दिव्य कला मेला 2026 उत्तराखंड में | उत्तराखंड | 27 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
दिव्य कला मेला का आयोजन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड राज्य समाज कल्याण विभाग तथा दिव्यांगजनों के लिये कार्यरत विभिन्न संगठनों के सहयोग से किया गया।
मुख्य बिंदु:
- भागीदारी: उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड के देहरादून स्थित रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित 30वें दिव्य कला मेले में भाग लिया।
- उन्होंने कहा कि दिव्यांगता कोई सीमा नहीं, बल्कि संकल्प, अनुकूलन और रचनात्मकता का प्रतीक है। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिये गरिमा, अवसर और समान भागीदारी पर बल दिया।
- लाभों का वितरण: राज्यपाल ने दिव्यांगजनों के उद्यमों को समर्थन देने हेतु विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को रियायती ऋण के चेक वितरित किये।
- समावेशी विकास: मेले में आधुनिक प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका को रेखांकित किया गया, जो दिव्यांगजनों के लिये रचनात्मकता, नवाचार और उत्पादन में योगदान देने के नए अवसर सृजित कर रही है।
- महत्त्व: इस आयोजन में पूरे देश के दिव्यांग कलाकारों और उद्यमियों की प्रतिभा का प्रदर्शन किया गया, जिससे आत्मनिर्भरता, सामाजिक समावेशन तथा स्थानीय उद्यमों के समर्थन का संदेश सुदृढ़ हुआ।
- दिव्य कला मेला स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को बढ़ावा देने संबंधी प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है।
उत्तराखंड ने भवन उपविधियों में बदलाव के लिये पैनल बनाया | उत्तराखंड | 27 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड सरकार ने राज्य की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता और अद्यतन भूकंप सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए राज्य के भवन उपविधियों की व्यापक समीक्षा एवं संशोधन के लिये 14-सदस्यीय उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
मुख्य बिंदु:
- नेतृत्व: इस समिति की अध्यक्षता CSIR-CBRI, रुड़की के निदेशक आर. प्रदीप कुमार कर रहे हैं तथा इसका गठन मुख्य सचिव आनंद बर्धन के मार्गदर्शन में किया गया है।
- समिति में CSIR-CBRI, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), IIT रुड़की, BRIDCUL, राज्य लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरणों, भूवैज्ञानिक विशेषज्ञों तथा अभियंता पेशेवरों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
- कारण: उत्तराखंड एक उच्च भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है, जिसके कारण भूकंप-रोधी डिज़ाइन, जलवायु-संवेदी निर्माण और आपदा न्यूनीकरण उपायों को सम्मिलित करते हुए भवन मानकों का अद्यतन किया जाना आवश्यक है।
- समिति भूमि-उपयोग विनियमों, शहरी नियोजन दिशानिर्देशों, भवन निर्माण सामग्री के मानकों, संरचनात्मक सुरक्षा उपायों तथा पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा करेगी।
- रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण: समिति अपनी रिपोर्ट राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आवास विभाग को सौंपेगी, जिसके पश्चात संशोधित उपविधियों को सुरक्षित शहरी तथा ग्रामीण विकास के लिये लागू किया जाएगा।
- उद्देश्य: समिति वर्तमान भवन उपविधियों का मूल्यांकन करेगी, आधुनिक निर्माण प्रौद्योगिकियों की अनुशंसा करेगी, भूकंप एवं भूस्खलन सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करेगी तथा अभियंताओं और योजनाकारों के लिये प्रशिक्षण आवश्यकताओं को रेखांकित करेगी।
- महत्त्व: यह पहल भारत के सर्वाधिक भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में से एक, उत्तराखंड में संरचनात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ करती है और जीवन एवं संपत्ति के जोखिम को कम करने में सहायक होगी।
छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 | छत्तीसगढ़ | 27 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 को 23 फरवरी, 2026 को राज्य विधानसभा में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसमें एक सुदृढ़ और अनुकूल अर्थव्यवस्था को रेखांकित किया गया है, जो व्यापक क्षेत्रीय विकास के बल पर राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रही है तथा वर्ष 2028 तक राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) को दोगुना कर ₹10 लाख करोड़ तक पहुँचाने के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती है।
मुख्य बिंदु:
समष्टि-आर्थिक परिदृश्य
- वास्तविक GSDP वृद्धि: स्थिर मूल्यों (2011–12) पर 8.11% की दर से बढ़कर ₹3,58,293 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान।
- नाममात्र GSDP वृद्धि: वर्तमान मूल्यों पर 11.57% आँकी गई है, जो लगभग ₹6.31 लाख करोड़ तक पहुँचने का संकेत देती है।
- प्रति व्यक्ति आय (PCI): ₹1,79,244 तक पहुँचने की संभावना, जो विगत वर्ष (₹1,62,848) की तुलना में 10.07% की वृद्धि दर्शाती है।
राजकोषीय संकेतक एवं प्रबंधन
- राजकोषीय घाटा: GSDP के 2.97% (₹18,900 करोड़) पर लक्षित, जो FRBM अधिनियम की 3% सीमा के भीतर है।
- राजस्व अधिशेष: ₹2,804 करोड़ (GSDP का 0.4%) आँकी गई है, जो विगत वर्ष के घाटे से उल्लेखनीय सुधार दर्शाती है।
- पूंजीगत व्यय (कैपेक्स): ₹26,341 करोड़ आवंटित (कुल बजट का 16% तथा GSDP का 4.14%), जिसमें दीर्घकालिक परिसंपत्ति निर्माण को प्राथमिकता दी गई है।
- ऋण-GSDP अनुपात: राज्य का लक्ष्य वर्ष 2027–28 तक बकाया ऋण को GSDP के 24% तक कम करना है।
रणनीतिक विषय: GYAN और GATI
यह सर्वेक्षण वर्ष 2030 के दृष्टिकोण के अनुरूप दो प्रमुख ढाँचों पर आधारित है—
- GYAN (लक्षित समूह): Gareeb (गरीब), Yuva (युवा), Annadata (अन्नदाता) और Naari (नारी) पर फोकस।
- GATI (विकास के प्रेरक तत्त्व):
- G – Good Governance (सुशासन): डिजिटल ट्रैकिंग, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल
- A – Accelerating Infrastructure (अवसंरचना का तीव्र विकास): सड़कें, बायपास, रिंग रोड
- T – Technology (प्रौद्योगिकी): ई-धरती, बिज़नेस इंटेलिजेंस यूनिट्स
- I – Industrial Growth (औद्योगिक विकास): नई औद्योगिक नीति 2024–2029
क्षेत्रीय प्रदर्शन
- GSDP में क्षेत्रीय योगदान (वर्तमान मूल्य):
- कृषि: 20.64%
- उद्योग: 46.59% (खनन और विनिर्माण के कारण प्रमुख योगदान)
- सेवा क्षेत्र: 32.77%
- कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ: 7.49% की वृद्धि दर के साथ छत्तीसगढ़ एक प्रमुख कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उच्च उत्पादन, सिंचाई समर्थन और प्रौद्योगिकी अपनाने के कारण कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन सुदृढ़ रहा है।
- संबद्ध क्षेत्रों के विस्तार से ग्रामीण आय में वृद्धि हुई है तथा फसल उत्पादन के अतिरिक्त भी रोज़गार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
- नीतिगत संदर्भ: कृषि वृद्धि को बनाए रखने के लिये जल अवसंरचना, फसल विविधीकरण, कृषि-बाज़ार संपर्क और मूल्य शृंखलाओं में निरंतर निवेश आवश्यक है।
- उद्योग: 7.21% की वृद्धि दर के साथ औद्योगिक क्षेत्र में दो अंकों की वृद्धि राज्य में बढ़ते निवेश और विनिर्माण गतिविधियों को दर्शाती है।
- व्यवसाय सुगमता और औद्योगिक अवसंरचना सुधार हेतु सरकारी पहलें सकारात्मक परिणाम दे रही हैं।
- रणनीतिक प्रभाव: औद्योगिक विकास से राजस्व आधार मज़बूत होता है, रोज़गार सृजन होता है और संरचनात्मक परिवर्तन को गति मिलती है।
- सेवा क्षेत्र: 9.11% की वृद्धि दर के साथ सेवा क्षेत्र विकास का प्रमुख चालक रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और संबंधित सेवाओं में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
- नीतिगत दृष्टिकोण: बढ़ती उपभोक्ता मांग और डिजिटल अपनाने के साथ सेवा क्षेत्र सतत विकास तथा रोज़गार सृजन की प्रबल संभावनाएँ रखता है।
अवसंरचना और सार्वजनिक निवेश
- सिंचाई नेटवर्क, ग्रामीण सड़कों तथा कनेक्टिविटी परियोजनाओं का विस्तार राज्य की विकास रणनीति की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
- डिजिटल अवसंरचना और विशेषीकृत आर्थिक क्षेत्रों पर केंद्रित प्रयासों का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना तथा क्षेत्रीय प्रतिस्पर्द्धात्मकता को सुदृढ़ करना है।
प्रमुख नीतिगत पहल एवं कल्याणकारी योजनाएँ
- कृषक उन्नति योजना: किसानों को समर्थन देने के लिये ₹10,000 करोड़ का पर्याप्त प्रावधान किया गया है।
- महतारी वंदन योजना: विवाहित महिलाओं को नकद सहायता प्रदान करने हेतु ₹5,500 करोड़ आवंटित किये गए हैं।
- अवसंरचना एवं कनेक्टिविटी: दूर-दराज़ क्षेत्रों के लिये मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना की शुरुआत तथा जगदलपुर, बिलासपुर और अंबिकापुर में हवाई अड्डों का विकास।
- शैक्षिक प्रगति: राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT), छह फिजियोथेरेपी कॉलेजों की स्थापना तथा नवा रायपुर में ‘एजुकेशन सिटी’ का विकास।
- स्वास्थ्य: शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के लिये ₹1,500 करोड़ का प्रावधान।
प्रमुख चुनौतियाँ
- नकद अंतरण: सर्वेक्षण में चेतावनी दी गई है कि बिना शर्त नकद अंतरणों का तीव्र विस्तार (वित्त वर्ष 2026 में ₹1.7 लाख करोड़) राजकोषीय स्थिरता के लिये जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
- शहरीकरण और स्वास्थ्य: सतत शहरीकरण ढाँचों की आवश्यकता के साथ-साथ दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच से जुड़ी कमियों को दूर करना एक बड़ी चुनौती है।
उत्तर प्रदेश ने जापानी कंपनियों के साथ ₹11,000 करोड़ के MoU पर हस्ताक्षर किये | उत्तर प्रदेश | 27 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
जापान की अपनी आधिकारिक यात्रा के पहले दिन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई प्रमुख जापानी कंपनियों के साथ लगभग ₹11,000 करोड़ के समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये।
मुख्य बिंदु:
- कुल निवेश: प्रारंभिक निवेश प्रतिबद्धताएँ लगभग ₹11,000 करोड़ तक पहुँची हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य औद्योगिक विकास को गति देना है।
- प्रमुख निवेशक: इन समझौतों में शामिल प्रमुख कंपनियों में कुबोटा कॉर्पोरेशन, मिंडा कॉर्पोरेशन, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री (JAE) सहित अन्य कंपनियाँ शामिल हैं।
- लक्षित क्षेत्र: निवेश ऑटोमोबाइल, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उपकरण, अवसंरचना तथा रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में किये जाएंगे।
- विनिर्माण और मूल्य शृंखलाओं को बढ़ावा: इन समझौतों से जापानी प्रौद्योगिकी, पूंजी एवं विशेषज्ञता उत्तर प्रदेश के विनिर्माण पारितंत्र में आएगी, जिससे औद्योगिक सहयोग तथा मूल्य शृंखलाएँ और अधिक सुदृढ़ होंगी।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नवाचार: जापानी कंपनियाँ उच्च-सटीक विनिर्माण और दक्षता पर विशेष बल देती हैं।
- ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में साझेदारियाँ भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्द्धात्मकता तथा तकनीकी आधार को मज़बूत करने में सहायक होंगी।
- रोज़गार सृजन और स्थानीय विकास: इन निवेशों से रोज़गार के अवसर बढ़ने, कौशल विकास को प्रोत्साहन मिलने तथा उत्तर प्रदेश में स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन मिलने की संभावना है।
- भारत–जापान आर्थिक संबंधों को मज़बूती: ये MoU भारत–जापान द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं, जिनमें विनिर्माण, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी और पर्यावरणीय समाधानों में सहयोग शामिल है।