शासन व्यवस्था
AI वारफेयर के युग में भारत की सुरक्षा
प्रिलिम्स के लिये: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीपफेक, इंडियाAI मिशन, इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026, सर्वम AI, भारतजेन परम2, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, बौद्धिक संपत्ति, सेमीकंडक्टर, डिजिटल लिटरेसी।
मेन्स के लिये: राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शस्त्रीकरण से उत्पन्न खतरे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शस्त्रीकरण के युग में राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिये भारत द्वारा आवश्यक कदम।
चर्चा में क्यों?
रक्षा, निगरानी और भू-राजनीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग ने 'AI संप्रभुता' (AI Sovereignty) पर विमर्श को तेज़ कर दिया है, जो भारत जैसे देशों के लिये राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता के रूप में इसके महत्त्व को रेखांकित करता है।
सारांश
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) राष्ट्रीय सुरक्षा के परिदृश्य को रूपांतरित कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप रणनीतिक लाभ के साथ-साथ गंभीर खतरे भी उत्पन्न हो रहे हैं। भारत को स्वायत्त हथियारों, साइबर हमलों, दुष्प्रचार और जैविक हथियारों से संबंधित खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
- अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिये, भारत को स्वदेशी एआई क्षमताओं का निर्माण करना होगा, डेटा अवसंरचना को सुरक्षित करना होगा, नियामक ढाँचे स्थापित करने होंगे और मज़बूत रक्षा के लिये वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रोत्साहन देने के लिये AI का उपयोग किस प्रकार तेज़ी से बढ़ रहा है ?
- सैन्य सटीकता में वृद्धि: घातक अभियानों के लिये सैन्य सटीकता बढ़ाने हेतु AI को सीधे युद्ध संचालन में शामिल किया जा रहा है। उदाहरण: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन रोरिंग लायन में अमेरिकी सेना द्वारा एंथ्रोपिक के क्लाउड मॉडल का उपयोग, हमास आतंकवादियों को ट्रैक करने के लिये AI उपकरण ‘वेयर इज़ डैडी?’ का उपयोग, जिसका उद्देश्य संपार्श्विक क्षति को कम करना है।
- C4ISR प्रणाली को मज़बूत करना: सैन्य तंत्र के आधुनिकीकरण में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, विशेषरूप से कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनिसेंस (C4ISR) प्रणालियों के एकीकरण एवं सुदृढ़ीकरण में। AI विशाल डेटा को संसाधित (प्रोसेस) करके निर्णय लेने की प्रक्रिया को गति प्रदान करता है। इसके माध्यम से भविष्यसूचक विश्लेषण संभव हो पाता है, जिससे शत्रु की गतिविधियों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
- समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के लिये, यह उपग्रह और जहाज़ के डेटा का विश्लेषण करके तस्करी या अवैध मत्स्य संग्रहण में शामिल ‘डार्क शिप्स’ की पहचान करता है।
- असममित खतरों का सामना: गैर-राज्य अभिकर्त्ताओं से उत्पन्न असममित खतरों का सामना करने के लिये आंतरिक सुरक्षा हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। एक बड़ी चिंता यह है कि सस्ती और स्वायत्त हथियार प्रणालियाँ, जैसे कि AI-संचालित ड्रोन, आतंकवादियों की विनाशकारी क्षमता को काफी बढ़ा सकती हैं। इस खतरे का सामना करने के लिये, AI-आधारित ड्रोन-रोधी और निगरानी प्रणालियों का विकास आवश्यक हो गया है।
- राष्ट्रीय अवसंरचना की सुरक्षा को बढ़ाना: AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विद्युत ग्रिड और नेटवर्क में विसंगतियों का पता लगाकर सक्रिय साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करता है, AI-संचालित वीडियो विश्लेषण संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सैन्य अड्डों एवं परमाणु सुविधाओं जैसे महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील स्थलों की भौतिक सुरक्षा को मज़बूत बनाता है।
- दुष्प्रचार से मुकाबला और सामाजिक एकता की सुरक्षा: सूचना युद्ध के क्षेत्र में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक दोधारी तलवार के रूप में कार्य करती है। सुरक्षा एजेंसियाँ समन्वित दुष्प्रचार अभियानों और बॉट नेटवर्क का पता लगाने के साथ-साथ 'डीपफेक' की पहचान करने वाले एल्गोरिद्म विकसित करने के लिये AI का उपयोग करती हैं, ताकि सार्वजनिक संवाद और विश्वास की अखंडता को संरक्षित किया जा सके।
AI सॉवरेनिटी
- परिचय: AI सॉवरेनिटी से तात्पर्य किसी देश के अपने AI इकोसिस्टम जैसे कम्प्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा, एल्गोरिद्म और गवर्नेंस पर स्वतंत्र नियंत्रण से है। इसका उद्देश्य तकनीक को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, सुरक्षा आवश्यकताओं और सामरिक हितों के अनुरूप बनाना है।
- भारत की नीतिगत प्राथमिकता: मार्च 2026 तक, AI सॉवरेनिटी भारत का प्रमुख नीतिगत केंद्र बन गया। यह 'इंडिया AI मिशन' द्वारा संचालित है और अमेरिका-चीन AI प्रतिद्वंद्विता के बीच 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में प्रमुखता से उभरा है।
- बुनियादी ढाँचा: भारत ने 'इंडिया AI कम्प्यूट पोर्टल' के माध्यम से नेशनल कम्प्यूट कैपेसिटी को 58,000 से अधिक GPU तक बढ़ा दिया है। निजी क्षेत्र के प्रमुख सहयोगियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज (7 वर्षों में 110 बिलियन डॉलर) और अडाणी समूह (वर्ष 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा आधारित AI डेटा सेंटर के लिये 100 बिलियन डॉलर) शामिल हैं।
- स्वदेशी मॉडल: भारत सर्वम AI और भारतजेन परम 2 जैसे बहुभाषी क्षमता वाले डोमेस्टिक 'फाउंडेशनल मॉडल' को बढ़ावा दे रहा है, जो डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के साथ एकीकरण पर बल देते हैं।
- भारत का व्यावहारिक दृष्टिकोण: भारत पूर्णतः आत्मनिर्भर हार्डवेयर की बजाय एप्लीकेशन-आधारित रणनीति अपना रहा है। इसमें घरेलू डेटा उपयोग और बहुभाषी मॉडलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। भारत वैश्विक कंपनियों (जैसे- NVIDIA, ओपन AI, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट) के साथ साझेदारी का लाभ उठाते हुए स्थानीय बुनियादी ढाँचे का निर्माण कर रहा है, साथ ही अपनी स्वदेशी क्षमताओं को भी विकसित कर रहा है।
और पढ़ें: सर्वम AI और भारत में सॉवरेन AI
AI का वेपनाइजेशन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये कैसे खतरा है?
- सैन्य प्रभुत्व को खतरा: AI असममित युद्ध (Asymmetric warfare) को सक्षम बनाता है, जिससे विरोधी देश स्वचालित घातक आयुध प्रणालियाँ (LAWS), ड्रोन समूह और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की AI-एडवांस एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) रणनीतियों के माध्यम से भारत की पारंपरिक सैन्य बढ़त को चुनौती दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त, नियंत्रण रेखा (LoC) और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सिस्टम की तकनीकी खराबी एस्केलेशन डायनामिक्स के कारण अनजाने में संघर्ष बढ़ने का जोखिम उत्पन्न करती है।
- उदाहरण: वर्ष 2026 की शुरुआत में, चीन ने प्रदर्शित किया कि एक अकेली सैनिक टोही और आक्रामक मिशनों को स्वायत्त सहयोग के साथ 200 से अधिक ड्रोनों का समूह नियंत्रित कर सकता है। यह भारत की रक्षा रणनीति को जटिल बना सकता है।
- AI-सक्षम साइबर खतरा: विरोधी देश पावर ग्रिड (व्यापक स्तर पर ब्लैकआउट करना), वित्तीय प्रणाली (बैंकों को असमर्थ बनाना) और डिफेंस नेटवर्क (सीक्रेट चुराना या संकट के दौरान कमांड को बाधित करना) पर अनुकूलित साइबर हमलों के लिये AI का उपयोग कर सकते हैं।
- उदाहरण: मई 2025 में पाकिस्तानी सेना ने भारत पर ‘आयरन वॉल’ कोडनेम से एक साइबर हमला किया, जिससे एक बड़ा पावर ग्रिड विफल हो गया और 23 राज्यों में विद्युत व्यवस्था ठप हो गई।
- सूचना का शस्त्रीकरण: डीपफेक और दुष्प्रचार का उपयोग सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने, संस्थानों में विश्वास को कम करने और भारत के विशाल चुनावों में मतदान को प्रभावित करने के लिये किया जा सकता है, जो देश की लोकतांत्रिक और सामाजिक स्थिरता के लिये खतरा है।
- उदाहरण: वर्ष 2024 के आम चुनावों में, राजनेताओं के AI-जनरेटेड डीपफेक का उपयोग दुष्प्रचार फैलाने के लिये किया गया था, जिससे सांप्रदायिक विभाजन गहरा गया और संपूर्ण भारत में हिंसा भड़क उठी।
- आर्थिक संप्रभुता को खतरा: AI-संचालित साइबर-जासूसी भारत के तेज़ी से बढ़ते फार्मा, अंतरिक्ष और IT क्षेत्रों से बौद्धिक संपदा (IP) की बड़े पैमाने पर चोरी को सक्षम बनाती है। इसके अतिरिक्त विरोधी देश आपूर्ति शृंखलाओं का मानचित्रण और शस्त्रीकरण करने के लिये AI का उपयोग कर सकते हैं, जिससे रक्षा उत्पादन को पंगु बनाने हेतु महत्त्वपूर्ण निर्भरताओं की पहचान कर उन्हें बाधित किया जा सके।
- चीनी राज्य-समर्थित तत्त्वों, जैसे- APT41, ने प्रोप्राइटरी ड्रग फार्मूला की चोरी करने के उद्देश्य से भारतीय तथा बहुराष्ट्रीय औषधि कंपनियों को निशाना बनाया है, जिनमें मधुमेह और मोटापे के उपचार से संबंधित दवाएँ भी शामिल हैं।
- AI-संचालित बायोवेपन: सिंथेटिक बायोलॉजी के साथ AI का संगम एक उभरता विनाशकारी जोखिम बन गया है। विरोधी देश या गैर-राज्य अभिकर्त्ता जेनरेटिव AI मॉडल का उपयोग नवीन रोगजनकों, विषाक्त पदार्थों या जीन-एडिटिंग पेलोड को डिज़ाइन करने के लिये कर सकते हैं, जो मौजूदा वैक्सीन को दरकिनार कर सकते हैं या विशिष्ट नृजातीय जनसंख्या को लक्षित कर सकते हैं।
- डेटा पॉइजनिंग: अदृश्य पूर्वाग्रह या 'बैकडोर' प्रविष्ट करके, विरोधी देश महत्त्वपूर्ण तंत्रों को एक निर्णायक क्षण में विफल कर सकते हैं। उदाहरण: एक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का किसी ज्ञात आतंकवादी की पहचान करने में विफल होना, या बिना हैकिंग के किसी भी दृश्य संकेत के एक स्वायत्त वाहन द्वारा किसी बाधा का अनुचित वर्गीकरण करना।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वेपनाइजेशन के युग में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने हेतु किन कदमों की आवश्यकता है?
- स्वदेशी रक्षा AI इकोसिस्टम का निर्माण: भारत को एक मज़बूत रक्षा AI एजेंसी (DAIA) की आवश्यकता है, जो नौकरशाही को पार कर AI एकीकरण का नेतृत्व कर सके। इसे समयबद्ध राष्ट्रीय रक्षा AI मिशनों के साथ समर्थित किया जाना चाहिये, जैसे कि प्रोजेक्ट ड्रोना (AI-संचालित ड्रोन स्वार्म), प्रोजेक्ट कवच (महत्त्वपूर्ण अवसंरचना के लिये साइबर सुरक्षा) और प्रोजेक्ट नेत्रा (वास्तविक समय युद्धक्षेत्र निगरानी)।
- राष्ट्र की ‘AI बैकबोन’ की सुरक्षा: भारत को एल्गोरिद्म प्रशिक्षण के लिये सुरक्षा-संबंधित लेबल वाला राष्ट्रीय सुरक्षित डेटा सेट तैयार करना होगा। इसके लिये स्वदेशी AI अवसंरचना में समानांतर निवेश की आवश्यकता है, जिसमें घरेलू रूप से डिज़ाइन किये गए सेमीकंडक्टर्स तथा उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग केंद्र शामिल हैं, जो पूरी तरह भारत में स्थित हों, ताकि संवेदनशील रक्षा अनुप्रयोगों को सुरक्षित रूप से प्रोसेस किया जा सके।
- अवसंरचना की मज़बूती: विरोधियों को रोकने हेतु भारत को विश्वसनीय आक्रामक साइबर क्षमताएँ विकसित करनी होंगी। विशेषरूप से सरकार को सभी नई महत्त्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं (जैसे- पावर प्लांट, ग्रिड) के लिये ‘AI-सुरक्षित’ डिज़ाइन मानक लागू करना अनिवार्य करना चाहिये, ताकि उनकी मज़बूती सुनिश्चित हो सके।
- संज्ञानात्मक सुरक्षा: अपने सामाजिक ताने-बाने की रक्षा के लिये भारत को एक राष्ट्रीय संज्ञानात्मक सुरक्षा केंद्र स्थापित करना चाहिये। इसके कार्यक्षेत्र में रियल-टाइम डीपफेक पहचान, बॉट नेटवर्क्स को निष्क्रिय करना और AI-जनित भ्रामक सूचना से नागरिकों को सुरक्षित रखने हेतु बड़े पैमाने पर डिजिटल साक्षरता अभियान चलाना शामिल होगा।
- मज़बूत विनियामक ढाँचा: घातक स्वायत्त हथियार प्रणालियों (LAWS) और AI-संचालित साइबर युद्ध के लिये व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करना, जिसमें परमाणु-संपन्न दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ने के जोखिमों को रोकने हेतु मानवीय निगरानी पर ज़ोर दिया गया हो।
निष्कर्ष
AI का वेपनाइजेशन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये एक अहम चुनौती प्रस्तुत करता है, जो उसकी सैन्य बढ़त, सामाजिक एकता और आर्थिक संप्रभुता को खतरे में डालती है। इन कमज़ोरियों को रणनीतिक ताकत में बदलने हेतु स्वदेशी AI विकास, मज़बूत साइबर रक्षा, संज्ञानात्मक सुरक्षा उपायों तथा वैश्विक कूटनीतिक सहयोग को शामिल करने वाली एक व्यापक रणनीति आवश्यक है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. AI संप्रभुता की अवधारणा की समीक्षा कीजिये। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का केंद्रीय स्तंभ क्यों बनती जा रही है और इसे हासिल करने में भारत को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है? |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. AI संप्रभुता क्या है?
AI संप्रभुता का अर्थ है कि एक राष्ट्र के पास AI अवसंरचना, डेटा, एल्गोरिद्म और शासन पर स्वतंत्र नियंत्रण हो, ताकि तकनीकी विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रणनीतिक हितों के अनुरूप बनाया जा सके।
2. आधुनिक युद्ध में C4ISR सिस्टम क्या हैं?
C4ISR (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर्स, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही) प्रणालियाँ वास्तविक समय के डेटा विश्लेषण, स्थितिजन्य जागरूकता और सैन्य निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार के लिये AI सहित उन्नत तकनीकों को एकीकृत करती हैं।
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये किस प्रकार खतरा उत्पन्न करती है?
AI स्वायत्त हथियार, साइबर हमले, डीपफेक भ्रामक सूचना अभियान और डेटा पॉइज़निंग को सक्षम बना सकता है, जो महत्त्वपूर्ण अवसंरचना, लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ तथा सैन्य संचालन को प्रभावित कर सकते हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. विकास की वर्तमान स्थिति में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है? (2020)
- औद्योगिक इकाइयों में विद्युत की खपत कम करना
- सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना
- रोगों का निदान
- टेक्स्ट से स्पीच (Text-to-Speech) में परिवर्तन
- विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1,2, 3 और 5
(b) केवल 1,3 और 4
(c) केवल 2,4 और 5
(d) 1,2,3,4 और 5
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की अवधारणा का परिचय दीजिये। AI क्लिनिकल निदान में कैसे मदद करता है? क्या आप स्वास्थ्य सेवा में AI के उपयोग में व्यक्ति की निजता को कोई खतरा महसूस करते हैं? (2023)

भारतीय राजव्यवस्था
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार में ग्रिड संबंधी अवरोध
प्रिलिम्स के लिये: नवीकरणीय ऊर्जा, केंद्रीय विद्युत् विनियामक आयोग, केंद्रीय पारेषण उपयोगिता, ग्रिड इंडिया, वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड।
मेन्स के लिये: भारत का ऊर्जा संक्रमण और नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, नवीकरणीय एकीकरण में ग्रिड इन्फ्रास्ट्रक्चर और पारेषण संबंधी चुनौतियाँ, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित पहलें।
चर्चा में क्यों?
भारत क्लाइमेट फोरम 2026 में, नीति-निर्माताओं और योजनाकारों ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के गंभीर जोखिम पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि अब नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार में उत्पादन क्षमता की कमी की बजाय, ट्रांजीशन (पारेषण) कंजेशन और ग्रिड संचालन मुख्य बाधा बन गए हैं।
सारांश
- भारत ने 50% गैर-जीवाश्म स्थापित ऊर्जा क्षमता का आँकड़ा पार कर लिया है, लेकिन ट्रांजीशन (पारेषण) कंजेशन, कम उपयोग की गई ग्रिड अवसंरचना और परिचालन संबंधी रूढ़िवादिता के कारण हज़ारों मेगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा रुकी हुई है।
- योजना और संचालन के बीच बेहतर समन्वय, समतापूर्ण नीतियाँ, उन्नत ग्रिड प्रबंधन और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विस्तार, भारत के नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार को बनाए रखने एवं वर्ष 2070 के शुद्ध शून्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये आवश्यक हैं।
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा निर्माण से संबंधित क्या चिंताएँ हैं?
- ग्रिड कंजेशन: उत्पादन क्षमता, पारेषण (निकासी) क्षमता की तुलना में अधिक तीव्र गति से बढ़ रही है। उदाहरण के लिये राजस्थान में 23 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता स्थापित है, लेकिन वह केवल 18.9 गीगावाट की निकासी कर सकती हैं; परिणामस्वरूप, 4,000 मेगावाट से अधिक फुल ऑपरेटिंग कैपेसिटी पीक ऑवर के दौरान ऊर्जा का निष्कासन नहीं कर पा रही है।
- T-GNA शटडाउन: यदि ग्रिड कंजेशन को समान रूप से प्रबंधित किया जाता है, तो सभी परियोजनाओं को वित्तीय रूप से प्रबंधनीय ~15% पीक-ऑवर के नुकसान का सामना करना पड़ता।
- इसकी बजाय ग्रिड पूरी तरह से टेंपरेरी जनरल नेटवर्क एक्सेस (T-GNA) वाली परियोजनाओं पर 100% शटडाउन लागू करता है।
- GNA भारत के केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग के तहत एक तंत्र है, जो विद्युत उत्पादकों और उपभोक्ताओं को अंतर-राज्य पारेषण प्रणाली (ISTS) तक अल्पकालिक, गैर-विवेकाधीन आधार पर पहुँचने की अनुमति देता है।
- नेशनल ओपन एक्सेस रजिस्ट्री के माध्यम से प्रबंधित, T-GNA लचीला, अस्थायी और उन्नत या तात्कालिक ऊर्जाक्रम को सक्षम बनाता है।
- स्थायी GNA वाली परियोजनाएँ निर्बाध रूप से संचालित होती हैं, जिससे उन नए डेवलपर्स को भारी नुकसान होता है, जिन्होंने अपनी सारी समय-सीमाओं को पूरा किया।
- मौज़ूदा परिसंपत्तियों का गंभीर रूप से कम उपयोग: ~6,000 मेगावाट क्षमता वहन करने के लिये डिज़ाइन किये गए उच्च-क्षमता वाले 765 किलोवाट डबल-सर्किट कॉरिडोर नियमित रूप से केवल 600–1,000 मेगावाट (20% से कम उपयोग) पर संचालित होते हैं।
- इसके परिणामस्वरूप, विभिन्न नवीन संचालित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ ग्रिड से जुड़ी रहती हैं, लेकिन अपनी ऊर्जा को अंतःक्षेपित करने में असमर्थ होती हैं।
- संरचनात्मक भिन्नता: केंद्रीय पारेषण उपयोगिता (CTU) कॉरिडोर की योजना का निर्माण करती है और डेवलपर्स को पूर्ण अनुमानित क्षमता (जैसे- 6,000 मेगावाट) के आधार पर GNA आवंटित करती है।
- ग्रिड इंडिया (ऑपरेटर), इसके पश्चात उस ऊर्जा के केवल एक भाग (जैसे- 1,000 मेगावाट) को प्रवाहित करने की अनुमति देता है।
- यह तीव्र अंतर एक विश्वसनीयता की समस्या उत्पन्न करता है। डेवलपर्स CTU कनेक्टिविटी स्वीकृतियों के आधार पर अरबों रुपये का निवेश करते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि भौतिक अवसंरचना उपयोग योग्य क्षमता में परिवर्तित नहीं होती।
- संचालनात्मक सतर्कता: ग्रिड संचालक ‘वोल्टेज दोलन और ग्रिड अस्थिरता’ का हवाला देते हुए बिजली के प्रवाह को काफी हद तक सीमित कर देते हैं, जिससे अत्यधिक सतर्कता ही सामान्य नीति बन जाती है।
- STATCOMs, स्टैटिक VAR जेनरेटर, हार्मोनिक फिल्टर और विशेष सुरक्षा योजनाओं जैसी सिद्ध शमन तकनीकें पहले से ही कई नए संयंत्रों में लगी हुई हैं, लेकिन ग्रिड ऑपरेटर उन्हें ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिये उपयोग करने की अनुमति नहीं देते हैं।
- उन्नत वैश्विक ऑपरेटरों के विपरीत, भारतीय संस्थान डायनेमिक सिक्योरिटी आकलन, रियल-टाइम कंटिन्जेंसी प्रबंधन, प्रायिकतामूलक जोखिम मूल्यांकन और अनुकूली लाइन रेटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने में विफल रहते हैं।
- संस्थागत जवाबदेही की कमी: जब ग्रिड अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाता, तब सरकारी संस्थानों को न तो प्रदर्शन समीक्षा का सामना करना पड़ता है और न ही किसी प्रकार के दंड का।
- इस बीच नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स को अवरुद्ध हुई परिसंपत्तियों के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, और उपभोक्ता अपनी बिजली दरों के माध्यम से कम उपयोग की गई अवसंरचना की लागत चुकाते हैं।
- भंडारण की कमी: जब सूर्य नहीं चमक रहा होता, तब ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिये भारत को वर्ष 2032 तक अनुमानित 411 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज (PHS) की तैनाती अभी भी बेहद अपर्याप्त है।
- आपूर्ति शृंखला की कमज़ोरियाँ: भारत सौर सेल और बैटरियों के निर्माण हेतु आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिजों (लिथियम, कोबाल्ट, दुर्लभ मृदा तत्त्व) और कच्चे माल के लिये अभी भी आयात पर काफी निर्भर है, जिससे यह क्षेत्र वैश्विक आपूर्ति जोखिमों के प्रति संवेदनशील बन जाता है।
भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र
- वर्तमान स्थिति: भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50% से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त किया है, जिससे उसने COP-26 के तहत अपने NDC लक्ष्य को 2030 की समय-सीमा से पाँच वर्ष पहले ही पूरा कर लिया है।
- नवंबर 2025 तक, भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता 262.74 गीगावाट तक पहुँच गई, जो देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 51.5% है।
- सौर ऊर्जा का प्रभुत्व: इस वृद्धि का मुख्य प्रेरक सौर ऊर्जा है। नवंबर 2025 तक सौर क्षमता 132.85 गीगावाट तक पहुँच गई है, जो वर्ष-दर-वर्ष 41% की वृद्धि दर्शाती है।
- पवन ऊर्जा में वृद्धि: पवन ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और नवंबर 2025 तक यह 53.99 गीगावाट तक पहुँच गई है।
- वैश्विक स्थिति: IRENA RE सांख्यिकी 2025 के अनुसार, सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर, पवन ऊर्जा में चौथे स्थान पर और कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भी चौथे स्थान पर है।
महत्त्वपूर्ण पहल
- PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना: फरवरी 2024 में शुरू की गई इस योजना के तहत वर्ष 2025 में लगभग 14.43 लाख रूफटॉप सोलर (RTS) सिस्टम स्थापित किये गए, जिससे 18.14 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM): इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
- NGHM इलेक्ट्रोलाइज़र के घरेलू निर्माण तथा हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिये वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है।
- मॉडल और निर्माताओं की अनुमोदित सूची (ALMM): वर्ष 2019 में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किया गया एक विनियामक ढाँचा है, जो सरकार समर्थित परियोजनाओं में अनुमोदित सौर पीवी मॉड्यूल (सूची-I) और सेल (सूची-II) के उपयोग को अनिवार्य बनाता है।
- यह कड़े निरीक्षण और प्रमाणन के माध्यम से गुणवत्ता, प्रदर्शन एवं वारंटी मानकों को सुनिश्चित करते हुए 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देता है।
- उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना ने विनिर्माण क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा दिया है।
- PM JANMAN & DA JGUA: प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA) उन जनजातीय और PVTG ( विशेषरूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) बस्तियों में 'सोलर होम लाइटिंग सिस्टम' तथा 'सोलर मिनी-ग्रिड' जैसी ऑफ-ग्रिड सौर प्रणाली प्रदान करते हैं, जहाँ ग्रिड के माध्यम से बिजली पहुँचाना संभव नहीं है।
- राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति (2025): सितंबर 2025 में अधिसूचित इस नीति का उद्देश्य अप्रयुक्त भू-तापीय क्षमता का उपयोग करके स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज़ करना और भारत की नेट ज़ीरो 2070 प्रतिबद्धता का समर्थन करना है।
- ऑफशोर विंड के लिये व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF): इस क्षेत्र की शुरुआत करने हेतु प्रारंभिक 1,000 मेगावाट की अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं (मुख्य रूप से गुजरात और तमिलनाडु के तटों पर) के लिये प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग को मज़बूत किया गया है तथा वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड जैसी पहलों को बढ़ावा दिया गया है।
भारत की नवीकरणीय ग्रिड समस्याओं का समाधान करने हेतु कौन-से उपाय किये जा सकते हैं?
- ग्रिड ऑपरेटर के जनादेश का पुनर्निर्धारण: 'ग्रिड इंडिया' को केवल ग्रिड स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय, सुरक्षित सीमाओं के भीतर परिसंपत्ति उपयोग को अधिकतम करने के लिये स्पष्ट रूप से अधिकृत किया जाना चाहिये और इसका कड़ाई से मूल्यांकन भी किया जाना चाहिये।
- प्रदर्शन मापदंडों को विश्वसनीयता और दक्षता, दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिये।
- समान कटौती लागू करना: पीक कंजेशन (अत्यधिक भीड़भाड़) के दौरान बिजली की कटौती (शटडाउन) को सभी जेनरेटरों (बिजली उत्पादकों) के बीच आनुपातिक रूप से वितरित किया जाना चाहिये।
- वर्तमान प्रणाली, जिसमें T-GNA वाले प्रोजेक्ट्स पर पूरा 100% भार डाला जाता है, असमान व्यावसायिक परिणामों से बचने के लिये समाप्त की जानी चाहिये।
- क्षमता का गतिशील पुनर्वितरण: ग्रिड की अप्रयुक्त या कम उपयोग की गई क्षमता (GNA) का कोई भी हिस्सा व्यर्थ न हो, यह सुनिश्चित करने के लिये विद्युत निकासी की सुरक्षित उपलब्ध क्षमता को पारदर्शी और रीयल-टाइम प्रोटोकॉल का उपयोग करते हुए गतिशील पुनर्वितरित किया जाना चाहिये।
- स्वचालित जवाबदेही समीक्षा तंत्र स्थापित करना: यदि प्रमुख ट्रांसमिशन संपत्तियाँ अपनी नियोजित क्षमता प्रदान करने में लगातार विफल रहती हैं, तो औपचारिक समीक्षा तंत्र स्वतः ही सक्रिय हो जाना चाहिये।
- समीक्षाओं द्वारा यह निश्चित किया जाना चाहिये कि बाधा का कारण तकनीकी, परिचालन संबंधी या देरी है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिये, इन निष्कर्षों को सार्वजनिक करना आवश्यक है।
- उन्नत ग्रिड प्रबंधन ढाँचे को अपनाना: ग्रिड ऑपरेटरों के लिये उन्नत ग्रिड प्रबंधन ढाँचे अपनाना आवश्यक है, जिसके तहत उन्हें रीयल-टाइम आकस्मिकता प्रबंधन, गतिशील सुरक्षा आकलन, अडैप्टिव लाइन रेटिंग्स और संभाव्य जोखिम मूल्यांकन जैसी प्रणालियों को लागू करना होगा।
- योजना और संचालन में संतुलन: भारत की केंद्रीय पारेषण उपयोगिता और ग्रिड इंडिया के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। यह संतुलन सुनिश्चित करेगा कि विशिष्ट क्षमताओं के लिये नियोजित पारेषण (ट्रांसमिशन) गलियारे डेवलपर्स के लिये वास्तविक, उपयोग योग्य विद्युत निकासी में सफलतापूर्वक परिवर्तित हो सकें।
भारत क्लाइमेट फोरम (BCF)
- भारत क्लाइमेट फोरम (BCF) एक नीति और हितधारक मंच है, जो भारत की जलवायु कार्रवाई और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लिये रणनीतियों पर चर्चा करने हेतु सरकारी नेतृत्वकर्त्ताओं, उद्योग, वित्तीय संस्थानों एवं अनुसंधान संगठनों को एक साथ लाता है।
- यह फोरम भारत की जलवायु संबंधी महत्त्वाकांक्षाओं (वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो हासिल करना और वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना) और उसकी आर्थिक प्राथमिकताओं (आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत) का समर्थन करता है।
- भारत क्लीनटेक मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म: भारत क्लाइमेट फोरम 2025 में लॉन्च किया गया यह मंच, भारत के भीतर क्लीनटेक के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, वित्तीय संस्थाओं और अनुसंधान संगठनों को एक साथ लाने का प्रयास करता है।
- इसका लक्ष्य आयातित जलवायु प्रौद्योगिकियों पर भारत की निर्भरता को कम करना, आपूर्ति शृंखला सुरक्षा सुनिश्चित करना और देश को वैश्विक स्वच्छ प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में स्थापित करना है। अनुमान है कि यह केंद्र वर्ष 2030 तक 120 से 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर का वार्षिक बाज़ार आकार प्राप्त कर लेगा, जिससे महत्त्वपूर्ण निर्यात और रोज़गार सृजन की अपार संभावनाएँ हैं।
निष्कर्ष:
भारत के 'नेट ज़ीरो 2070' लक्ष्यों की पूर्ति हेतु नीति-निर्माताओं को तत्काल दो प्रमुख कदम उठाने होंगे। पहला- अरबों की फँसी हुई संपत्तियों को बचाने के लिये, ट्रांसमिशन योजना को गतिशील ग्रिड संचालन के साथ तेज़ी से संरेखित करना होगा। दूसरा- ऊर्जा भंडारण को बढ़ाना अनिवार्य है। अंततः कुशल विद्युत् निकासी सुनिश्चित करने की दिशा में ध्यान केंद्रित करना, उत्पादन क्षमता के विस्तार से अधिक महत्त्वपूर्ण होगा।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न प्रश्न. भारत ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का तेज़ी से विस्तार किया है, लेकिन उसे ग्रिड बुनियादी ढाँचे में संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इनके कारणों का परीक्षण कीजिये और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाइये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची (ALMM) क्या है?
अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची के तहत सरकारी सहायता प्राप्त परियोजनाओं में अनुमोदित सौर पीवी मॉड्यूल एवं सेल का उपयोग अनिवार्य है, ताकि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है, साथ ही घरेलू इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण को भी समर्थन देना है।
3. पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना क्या है?
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना घरों में विद्युत लागत कम करने और वितरित सौर ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने के लिये छतों पर सौर पैनल लगाने को बढ़ावा देती है।
4. भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के लिये ग्रिड कंजेशन (Grid Congestion) चिंता का विषय क्यों है?
ट्रांसमिशन (पारेषण) की सीमाएँ उत्पादित सभी नवीकरणीय बिजली की निकासी को रोकती हैं, जिससे हज़ारों मेगावाट की स्थापित क्षमता परिचालन में होने के बावजूद बेकार पड़ी रहती है ।
5. नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिये ऊर्जा भंडारण क्यों महत्त्वपूर्ण है?
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और पंपयुक्त जल भंडारण जैसी प्रौद्योगिकियाँ नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर प्रणालियों में आपूर्ति में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने एवं ग्रिड स्थिरता बनाए रखने में मदद करती हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स:
प्रश्न. भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (IREDA) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2015)
- यह एक पब्लिक लिमिटेड सरकारी कंपनी है।
- यह एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
मेन्स:
प्रश्न. “सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने के लिये सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच अनिवार्य है।" इस संबंध में भारत में हुई प्रगति पर टिप्पणी कीजिये। (2018)
प्रश्न. परंपरागत ऊर्जा की कठिनाइयों को कम करने के लिये भारत की ‘हरित ऊर्जा पट्टी’ पर लेख लिखिये। (2013)

