बिहार ने पहले ग्रीन-टेक हॉर्टिकल्चर कॉन्क्लेव की मेज़बानी की | बिहार | 02 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का बागवानी कार्यक्रम ‘बिहार नर्सरी एंड ग्रीन-टेक कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन पटना के ज्ञान भवन में किया गया, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी-आधारित बागवानी को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
मुख्य बिंदु:
- आयोजन प्राधिकरण: बिहार सरकार के कृषि विभाग के अंतर्गत बागवानी निदेशालय द्वारा आयोजित।
- थीम: ‘परंपरा से प्रगति तक’।
- उद्देश्य: इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य किसानों को बागवानी में आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना, उत्पादकता बढ़ाना तथा नवाचार आधारित प्रथाओं के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना है।
- विशेष पहलें:
- उद्यान पाठशाला: किसानों और युवाओं के लिये आधुनिक बागवानी तकनीकों पर प्रशिक्षण सत्र।
- चाणक्य हॉर्टी-पिच: स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिये एक मंच, जहाँ वे बागवानी क्षेत्र से जुड़े नवाचारी व्यावसायिक विचार प्रस्तुत कर निवेश समर्थन प्राप्त कर सकें।
- महत्त्व: यह कार्यक्रम कृषि, बागवानी और प्रौद्योगिकी के समेकन को बढ़ावा देता है तथा इस क्षेत्र में ज्ञान आदान-प्रदान तथा नवाचार के लिये एक सशक्त मंच प्रदान करता है।
लखनऊ अपशिष्ट प्रबंधन पहल | उत्तर प्रदेश | 02 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ नगर निगम के लिये 250 इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को लॉन्च करके अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ किया है, जिससे स्वच्छता तथा सतत शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य बिंदु:
- लॉन्च: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में अपशिष्ट प्रबंधन कार्यों को सुदृढ़ करने के लिये 250 इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को हरी झंडी दिखाई।
- उद्देश्य: इस पहल का लक्ष्य शहर के सभी वार्डों में 100% अपशिष्ट संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण सुनिश्चित करना तथा एक सतत शहरी पर्यावरण को बढ़ावा देना है।
- यह ‘शून्य अपशिष्ट से शून्य कार्बन उत्सर्जन’ के लक्ष्य को भी प्रोत्साहित करता है।
- पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण: नगर निगम प्रदूषण कम करने के लिये डीज़ल वाहनों को धीरे-धीरे हटाकर इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को प्राथमिकता दे रहा है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को समर्थन देने हेतु शहर में 13 स्थानों पर लगभग 520 चार्जिंग पॉइंट स्थापित किये गए हैं।
- वेस्ट-टू-वेल्थ: यह परियोजना अपशिष्ट को उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित करने और परिपत्र अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।
विश्व की सबसे बड़ी और भारत की पहली डिजिटल जनगणना शुरू | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 02 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने जनगणना 2027 के चरण-I — हाउसलिस्टिंग एवं आवास जनगणना (HLO) की शुरुआत कर दी है, जो डिजिटल डेटा संग्रहण और स्व-गणना की शुरुआत के साथ विश्व की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया का आरंभ है।
मुख्य बिंदु:
- परिचय: जनगणना 2027 भारत की देशव्यापी जनसंख्या गणना प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य नीतिगत योजना और शासन के लिये जनसांख्यिकीय, सामाजिक एवं आर्थिक आँकड़ों का संग्रह करना है।
- यह देश की 16वीं जनगणना है तथा स्वतंत्रता के बाद आयोजित होने वाली 8वीं जनगणना है।
- डिजिटल जनगणना: जनगणना 2027 भारत की पहली जनगणना होगी, जिसमें डिजिटल डेटा संग्रहण और ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी।
- पहली बार गणनाकर्त्ता स्मार्टफोन पर मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से डेटा एकत्रित और प्रस्तुत करेंगे।
- स्व-गणना सुविधा:
- नागरिक एक सुरक्षित वेब पोर्टल (se.census.gov.in) के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं।
- विवरण जमा करने के बाद सत्यापन हेतु एक सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी (SE ID) उत्पन्न होगी, जिसे गणनाकर्त्ता के दौरे के समय उपयोग किया जाएगा।
- शुरुआत: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जनगणना 2027 के लिये स्व-गणना प्रक्रिया पूरी करने वाली पहली नागरिक बन गईं।
- पहले ही दिन लगभग 55,000 परिवारों ने इस सुविधा का लाभ उठाया।
- भाषाएँ: स्व-गणना सुविधा 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे यह प्रक्रिया देशभर के लोगों के लिये सुलभ बनती है।
- प्रारंभिक क्रियान्वयन क्षेत्र: यह प्रक्रिया प्रारंभ में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिज़ोरम, ओडिशा, सिक्किम तथा नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के क्षेत्रों में शुरू की गई।
- चरण-I – हाउसलिस्टिंग एवं आवास जनगणना:
- यह 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 के बीच आयोजित की जा रही है।
- प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश इस अवधि में 30 दिनों का निरंतर क्षेत्रीय कार्य करेगा।
- पहली बार घर-घर सर्वेक्षण शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि स्व-गणना के लिये प्रदान की जाएगी।
- संग्रहित जानकारी: चरण-I के दौरान आवास की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और परिसंपत्तियों से संबंधित विवरण 33 अधिसूचित प्रश्नों के माध्यम से एकत्र किये जाएंगे।
- कानूनी ढाँचा: जनगणना के दौरान एकत्रित आँकड़े जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत संरक्षित होते हैं, जो व्यक्तिगत जानकारी की कड़ी गोपनीयता सुनिश्चित करता है।
उत्तराखंड में लॉन्च किया गया 'प्रज्ञानम्' AI चैटबॉट | उत्तराखंड | 02 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने लोक भवन, देहरादून में श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित 'प्रज्ञानम्' AI चैटबॉट लॉन्च किया।
मुख्य बिंदु:
- परिचय: ‘प्रज्ञानम्’ एक AI-आधारित चैटबॉट है, जिसे भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिये विकसित किया गया है।
- यह प्लेटफॉर्म वेद, उपनिषद, पुराण, आयुर्वेद, दर्शन, गणित और पारंपरिक विज्ञान सहित भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न स्रोतों से सामग्री ग्रहण करता है।
- लॉन्च: इस चैटबॉट को 25 मार्च, 2026 को देहरादून के लोक भवन में लॉन्च किया गया।
- विकासकर्त्ता: इसे ‘वन यूनिवर्सिटी–वन रिसर्च’ पहल के अंतर्गत श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
- उद्देश्य:
- छात्रों, शोधकर्त्ताओं और आम जनता को भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली तक आसान पहुँच प्रदान करना।
- डिजिटल माध्यमों के ज़रिये युवा पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत से जोड़ना।
- प्रौद्योगिकी एकीकरण: यह चैटबॉट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल डाटाबेस को एकीकृत कर उपयोगकर्त्ताओं के प्रश्नों के सटीक उत्तर प्रदान करता है।
- NEP के अनुरूप: यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) को आधुनिक शिक्षा में समाहित करने पर बल देती है।
राष्ट्रव्यापी कृषि क्षेत्रीय सम्मेलनों की शुरुआत जयपुर से हुई | राजस्थान | 02 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने घोषणा की है कि केंद्र–राज्य समन्वय को सुदृढ़ करने और कृषि विकास को तीव्र करने के लिये जयपुर से शुरू करते हुए देशभर में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों की एक शृंखला आयोजित की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
- परिचय: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय देश के विभिन्न हिस्सों में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों की एक शृंखला आयोजित करेगा।
- प्रारंभ स्थल: इस शृंखला का पहला सम्मेलन 7 अप्रैल, 2026 को राजस्थान के जयपुर में आयोजित होगा।
- घोषणा: इस पहल की घोषणा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।
- उद्देश्य:
- कृषि क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना।
- विभिन्न कृषि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना।
- कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिये क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियाँ तैयार करना।
- क्षेत्रीय कवरेज: स्थानीय कृषि चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए ये सम्मेलन क्षेत्रवार आयोजित किये जाएंगे।
- पश्चिमी क्षेत्र सम्मेलन: जयपुर (राजस्थान) – 7 अप्रैल, 2026
- उत्तरी क्षेत्र सम्मेलन: लखनऊ (उत्तर प्रदेश) – 17 अप्रैल, 2026
- पूर्वी क्षेत्र सम्मेलन: भुवनेश्वर (ओडिशा) – 24 अप्रैल, 2026
- मुख्य फोकस क्षेत्र: आत्मनिर्भर दलहन मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, प्राकृतिक कृषि मिशन और डिजिटल कृषि मिशन।
छत्तीसगढ़ में महिला-नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों से आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा | छत्तीसगढ़ | 02 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने इस तर्क पर प्रकाश डाला कि महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह और जनजातीय शिल्प छत्तीसगढ़ में आर्थिक सशक्तीकरण एवं समावेशी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।
मुख्य बिंदु:
- परिचय: रक्षा खडसे ने जगदलपुर में ‘छत्तीसगढ़ कला’ ब्रांड के अंतर्गत ग्रोथ सेंटर और प्रगति महिला स्वयं सहायता समूह के स्टॉलों का दौरा किया।
- राज्य योजनाएँ: उन्होंने महतारी वंदन योजना और लखपति दीदी योजना जैसी महिला-केंद्रित राज्य योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित किया, जो वित्तीय सहायता, सतत आजीविका के अवसर तथा बाज़ार तक पहुँच प्रदान करती हैं।
- ई-कॉमर्स: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री और रेडी-टू-ईट खाद्य उत्पादों जैसे प्रयासों ने महिलाओं द्वारा निर्मित वस्तुओं की बाज़ार पहुँच का विस्तार किया है।
- उन्होंने ज़ोर दिया कि ये पहल पोषण सुरक्षा, रोज़गार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में योगदान देती हैं।
- संवाद: उन्होंने महिला उद्यमियों और कारीगरों के साथ संवाद भी किया, उनके योगदान की सराहना की तथा उन्हें अपने प्रयासों का विस्तार करने के लिये प्रोत्साहित किया।
- समावेशी विकास का मॉडल: छत्तीसगढ़ में महिला-नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और जनजातीय शिल्प के माध्यम से हो रहा परिवर्तन महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण विकास तथा समावेशी विकास का एक प्रभावशाली मॉडल बनकर उभर रहा है।