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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

ड्रोन तकनीक पर नियंत्रण

  • 15 Feb 2022
  • 11 min read

चर्चा में क्यों?

किसी आतंकवादी घटना में ड्रोन का संभावित उपयोग या किसी महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे या सॉफ्ट टारगेट के खिलाफ ड्रोन से हमला दुनिया भर में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिये एक बढ़ती चिंता है क्योंकि ड्रोन तकनीक की उपलब्धता विश्व स्तर पर अधिक व्यापक हो चली है।

  • यमन के हाउती (Houthi) विद्रोहियों द्वारा दावा किये गए एक ड्रोन हमले में अबू धाबी में दो भारतीयों सहित तीन लोगों के मारे जाने के कुछ दिनों बाद संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने एक महीने के लिये खाड़ी देश में निजी ड्रोन और हल्के खेल विमानों के सभी उड़ान संचालन को रोकने का आदेश दिया है।

ड्रोन प्रौद्योगिकी और भारत

  •  ड्रोन क्या हैं?
    • आमतौर पर ड्रोन एक मानवरहित विमान (UA) के लिये प्रयुक्त होता है।
    • ड्रोन मूल रूप से सैन्य और एयरोस्पेस उद्योगों के लिये विकसित किया गया था, किंतु सुरक्षा और दक्षता के उन्नत स्तरों के कारण इसने मुख्यधारा में भी अपनी जगह बना ली।
    • एक ड्रोन दूर से संचालित (मानव इसके परिचालन को नियंत्रित करता है।) होने के साथ-साथ उन्नत स्तर पर पूरी तरह से स्वचालित भी हो सकता है, जिसका अर्थ है कि यह अपने परिचालन एवं गणना करने के लिये सेंसर तथा LiDAR डिटेक्टरों की प्रणाली पर निर्भर करता है।

ड्रोन तकनीक कितनी महत्त्वपूर्ण है?

  • वर्तमान समय में ड्रोन राष्ट्रों को अधिक किफायती और व्यावसायिक व्यवहार्यता प्रदान कर रहे हैं और कम लागत पर इन ड्रोनों की आसान उपलब्धता उद्योग के लिये बहुत उपयोगी साबित हो रही है।
  • ड्रोन तकनीक का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाता है:
  • रक्षा: ड्रोन सिस्टम को आतंकवादी हमलों के खिलाफ एक सिमेट्रिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही ड्रोन को राष्ट्रीय हवाई प्रणाली में एकीकृत किया जा सकता है।
  • हेल्थकेयर डिलीवरी: हाल ही में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने तेलंगाना सरकार के साथ दूर-दराज़ के क्षेत्रों में टीके पहुँचाने के लिये ड्रोन तकनीक का उपयोग करने के लिये एक परियोजना को मंज़ूरी दी है।
  • कृषि: कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म पोषक तत्त्वों और कीटनाशकों का छिड़काव ड्रोन की मदद से किया जा सकता है।
  • निगरानी: भारत सरकार द्वारा शुरू की गई SVAMITVA योजना में ड्रोन तकनीक का उपयोग संपत्ति और ट्रांसमिशन लाइनों की वास्तविक समय की निगरानी, चोरी की रोकथाम, दृश्य निरीक्षण/रखरखाव, निर्माण योजना और प्रबंधन आदि के लिये किया गया था।
  • खनन: ड्रोन का उपयोग औद्योगिक प्रतिष्ठानों की कठिन परिस्थितियों में निगरानी हेतु किया जाता है, जहाँ ज़हरीली गैसें, उच्च तापमान या उच्च दबाव की स्थिति हो सकती है एवं जहाँ मनुष्यों तक पहुँचना असुविधाजनक होता है।

काउंटर ड्रोन तकनीक क्या है?

  • काउंटर ड्रोन तकनीक उन प्रणालियों को संदर्भित करती है जिनका उपयोग उड़ान के दौरान मानव रहित विमान प्रणालियों का पता लगाने या अवरोधन के लिये किया जाता है। 
  • यह प्रौद्योगिकी तेज़ी से उभर रही है और विकसित हो रही है क्योंकि ड्रोन को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है।
  • इस तकनीक में वृद्धि को नागरिक और सैन्य क्षेत्र में ड्रोन से उत्पन्न खतरे से जोड़ कर देखा जा सकता है।
  • कई देश इन तकनीकों को विकसित करने हेतु निवेश कर रहे हैं जैसे, US DOD (संयुक्त राज्य रक्षा विभाग) ने रिसर्च एवं डेवलपमेंट के लिये लगभग 404 मिलियन डॉलर और ग्राउंड-आधारित ड्रोन एवं काउंटर ड्रोन सिस्टम की खरीद के लिये 83 मिलियन डॉलर राशि निर्धारित की है।
  • साथ ही US हवाई प्रणाली के लिये एक काउंटर ड्रोन प्रणाली विकसित करने के लिये लगभग 85 मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है।
  • जहाँ तक भारत का संबंध है, इसने उद्योग द्वारा सॉफ्ट किल काउंटर-ड्रोन सिस्टम और डीआरडीओ द्वारा सॉफ्ट एंड हार्ड किल सिस्टम विकसित किया है।
  • ड्रोन हमलों के खिलाफ सॉफ्ट किल उपायों में ड्रोन के संचार को बाधित करने के लिये जैमर (Jammer) का उपयोग करना या जीपीएस सिग्नल को बाधित करना शामिल है।
  • काइनेटिक या हार्ड-किल उपायों में ड्रोन तंत्र को बाधित करने के लिये गोलियों या बंदूकों का उपयोग भी शामिल है।

ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े सुरक्षा जोखिम क्या हैं?

  • पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादियों द्वारा योजनाबद्ध हमलों के प्रयास के लिये ड्रोन के इस्तेमाल के कई मामले सामने आए हैं।
  • भारत ने हाल के वर्षों में अपनी पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान द्वारा ड्रोन से हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स गिराने जैसी गतिविधियाँ भी देखी है।
  • जून 2021 में जम्मू में वायु सेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र के अंदर विस्फोटों को ट्रिगर करने वाले उपकरणों को गिराने के लिये पहली बार ड्रोन का उपयोग किया गया था।
  • ड्रोन की सस्ती कीमत एक बड़ी आबादी को ड्रोन खरीदने में सक्षम बनाती है। पारंपरिक हथियारों की तुलना में ड्रोन अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं लेकिन इनका प्रभाव अधिक विनाशकारी होता हैं। यह ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ने का प्राथमिक कारण है।
  • जो बात लड़ाकू ड्रोन को सबसे खतरनाक बनाती है वह है सामूहिक विनाश के हथियारों को पहुँचाने के लिये उनके इस्तेमाल का खतरा।  गैर-राज्य तत्त्वों द्वारा लड़ाकू ड्रोन की खरीद गंभीर खतरे पैदा करती है।

आगे की राह

  • सीमा पार से हमलों का मुकाबला: ड्रोन के माध्यम से सीमा पार से हमले भारत के लिये एक बड़ा खतरा है।  ऐसे ड्रोन हमलों का मुकाबला तकनीक की मदद से ही किया जा सकता है।
    • ड्रोन और एंटी-ड्रोन दोनों ही ऐसी विकसित प्रौद्योगिकियाँ हैं जिनमें भारत को तेज़ी से आगे बढ़ना है। यह वह क्षेत्र है जहाँ सरकार को ड्रोन रोधी तकनीक पर हितधारकों का ध्यान केंद्रित करने के लिये एक बजट लाने की आवश्यकता होगी।
    • साथ ही भारत के दो करीबी सहयोगी अमेरिका और इज़रायल ड्रोन के दो प्रमुख उत्पादक हैं।
    • सैन्य ड्रोन प्राप्त करने और ड्रोन के निर्माण करने में उनकी सहायता प्राप्त करने के लिये द्विपक्षीय संबंधों का लाभ उठाया जा सकता है।
    • सरकार के प्रोत्साहन से ड्रोन प्रौद्योगिकी के विकास में तेज़ी आएगी।
  • तात्कालिक तौर पर फोकस के क्षेत्र: पूरे भारत में ड्रोन हमले के खिलाफ रक्षा आवश्यक है लेकिन वर्तमान में यह संभव नहीं दिख रहा है।
    • रक्षा क्षेत्र का यह एक नया पहलू है जिसका मुकाबला करने में समय लगेगा, इसलिये सरकार द्वारा तात्कालिक तौर पर क्या किया जा सकता है यह तय करना आवश्यक है। इसके अंतर्गत कुछ महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान करना, उनमें निवेश करना, ड्रोन सुरक्षा के मामले से जुड़े सभी बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना तथा उन क्षेत्रों में जागरूकता पैदा करना शामिल होना चाहिये।
    • ये क्षेत्र हवाई अड्डे, शहरों में वीआईपी क्षेत्र आदि हो सकते हैं।
  • काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी: खतरा ड्रोन की वजह से नहीं बल्कि असामाजिक तत्त्वों की वजह से होता है। निस्संदेह ऐसे हमले जिसमें ड्रोन का उपयोग किया जाता है की संभावना रहती है लेकिन समग्र रूप से ड्रोन का उपयोग बंद करना इसका समाधान नहीं है। इस समस्या का समाधान काउंटर ड्रोन तकनीक के विकास में है।
    • भारत को अपने स्वयं के मानव रहित हवाई वाहन (UAV) सिस्टम और काउंटर-ड्रोन तकनीक में निवेश करने कीआवश्यकता है ताकि खतरों का पता लगाया जा सके और उन पर नज़र रखी जा सके, विशेष रूप से राष्ट्र की महत्त्वपूर्ण संपत्तियों की।
    • DRDO ने एक एंटी-ड्रोन सिस्टम के विकास का कार्य शुरू कर दिया है, ऐसी एक प्रणाली पहले से ही मौजूद है।

निष्कर्ष

ड्रोन तकनीक एक विकसित चरण में है जहाँ बहुत सारे विकास किये जा रहे हैं। जहाँ तक भारत का संबंध है इन वैश्विक विकासों के साथ-साथ उन तरीकों और साधनों को देखने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये, जिनमें सुरक्षा खतरे के पहलू से निपटने के लिये ड्रोन के हानिकारक उपयोग को भी रोका जा सकता है।

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