्र बना जहाँ वर्ष 1932 में जे.डब्ल्यू. निकोलसन की देखरेख में पगमार्क (पंजों के निशान) गिनती पद्धति का उपयोग करके बाघों की गणना की गई थी।
स्वीडन भारत के शुक्रयान मिशन में शामिल हुआ | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 20 May 2026
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूरोप यात्रा के दौरान, स्वीडन भारत के 'वीनस ऑर्बिटर मिशन' (शुक्र ग्रह मिशन) में शामिल हो गया, जबकि नॉर्वे ने द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग को मज़बूत करने के लिये भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये।
मुख्य बिंदु:
- स्वीडन की भागीदारी: स्वीडन ने इस अंतरग्रहीय मिशन (Interplanetary mission) में सहयोग के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर करके भारत के आगामी 'वीनस ऑर्बिटर मिशन' (शुक्र ग्रह मिशन) में शामिल होने की घोषणा की।
- मिशन: भारत का शुक्र मिशन, जिसे लोकप्रिय रूप से ‘शुक्रयान’ या 'वीनस ऑर्बिटर मिशन' (VOM) के रूप में जाना जाता है, शुक्र ग्रह और उसके वायुमंडल का अध्ययन करने के लिये ISRO का एक नियोजित मिशन है।
- ISRO के 'वीनस ऑर्बिटर मिशन' के 2028 में लॉन्च होने की उम्मीद है और यह शुक्र ग्रह के लिये भारत का पहला समर्पित मिशन होगा।
- अंतरिक्ष सहयोग: यह समझौता ISRO और स्वीडिश नेशनल स्पेस एजेंसी के बीच हस्ताक्षरित किया गया था।
- वैज्ञानिक उपकरण: स्वीडन शुक्र ग्रह पर प्लाज़्मा संपर्क और वायुमंडलीय पलायन प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिये 'वीनसियन न्यूट्रल्स एनालाइज़र' (VNA) सहित वैज्ञानिक उपकरणों का योगदान देगा।
- नॉर्वे-ISRO MoU: नॉर्वेजियन स्पेस एजेंसी और ISRO ने अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने के लिये एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये।
- भारत-नॉर्वे सहयोग: इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैटेलाइट अनुप्रयोगों, वैज्ञानिक अनुसंधान और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में सहयोग के नए रास्ते खोलना है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी का निधन | उत्तराखंड | 20 May 2026
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का लंबी बीमारी के बाद देहरादून में 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
मुख्य बिंदु:
- निधन: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी का लंबी बीमारी के बाद देहरादून में 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
- राजनीतिक करियर: वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता थे और उन्होंने उत्तराखंड में पार्टी को मज़बूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- उन्होंने वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में राजनीति में प्रवेश किया और गढ़वाल से लोकसभा के लिये चुने गए।
- सैन्य पृष्ठभूमि: राजनीति में आने से पहले, उन्होंने भारतीय सेना में अपनी सेवाएँ दीं और लगभग 36 वर्षों की सेवा के बाद मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए।
- उनकी विशिष्ट सेवा के लिये उन्हें 'अति विशिष्ट सेवा पदक' (AVSM) से सम्मानित किया गया था।
- मुख्यमंत्री: उन्होंने दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया — पहली बार वर्ष 2007 से 2009 तक और दूसरी बार 2011 से 2012 तक।
- उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री के रूप में भी कार्य किया था।