छत्तीसगढ़ में राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) योजना | छत्तीसगढ़ | 16 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
छत्तीसगढ़ सरकार रायपुर, दुर्ग और नवा रायपुर अटल नगर को एकीकृत महानगरीय क्षेत्र में शामिल करके 'राज्य राजधानी क्षेत्र' (SCR) विकसित करने की योजना पर कार्य कर रही है, ताकि समन्वित शहरी विकास और बुनियादी ढाँचे की वृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: इस पहल का लक्ष्य राजधानी क्षेत्र में तीव्र शहरीकरण का प्रबंधन करते हुए समन्वित शहरी नियोजन, बुनियादी ढाँचे के विकास, आवास और सेवा वितरण को सुदृढ़ करना है।
- राज्य सरकार क्षेत्रीय नियोजन, भूमि उपयोग विनियमन और बुनियादी ढाँचे के विकास की निगरानी के लिये एक समर्पित 'राज्य राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण' स्थापित करने की योजना बना रही है।
- मॉडल: यह अवधारणा दिल्ली के आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से प्रेरित है, जो संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिये कई शहरों को एकीकृत करता है।
- बुनियादी ढाँचा: योजना में बढ़ती आबादी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये एकीकृत परिवहन प्रणाली, बेहतर सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक पारगमन प्रणाली और बेहतर शहरी बुनियादी ढाँचे पर ज़ोर दिया गया है।
- पूरे राजधानी क्षेत्र में आवाजाही को सुधारने के लिये रायपुर-दुर्ग मेट्रो कॉरिडोर और उन्नत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया जा रहा है।
- एकीकृत राजधानी क्षेत्र से निवेश आकर्षित होने, औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने और रोज़गार के अवसर उत्पन्न होने की उम्मीद है, जिससे यह राज्य का एक प्रमुख आर्थिक केंद्र बन जाएगा।
- शहरी विस्तार और विकेंद्रीकरण: नवा रायपुर अटल नगर का एक आधुनिक नियोजित शहर के रूप में विकास मौजूदा राजधानी की भीड़भाड़ कम करने में सहायता करेगा और प्रशासनिक व व्यावसायिक विकास को सुगम बनाएगा।
- संतुलित क्षेत्रीय विकास: SCR ढाँचे का उद्देश्य मुख्य शहरों पर दबाव कम करना और समन्वित नियोजन के माध्यम से आसपास के शहरी और उप-शहरी क्षेत्रों में संतुलित विकास को बढ़ावा देना है।
हरियाणा ने लॉन्च किया ‘भू-मित्र’ व्हाट्सएप चैटबॉट | हरियाणा | 16 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
हरियाणा सरकार ने ‘भू-मित्र’ (Bhu-Mitra) नामक एक व्हाट्सएप-आधारित चैटबॉट लॉन्च किया है, जो नागरिकों को भूमि और राजस्व से संबंधित सेवाओं तक 24×7 पहुँच प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को नागरिकों के लिये अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाना है।
मुख्य बिंदु:
- भू-मित्र चैटबॉट: राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 'भू-मित्र' व्हाट्सएप चैटबॉट पेश किया गया है, ताकि नागरिक व्हाट्सएप पर एक सरल 'कन्वर्सेशनल इंटरफेस' (संवादात्मक माध्यम) के ज़रिये भूमि और राजस्व सेवाओं का लाभ उठा सकें।
- यह चैटबॉट चौबीसों घंटे (24×7) सहायता प्रदान करता है, जिससे लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने या जटिल ऑनलाइन पोर्टल्स पर जाने के बजाय सीधे अपने स्मार्टफोन पर सेवाएँ प्राप्त कर सकते हैं।
- मुख्य राजस्व सेवाएँ: चैटबॉट के माध्यम से नागरिक चार प्रमुख सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं—जमाबंदी की प्रति (भूमि स्वामित्व और खेती के अभिलेख), इंतकाल की प्रति (स्वामित्व में परिवर्तन), मुआवज़ा पंजीकरण और दस्तावेज़/रजिस्ट्री पंजीकरण में सहायता।
- इसके अलावा, चैटबॉट के माध्यम से विलेख टोकन जनरेशन, भूमि सीमांकन का अनुरोध, राजस्व संबंधी शिकायतों का पंजीकरण और शिकायतों की स्थिति की रियल-टाइम ट्रैकिंग भी की जा सकती है।
- भाषा की सुलभता: यह प्लेटफॉर्म हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे पूरे राज्य के नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण उपयोगकर्त्ताओं के लिये इसे समझना और उपयोग करना आसान हो गया है।
- सुशासन: इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक देरी को कम करना, सरकारी कार्यालयों में लोगों के भौतिक दौरों को सीमित करना और भूमि संबंधी प्रशासन में पारदर्शिता तथा दक्षता बढ़ाना है।
- यह चैटबॉट राजस्व विभाग के व्यापक डिजिटल सुधारों का हिस्सा है। इसमें पेपरलेस रजिस्ट्री सिस्टम और अन्य ऑनलाइन भूमि सेवाएँ भी शामिल हैं, ताकि एक पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके।
उत्तराखंड बजट 2026-27 | उत्तराखंड | 16 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये लगभग ₹1.11 लाख करोड़ का राज्य बजट पेश किया, जिसमें सरकार की विकास प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
मुख्य बिंदु:
- बजट का आकार: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये कुल बजट परिव्यय लगभग ₹1,11,703 करोड़ है। यह राज्य के अब तक के सबसे बड़े बजटों में से एक है, जो पिछले वर्ष के बजट से लगभग 10% अधिक है।
- वित्तीय संकेतक: बजट में लगभग ₹64,989 करोड़ का राजस्व व्यय और लगभग ₹46,713 करोड़ का पूंजीगत व्यय अनुमानित है। राजकोषीय घाटा लगभग ₹12,579 करोड़ है, जो राजकोषीय नियमों के तहत GSDP की 3% की सीमा के भीतर बना हुआ है।
- राजकोषीय प्रावधान (करोड़ में):
- कुल प्राप्तियाँ: 110143.12
- कुल व्यय: 111703.21
- राजस्व प्राप्तियाँ: 67525.77
- राजस्व व्यय: 64989.44
- पूंजीगत प्राप्तियाँ: 42617.35
- पूंजीगत व्यय: 46713.77
- राजस्व अधिशेष: 2536.33
- राजकोषीय घाटा: 12579.70
- प्राथमिक घाटा: 4650.30
- क्षेत्रवार प्रावधान (हज़ारों में):
- शिक्षा, खेल, युवा कल्याण और संस्कृति: 126606022
- चिकित्सा और परिवार कल्याण: 45464669
- जल आपूर्ति, आवास और शहरी विकास: 42433468
- कल्याणकारी योजनाएँ: 29124998
- श्रम और रोज़गार: 5869333
- कृषि और अनुसंधान: 14958193
- ग्रामीण विकास: 38602170
- अनुसूचित जातियों का कल्याण: 24688848
- अनुसूचित जनजातियों का कल्याण: 7467691
- विकास मॉडल (GYAN): बजट GYAN मॉडल पर आधारित है, जो चार स्तंभों—गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी पर केंद्रित है, ताकि समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
- अवसंरचना विकास: बजट में प्रमुख अवसंरचना विस्तार पर ज़ोर दिया गया है। सड़कों और पुलों के निर्माण तथा सुधार के लिये लोक निर्माण विभाग (PWD) को ₹2,502 करोड़ आवंटित किये गए हैं, जिससे पूरे राज्य में संपर्क व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।
- ग्रामीण संपर्क: दूरस्थ पहाड़ी गाँवों में अंतिम छोर तक संपर्क सुधारने के लिये प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत लगभग ₹1,050 करोड़ तथा ग्रामीण विकास के लिये ₹1,642 करोड़ आवंटित किये गए हैं।
- कुंभ मेले की तैयारी: वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले के लिये लगभग ₹1,027 करोड़ निर्धारित किये गए हैं, जिनका उपयोग अवसंरचना, भीड़ प्रबंधन और लाखों श्रद्धालुओं के लिये सुविधाएँ विकसित करने में किया जाएगा।
- पर्यटन संवर्द्धन: सरकार ने आध्यात्मिक पर्यटन को मज़बूत करने के लिये कई पहलों की घोषणा की है। इसमें हरिद्वार और ऋषिकेश में 'गंगा कॉरिडोर' का विकास तथा 'नंदा देवी राज जात यात्रा' जैसे प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों के लिये समर्थन शामिल है।
- शहरी विकास: बजट में शहरी अवसंरचना, आवास और नगर सेवाओं में सुधार के लिये ₹1,401 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
- कृषि और संबद्ध क्षेत्र: किसानों की आय में वृद्धि के लिये कई पहलें लागू की जाएंगी, जिनमें मिशन एप्पल, ट्राउट प्रोत्साहन योजना, डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहन, जैविक कृषि का विस्तार तथा मत्स्य पालन और मोटे अनाज (मिलेट) की कृषि को बढ़ावा देना शामिल है।
- शिक्षा और कौशल विकास: बजट में युवाओं के लिये रोज़गार के अवसरों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शिक्षा और खेल के लिये ₹11,871 करोड़ तथा कौशल विकास कार्यक्रमों के लिये ₹586 करोड़ का आवंटन किया गया है।
- बजट में युवाओं के रोज़गार को बढ़ावा देने के लिये मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना, पलायन रोकथाम योजना और ग्रामीण कौशल विकास कार्यक्रमों जैसी योजनाओं के लिये भी धन का प्रावधान किया गया है, ताकि रोज़गार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहन मिल सके।
- महिला एवं समाज कल्याण: महिला और बाल कल्याण को मज़बूत करने के लिये 'जेंडर बजट' के रूप में लगभग ₹19,692 करोड़ का आवंटन किया गया है। इसमें नंदा गौरा योजना, पोषण 2.0 और सक्षम आँगनवाड़ी जैसे महिला-केंद्रित कार्यक्रम शामिल हैं।
- स्वास्थ्य क्षेत्र: सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे और चिकित्सा सेवाओं के लिये अधिक धनराशि प्रस्तावित की गई है, विशेष रूप से दूरस्थ पहाड़ी ज़िलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाने के लिये।
- आपदा प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं के प्रति राज्य की संवेदनशीलता को देखते हुए, बजट में आपदा तैयारियों, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढाँचे के लिये प्रावधान शामिल हैं।
- नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण: हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में सतत विकास सुनिश्चित करने के लिये सरकार जलविद्युत, सौर ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है।
- नागरिक उड्डयन और कनेक्टिविटी: राज्य में हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन के लिये लगभग ₹52.5 करोड़ आवंटित किये गए हैं।
- आर्थिक दृष्टिकोण: यह बजट गरीब, युवा, किसानों और महिलाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए समावेशी विकास पर ज़ोर देता है। साथ ही यह राज्य की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिये बुनियादी ढाँचे, पर्यटन एवं स्वरोज़गार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।