आंतरिक सुरक्षा
वामपंथी उग्रवाद-मुक्त भारत
- 03 Apr 2026
- 90 min read
प्रिलिम्स के लिये: वामपंथी उग्रवाद (LWE), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान
मेन्स के लिये: भारत में वामपंथी उग्रवाद (LWE): कारण, विस्तार और पतन, आंतरिक सुरक्षा में सुरक्षा बनाम विकास दृष्टिकोण की भूमिका, 'समाधान' सिद्धांत और उग्रवाद-रोधी रणनीतियाँ।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृहमंत्री के अनुसार, छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र, जो कभी भारत में वामपंथी उग्रवाद (LWE) का अभेद्य दुर्ग माना जाता था, अब माओवाद से लगभग पूरी तरह मुक्त हो चुका है।
- उन्होंने घोषणा की कि देश “नक्सल-मुक्त” हो गया है और इस प्रगति को भारत सरकार के उस लक्ष्य के अनुरूप बताया, जिसके तहत मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद (LWE) को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
सारांश
- भारत सुरक्षा अभियानों, विकास पहलों और समाधान सिद्धांत जैसी रणनीतिक नीतियों के माध्यम से ‘नक्सल-मुक्त’ बना है।
- हालाँकि स्थायी शांति बनाए रखने के लिये जनजातीय अधिकारों, शासन की कमियों और आर्थिक समावेशन जैसे मूल कारणों को दूर करना आवश्यक है, ताकि पुनः उग्रवाद न उभर सके।
वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने हेतु भारत की क्या रणनीति है?
- नीतिगत ढाँचा: यह मानते हुए कि विद्रोह को केवल सैन्य बल से समाप्त नहीं किया जा सकता, भारत ने एक समग्र, बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया, जिसे राष्ट्रीय नीति एवं कार्ययोजना (2015) में औपचारिक रूप दिया गया।
- इस रणनीति का मुख्य लक्ष्य मार्च 2026 तक ‘नक्सल-मुक्त भारत’ बनाना और पहले के ‘रेड ज़ोन’ क्षेत्रों को ‘विकास कॉरिडोर’ में परिवर्तित करना है।
- इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये सरकार विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘क्लियर, होल्ड और बिल्ड’ आतंकवाद-रोधी सिद्धांत पर आधारित एक समन्वित तीन-स्तरीय रणनीति अपनाती है।
- सुरक्षा उपाय: प्राथमिक लक्ष्य राज्य की क्षेत्रीय प्रभुसत्ता को पुनः स्थापित करना है, जिसके लिये सशस्त्र उग्रवादियों को निष्क्रिय करना और उनके सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करना शामिल है।
- SAMADHAN सिद्धांत: वर्ष 2017 में शुरू किया गया यह सुरक्षा बलों के लिये एक संचालनात्मक खाका (ऑपरेशनल ब्लूप्रिंट) है।
- SAMADHAN का अर्थ है—स्मार्ट नेतृत्व, आक्रामक रणनीति, प्रेरणा व प्रशिक्षण, उपयोगी खुफिया जानकारी, डैशबोर्ड आधारित KPI, तकनीक का प्रभावी उपयोग, प्रत्येक क्षेत्र के लिये कार्ययोजना तथा वित्तीय संसाधनों तक पहुँच को रोकना।
- खुफिया-आधारित अभियान: CoBRA (CRPF), ग्रेहाउंड्स (आंध्र/तेलंगाना) और ज़िला रिज़र्व गार्ड (DRG) जैसी विशेष जंगल युद्ध इकाइयों के माध्यम से व्यापक और लक्षित सैन्य अभियान संचालित करना।
- सुरक्षा बलों ने 2022 में ऑपरेशन ऑक्टोपस, ऑपरेशन डबल बुल और ऑपरेशन चक्रबंधा जैसे प्रमुख अभियानों के माध्यम से वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। हाल ही में, छत्तीसगढ़ में 2025 का ऑपरेशन कगार भी उग्रवाद को नियंत्रित करने के प्रयासों को और मज़बूत करता है।
- फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOBs): रक्षात्मक घेराबंदी से आगे बढ़ते हुए आक्रामक रणनीति अपनाना, जिसके तहत अबूझमाड़ जैसे दुर्गम माओवादी क्षेत्रों के भीतर मज़बूत पुलिस कैंप स्थापित किये जाते हैं।
- यह स्थायी रूप से उग्रवादियों की आपूर्ति लाइनों को बाधित करता है और उन्हें फिर से संगठित होने से रोकता है।
- आतंक के वित्तपोषण पर अंकुश: राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का उपयोग करते हुए उन जटिल जबरन वसूली (लेवी) नेटवर्कों का पता लगाना, उन्हें फ्रीज़ करना और ध्वस्त करना, जो माओवादी तंत्र को वित्तपोषित करते हैं।
- SAMADHAN सिद्धांत: वर्ष 2017 में शुरू किया गया यह सुरक्षा बलों के लिये एक संचालनात्मक खाका (ऑपरेशनल ब्लूप्रिंट) है।
- त्वरित विकास (निर्माण): उग्रवाद भौगोलिक अलगाव और गहन गरीबी में विकसित होता है। राज्य इसका सामना व्यापक अवसंरचना विकास को लागू करके करता है, ताकि इस अलगाव को समाप्त किया जा सके और शासन के शून्य (गवर्नेंस वैक्यूम) को भरा जा सके।
- फिजिकल कनेक्टिविटी: LWE प्रभावित क्षेत्रों के लिये सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) के कार्यान्वयन के माध्यम से घने वनों के बीच हर मौसम में उपयोग योग्य सड़कों का निर्माण, जिससे एक ओर तेज़ी से सैनिकों की आवाजाही संभव हो सके और दूसरी ओर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मुख्यधारा के बाज़ारों तक पहुँच मिल सके।
- डिजिटल कनेक्टिविटी: LWE ज़िलों में 100% 4G कवरेज सुनिश्चित करने के लिये हज़ारों मोबाइल टावरों की तीव्र स्थापना, जिससे संचार के ब्लैकआउट को समाप्त किया जा सके और स्थानीय लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके।
- मानव पूंजी एवं वित्तीय समावेशन: एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) और ITI (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) की स्थापना करके गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना, जिससे जनजातीय युवाओं को उग्रवाद/कट्टरपंथ की ओर आकर्षित होने से रोका जा सके।
- साथ ही, बैंक शाखाओं और डाकघरों का विस्तार नकद-आधारित जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) अर्थव्यवस्था को दरकिनार करने में सहायक होता है।
- लक्षित ग्राम कल्याण: धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे सैचुरेशन अभियानों का क्रियान्वयन, ताकि बुनियादी व्यक्तिगत सुविधाएँ सबसे दूरस्थ जनजातीय गाँवों तक सुनिश्चित रूप से पहुँच सकें।
माओवाद
- माओवाद माओ त्से तुंग द्वारा विकसित साम्यवाद का एक क्रांतिकारी स्वरूप है, जो ‘दीर्घकालिक जनयुद्ध’ (Protracted People’s War) के माध्यम से राज्य सत्ता पर कब्ज़ा करने की वकालत करता है।
- यह विचारधारा ‘सैन्य रेखा’ (Military Line) को प्राथमिकता देती है, जिसमें स्थापित संस्थाओं को समाप्त करने के लिये सशस्त्र विद्रोह, जनसमूह की लामबंदी और रणनीतिक गठबंधनों का उपयोग किया जाता है।
- भारत में, यह नक्सलवाद (या वामपंथी उग्रवाद) के रूप में सामने आया, जिसकी शुरुआत पश्चिम बंगाल में 1967 के नक्सलबाड़ी विद्रोह से हुई थी।
- भारत में सबसे बड़ा और सबसे हिंसक माओवादी संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) है, जिसकी स्थापना वर्ष 2004 में हुई थी। यह संगठन और इसके विभिन्न फ्रंट संगठन अवैध गतिविधियों (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत प्रतिबंधित हैं।
- ये समूह अक्सर राज्य संस्थानों की विश्वसनीयता को प्रभावित करने के लिये प्रचार (प्रोपेगैंडा) और भ्रामक सूचनाओं का उपयोग करते हैं तथा अपने हिंसक विद्रोह के लिये कानूनी दायित्व से बचने हेतु विभिन्न उप-समूहों (ऑफ-शूट्स) के माध्यम से कार्य करते हैं।
भारत में वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन के बाद शेष रहने वाली चुनौतियाँ क्या हैं?
- सुरक्षा शून्य एवं ‘वैक्यूम प्रभाव’: जैसे ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) का चरणबद्ध रूप से हटना शुरू होता है, एक स्थानीय स्तर पर शक्ति का शून्य (पावर वैक्यूम) उत्पन्न हो जाता है।
- यदि राज्य पुलिस बलों को संख्या और प्रशिक्षण के दृष्टिकोण से पर्याप्त रूप से सुदृढ़ (ऑगमेंट) नहीं किया जाता है, तो विभाजित समूह (स्प्लिंटर ग्रुप्स) या आपराधिक गिरोह अक्सर इस शून्य को भर देते हैं।
- संगठित अपराध में रूपांतरण: माओवादी ऐतिहासिक रूप से खनन, तेंदू पत्ता व्यापार और अवसंरचना परियोजनाओं से संबंधित करोड़ों की जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण बनाए रखते आए हैं।
- वैचारिक नेतृत्व से वंचित होने पर बचे हुए निम्न-स्तरीय कैडर इन अवैध आय स्रोतों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिये सशस्त्र ‘माफिया’ समूहों में परिवर्तित हो सकते हैं।
- ‘अनुपस्थित प्रशासन’ सिंड्रोम: राज्य ने ‘हार्डवेयर’ (स्कूल, अस्पताल, प्रशासनिक भवन) तो तैयार कर दिये हैं, लेकिन “सॉफ्टवेयर” (सेवा वितरण) अभी भी अप्रभावी बना हुआ है।
- यह सुनिश्चित करना कि डॉक्टर, शिक्षक और नौकरशाह इन दूरस्थ, पूर्ववर्ती ‘रेड ज़ोन’ क्षेत्रों में वास्तव में उपस्थित रहें और कार्य करने के लिये प्रेरित हों, अब भी एक बड़ी लॉजिस्टिक और प्रेरणात्मक चुनौती बना हुआ है।
- ‘शहरी नक्सलवाद’ और फ्रंटल संगठनों से निपटना: जहाँ ‘जंगल स्क्वाड्स’ (दलम) को निष्क्रिय किया जा सकता है, वहीं शहरी केंद्रों में बौद्धिक और वित्तीय ‘ओवरग्राउंड’ नेटवर्क स्थानीय असंतोषों (मज़दूर हड़तालें, भूमि अधिग्रहण) का उपयोग करके माओवादी विचारधारा को जीवित बनाए रखते हैं।
- इस नेटवर्क को निष्क्रिय करना, जबकि नागरिक स्वतंत्रताओं का उल्लंघन न हो, एक संवेदनशील कानूनी और खुफिया चुनौती है।
- सामरिक प्रतिकार अभियानों (TCOC) का जोखिम: ऐतिहासिक रूप से कोने में दबे और हताश माओवादी कैडर गर्मियों के महीनों में TCOC शुरू करते हैं ताकि सुरक्षा बलों पर भारी क्षति पहुँचाई जा सके। इसलिये सामरिक सतर्कता अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहती है।
वामपंथी क्षेत्रों में स्थायी शांति और विकास सुनिश्चित करने के लिये कौन-से उपाय किये जा सकते हैं?
- राज्य पुलिस को सुदृढ़ करना (हब-एंड-स्पोक मॉडल): CAPF पर निर्भरता को एक राज्य पुलिस की उपस्थिति द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिये।
- इसमें "पुलिस-स्टेशन-ए-ग्रोथ-सेंटर" मॉडल शामिल है, जहाँ स्थानीय पुलिस स्टेशन केवल एक प्रवर्तन इकाई नहीं बल्कि शिकायत निवारण और कल्याण वितरण के लिये एक सुविधाकर्त्ता के रूप में कार्य करता है।
- सिविल एक्शन प्रोग्राम (CAP) को स्थायी सामुदायिक-पुलिस साझेदारी में संस्थागत किया जाना चाहिये।
- PESA और FRA का सख्त प्रवर्तन: शिकायतों के पुनरुत्थान को रोकने के लिये राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि वन अधिकार अधिनियम (FRA, 2006) और PESA अधिनियम (1996) को भावना और अक्षरशः लागू किया जाए।
- "जल, जंगल, ज़मीन" पर ग्रामसभा को सशक्त बनाना माओवादी विचारधारा का सबसे शक्तिशाली उपचार है।
- जनजातीय-संवेदनशील विकास: जैसे-जैसे इन खनिज-समृद्ध क्षेत्रों में खनन और औद्योगिक परियोजनाएँ बढ़ रही हैं, राज्य को "जनजातीय-प्रथम" विकास मॉडल अपनाना चाहिये।
- यह सुनिश्चित करना कि ज़िला खनिज फाउंडेशन (DMF) निधि प्रभावित जनजातीय परिवारों के प्रत्यक्ष कल्याण पर पारदर्शी रूप से खर्च की जाए, गैर-परक्राम्य है।
निष्कर्ष
भारत सुरक्षा अभियानों और विकास पहलों के मिश्रण के माध्यम से नक्सलवाद को समाप्त करने के कभी भी करीब नहीं रहा है, स्थायी शांति मूल सामाजिक-आर्थिक कारणों को संबोधित करने पर निर्भर करेगी। यह सुनिश्चित करने के लिये कि भविष्य में वामपंथी उग्रवाद पुनः उभर न सके, सुरक्षा-संचालित दृष्टिकोण से विश्वास-आधारित शासन में परिवर्तन महत्त्वपूर्ण होगा।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. भारत की विद्रोह को रोकने के लिये अपनाई गई रणनीति में "क्लियर, होल्ड, बिल्ड" सिद्धांत की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत में वामपंथी उग्रवाद (LWE) क्या है?
यह एक नक्सली विद्रोह है जिसका उद्देश्य सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से राज्य का विरोध करना है, जो जनजातीय शस्त्रीकरण और विकासशील जैसे मुद्दों में निहित है।
2. SAMADHAN सिद्धांत क्या है?
यह विद्रोह को रोकने के लिये अपनाई गई रणनीति है, जो खुफिया-नेतृत्व वाले अभियानों, प्रौद्योगिकी के उपयोग और नक्सली नेटवर्क के वित्तीय विघटन पर केंद्रित है।
3. कौन-सा कानून भारत में माओवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाता है?
विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA), 1967, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) और उसके संबद्ध संगठनों पर प्रतिबंध लगाता है।
4. LWE समाप्त होने के बाद प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
चुनौतियों में सुरक्षा शून्यता, संगठित अपराध का उदय, कमज़ोर शासन और शहरी नक्सली नेटवर्क शामिल हैं।
5. LWE क्षेत्रों में स्थायी शांति कैसे सुनिश्चित की जा सकती है?
राज्य पुलिसिंग के सुदृढ़ीकरण, PESA और FRA के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनजातीय-केंद्रित समावेशी विकास के समन्वय द्वारा।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
मेन्स
प्रश्न. भारत के पूर्वी भाग में वामपंथी उग्रवाद के निर्धारक क्या हैं? प्रभावित क्षेत्रों में खतरों के प्रतिकारार्थ भारत सरकार, नागरिक प्रशासन एवं सुरक्षा बलों को किस सामरिकी को अपनाना चाहिये? (2020)
प्रश्न. पिछड़े क्षेत्रों में बड़े उद्योगों का विकास करने के सरकार के लगातार अभियानों का परिणाम जनजातीय जनता और किसानों, जिनको अनेक विस्थापनों का सामना करना पड़ता है, का विलगन (अलग करना) है। मल्कानगिरि और नक्सलबाड़ी पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वामपंथी उग्रवादी विचारधारा से प्रभावित नागरिकों को सामाजिक और आर्थिक संवृद्धि की मुख्यधारा में फिर से लाने की सुधारक रणनीतियों पर चर्चा कीजिये। (2015)
