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भारतीय अर्थव्यवस्था

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना

  • 23 Aug 2023
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के लिये PLI योजना, आत्मनिर्भरता, स्वचालित घटक, WTO नियम

मेन्स के लिये:

PLI योजना- महत्त्व और मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण योजना, प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) की प्रभावशीलता को लेकर विवाद खड़ा हो गया, इस संबंध में कहा गया है कि यह विनिर्माण और आर्थिक विकास में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के बजाय इम्पोर्ट बेस्ड असेंबली जॉब्स (इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तैयार करने में आयात पर निर्भरता वाले रोज़गार) उत्पन्न करती है।

उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI): 

  • परिचय:
    • PLI योजना की कल्पना घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ उच्च आयात प्रतिस्थापन और रोज़गार सृजन के लिये की गई थी।
    • मार्च 2020 में शुरू की गई इस योजना ने आरंभ में तीन उद्योगों को लक्षित किया:
      • मोबाइल और संबद्ध घटक विनिर्माण
      • विद्युत घटक विनिर्माण 
      • चिकित्सा उपकरण
    • बाद में इसे 14 क्षेत्रों तक बढ़ा दिया गया।
    • PLI योजना में घरेलू और विदेशी कंपनियों को भारत में विनिर्माण के लिये पाँच वर्षों तक उनके राजस्व के प्रतिशत के आधार पर वित्तीय लाभ प्राप्त होता है।
  • लक्षित क्षेत्र:
    • ये 14 क्षेत्र हैं;  मोबाइल विनिर्माण, चिकित्सा उपकरणों का विनिर्माण, ऑटोमोबाइल और इसके घटक, फार्मास्यूटिकल्स, दवाएँ, विशेष इस्पात, दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, घरेलू उपकरण (ACs व  LEDs), खाद्य उत्पाद, कपड़ा उत्पाद, सौर पीवी मॉड्यूल, उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी तथा ड्रोन एवं इसके घटक
  • योजना के तहत प्रोत्साहन:
    • दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि की गणना वृद्धिशील बिक्री के आधार पर की जाती है।
      • उन्नत रसायन विज्ञान सेल बैटरी, कपड़ा उत्पाद और ड्रोन उद्योग जैसे कुछ क्षेत्रों में दिये  जाने वाले प्रोत्साहन की गणना पाँच वर्षों की अवधि में की गई बिक्री, प्रदर्शन एवं स्थानीय मूल्यवर्द्धन के आधार पर की जाएगी।
    • अनुसंधान एवं विकास निवेश (R&D investment) पर ज़ोर देने से उद्योग को वैश्विक रुझानों के साथ बने रहने और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्द्धी बने रहने में भी मदद मिलेगी।
  • स्मार्टफोन निर्माण में प्रगति:
    • वित्त वर्ष 2017-18 में मोबाइल फोन का आयात 3.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जबकि निर्यात मात्र 334 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसके परिणामस्वरूप 3.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।
    • वित्त वर्ष 2022-23 तक आयात घटकर 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का, जबकि निर्यात बढ़कर लगभग 11 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिससे 9.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सकारात्मक निवल निर्यात हो पाया।

PLI योजना से संबंधित मुद्दे:

  • असेंबली बनाम मूल्यवर्द्धन:
    • मोबाइल और संबद्ध घटक/पुर्जों की विनिर्माण योजना में सब्सिडी का भुगतान केवल भारत में फोन के विनिर्माण के लिये किया जाता है; यह इस पर निर्भर नहीं करता कि भारत में विनिर्माण से कितना वर्द्धित मूल्य उत्पन्न होता है, ऐसे में सब्सिडी का मूल्य काफी कम हो जाता है।
    • इसलिये भारत अभी भी मोबाइल फोन के अधिकांश पुर्जों का आयात करता है।
      • मोबाइल फोन के पुर्जों का आयात, जिसमें डिस्प्ले स्क्रीन, कैमरा, बैटरी, मुद्रित सर्किट बोर्ड शामिल हैं, में वित्त वर्ष 2021 और 2023 के बीच वृद्धि हुई है।
      • व्यावहारिक रूप से देखें तो ये वही दो वर्ष हैं जब मोबाइल फोन निर्यात में सबसे ज़्यादा उछाल देखा गया।

  • WTO के नियम और सीमित मूल्यवर्द्धन:
    • WTO के नियम भारत को PLI सब्सिडी को घरेलू मूल्यवर्द्धन से जोड़ने से रोकते हैं।
    • हालाँकि भारत इलेक्ट्रॉनिक चिप्स विनिर्माण की आकांक्षा रखता है, किंतु धरातल पर देखें तो चिप्स जटिल घटक/कंपोनेंट हैं।
    • ये प्रतिबंध संभवतः घरेलू मूल्यवर्द्धन में उल्लेखनीय कमी का कारण हैं।
  • प्रोत्साहन राशि का अस्पष्ट वितरण:
    • योजना की देख-रेख और विभिन्न क्षेत्रों के लिये धन वितरण को प्रबंधित करने के लिये एक अधिकार प्राप्त समिति के गठन के बावजूद प्रोत्साहन देने की प्रक्रिया में स्पष्टता का अभाव है।
    • एक अच्छी तरह से परिभाषित ऐसा कोई मानदंड या मानकीकृत पैरामीटर नहीं हैं जिसका उपयोग मंत्रालय तथा विभाग इन प्रोत्साहनों के आवंटन को निर्धारित करने के लिये कर सकें, जिस कारण योजना की निष्पक्षता व प्रभावशीलता संबंधी चिंताएँ बढ़ जाती हैं।
  • केंद्रीकृत डेटाबेस की कमी:
    • केंद्रीकृत डेटाबेस (जो उत्पादन अथवा निर्यात में वृद्धि, सृजित नई नौकरियों की संख्या आदि जैसे आँकड़े दर्ज करता है) की कमी के कारण प्रशासनिक समीक्षा करना मुश्किल होता है।
    • सूचना की अस्पष्टता (Information Ambiguity) पारदर्शिता को प्रभावित करती है तथा अपराध की भावना उत्पन्न कर सकती है, साथ ही दोषों में और अधिक वृद्धि कर नीति संरचना को कमज़ोर कर सकती है।

आगे की राह

  • सरकार को रोज़गार सृजन, प्रति नौकरी लागत तथा सीमित सफलता के कारणों पर विचार करते हुए PLI की प्रभावशीलता का आकलन करना चाहिये।
  • इस योजना को नए क्षेत्रों तक विस्तारित करने के लिये इसकी सीमाओं को समझने तथा अंतर्निहित मुद्दों को संबोधित करने की आवश्यकता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न   

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2023)

कथन-I वस्तुओं के वैश्विक निर्यात में भारत का निर्यात 3.2% है। 

कथन-II भारत में कार्यरत अनेक स्थानीय कंपनियों एवं भारत में कार्यरत कुछ विदेशी कंपनियों ने भारत की ‘उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव)’ योजना का लाभ उठाया है। 

   उपर्युक्त कथनों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है? 

(a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है। 

(b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है। 

(c) कथन-I सही है किंतु कथन-II गलत है। 

(d) कथन-I गलत है किंतु कथन-II सही है। 

उत्तर: (d)

व्याख्या:

  • हाल ही में विश्व व्यापार संगठन की वैश्विक व्यापार आउटलुक एवं स्टैटिक्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत वस्तुओं के वैश्विक निर्यात में 1.8 % हिस्सेदारी रखता है। अतः कथन 1 गलत है।
  • वर्ष 2024 के लिये अनुमानित 3.2% के लक्ष्य तक पहुँचने से पूर्व वर्ष 2023 में विश्व वाणिज्यिक वस्तु व्यापार की मात्रा में 1.7% वृद्धि का अनुमान है।
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (प्रोडक्शन लिंक्ड इनिशिएटिव) योजना कंपनियों को भारत में निर्मित उत्पादों के वृद्धिशील विक्रय पर प्रोत्साहन प्रदान करती है। इसका उद्देश्य विदेशी कंपनियों को भारत में इकाइयाँ स्थापित करने के लिये आकर्षित करना है, जबकि स्थानीय कंपनियों को अपनी विनिर्माण इकाइयों का विस्तार करने एवं अधिक रोजगार सृजन तथा आयात पर देश की निर्भरता को कम करने के लिये प्रोत्साहित करना है। अतः कथन 2 सही है।

स्रोत: द हिंदू

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