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रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया-2020 का अनावरण

  • 29 Sep 2020
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये 

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया-2020 

मेन्स के लिये 

आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य, ऑफसेट नीति में परिवर्तन 

चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Process-DAP)–2020 का अनावरण किया है। पहली रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) वर्ष 2002 में लागू की गई थी, जिसके पश्चात् घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देने और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिये इसे समय-समय पर संशोधित किया जाता रहा है। रक्षा मंत्री ने DAP–2020 तैयार करने के लिये अगस्त, 2019 में महानिदेशक (अधिग्रहण) श्री अपूर्वा चंद्रा की अध्यक्षता में मुख्य समीक्षा समिति के गठन को मंज़ूरी दी थी।

DAP-2020 में सम्मिलित सुधार 

  • DAP-2020 को 1 अक्तूबर, 2020 से लागू किया जाएगा। इसमें कई हितधारकों से मिली टिप्पणियों/सुझावों को सम्मिलित किया गया है।
  • आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य 
    • किसी उपकरण की खरीद आयात से पूर्व अधिसूचित समय सीमा के बाद नहीं की गई है, यह सुनिश्चित करने के लिये आयात पर प्रतिबंध के लिये हथियारों/मंचों की एक सूची को अधिसूचित करना।
    • कलपुर्ज़ों/छोटे उपकरणों के स्तर पर निर्माण और स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना के लिये संभावित विदेशी विक्रेताओं की इच्छा का पता लगाना।
    • खरीद की नई श्रेणी के माध्यम से भारत में अपनी सहायक कंपनी के माध्यम से उपकरणों/कलपुर्ज़ों का निर्माण, रख-रखाव और मरम्मत सुविधा का निर्माण करना।
    • अंतर-सरकारी समझौतों के माध्यम से सह-उत्पादन सुविधाओं की स्थापना और 'आयात प्रतिस्थापन' के लक्ष्य को हासिल करना।
    • संविदात्मक सक्षमता हासिल करते हुए इसमें स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से जीवन चक्र समर्थन लागत प्रणाली संवर्द्धन को अनुकूलित करना।
    • रक्षा विनिर्माण में नई FDI नीति की घोषणा के साथ कई उपयुक्त प्रावधानों को शामिल किया गया है ताकि घरेलू उद्योग को आवश्यक संरक्षण प्रदान करते हुए विदेशी OEM (Original Equipment Manufacturer) को भारत में अपनी सहायक कंपनी के माध्यम से 'विनिर्माण/रख-रखाव संस्थाओं'की स्थापना के लिये प्रोत्साहित किया जा सके।
    • समयबद्ध तरीके से रक्षा खरीद प्रक्रिया और तीव्रता से निर्णय लेना। आत्मनिर्भर भारत अभियान में घोषित रक्षा सुधार के एक हिस्से के रूप में अनुबंध प्रबंधन का समर्थन करने के लिये एक परियोजना प्रबंधन इकाई  (Project Management Unit- PMU) की स्थापना अनिवार्य है। PMU अधिग्रहण प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिये निर्दिष्ट क्षेत्रों में सलाहकार और परामर्श सहायता प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करेगा।
    • वैश्विक और घरेलू बाज़ारों में उपलब्ध ‘तुलनात्मक’ उपकरणों के विश्लेषण के आधार पर सत्यापन योग्य मापदंडों की पहचान पर अधिक ज़ोर देना।
    • DAP-2020 पारदर्शिता, निष्पक्षता और सभी को समान अवसरों के सिद्धांत के आधार पर प्रतियोगिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य के साथ परीक्षण करने की आवश्यकता पर ज़ोर देता है।
  • ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (Ease of Doing Business): ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को निम्नलिखित प्रावधानों के साथ अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है- 
    • प्रक्रियात्मक बदलाव
      • 500 करोड़ रुपए तक के सभी मामलों में AoN (Acceptance of Necessity) के एकल चरण समझौते को स्थापित किया गया है, जिससे समय कम लगेगा।
    • प्रस्ताव के लिये अनुरोध (Request for proposal-RFP) और मानक अनुबंध दस्तावेज़ (Standard Contract Document-SCD): फ्लो-चार्ट संचालित दिशा-निर्देशों, भंडारण संरक्षण के प्रावधान और संविदा के निरस्तीकरण के अनुसार RFD और SCD प्रावधानों को सक्षम करने के कुछ उपायों को शामिल किया गया है।

DAP-2020 की प्रमुख विशेषताएँ 

  • भारतीय विक्रेताओं के लिये श्रेणियों में आरक्षण: नए प्रावधानों के तहत कई तरह की खरीद को विशेष तौर पर भारतीय निर्माताओं के लिये ही आरक्षित किया गया है। यह आरक्षण घरेलू भारतीय उद्योग में भागीदारी को विशिष्टता प्रदान करेगा।
  • स्वदेशी सामग्री का संवर्द्धन: स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content-IC) में समग्र वृद्धि, स्वदेशी सामग्री के सत्यापन की एक सरल और व्यावहारिक प्रक्रिया, स्वदेशी कच्चे माल का उपयोग, स्वदेशी सॉफ्टवेयर, जैसे- फायर कंट्रोल सिस्टम, रडार, एन्क्रिप्शन, कम्युनिकेशंस आदि को अपनाकर स्वदेशी सामग्री के संवर्द्धन के प्रावधान किये गए हैं।
  • परीक्षण और जांच प्रक्रियाओं का युक्तिकरण: 
    • उपयुक्तता और अन्य शर्तों पर परीक्षण उपकरण के लिये कार्यात्मक प्रभावशीलता की पुष्टि करने वाले उचित प्रमाण पत्र प्राप्त किये जा सकते हैं।
    • परीक्षणों का दायरा प्रमुख ऑपरेशनल मापदंडों के भौतिक मूल्यांकन तक सीमित रहेगा।
    • परीक्षणों के दोहराव से बचाव और छूट समनुरूपता प्रमाण पत्र के आधार पर दी जाएगी।
  • निरीक्षण: निरीक्षण की कोई पुनरावृत्ति विशेष रूप से उपकरणों की स्वीकृति के दौरान नहीं की जाएगी। थर्ड पार्टी निरीक्षण भी किया जाएगा।
  • निर्माण और नवाचार: आईडेक्स (An innovation ecosystem for Defence titled Innovations for Defence Excellence-iDEX), प्रौद्योगिकी विकास कोष और आंतरिक सेवा संगठनों जैसी विभिन्न पहलों के तहत 'नवाचार' के माध्यम से विकसित प्रोटोटाइप (Prototype)  की खरीद की सुविधा दी गई है।
  • डिजाइन और विकास: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (Defence Research and Development Organisation-DRDO)/DPSU (Defence Public Sector Undertakings)/OFB (Ordnance Factory Board) द्वारा डिजाइन और विकसित प्रणालियों के अधिग्रहण के लिये DAP-2020 में अलग से एक समर्पित अध्याय शामिल किया गया है। प्रमाणीकरण और सिमुलेशन के माध्यम से मूल्यांकन पर अधिक ज़ोर देने और समय में कमी लाने के लिये एकीकृत एकल चरण परीक्षणों के साथ एक सरल प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 
  • उद्योग के अनुकूल वाणिज्यिक शर्तें: 
    • विक्रेताओं द्वारा प्रारंभिक मूल्यों को बढ़ाने से रोकने और परियोजना की वास्तविक कीमत पर बड़े अनुबंधों के लिये मूल्य बदलाव खंड शामिल किया गया है।
    • विक्रेताओं को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिये तय समयसीमा के अंदर डिजिटल सत्यापन के प्रावधानों को शामिल किया गया है।

ऑफसेट के प्रावधान में परिवर्तन 

  • ऑफसेट दिशा-निर्देशों को संशोधित किया गया है, जिसमें घटकों की बजाय पूर्ण रक्षा उत्पादों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • भारत की ऑफसेट नीति के अनुसार, विदेशी कंपनियों को अनुबंध का 30 प्रतिशत हिस्सा भारत में अनुसंधान या उपकरणों पर खर्च करना होता है। पुरानी ​रक्षा खरीद प्रक्रिया में रक्षा मंत्रालय ने यह ऑफसेट नीति विदेशी कंपनियों से 300 करोड़ रुपए  से अधिक के रक्षा सौदों के लिये बनाई थी, जिसे DAP-2020 में बदल दिया गया है।
  • कैग ने संसद में डिफेंस ऑफसेट पॉलिसी (Defence Offset Policy) पर संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट के अनुसार, डसॉल्ट एविएशन से 59 हजार करोड़ रुपए में 36 राफेल विमानों की डील करते समय ऑफसेट समझौते में DRDO को कावेरी इंजन की तकनीक देकर 30 प्रतिशत ऑफसेट पूरा करने की बात तय हुई थी, लेकिन अभी तक यह वादा पूरा नहीं किया गया है।
  • ​वर्ष 2005 से वर्ष 2018 तक विदेशी कंपनियों से 66 हज़ार करोड़ रुपए  के कुल 46 ऑफसैट हस्ताक्षरित हुए। इनमें से 90 प्रतिशत मामलों में कंपनियों ने ऑफ​सेट के बदले में सिर्फ सामान खरीदा है, किसी भी केस में तकनीक हस्तांतरित नहीं हुई है। इस विफलता को देखते हुए सरकार ने ऑफसेट नीति में परिवर्तन किया है।

आगे की राह 

एक वर्ष से भी अधिक समय में तैयार की गई DAP-2020 भारत सरकार के आत्म-निर्भर भारत के विज़न और मेक इन इंडिया के अनुकूल प्रक्रिया है। DAP-2020 दस्तावेज़ एक विश्वास पैदा करता है और यह रक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा।

स्रोत: पीआईबी

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