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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

फाइबर ऑप्टिक केबल

  • 29 Nov 2023
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

फाइबर ऑप्टिक केबल्स, ऑप्टिकल फाइबर्स, चार्ल्स काओ, टोटल इंटरनल रिफ्लेक्शन, क्वांटम टेक्नोलॉजीज़ और एप्लीकेशन पर राष्ट्रीय मिशन।

मेन्स के लिये:

फाइबर ऑप्टिक केबल, इंटरनेट का विकास, फाइबराइज़ेशन में चुनौतियाँ, सरकार की पहल।

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन की बढ़ती मांग के साथ ऑप्टिकल फाइबर को हाई-स्पीड डेटा ट्रांसमिशन की आधुनिक वास्तविकता में बदल दिया गया है। 

ऑप्टिकल फाइबर क्या है?

  • परिचय:
    • ऑप्टिकल फाइबर काँच से बने पतले, बेलनाकार तार होते हैं, जिनका व्यास सामान्यतः मानव बाल के बराबर होता है।
    • इन तंतुओं में पाठ, चित्र, ऑडियो, वीडियो, फोन कॉल और डिजिटलीकृत किये जा सकने वाले किसी भी डेटा सहित विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को प्रकाश की गति के साथ अत्यधिक दूरी तक प्रसारित करने की उल्लेखनीय क्षमता है।
    • वे मज़बूत, हल्के और उल्लेखनीय रूप से लचीले हैं, जो उन्हें भूमिगत, जल के नीचे उपयोग या स्पूल के चारों ओर लपेटने में उपयुक्त बनाते हैं।
    • लगभग 60 वर्ष पूर्व भौतिक विज्ञानी चार्ल्स काओ ने प्रचलित तांबे के तारों को हटाकर, दूरसंचार के लिये एक बेहतर माध्यम के रूप में ग्लास फाइबर का उपयोग करने की अवधारणा को प्रस्तावित किया था। 
      • फाइबर ऑप्टिक संचार में उनके अभूतपूर्व योगदान के कारण उन्हें वर्ष 2009 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार दिया गया।

  • कार्य-प्रणाली:
    • पूर्ण आंतरिक परावर्तन का सिद्धांत: पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) की घटना ऑप्टिकल फाइबर के भीतर प्रकाश के गमन का आधार बनाती है।
      • यदि प्रकाश एक विशिष्ट कोण पर उच्च अपवर्तनांक माध्यम (जैसे काँच) से निचले अपवर्तनांक माध्यम (जैसे वायु) तक गमन करता है, तो यह माध्यम से बाहर नहीं निकल सकता है, लेकिन पूरी तरह से इसके भीतर परावर्तित हो सकता है। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहा जाता है।
    • सिग्नल एन्कोडिंग: सूचना को तेज़ी से चमकती प्रकाश स्पंदन/पल्स के रूप में ऑप्टिकल सिग्नल में एन्कोड किया जाता है, जो आमतौर पर बाइनरी अंक (शून्य और एक) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
      • इन ऑप्टिकल संकेतों को ऑप्टिकल फाइबर के एक छोर में फीड किया जाता है, जहाँ वे पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण काँच की भित्तियों के बीच टकराते (Bouncing) और परावर्तित होते हुए गमन करते हैं।
    • सिग्नल ट्रांसपोर्ट: ऑप्टिकल फाइबर निर्बाध रूप से एन्कोडेड सिग्नल को कई किलोमीटर तक पहुँचाने में मदद करता है।
      • गंतव्य पर एक रिसीवर प्रेषित ऑप्टिकल सिग्नल से एन्कोडेड जानकारी को पुन: उत्पन्न करता है।
  • लाभ:
    • तीव्र गति/हाई स्पीड: फाइबर अधिक बैंडविड्थ प्रदान करता है और 10 Gbps तथा उससे अधिक तक मानकीकृत प्रदर्शन करता है। तांबे के उपयोग के साथ इसे प्राप्त कर पाना असंभव है।
      • अधिक बैंडविड्थ का मतलब है कि फाइबर तांबे के तार की तुलना में कहीं अधिक दक्षता के साथ अधिक जानकारी का वहन कर सकता है।
    • ट्रांसमिशन की रेंज: चूँकि फाइबर-ऑप्टिक केबल्स में डेटा प्रकाश के रूप में गुज़रता है, ट्रांसमिशन के दौरान अत्यंत कम सिग्नल हानि होती है और डेटा तीव्र गति से तथा अधिक दूरी तक स्थानांतरित हो सकता है।
    • हस्तक्षेप के प्रति अतिसंवेदनशील नहीं: फाइबर-ऑप्टिक केबल कॉपर केबल की तुलना में शोर तथा विद्युत चुंबकीय हस्तक्षेप के प्रति भी बहुत कम संवेदनशील होती है।
      • यह वास्तव में इतना कुशल है कि ज़्यादातर मामलों में लगभग 99.7% सिग्नल राउटर तक पहुँचता है।
    • स्थायित्व: कॉपर केबल को प्रभावित करने वाले कई पर्यावरणीय कारकों का फाइबर-ऑप्टिक केबल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
      • केबल का कोर भाग काँच से बना होता है, जो एक इन्सुलेटर का कार्य करता है, इसलिये इसमें विद्युत प्रवाह प्रवाहित नहीं हो सकती है।

भारत में फाइबर ऑप्टिक्स का वर्तमान परिदृश्य क्या है?

  • फाइबर ऑप्टिक्स का  उपयोग दूरसंचार तकनीक, चिकित्सा विज्ञान, लेज़र तकनीक और सेंसिंग में व्यापक रूप से किया जाने लगा है।
  • संचार को सुरक्षित करने और क्वांटम विज्ञान को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ भारत सरकार ने वर्ष 2020 के केंद्रीय बजट में एक राष्ट्रीय मिशन की घोषणा की। इस 'नेशनल मिशन ऑन क्वांटम टेक्नोलॉजीज़ एंड एप्लीकेशन' के लिये प्रस्तावित बजट पाँच वर्षों की अवधि में 8,000 करोड़ रुपए है।
  • फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क की संभावनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, जो हमारे घरों तक पहुँच रहा है। क्वांटम ऑप्टिक्स के साथ फाइबर ऑप्टिक संचार एक नए युग के शिखर पर खड़ा हुआ है।
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