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Drishti IAS Classroom Programme

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  • हमारा नज़िरया
  • दृष्टि ही क्यों?
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हमारा नज़रिया

  • सिविल सेवक बनना देश के अधिकांश युवाओं का सपना होता है। इस सपने को साकार करने के लिये हर साल लाखों अभ्यर्थी सिविल सेवा परीक्षा में सम्मिलित होते हैं, जिनमें से कुछ को ही इन प्रतिष्ठित पदों तक पहुँचने का सौभाग्य प्राप्त होता है। गौरतलब है कि सिविल सेवा परीक्षा में सम्मिलित होने वाले बहुत से अभ्यर्थी (विशेषकर हिंदी माध्यम के) ऐसी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं जहाँ सिविल सेवा परीक्षा में चयनित होने को गौरव का विषय समझा जाता है। लेकिन, हिन्दी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के समक्ष अपने इस सपने को साकार करने में सबसे बड़ी बाधा विश्वसनीय मार्गदर्शन एवं स्तरीय अध्ययन सामग्री के अभाव के रूप में आती है।  

  • सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में मार्गदर्शन की अपनी विशिष्ट भूमिका है। लेकिन, ऐसे विद्यार्थियों के लिये मार्गदर्शन की भूमिका और भी बढ़ जाती है जिनकी अकादमिक पृष्ठभूमि हिन्दी माध्यम की होती है, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि हिन्दी माध्यम के विद्यालयों में विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकों का अध्ययन करने के लिये प्रेरित नहीं किया जाता है बल्कि परीक्षा पास करने के लिये मॉडल प्रश्नोत्तर वाली पुस्तकों को पढ़ने पर ज़ोर दिया जाता है, फलस्वरूप इन विद्यालयों से पढ़कर आए विद्यार्थियों की रुचि पाठ्य पुस्तकों को पढ़ने में नहीं होती है।

  • सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों में एक वर्ग ऐसे विद्यार्थियों का भी होता है जिनकी अकादमिक पृष्ठभूमि तो विज्ञान की रही होती है, लेकिन वे सिविल सेवा परीक्षा मानविकी विषयों के साथ देते हैं ऐसे विद्यार्थियों के लिये सीमित समय में स्तरीय पाठ्य सामग्री के बिना (जो सामान्यतः हिन्दी माध्यम में उपलब्ध नहीं है) अच्छी तैयारी करना कठिन होता है, क्योंकि स्तरीय एवं विश्वसनीय पाठ्य सामग्री सामान्य रूप से अंग्रेज़ी भाषा की पाठ्य पुस्तकों में ही उपलब्ध है और हिन्दी माध्यम के अधिकांश विद्यार्थियों की अंग्रेज़ी की समझ या तो बहुत अच्छी नहीं होती या फिर वे अंग्रेज़ी में इतने सहज नहीं होते कि अंग्रेज़ी की पाठ्य पुस्तकों से विषय वस्तु को हिन्दी में अनूदित करके उसका उपयोग कर सकें। ऐसे में, मार्गदर्शन की भूमिका उभरकर आती है, और यही कार्य कोचिंग संस्थान करते हैं।

  • अगर बात कोचिंग संस्थानों की करें तो आज सिविल सेवा परीक्षा के प्रति युवाओं के बढ़ते रुझान के चलते तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों की बाढ़ सी आ गई है। ऐसे में, तैयारी के इच्छुक अभ्यर्थी इस बात का निर्धारण नहीं कर पाते कि किस कोचिंग संस्थान में प्रवेश लें? अच्छे कोचिंग संस्थान का चुनाव करने के लिये क्या कसौटी अपनाएँ? 

  • आज, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कराने वाले अधिकांश संस्थानों के पास ऐसे अध्यापक नहीं हैं जो परीक्षा के बदलते प्रारूप के अनुरूप अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन उपलब्ध करा सकें और जिन संस्थानों में अच्छे अध्यापक हैं भी तो उनमें से अधिकांश के पास स्तरीय पाठ्य सामग्री उपलब्ध नहीं है। अब, ऐसे में विद्यार्थी क्या करें- वे इन बातों की जाँच कैसे करें? हालाँकि, ये बात तो बिल्कुल सही है कि इन सब बातों का पता करना किसी भी विद्यार्थी के लिये थोड़ा मुश्किल ज़रूर है लेकिन इतना जटिल भी नहीं है।

  • इसके लिये, सबसे पहले आप तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से कोचिंग संस्थानों के बारे में पूछें, फिर अगर अधिकांश विद्यार्थी सिर्फ किसी एक कोचिंग के बारे में ही सलाह देते हैं तो आप उसमें जाकर डेमो क्लास करके देख सकते हैं ताकि आपको उस कोचिंग संस्थान के शिक्षण का तरीका और वहाँ से मिलने वाली पाठ्य सामग्री के बारे में पता चल जाए। और अगर जिन विद्यार्थियों से आपने कोचिंग संस्थानों  के बारे में पूछा है, वे आपको दो – तीन कोचिंगों के बारे में बताते हैं तो आप उनमें बारी-बारी से डेमो क्लास कर सकते हैं, फिर अध्यापन, पाठ्य सामग्री, प्रबंधन तथा अन्य सुविधाओं की दृष्टि से जो संस्थान आपको सबसे बेहतर लगे, वहाँ प्रवेश ले लीजिये।

  • सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले विशेषकर हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थियों के समक्ष आने वाली इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए दृष्टि समूह ने अपने ‘दृष्टि: द विज़न’ संस्थान के अंतर्गत प्रारंभिक परीक्षा से लेकर साक्षात्कार तक के लिये सामान्य अध्ययन, निबंध, सीसैट और वैकल्पिक विषयों के साथ-साथ साक्षात्कार तक के लिये अपने अकादमिक कार्यक्रम को इस तरह से तैयार किया है कि ऐसे विद्यार्थी जो सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं लेकिन उनकी अकादमिक पृष्ठभूमि उस स्तर की नहीं रही है कि वे बिना कोचिंग संस्थान की मदद लिये सिर्फ पाठ्य पुस्तकों की मदद से अपनी तैयारी कर सकें, उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम है। 

  • सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करवाने के लिये 'दृष्टि: द विज़न’ ने अपना फाउंडेशन कोर्स डिज़ाइन किया है, जिसकी समयावधि 16-17 महीनों की है कोई भी विद्यार्थी अगर नियमित रूप से पूरी लगन के साथ इस कार्यक्रम का अनुसरण करता है तो उसके लये सिविल सेवा परीक्षा के किसी भी चरण में सफलता हासिल करना दुष्कर कार्य नहीं रह जाएगा। इस कार्यक्रम में स्नातक की पढ़ाई कर रहे ऐसे विद्यार्थी भी शामिल हो सकते हैं जो स्नातक के बाद सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं। ऐसे विद्यार्थी अपनी स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी कर सकते हैं।

दृष्टि ही क्यों?

सिविल सेवा परीक्षा के विस्तृत पाठ्यक्रम एवं पाठ्यक्रम की परिवर्तनशील प्रकृति को देखते हुए अभ्यर्थियों के समक्ष जो सबसे बड़ी मुश्किल आती है, वो ये है कि निश्चित समय-सीमा (सामान्यतः डेढ़-दो वर्षों) में इतने विस्तृत पाठ्यक्रम को पूरी तरह से तैयार कैसे किया जाए? हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिये तो यह चुनौती और भी बड़ी हो जाती है। ऐसे में, अभ्यर्थियों के समक्ष एक ही विकल्प उभरकर आता है- कोचिंग संस्थान। लेकिन यहाँ समस्या ये आती है कि कौन-सी कोचिंग उनके लिये बेहतर रहेगी, इसका चयन कैसे किया जाए ? हिन्दी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के समक्ष इस परीक्षा की तैयारी के दौरान आने वाली तमाम समस्याओं को ध्यान में रखते हुए दृष्टि संस्थान ने एक समग्र अकादमिक कार्यक्रम तैयार किया है। 

दृष्टि: द विज़न के अकादमिक कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ-

  • सबसे पहले तो यह समझना ज़रूरी है कि सामान्य अध्ययन के प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम को एक-दूसरे से एकदम पृथक नहीं किया जा सकता है, क्योंकि प्रारंभिक परीक्षा का 80 फीसदी से अधिक पाठ्यक्रम मुख्य परीक्षा के साथ ही पढ़ाया जाता है।

  • यह बात सत्य है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले हिन्दी माध्यम के अधिकांश उम्मीदवारों की न तो अकादमिक पृष्ठभूमि ही पर्याप्त मज़बूत होती है और न ही पाठ्यक्रम की विषयवस्तु की अच्छी समझ होती है।

  • ऐसे विद्यार्थियों की अकादमिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए दृष्टि संस्थान ने अपने अकादमिक कार्यक्रम को समावेशी प्रकृति का बनाया है, ताकि किसी भी तरह की अकादमिक पृष्ठभूमि का अभ्यर्थी किसी कारण से इस प्रतिस्पर्द्धा में अन्य प्रतियोगियों से पीछे न रहे।

  • हमारे अकादमिक सत्र की कुल समयावधि 16-17 महीनों की है। एकबारगी देखने पर यह समयावधि आपको ज़्यादा लग सकती है, लेकिन किसी अन्य संस्थान की तरह हम अध्यापन की चयनात्मक पद्धति को न तो अपनाते है और न ही सिविल सेवा परीक्षा के लिये इसे उचित समझते हैं, अतः सिविल सेवा परीक्षा में विस्तृत एवं परिवर्तनशील प्रकृति के पाठ्यक्रम को अच्छी तरह से तैयार करने के लिये यह समयावधि एकदम उचित है।

  • विद्यार्थियों के अकादमिक स्तर और अध्ययन की सहजता को ध्यान में रखते हुए हमने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा निर्धारित सिविल सेवा परीक्षा पाठ्यक्रम को विभिन्न उप-खंडों में वर्गीकृत किया है ताकि जिन विषयों का पाठ्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से उल्लेख नहीं है (लेकिन परीक्षा में अक्सर उनसे प्रश्न पूछे जाते हैं या पूछे जाने की सम्भावना रहती है), उन पर भी पर्याप्त ध्यान देते हुए तैयार किया जा सके। 

  • वस्तुतः हम यह मानकर चलते हैं कि अगर किसी विद्यार्थी ने स्नातक किया है तो उसके अंदर विभिन्न अवधारणाओं को समझने की क्षमता तो विकसित होगी। इसके बाद हम प्रत्येक विषय को बिल्कुल बेसिक स्तर से शुरू करते हैं।

  • कक्षा के दौरान अध्यापक विभिन्न विषयों से संबंधित जटिल अवधारणाओं को रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी घटनाओं से जोड़कर समझाते हैं। 

  • अगर किसी अवधारणा को समझाने के लिये विद्यार्थियों को कोई वीडियों क्लिप  या मानचित्र दिखाना आवश्यक है, तो उसके लिये सभी कक्षाओं में दो-तीन प्रोजेक्टर लगे हुए हैं।  

  • अगर किसी विद्यार्थी को पढ़ाए गए विषय में किसी अवधारणा, घटना या तथ्य के संबंध में कोई संदेह (doubt) है या फिर समझने में समस्या आ रही है तो इस कार्य में संस्थान की शोध टीम विद्यार्थियों की मदद करती है। 

  • ‘दृष्टि : द विज़न’  की शोध टीम कई उप-टीमों में विभाजित है, जिनमें कुल मिलाकर 250 से अधिक पूर्णकालिक सदस्य कार्यरत हैं। 

  • ये सभी सदस्य ऐसे हैं जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा का लंबा अनुभव है और साथ ही सामान्य अध्ययन के विभिन्न खंडों और वैकल्पिक विषयों में विशेषज्ञता हासिल है।

  • सभी विद्यार्थियों को दैनिक उत्तर लेखन हेतु प्रतिदिन अभ्यास प्रश्न दिये जाते हैं, विद्यार्थी उन प्रश्न के उत्तर लिखकर कक्षा के बाहर नोट्स काउंटर पर जमा कर देते हैं।

  • ये उत्तर अगले 5-6 दिनों में मूल्यांकन के साथ वापस विद्यार्थी को मिल जाते हैं। दैनिक उत्तर लेखन के अतिरिक्त, नियमित अंतराल पर (सामान्यतः महीने में दो बार) क्रमशः प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के प्रारूप पर आधारित जाँच परीक्षाएँ (Tests) भी आयोजित की जाती हैं।

  • जाँच परीक्षा उत्तर मूल्यांकन के लिये दो विशेषज्ञ टीमें हैं, जिनमें एक टीम दैनिक उत्तर लेखन तथा कक्षा में नियमित अंतराल पर होने वाली जाँच परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करती है, जबकि दूसरी टीम प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की टेस्ट सीरीज़ के प्रश्नोत्तर तैयार करने एवं उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य संभालती है।

  • कक्षा में अध्यापकों द्वारा लिखवाई गई विषयवस्तु के अलावा संस्थान की तरफ से विद्यार्थियों को प्रत्येक विषय के लिये अध्यायवार ढंग से अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है।

  • हम विद्यार्थियों को किसी भी विषय की अध्ययन सामग्री एक-साथ उपलब्ध नहीं कराते हैं, बल्कि हर दूसरे-तीसरे दिन जब नया अध्याय शुरू होता है तो अध्यायवार ढंग से पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसका लाभ ये है कि अगर किसी विषय के लिये या फिर पूरे पाठ्यक्रम की पाठ्य सामग्री एक-साथ दे दी जाए तो विद्यार्थी पर उसका अनावश्यक दबाव बनेगा जिससे वह न चाहते हुए भी उस पाठ्य सामग्री को पूरा नहीं पढ़ पाएगा। अध्यायवार ढंग से अध्ययन सामग्री देने का लाभ ये होता है कि अध्यापक को कोई भी अध्याय पढ़ाने में लगभग 3-4 दिनों का समय होता है और किसी अध्याय को पढ़ाने से पहले उससे संबंधित जो पाठ्य सामग्री दी जाती है उसमें भी अधिकतम 10-12 पेज होते हैं। ऐसे में विद्यार्थी कक्षा के साथ-साथ पूरे पाठ्यक्रम को अच्छे से पढ़ पाता है।

  • विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाने वाली अध्ययन सामग्री विश्वसनीय एवं स्तरीय पाठ्य पुस्तकों एवं सरकारी दस्तावेज़ों और वेबसाइटों से प्राप्त सामग्री से तैयार की जाती है और इस सामग्री को नियमित रूप से अपडेट भी किया जाता है।

  • करेंट अफेयर्स के लिये संस्थान चार स्तरों पर कार्य करता है- पहला, दृष्टि पब्लिकेशन्स द्वारा मासिक रूप से प्रकाशित हिन्दी माध्यम की सर्वश्रेष्ठ पत्रिका “दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे” नियमित रूप से विद्यार्थियों को वितरित की जाती है। दूसरा, प्रतिदिन अंग्रेज़ी के एक प्रमुख समाचार पत्र से एक महत्त्वपूर्ण लेख का भावानुवाद करके उससे संबंधित मुख्य परीक्षा का एक प्रश्न बनाकर रोज़ाना विद्यार्थियों को दिया जाता है। तीसरा, हिन्दी के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित महत्त्वपूर्ण लेखों का अर्द्ध-मासिक संकलन वितरित किया जाता है। चौथा, दृष्टि समूह की वेबसाइट www.drishtiias.com पर प्रतिदिन अंग्रेज़ी के समाचार पत्रों से महत्त्वपूर्ण समाचारों (News) एवं लेखों (Articles) का हिन्दी में विश्लेषण प्रस्तुत किया जाता है और प्रतिदिन करेंट अफेयर्स से संबंधित दैनिक अभ्यास प्रश्न भी दिये जाते हैं, इन अभ्यास प्रश्नों के साथ इनके व्याख्या सहित उत्तर भी दिये जाते हैं।


इसके अतिरिक्त, दृष्टि समूह की इसी वेबसाइट www.drishtiias.com पर सिविल सेवा परीक्षा एवं विभिन्न राज्य सिविल सेवा यानी पी.सी.एस. परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी हर तरह की पाठ्य सामग्री अद्यतन रूप से उपलब्ध रहती है। 

कुल मिलाकर, अगर कोई विद्यार्थी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिये दृष्टि संस्थान में एडमिशन लेता है तो उसको बस नियमित रूप से हमारे अकादमिक कार्यक्रम का अनुसरण करना है, सफलता निश्चित रूप से उसका वरण करेगी। इसी मूल ध्येय से हम अपना कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।

पढ़ाने का तरीका

  • हमारे यहाँ किसी भी टॉपिक को बिना समझे याद करने या रटने की सलाह नहीं दी जाती बल्कि कोशिश की जाती है कि हर विद्यार्थी मूल अवधारणाओं (Basic Concepts) को समझे तथा आत्मसात करे। 
  • एक बार किसी टॉपिक से संबंधित अवधारणाओं को समझ लेने के बाद उस टॉपिक से संबंधित प्रमुख सूचनाओं एवं तथ्यों को याद रखना ज़्यादा मुश्किल नहीं रहता है, फलस्वरूप परीक्षा में उस टॉपिक से  घुमा-फिराकर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में विद्यार्थी सहजता महसूस करता है।
  • हमारे अध्यापक कक्षा में विद्यार्थियों को सिर्फ लिखवाते रहने में विश्वास नहीं करते क्योंकि एक तो इससे विद्यार्थियों का बहुत सारा समय अनुत्पादक तरीके से खर्च होता है, साथ ही उसकी ज़्यादातर ऊर्जा लिखने में लग जाती है और वह अवधारणाओं को समझने में पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाता है। 
  • हमारे अध्यापक खुद विस्तृत नोट्स तैयार करके विद्यार्थियों को देते हैं ताकि उन्हें अन्य स्रोतों से कुछ और न पढ़ना पड़े। 
  • कक्षा में हर टॉपिक पर विस्तृत व रोचक ढंग से चर्चा होती है। हास्य-व्यंग्य, मनोरंजक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी घटनाओं के उदाहरणों का प्रयोग करते हुए विद्यार्थियों को अवधारणाएँ समझाई जाती हैं।
  • कक्षा में प्रोजेक्टर के माध्यम से विभिन्न घटनाओं एवं अवधारणाओं से जुड़ी वीडियो क्लिप्स एवं मानचित्र/ आरेख के माध्यम से विभिन्न घटनाओं एवं अमूर्त विषयों को समझाया जाता है ताकि पढ़ाई गई बातें लंबे समय तक और स्पष्टता के साथ विद्यार्थियों को याद रह सकें। 
  • कक्षा में पढ़ाए जा रहे विषय के संबंध में अपनी जिज्ञासाओं के समाधान के लिये विद्यार्थी अध्यापकों से सवाल पूछ सकते हैं। हमारे सभी अध्यापकों की कोशिश रहती है कि वे विद्यार्थियों की विषय से संबंधित सभी जिज्ञासाओं को संतुष्ट करें।
  • विगत वर्षों में परीक्षाओं में पहले पूछे जा चुके तथा भावी परीक्षा के लिये संभावित प्रश्नों को कक्षा की चर्चाओं में एक ज़रूरी संदर्भ की तरह शामिल किया जाता है ताकि विद्यार्थी सिर्फ अवधारणाओं को समझने तक सीमित न रहें बल्कि यह भी समझें कि उन्हें अपने अर्जित ज्ञान को परीक्षा में किस तरह प्रस्तुत करना है? मुख्य परीक्षा के प्रश्नों के उत्तरों की रूपरेखा पर विशेष चर्चा होती है तथा उत्तरों के प्रारूप लिखवाए जाते हैं। साथ ही, विद्यार्थियों को दैनिक रूप से प्रश्नोत्तर अभ्यास के लिये प्रेरित किया जाता है। 
  • कक्षा के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि कक्षा की चर्चाओं में अनावश्यक भटकाव न हो ताकि सत्र का समापन निर्धारित समय में हो सके।

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Anil Kumar Yadav

IPS 573 Rank

Anil Kumar Yadav, has got 573 rank in UPSC-CSE-2017. Drishti IAS is uploading video of Anil Kumar Yadav's Mock Interview to help UPSC aspirants for their exam.This video will help lots of students to understand the process of Interview.

Arti Singh

AIR 118 Rank

Arti Singh secured a rank of 118 at the UPSC Civil Services (IAS) examination in the year 2016. This video about Arti’s journey to civil services exam success documents her life. She is an inspiration for Hindi medium students.

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