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जैव विविधता और पर्यावरण

NGT ने ग्रेट निकोबार परियोजना को स्वीकृति प्रदान की

  • 17 Feb 2026
  • 110 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने ₹81,000 करोड़ की ग्रेट निकोबार परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। अधिकरण ने कहा कि उसे इस मामले में हस्तक्षेप करने का "कोई ठोस आधार" नहीं मिला, साथ ही पर्यावरण की रक्षा के लिये कुछ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं।

  • NGT ने "परियोजना के रणनीतिक महत्त्व" को स्वीकार किया और उल्लेख किया कि पारिस्थितिक प्रभावों को कम करने के लिये पर्यावरणीय स्वीकृति में "पर्याप्त सुरक्षा उपाय" शामिल किये गए हैं।

सारांश

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण ग्रेट निकोबार परियोजना को, तटरेखाओं एवं प्रवाल भित्तियों और संकटापन्न प्रजातियों की सुरक्षा के लिये कड़ी शर्तें लागू करते हुए, स्वीकृति प्रदान की है।
  • वनों की कटाई, जनजातीय विस्थापन और भूकंपीय संवेदनशीलता संबंधी चिंताएँ जारी हैं।
  • सफल कार्यान्वयन के लिये सुरक्षा उपायों का कठोर प्रवर्तन और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत शोंपेन एवं निकोबारी जैसे सुभेद्य जनजातीय समूहों (PVTG) के साथ वास्तविक परामर्श आवश्यक है।

NGT द्वारा पर्यावरण के लिये क्या सुरक्षा उपाय लागू किये गए हैं?

  • अपरदन को रोकना: राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने निर्देश दिया कि निर्माण (जिसमें अग्र तट का विकास शामिल है) से परियोजना क्षेत्र के निकट या किसी भी द्वीप की तटरेखा पर अपरदन या प्रतिकूल तटरेखा निर्मित नहीं होनी चाहिये।
  • रेतीले समुद्र तटों का संरक्षण: इसके लिये विशेष रूप से आदेश दिया कि "रेतीले समुद्र तटों का कोई नुकसान नहीं होगा", इन तटों को कछुओं और पक्षियों के लिये महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल और द्वीपों के लिये  प्राकृतिक सुरक्षा के रूप में मान्यता दी गई है।
  • प्रवाल भित्तियों का संरक्षण: इसने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को तटीय क्षेत्र के साथ प्रवाल भित्तियों की रक्षा के लिये "सभी उपाय" करने और "सिद्ध वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से प्रवाल पुनर्जनन" सुनिश्चित करने का आदेश दिया। किसी भी मौज़ूदा बिखरे हुए प्रवाल को भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के सुझावों के अनुसार "स्थानांतरित" किया जाना चाहिये।
  • संकटापन्न प्रजातियों का संरक्षण: पर्यावरणीय स्वीकृति में लेदरबैक सी टर्टल, निकोबार मेगापोड, खारे जल के मगरमच्छ, रोबेर क्रैब, निकोबार मकाक और ग्रेट निकोबार द्वीप की अन्य स्थानिक पक्षी प्रजातियों के संरक्षण के लिये विशिष्ट शर्तें शामिल हैं।
  • शर्तों की बाध्यकारी प्रकृति: राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने यह निर्धारित किया कि सरकार पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों से बाध्य है और उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि परियोजना कार्यान्वयन के किसी भी चरण में इनका उल्लंघन न हो।

ग्रेट निकोबार परियोजना क्या है?

  • परिचय: ग्रेट निकोबार द्वीप (GNI) परियोजना वर्ष 2021 में प्रारंभ की गई थी। इसकी संकल्पना नीति आयोग द्वारा की गई थी। यह एक व्यापक अवसंरचनात्मक पहल है, इसका उद्देश्य अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के दक्षिणतम द्वीप को एक रणनीतिक एवं आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। यह भारत के मैरीटाइम विज़न 2030 तथा अमृत काल विज़न 2047 के अनुरूप है।
  • परियोजना का अवलोकन: इस परियोजना के अंतर्गत गैलेथिया खाड़ी, पेम्माया खाड़ी तथा नंजप्पा खाड़ी में विकास कार्य प्रस्तावित हैं। ये द्वीप कोलंबो (श्रीलंका), पोर्ट क्लांग (मलेशिया) तथा सिंगापुर से लगभग समान दूरी पर स्थित हैं, जिससे भारत क्षेत्रीय समुद्री व्यापार के केंद्र में स्थापित हो सकता है। 
  • परियोजना के प्रमुख घटक:
    • अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT): इसका उद्देश्य ग्रेट निकोबार को क्षेत्रीय एवं वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट केंद्र के रूप में स्थापित करना है, ताकि भारत माल-परिवहन में सक्रिय भागीदारी कर सके।
    • ग्रीनफील्ड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: सिविलियन कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देने तथा डुअल-यूज़ रक्षा क्षमता प्रदान करने के लिये।
    • ग्रीनफील्ड टाउनशिप: अनुमानित जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करने के लिये।
    • गैस और सौर आधारित पावर प्लांट: नई अवसंरचना की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये।
  • जनजातीय सुरक्षा उपाय: विकास कार्य के लिये जनजातीय कल्याण संस्थाओं [जैसे– अंडमान आदिम जनजाति विकास समिति (AAJVS), जनजातीय कार्य मंत्रालय] के साथ अनिवार्य परामर्श आवश्यक है, जैसा कि जारवा (2004) और शॉम्पेन (2015) नीतियों में निर्दिष्ट है। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 338A(9) के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के साथ परामर्श यह सुनिश्चित करता है कि जनजातीय हितों की रक्षा की जाएगी।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय: परियोजना में सुरक्षित वन्यजीव आवाजाही के लिये 8 वन्यजीव कॉरिडोर शामिल हैं। कटे हुए पेड़ों के लिये क्षतिपूर्ति वनीकरण हरियाणा में किया जाएगा, क्योंकि इन द्वीपों में पहले ही 75% से अधिक वन क्षेत्र मौजूद है।

ग्रेट निकोबार परियोजना का रणनीतिक महत्त्व क्या है?

  • संकीर्ण जलमार्ग निकटता: इस द्वीप का स्थान मलक्का, सुंदर और लोंबोक जलसंधियों के पास है, ये महत्त्वपूर्ण जलमार्ग हैं जो भारतीय महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ते हैं। इससे भारत को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिये आवश्यक समुद्री मार्गों की निगरानी करने की सुविधा मिलती है।
    • यह भारत को साबांग (इंडोनेशिया) और प्रस्तावित क्रा नहर (थाईलैंड) के निकट होने की सुविधा भी देता है, जिससे यह इंडो-प्रशांत समुद्री मार्गों में भारत की केंद्रीय भूमिका को उजागर करता है।
  • मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस: यह भारत की क्षमता को मज़बूत करता है कि वह नौसैनिक गतिविधियों पर निगरानी रख सके, विशेषकर चीन की भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती उपस्थिति और कोको द्वीपों (म्याँमार) पर स्थापित हो रही सैन्य सुविधा, जो भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से केवल 55 किमी. उत्तर में है, पर ध्यान केंद्रित कर सके।
  • रक्षा की अग्रिम पंक्ति: अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भारत की समुद्री रक्षा की अग्रिम पंक्ति के रूप में कार्य करता है और म्याँमार, थाईलैंड, इंडोनेशिया एवं बांग्लादेश के साथ समुद्री सीमाएँ साझा करता है। इससे भारत को संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन, 1982 (UNCLOS) के तहत एक विशाल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और महाद्वीपीय शेल्फ का अधिकार प्राप्त होता है।
  • सैन्य निवारक क्षमता: यह परियोजना अतिरिक्त सैन्य बलों, बड़े युद्धपोतों, विमानों, मिसाइल बैटरी और सैनिकों की तैनाती को सक्षम बनाती है, जिससे सघन निगरानी संभव होती है और दृढ़ सैन्य निवारक क्षमता का निर्माण होता है।
  • आर्थिक महत्त्व: ICTT का उद्देश्य भारत की सिंगापुर और कोलंबो जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट पोर्ट्स पर निर्भरता को कम करना है तथा भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में सम्मिलित करना है।

ग्रेट निकोबार द्वीप

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह: इसमें 836 द्वीप शामिल हैं, जो भौगोलिक रूप से अंडमान समूह (उत्तर में) और निकोबार समूह (दक्षिण में) में विभाजित हैं। इन दोनों समूहों को टेन डिग्री चैनल (~150 किमी. चौड़ा) अलग करता है।
  • ग्रेट निकोबार द्वीप: यह निकोबार समूह का सबसे बड़ा द्वीप है और अधिकांशतः उष्णकटिबंधीय वर्षावन से आच्छादित है। यहाँ स्थित इंदिरा प्वाइंट भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु है, जो सुमात्रा, इंडोनेशिया से केवल 90 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है।
  • पारिस्थितिक महत्त्व: इस द्वीप में दो राष्ट्रीय उद्यान हैं- कैंपबेल बे नेशनल पार्क और गलाथिया बे नेशनल पार्क। इसके अलावा इसमें ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिज़र्व भी है, जिसे वर्ष 2013 में UNESCO के मानव और बायोस्फीयर कार्यक्रम में शामिल किया गया।
  • जनसांख्यिक प्रोफाइल: द्वीप पर स्थानीय जनजातीय समुदायों की छोटी जनसंख्या रहती है, जिनमें शॉम्पेन और निकोबारी शामिल हैं, साथ ही कुछ गैर-आदिवासी बसने वाले भी हैं। ऐतिहासिक रूप से क्षेत्र से जुड़े अन्य आदिवासी समूहों में ओंगे और अंडमानीज़ शामिल हैं।

Great_Nicobar_Project

ग्रेट निकोबार परियोजना से जुड़ी चिंताएँ क्या हैं?

  • स्थानीय जनजातियों पर प्रभाव: यह परियोजना निकोबारी लोगों को उनकी पारंपरिक ज़मीन से वंचित कर सकती है, जो वर्ष 2004 के भारतीय महासागर सुनामी के दौरान पहले ही काफी प्रभावित हो चुकी थी और जिससे गहन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों वाले समुदायों का विस्थापन होगा।
  • पर्यावरणीय और पारिस्थितिक चिंताएँ:
    • अत्यधिक वनों की कटाई: इस परियोजना के तहत 130 वर्ग किमी. प्राथमिक उष्णकटिबंधीय वर्षावन (ग्रेट निकोबार द्वीप की भूमि का लगभग 15%) को साफ किया जाएगा। वास्तविक पेड़ कटाई 1 करोड़ से अधिक हो सकती है।
    • वन्यजीवों के लिये जोखिम: यह परियोजना गलाथिया बे वन्यजीव अभयारण्य में पाए जाने वाले लेदरबैक समुद्री कछुओं के लिये जोखिम उत्पन्न करती है। यह अभयारण्य वर्ष 1997 में उनके संरक्षण हेतु स्थापित किया गया था, लेकिन वर्ष 2021 में बंदरगाह के लिये इसे निरस्त कर दिया गया।
    • ICRZ उल्लंघनों का आरोप: याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि प्रस्तावित परियोजना का 700 हेक्टेयर हिस्सा ICRZ क्षेत्रों में आता है, जहाँ ICRZ अधिसूचना, 2019 के तहत विकास सख्ती से प्रतिबंधित है।
  • प्रतिपूरक वनीकरण के मुद्दे: निर्मल निकोबार वनों के विचलन की भरपाई के लिये हरियाणा और मध्य प्रदेश में भूमि का उपयोग किया जा रहा है, जिसे आलोचक कहते हैं कि यह विशिष्ट द्वीपीय पारिस्थितिक तंत्र की खोई हुई जैव विविधता की पुनरावृत्ति नहीं कर पाता।
  • भूवैज्ञानिक चिंताएँ: इस द्वीप की भूविज्ञान संरचना में टर्शियरी सैंडस्टोन, चूना पत्थर और शेल शामिल हैं, जो ज्वालामुखीय चट्टानों पर स्थित हैं। ये भूकंप के दौरान झटकों को बढ़ा सकते हैं और लिक्विफैक्शन  के लिये संवेदनशील हैं।
  • कानूनी चिंताएँ: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2002 में नियुक्त शेखर सिंह समिति (आयोग) ने आदिवासी आरक्षित क्षेत्रों और राष्ट्रीय उद्यानों में वृक्षों की कटाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने तथा कटाई से पहले वनीकरण करने की सिफारिश की थी—जो वर्तमान में लागू नहीं की जा रही है।

ग्रेट निकोबार परियोजना की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये क्या आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है?

  • पारिस्थितिक संरक्षण रणनीतियाँ: ग्रेट निकोबार पारिस्थितिक तंत्र को 'विधिक व्यक्तित्व' (Legal Personhood) का दर्जा देने जैसे नवोन्मेषी कानूनी उपायों पर विचार करना, ताकि सभी निर्णय संरक्षण-केंद्रित हों।
    • दीर्घकालिक पारिस्थितिक निगरानी: मृदा की गुणवत्ता, तटीय कटाव और कार्बन उत्सर्जन जैसे  पारिस्थितिक मापदंडों हेतु लंबे समय तक निगरानी स्थापित करना, साथ ही कछुए के घोंसले के स्थलों की सुरक्षा और आवासीय खंडन को रोकने के लिये अनुकूलनीय उपाय लागू करना।
  • आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा: पुनर्वास पैकेज इस तरह डिज़ाइन करना चाहिये कि सुनामी से पहले के आवास पैटर्न को मान्यता मिले और निर्माण के दौरान आदिवासी समुदायों की सुरक्षा के लिये सीमित पहुँच प्रोटोकॉल लागू किये जाएँ।
    • आदिवासी परिषदों को शामिल करना: ग्रेट और लिटिल निकोबार द्वीपों की आदिवासी परिषदों को परियोजना से संबंधित निर्णयों में शामिल करना अनिवार्य करें और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत उनके कानूनी अधिकारों का पालन सुनिश्चित करना।
  • संस्थागत निगरानी और पारदर्शिता: एक बहु-पक्षीय स्वतंत्र निगरानी प्राधिकरण स्थापित करना, जिसमें पर्यावरण विशेषज्ञ, आदिवासी प्रतिनिधि और सरकारी नामांकित सदस्य शामिल हों, ताकि पर्यावरण तथा सामाजिक सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित किया जा सके एवं पारदर्शिता व जवाबदेही बनी रहे।
  • सतत आर्थिक अवसर: नवीकरणीय ऊर्जा, पारिस्थितिक रूप से ज़िम्मेदार पर्यटन और कम प्रभाव वाली ऑफशोर गतिविधियों जैसे क्षेत्रों में हरित रोज़गार को बढ़ावा देना। परियोजना के परिणामों को भारत की जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु कार्रवाई की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप बनाना।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा ग्रेट निकोबार परियोजना को कड़े पर्यावरणीय शर्तों के साथ मंज़ूरी देना राष्ट्रीय रणनीतिक हितों और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का एक संतुलित प्रयास है। हालाँकि  परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन, स्थानीय आदिवासी PVTGs के साथ वास्तविक परामर्श तथा पारदर्शी संस्थागत निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास स्थायी क्षति पर न हो।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. भारत के समुद्री सुरक्षा ढाँचे में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के रणनीतिक महत्त्व का परीक्षण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना क्या है?
यह एक महा-अवसंरचना परियोजना है, जिसका उद्देश्य ग्रेट निकोबार द्वीप पर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, टाउनशिप और पावर प्लांट विकसित करना है, ताकि इसे रणनीतिक तथा आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

2. ग्रेट निकोबार द्वीप का रणनीतिक महत्त्व क्या है?
इसकी मलक्का जलडमरूमध्य और अन्य समुद्री चोक प्वाइंट्स के पास की निकटता भारत को महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी, चीनी प्रभाव (जैसे– कोको द्वीप) को संतुलित करने तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य शक्ति प्रदर्शन करने की सुविधा देती है।

3. परियोजना के खिलाफ उठाई गई प्रमुख पर्यावरणीय चिंताएँ क्या थीं?
मुख्य चिंताओं में शामिल थीं: विशाल वनक्षेत्र की कटाई (130 वर्ग किमी.), लैदरबैक कछुओं जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों को खतरा, कथित ICRZ उल्लंघन और कोरल रीफ तथा गलाथिया बे वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी पर पारिस्थितिक प्रभाव।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)

  1. बैरेन द्वीप ज्वालामुखी भारतीय क्षेत्र में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है। 
  2. बैरेन द्वीप ग्रेट निकोबार से लगभग 140 किमी. पूर्व में स्थित है। 
  3. पिछली बार वर्ष 1991 में बैरेन द्वीप ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था और तब से यह निष्क्रिय है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1  

(b) केवल 2 और 3 

(c) केवल 3  

(d) केवल 1 और 3 

उत्तर: (a)


प्रश्न. निम्नलिखित द्वीपों के युग्मों में से कौन-सा एक 'दश अंश जलमार्ग' द्वारा आपस में पृथक् किया जाता है? (2014)

(a) अंडमान एवं निकोबार

(b) निकोबार एवं सुमात्रा

(c) मालदीव एवं लक्षद्वीप

(d) सुमात्रा एवं जावा

उत्तर: (a)

मेन्स

प्रश्न. सरकार द्वारा किसी परियोजना को अनुमति देने से पूर्व, अधिकाधिक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अध्ययन किये जा रहे हैं। कोयला गर्त-शिखरों (पिटहेड्स) पर अवस्थित कोयला-अग्नित तापीय संयंत्रों के पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा कीजिये। (2014)

प्रश्न. परियोजना 'मौसम' को भारत सरकार की अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों की सुदृढ़ करने की एक अद्वितीय विदेश नीति पहल माना जाता है। क्या इस परियोजना का एक रणनीतिक आयाम है? चर्चा कीजिये। (2015)

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