गुरुग्राम में सरस आजीविका मेला-2026 शुरू हुआ | हरियाणा | 12 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
‘सरस आजीविका मेला–2026’ ग्रामीण हस्तशिल्प और महिला सशक्तीकरण को प्रोत्साहित करने वाला एक भव्य मेला है, जिसकी शुरुआत फरवरी 2026 में गुरुग्राम में की गई।
मुख्य भाग:
- उद्घाटन: इस मेले का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया।
- देश के 28 राज्यों से विभिन्न स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से संबद्ध 900 से अधिक महिला उद्यमी इस मेले में भाग ले रही हैं।
- स्टॉल एवं प्रदर्शनी: 450 से अधिक स्टॉलों पर कश्मीर की पश्मीना, तमिलनाडु की रेशम साड़ियाँ, राजस्थान की कढ़ाई तथा असम के बाँस शिल्प जैसी विविध क्षेत्रीय हस्तकलाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है, जो एक ही स्थान पर ‘मिनी इंडिया’ का अनुभव प्रदान करता है।
- कार्यशालाएँ: नॉलेज पवेलियन के अंतर्गत प्रतिदिन विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।
- जिनमें महिला उद्यमियों को पैकेजिंग, ब्रांडिंग, व्यावसायिक प्रस्ताव तैयार करने और सोशल मीडिया मार्केटिंग जैसे कौशल सिखाए जा रहे हैं।
- बाज़ार तक पहुँच: ग्रामीण उत्पादकों को घरेलू एवं वैश्विक बाज़ारों में अपनी पहुँच बढ़ाने में सहायता हेतु लॉजिस्टिक्स और परिवहन संबंधी सत्र भी आयोजित किये जा रहे हैं।
- SHG पर प्रभाव: दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत लगभग 10 करोड़ महिलाएँ संगठित हैं और 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ के लक्ष्य की दिशा में लगभग 2.9 करोड़ लखपति दीदी पहले ही तैयार की जा चुकी हैं।
- सशक्तीकरण: स्वयं सहायता समूहों ने बेहतर वित्तीय अनुशासन प्रदर्शित किया है, जहाँ गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPAs) 2% से कम हैं, जो ग्रामीण महिला उद्यमियों में सुदृढ़ ऋण प्रबंधन और पुनर्भुगतान व्यवहार को दर्शाता है।
IIT मद्रास ने डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिये ₹600 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड बनाया | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 12 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
IIT मद्रास रिसर्च पार्क ने भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम में प्रारंभिक चरण और प्रौद्योगिकी-गहन स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ₹600 करोड़ का डीप-टेक वेंचर कैपिटल फंड लॉन्च किया है।
मुख्य बिंदु:
- फंड: IIT मद्रास रिसर्च पार्क (IITMRP) ने यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स के सहयोग से ₹600 करोड़ के डीप-टेक वेंचर कैपिटल फंड की स्थापना की घोषणा की है, जिसका नाम IITM यूनिकॉर्न फ्रंटियर फंड I रखा गया है।
- इस फंड में अतिरिक्त ₹400 करोड़ का ‘ग्रीनशू विकल्प’ भी शामिल है, जिससे डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश हेतु इसकी संभावित कुल निवेश क्षमता ₹1,000 करोड़ तक पहुँच सकती है।
- यह फंड प्रारंभिक चरण की डीप-टेक कंपनियों को लक्षित करता है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, रक्षा प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स और उन्नत अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
- रणनीतिक दृष्टि: यह पहल प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता पर बल देती है, ताकि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी समाधान विकसित करने वाले भारतीय उपक्रमों को समर्थन देकर आयातित प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम की जा सके।
- नवाचार समर्थन: यह फंड ‘धैर्यशील पूंजी’ (Patient Capital) उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखता है, क्योंकि डीप-टेक स्टार्टअप्स को गहन अनुसंधान एवं विकास (R&D), प्रोटोटाइप निर्माण और नियामकीय चुनौतियों के कारण प्रायः अधिक समय की आवश्यकता होती है।
- प्रभाव: इस पहल से बौद्धिक संपदा-आधारित उपक्रमों की वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा और अनुसंधान संस्थानों तथा उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करते हुए भारत के डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को मज़बूती मिलने की अपेक्षा है।
- IITMRP: यह भारत के प्रमुख विश्वविद्यालय-आधारित अनुसंधान पार्कों में से एक है, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करना और अपनी परिसंपत्ति में अनुसंधान एवं विकास इकाइयों को स्थान प्रदान कर अकादमिक जगत तथा उद्योग के बीच के अंतर को कम करना है।
गुजरात ने हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिये स्टारलिंक के साथ LoI एक्सचेंज किया | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 12 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
गुजरात सरकार ने पूरे राज्य में उच्च-गति सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार के लिये एलन मस्क की स्पेसएक्स की सहायक कंपनी स्टारलिंक के साथ एक आशय पत्र (Letter of Intent – LoI) पर हस्ताक्षर किये हैं।
मुख्य बिंदु:
- हस्ताक्षरकर्त्ता: यह दस्तावेज़ गांधीनगर में राज्य उद्योग आयुक्त पी. स्वरूप और स्टारलिंक इंडिया के प्रमुख प्रभाकर जयकुमार के बीच आदान-प्रदान किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी उपस्थित थे।
- लक्षित क्षेत्र: यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ, सीमावर्ती, जनजातीय और वंचित क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहाँ पारंपरिक दूरसंचार अवसंरचना या तो अपर्याप्त है अथवा स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है।
- प्राथमिकता वाले ज़िले: नर्मदा और दाहोद जैसे ‘आकांक्षी ज़िलों’ पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
- पायलट परियोजना का दायरा: प्रारंभिक चरण में निम्नलिखित प्रमुख सार्वजनिक अवसंरचनाओं को जोड़ने का लक्ष्य है—
- शिक्षा: स्मार्ट कक्षाओं हेतु राज्य विद्यालय।
- स्वास्थ्य: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs) और टेलीमेडिसिन सेवाएँ।
- सुरक्षा: तटीय पुलिस चौकियाँ और राजमार्ग सुरक्षा प्रणाली।
- लोक सेवाएँ: कॉमन सर्विस सेंटर (CSCs) और ई-गवर्नेंस केंद्र।
- लॉजिस्टिक्स एवं पर्यावरण: बंदरगाह, GIDC औद्योगिक पार्क और वन्यजीव अभयारण्य।
- संयुक्त कार्यदल: पायलट आकलन की निगरानी एवं क्रियान्वयन के समन्वय हेतु गुजरात सरकार और स्टारलिंक के प्रतिनिधियों का एक संयुक्त कार्यदल गठित किया जाएगा।
- नियामकीय स्थिति: यद्यपि स्टारलिंक को आशय पत्र (LoI) जारी किया गया है, किंतु अंतिम वाणिज्यिक शुरुआत भारत की केंद्रीय प्राधिकरणों (दूरसंचार विभाग/IN-SPACe) से लाइसेंस और सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियों के अधीन होगी।
- महत्त्व: यह रणनीतिक पहल गुजरात के डिजिटल कनेक्टिविटी मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में डिजिटल अंतर को पाटना है जहाँ भौगोलिक या लागत संबंधी कारणों से स्थलीय दूरसंचार नेटवर्क कमज़ोर या अव्यवहार्य हैं।
ओम बिरला ने बिहार विधानसभा में ई-विधान ऐप लॉन्च किया | बिहार | 12 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 7 फरवरी, 2026 को पटना स्थित बिहार विधानसभा में नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) की आधिकारिक शुरुआत की, जिसे प्रचलित रूप से ई-विधान ऐप कहा जाता है।
मुख्य बिंदु:
- कार्यक्रम: यह आयोजन बिहार विधानसभा के 105वें स्थापना दिवस के अवसर के साथ संपन्न हुआ।
- ई-विधान ऐप (NeVA): नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) एक डिजिटल विधायी कार्यप्रवाह प्रणाली है, जिसे नेशनल ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) के अंतर्गत विकसित किया गया है और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से लागू किया गया है।
- उद्देश्य: इसका लक्ष्य भारत के राज्य विधानमंडलों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में विधायी कार्य को डिजिटाइज़ करना तथा उसे सुव्यवस्थित बनाना है।
- मुख्य विशेषताएँ: भौतिक फाइलों और मुद्रित दस्तावेज़ों के स्थान पर डिजिटल अभिलेखों का उपयोग।
- रियल-टाइम पहुँच: सदस्य अपने हैंडहेल्ड उपकरणों पर विधेयक, नोटिस, प्रश्न, कार्यवृत्त, प्रतिवेदन और समिति संबंधी दस्तावेज़ देख सकते हैं।
- क्लाउड-बेस्ड प्रणाली: एकरूपता और परस्पर संचालन (इंटरऑपरेबिलिटी) सुनिश्चित करने हेतु सुरक्षित NIC क्लाउड प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई।
- एक राष्ट्र–एक विधायी मंच: राज्यों के बीच परस्पर संपर्क और मानकीकृत प्रक्रियाओं को सक्षम बनाता है।
- महत्त्व: NeVA डिजिटल एजेंडा, खोज योग्य अभिलेख, ई-नोटिस और एकीकृत समिति कार्यप्रवाह को समर्थन देता है, जिससे विधायी प्रक्रियाएँ अधिक दक्ष, पारदर्शी तथा जनप्रतिनिधियों के लिये सुलभ बनती हैं।
भारत लगाएगा लद्दाख में दो नए टेलीस्कोप | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 12 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सरकार ने लद्दाख में अपनी भू-आधारित खगोल विज्ञान अवसंरचना के व्यापक विस्तार को स्वीकृति दी है, जिसमें दो नए मेगा-टेलीस्कोप की स्थापना तथा एक मौजूदा सुविधा के उन्नयन को शामिल किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- नई टेलीस्कोप परियोजनाएँ: नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप और नेशनल लार्ज ऑप्टिकल–नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप की स्थापना।
- नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST): सूर्य की सतह और वायुमंडल का उच्च-रिज़ॉल्यूशन में अवलोकन करने हेतु।
- स्थान: पैंगोंग त्सो झील के निकट, लद्दाख।
- वैज्ञानिक फोकस: सौर चुंबकीय क्षेत्र, सौर ज्वालाएँ (फ्लेयर), कोरोनल मास इजेक्शन तथा अंतरिक्ष मौसम संबंधी घटनाएँ।
- महत्त्व: पूर्ण होने पर NLST भारत की तीसरी भू-आधारित सौर वेधशाला होगी। यह तमिलनाडु स्थित कोडाइकनाल सौर वेधशाला और राजस्थान स्थित उदयपुर सौर वेधशाला जैसी मौजूदा सुविधाओं का पूरक बनेगी तथा भारत की आदित्य-L1 अंतरिक्ष वेधशाला से प्राप्त आँकड़ों को भी सुदृढ़ करेगी।
- नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT): गहन अंतरिक्ष अनुसंधान के लिये एक उन्नत ऑप्टिकल और निकट-अवरक्त टेलीस्कोप।
- वैज्ञानिक अनुप्रयोग: एक्सोप्लैनेट, तारकीय और आकाशगंगीय विकास, ब्रह्मांड विज्ञान, सुपरनोवा तथा दूरस्थ आकाशगंगाओं का अध्ययन।
- महत्त्व: अपने बड़े संग्रहण क्षेत्र और उच्च ऊँचाई वाले स्थान के कारण NLOT गहन अंतरिक्ष अवलोकन के लिये क्षेत्र की सबसे शक्तिशाली ऑप्टिकल टेलीस्कोप में से एक होगा।
- हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT) का उन्नयन: HCT को 3.7 मीटर के खंडित प्राथमिक दर्पण वाले टेलीस्कोप में उन्नत किया जाएगा, जिससे इसकी संवेदनशीलता और ऑप्टिकल-अवरक्त तरंगदैर्ध्य क्षेत्र में कवरेज में सुधार होगा।
- वैज्ञानिक प्रभाव: उन्नत HCT गहन अवलोकन को संभव बनाएगा तथा अंतर्राष्ट्रीय वेधशालाओं और इस कार्यक्रम के अंतर्गत निर्मित नए टेलीस्कोप का पूरक बनेगा।
- लद्दाख क्यों?: उच्च ऊँचाई, स्वच्छ और शुष्क आकाश तथा कम वायुमंडलीय विक्षोभ के कारण लद्दाख को खगोलीय अवलोकन के लिये एक आदर्श स्थल के रूप में पहचाना गया है। यहाँ पहले से ही कई महत्त्वपूर्ण ऑप्टिकल और उच्च-ऊर्जा खगोल विज्ञान सुविधाएँ स्थापित हैं।