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वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित ज़िले

  • 04 Apr 2026
  • 19 min read

स्रोत: द हिंदू 

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित ज़िलों के वर्गीकरण में व्यापक रूप से संशोधन किया है, ताकि नक्सल विरोधी रणनीतियों को वर्तमान ज़मीनी वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जा सके, जो रेड कॉरिडोर (भारत के वे ज़िले जहाँ नक्सलियों की उपस्थिति और प्रभाव है) के ऐतिहासिक संकुचन को चिह्नित करता है।

  • नया वर्गीकरण: "सर्वाधिक प्रभावित ज़िलों" की पूर्व की श्रेणी को LWE प्रभावित ज़िलों के रूप में अधिक सूक्ष्म वर्गीकरण द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है, जो उग्रवाद की तीव्रता के बेहतर मूल्यांकन की अनुमति देता है।
  • वर्तमान वर्गीकरण (2026): वर्तमान में केवल बीजापुर (छत्तीसगढ़) और पश्चिमी सिंहभूम (झारखंड) को LWE प्रभावित ज़िलों के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जबकि कांकेर (छत्तीसगढ़) को अत्यधिक प्रभावित ज़िला की श्रेणी में रखा गया है और शेष नौ राज्यों में 35 ज़िले कम प्रभावित श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।
    • पहले छत्तीसगढ़ के बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जैसे ज़िले वर्ष 2025 तक "सर्वाधिक प्रभावित" श्रेणी का हिस्सा थे, जहाँ महत्त्वपूर्ण सुधार देखने को मिलते हैं।
  • रेड कॉरिडोर का पतन: रेड कॉरिडोर वर्ष 2005 के 200 से अधिक ज़िलों से घटकर वर्ष 2026 में मात्र 2 ज़िलों में आ गया है, जो निरंतर सुरक्षा और विकासात्मक हस्तक्षेपों की सफलता को दर्शाता है, जो मार्च 2026 तक LWE को समाप्त करने के भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।
  • पुनर्वर्गीकरण का उद्देश्य: संशोधित वर्गीकरण का उद्देश्य संसाधनों के बेहतर आवंटन और बदलती वास्तविकताओं के साथ LWE-विरोधी प्रयासों के संरेखण को सुनिश्चित करना है, जिससे हस्तक्षेप अधिक लक्षित और प्रभावी बन सकें।
  • नीतिगत ढाँचा: ये परिवर्तन वर्ष 2015 की LWE से निपटने के लिये राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना में निहित हैं, जो उग्रवाद से व्यापक रूप से निपटने के लिये सुरक्षा उपायों को विकास पहलों के साथ जोड़ती है।
  • सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना: संशोधित वर्गीकरण SRE योजना के तहत संसाधनों की तैनाती को निर्धारित करेगा, जहाँ केंद्र सुरक्षा बल अभियानों, अनुग्रह भुगतान और आत्मसमर्पण करने वाले LWE कैडरों के पुनर्वास तथा सामुदायिक पुलिसिंग के लिये राज्यों को धन की प्रतिपूर्ति करता है।
    • SRE योजना के तहत वर्ष 2023–24 तक कुल 1,685 करोड़ रुपये जारी किये गए हैं, जो LWE का सामना करने के लिये निरंतर वित्तीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • नक्सल-मुक्त भारत: केंद्र सरकार ने लोकसभा में घोषणा की है कि देश प्रभावी रूप से "नक्सल-मुक्त" है, जो आंतरिक सुरक्षा में एक प्रमुख उपलब्धि है।

और पढ़ें: भारत में वामपंथी उग्रवाद

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