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आत्मनिर्भर भारत: अवसर और चिंताएँ

  • 07 Jul 2021
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये

आत्मनिर्भर भारत अभियान, मेक इन इंडिया अभियान

मेन्स के लिये

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत प्रस्तुत अवसर और चुनौतियाँ 

चर्चा में क्यों?

यूके-इंडिया बिज़नेस काउंसिल (UKIBC) ने 'रोड टू ए यूके-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: एन्हांसिंग द पार्टनरशिप एंड अचीविंग सेल्फ-रिलायंस' शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है।

  • भारत में व्यापार करने को लेकर ‘यूके-इंडिया बिज़नेस काउंसिल’ के वार्षिक सर्वेक्षण के मुताबिक ब्रिटेन की 77 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ एक चुनौती के बजाय एक अवसर प्रदान करता है।
  • हालाँकि परिषद ने अपनी रिपोर्ट में ज़ोर देते हुए कहा है कि ‘आत्मनिर्भर अभियान’ के तहत लागू कुछ सुधारों के कारण ब्रिटेन और सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 

प्रमुख बिंदु

आत्मनिर्भर भारत अभियान द्वारा प्रस्तुत अवसर: 

  • ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को वर्ष 2014 में शुरू किये गए ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिये, क्योंकि ये दोनों ही अभियान घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से विनिर्माण निवेश हासिल करने के उद्देश्य को साझा करते हैं।
  • इस अभियान के हिस्से के रूप में घोषित पैकेज के तहत भारतीय समाज के संवेदनशील और वंचित वर्गों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), कृषि क्षेत्र के लिये तथा व्यवसायों हेतु नियमों को आसान बनाने और अर्थव्यवस्था का समर्थन करने हेतु अन्य समाधानों की एक शृंखला हेतु कई वित्तीय सहायता उपायों की पेशकश की गई थी।
  • इस अभियान ने विदेशी निवेशकों के लिये रक्षा, परमाणु ऊर्जा, कृषि, बीमा, स्वास्थ्य सेवा और नागरिक उड्डयन सहित कई क्षेत्रों में निवेश के अवसर प्रदान किये हैं।

बढ़ती चिंता:

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश का कम होना: इस कार्यक्रम के कुछ पहलुओं जैसे- आयात एवं आयात प्रतिस्थापन पर टैरिफ व गैर-टैरिफ प्रतिबंध में वृद्धि आदि में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तथा निवेश को कम करने की क्षमता है।
    • गैर-टैरिफ बैरियर, जैसे- कोटा (Quota), अधिरोध (Embargo) या सैंक्शन (Sanction) आदि व्यापार अवरोधक हैं, जिनका उपयोग देश अपने राजनीतिक और आर्थिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिये करते हैं।
    • देश मानक टैरिफ बैरियर (जैसे सीमा शुल्क) के स्थान पर गैर-टैरिफ बैरियर का उपयोग कर सकते हैं।
  • DISCOMS द्वारा तदर्थ नीति में परिवर्तन: बिजली वितरण कंपनियाँ (DISCOMS) और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के मामले में बिजली खरीद समझौतों पर दुबारा बातचीत करने के लिये तदर्थ (Ad-Hoc) परिवर्तनों को अपनाती हैं।
  • नीतिगत मुद्दे: भारत की बौद्धिक संपदा प्रवर्तन व्यवस्था में कठिनाइयाँ, फार्मा क्षेत्र के नियमों में अंतराल, दवा मूल्य नियंत्रण और डेटा स्थानीयकरण तथा शासन से संबंधित मानदंड।
    • डेटा स्थानीयकरण (देश की सीमाओं के भीतर डेटा संग्रहीत करना) वैश्विक आपूर्ति शृंखला तक पहुँच सीमित करके स्थानीय कंपनियों की वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्द्धा करने की क्षमता को सीमित कर सकता है।
    • इससे निवेश, पूंजी और ग्राहकों तक पहुँच में कमी हो सकती है।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में :  अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी निवेशकों के लिये खोलना एक महत्त्वपूर्ण कदम था, लेकिन इससे जुड़ी प्रक्रियाओं से संबंधित कई पहलुओं के बारे में 'स्पष्टता की कमी' थी।
    • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन तथा प्रमाणीकरण केंद्र (IN-SPACe) भारतीय अंतरिक्ष अवसंरचना का उपयोग करने हेतु निजी क्षेत्र की कंपनियों को समान अवसर उपलब्ध कराएगा।
  • रक्षा क्षेत्र में: रक्षा उपकरणों की 101 वस्तुओं पर आयात प्रतिबंध को 4 वर्ष की अवधि तक  या  वर्ष 2024 तक लागू करने की योजना है। 
    • इसके अतिरिक्त रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 में परिवर्तन के कारण यह संभावना सुनिश्चित की गई है कि इस सूची में कोई भी वस्तु कट-ऑफ तिथि से आगे आयात नहीं की जाती है।
    • इससे भारत में विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है।

सुझाव :

  • भविष्य की रणनीति बनाना :
    • एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण जो क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं और स्थान संबंधी निर्णय लेने पर विचार करता है, सफल होने के लिये आवश्यक है।
  • भारत में मुक्त और निष्पक्ष व्यापार हेतु खुलेपन को बढ़ावा देना :
    • भारत को अंतर्राष्ट्रीय व्यवसायों को भारत में निवेश करने और मेक इन इंडिया को एक उपकरण के रूप में टैरिफ का उपयोग करने के बजाय अपनी क्षमता के कारण निवेशकों को आकर्षित करना चाहिये।
  •  नवोन्मेषकों के विकास और समर्थन पर ध्यान देना :
    • STEM, डिजिटल, रचनात्मक और महत्त्वपूर्ण विचार कौशल पर ध्यान केंद्रित करने से यह ऐसे नेतृत्त्वकर्त्ताओं और कार्यकर्ताओं का निर्माण करेगा जो नवाचार कर सकते हैं तथा समस्याओं को हल कर सकते हैं।
    • भारत को एक नवप्रवर्तक-अनुकूल बौद्धिक संपदा नीति और प्रवर्तन व्यवस्था भी विकसित करनी चाहिये।
  •  डिजिटल और डेटा:
    • वैश्विक व्यापार में डिजिटल और डेटा सेवाओं का तीव्रता से बढ़ते महत्त्व के साथ भारत के समक्ष अन्य प्रमुख लोकतांत्रिक बाज़ारों के साथ पूरी तरह से एकीकृत होने का अवसर उपलब्ध है।
    • भारत को अपनी विकास क्षमता को प्राप्त करने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence), डिजिटल तकनीक (Digital Technology) और डेटा के मौजूद अवसरों का दोहन करने के लिये इन क्षेत्रों में सक्रिय रूप से निवेश करना जारी रखना चाहिये।
  • भारत की  व्यापार और निवेश रणनीति को स्थिरता प्रदान करना :
    • अगर व्यापारिक व्यवस्थाओं को सही ढंग से आकार दिया जाए, तो  ये संस्थाएँ गरीबों का समर्थन करने और पर्यावरण की रक्षा करने में मदद कर सकती हैं।
    • देश और विभिन्न व्यापरिक समूह इस तथ्य से अवगत हैं तथा वे अपने  व्यापार समझौतों और रणनीतियों में स्थिरता और मानवाधिकारों को तेज़ी से एकीकृत कर रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत अभियान:

  • मई 2020 में प्रधानमंत्री द्वारा 20 लाख करोड़ रुपए के इस कार्यक्रम को आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज के साथ शुरू किया गया था - जिसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्राप्त करना था।
    • वर्ष 2019-20 हेतु घोषित आर्थिक पैकेज भारत के सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product- GDP) का 10% था।
    •  20 लाख करोड़ रुपए की धनराशि में RBI के उपायों औ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana) के तहत भुगतान को शामिल करते हुए लॉकडाउन की शुरुआत में पहले से घोषित पैकेज शामिल हैं।
    • उम्मीद है कि इस पैकेज का उपयोग भूमि, श्रम, तरलता और कानूनों पर ध्यान केंद्रित करने हेतु किया जाएगा।

लक्ष्य:

  • इसका उद्देश्य वैश्विक बाज़ार में हिस्सेदारी हासिल करने हेतु सुरक्षा अनुपालन और सामानों की गुणवत्ता में सुधार करते हुए प्रतिस्थापन पर ध्यान केंद्रित करके आयात निर्भरता को कम करना है।
  • आत्मनिर्भरता न तो किसी बहिष्करण या अलगाववादी रणनीतियों का प्रतीक है बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर एक सहायता के रूप में देखे जाने की ज़रूरत है।
  • मिशन "स्थानीय" उत्पादों को बढ़ावा देने के महत्त्व पर केंद्रित है।

Atmanirbhar-Bharat

स्रोत: द हिंदू

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