दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स



रैपिड फायर

डेंगू के लिये क्यूडेंगा वैक्सीन

  • 03 Apr 2026
  • 15 min read

स्रोत: द हिंदू 

भारत ने टेकडा के TAK-003 (Qdenga) को स्वीकृति प्रदान की है, जो इसका पहला डेंगू वैक्सीन है, जिसे भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) के अधीन विषय विशेषज्ञ समिति (SEC) द्वारा 4 से 60 वर्ष के व्यक्तियों के लिये स्वीकृति प्रदान की गई है, जो प्रतिक्रियाशील वेक्टर कंट्रोल से निवारक सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति की ओर एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है।

  • क्यूडेंगा: यह एक टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन है जिसका 28,000+ प्रतिभागियों पर परीक्षण किया गया है, इसको 40+ देशों में अनुमोदित किया गया है।
    • TAK-003 एक डिज़ीज़-मॉडिफाइंग वैक्सीन है, न कि संचरण-अवरोधक। यह नैदानिक गंभीरता को कम करता है लेकिन संक्रमण को नहीं रोकता है या प्रकोप को समाप्त नहीं करता है।
    • पिछले वैक्सीन के विपरीत, इसके लिये पूर्व डेंगू संक्रमण परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे रोलआउट आसान हो जाता है।
    • SEC ने भारत में वास्तविक विश्व की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिये क्षेत्रों और सेरोटाइप पैटर्न में बाज़ार-पश्चात अध्ययन अनिवार्य किया है।
  • प्रमुख सीमाएँ: डेंगू चार सेरोटाइप (DENV-1 से DENV-4) के कारण होता है। जबकि TAK-003 DENV-2 (इसका आनुवंशिक आधार) के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी है, DENV-3 और DENV-4 के खिलाफ इसकी प्रभावकारिता काफी कम है, विशेष रूप से "सेरोनिगेटिव" व्यक्तियों (जो पहले कभी संक्रमित नहीं हुए हैं) में।
    • भारत की डेंगू एपिडेमोलॉजी बदल रही है, जबकि DENV-3 कई क्षेत्रों में बढ़ रही है (मामलों का 20-30% योगदान), जो संभावित रूप से जनसंख्या पर वैक्सीन के प्रभाव को कम कर सकता है।
  • लागत चिंता: पूर्ण दो-खुराक वाले कोर्स का अनुमान 6,000 रुपये से 12,000 रुपये के बीच है, जो ग्रामीण और कम आय वाली आबादी के लिये महत्त्वपूर्ण वहन क्षमता और अनुपालन संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न करता है।
  • स्वदेशी पाइपलाइन: भारत 'डेंगीऑल' (पैनेसिया बायोटेक और ICMR द्वारा विकसित) विकसित कर रहा है, जिसका उद्देश्य सभी चार सेरोटाइपों में अधिक संतुलित सुरक्षा प्रदान करना है, जो संभावित रूप से वर्ष 2027 तक उपलब्ध हो सकता है।

और पढ़ें: डेंगीऑल

close
Share Page
images-2
images-2