अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत-फिनलैंड संबंध
- 10 Mar 2026
- 97 min read
प्रिलिम्स के लिये: फिनलैंड, 5G, 6G, क्वांटम कम्युनिकेशंस, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन, बाल्टिक सागर
मेन्स के लिये: भारत-नॉर्डिक देशों के संबंध, भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक और सामरिक सहयोग
चर्चा में क्यों?
फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब ने 11वें रायसीना संवाद में मुख्य अतिथि के रूप में भारत की राजकीय यात्रा की, जिसके दौरान भारत-फिनलैंड संबंधों को 'डिजिटलीकरण और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी' के रूप में उन्नत किया गया और पर्यावरण सहयोग समझौतों का नवीनीकरण किया गया।
सारांश
- रायसीना संवाद के लिये राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा के दौरान भारत और फिनलैंड ने अपने संबंधों को 'डिजिटलीकरण और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी' के रूप में उन्नत किया। इस अवसर पर प्रवासन, हरित ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कि 5G, 6G, AI और क्वांटम संचार पर महत्त्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए।
- दोनों देशों का लक्ष्य व्यापार का विस्तार करना, स्टार्टअप सहयोग को बढ़ावा देना और पर्यावरण सहयोग को मज़बूत करना है, जिसमें 'विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच 2026' की सह-मेज़बानी करना शामिल है। साथ ही वे व्यापार असंतुलन और भू-राजनीतिक मतभेदों जैसी चुनौतियों के समाधान पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
फिनलैंड के राष्ट्रपति के भारत दौरे के मुख्य नतीजे क्या हैं?
- द्विपक्षीय संबंधों का उन्नयन: दोनों देशों के बीच संबंधों को आधिकारिक तौर पर 'डिजिटलीकरण और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी' के रूप में उन्नत किया गया है। यह एक हरित और तकनीकी रूप से उन्नत भविष्य के साझा दृष्टिकोण को स्वीकार करता है।
- भारत और फिनलैंड अपने संबंधित विदेश मंत्रालयों के बीच एक 'समर्पित कांसुलर संवाद' स्थापित करने पर सहमत हुए हैं। इस तंत्र का उद्देश्य कांसुलर मुद्दों, गतिशीलता और नागरिकों के कल्याण पर समन्वय को मज़बूत करना है।
- प्रमुख समझौता ज्ञापन (MoUs) और समझौते हस्ताक्षरित:
- प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी: फिनलैंड भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिये एक प्रमुख गंतव्य बन रहा है। यह समझौता ज्ञापन (MoU) कुशल भारतीय प्रतिभा के फिनलैंड में आवागमन को सुगम बनाने के लिये एक संस्थागत ढाँचा स्थापित करता है।
- पर्यावरण सहयोग (नवीनीकरण): वर्ष 2020 के समझौते को आधार बनाते हुए यह संधारणीयता की पहलों को कवर करता है, जिसमें बायो-एनर्जी, 'वेस्ट-टू-एनर्जी' (अपशिष्ट से ऊर्जा) समाधान, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ (पवन, सौर, लघु जलविद्युत) शामिल हैं।
- सांख्यिकी में सहयोग: आधिकारिक सरकारी सांख्यिकी के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और सहयोग के लिये एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए।
- डिजिटलीकरण, प्रौद्योगिकी और नवाचार
- 6G पर संयुक्त कार्य बल: उन्नत 6G अनुसंधान को गति देने के लिये इसकी स्थापना की गई है, जिसमें फिनलैंड के ओलू विश्वविद्यालय और 'भारत 6G अलायंस' के बीच रणनीतिक साझेदारी की गई है।
- डिजिटलीकरण पर अंतर-क्षेत्रीय संयुक्त कार्यसमूह: भारत और फिनलैंड के बीच उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिये यह समूह बनाया गया है। इसका उद्देश्य उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC), 5G, 6G, क्वांटम संचार/कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करना है।
- संयुक्त अनुसंधान आह्वान: भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और फिनलैंड की नवाचार वित्तपोषण एजेंसी 'बिजनेस फिनलैंड' के बीच एक कार्यान्वयन व्यवस्था स्थापित की गई है।
- भारत-फिनलैंड स्टार्टअप कॉरिडोर: इसका उद्देश्य दोनों देशों के स्टार्टअप ईकोसिस्टम के बीच जुड़ाव को बढ़ावा देना है। इसके तहत फिनलैंड के 'स्लश' कार्यक्रम में भारतीय स्टार्टअप्स की और भारत के 'स्टार्टअप महाकुंभ' में फिनिश स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
- व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग
- द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य: दोनों राष्ट्रों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है, जिसके लिये हाल ही में संपन्न हुए 'भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते' (India-EU FTA) का भरपूर लाभ उठाया जाएगा।
- विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF): भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) तथा फिनलैंड के नवाचार कोष 'सिट्रा' (SITRA) ने घोषणा की है कि वे 2026 में भारत में WCEF की सह-मेज़बानी करेंगे।
भारत-फिनलैंड संबंध कैसे हैं?
- व्यापार और आर्थिक संबंध: भारत और फिनलैंड के बीच वर्ष 2023–24 में भारत का फिनलैंड को निर्यात लगभग 582.65 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि फिनलैंड से आयात लगभग 913.48 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इसके परिणामस्वरूप भारत को लगभग 330.83 मिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।
- फिनलैंड को भारत के प्रमुख निर्यातों में औषधीय और फार्मास्युटिकल उत्पाद, वस्त्र और परिधान, धातु के उत्पाद और इलेक्ट्रिकल मशीनरी एवं उपकरण शामिल हैं।
- भारत मुख्यतः फिनलैंड से विशिष्ट औद्योगिक मशीनरी, विद्युत उपकरण, कागज़ और पेपरबोर्ड उत्पाद, धातुमय अयस्क और धातु का स्क्रैप आयात करता है।
- फिनलैंड के साथ भारत के व्यापार में हेटरोसाइक्लिक यौगिकों (जो फार्मास्यूटिकल्स और विशेष रसायनों में उपयोग होने वाले प्रमुख मध्यवर्ती पदार्थ हैं) का निर्यात तेज़ी से बढ़ा है। यह वर्ष 2022 में 1% से बढ़कर 2025 में 28% हो गया, जिससे यह सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गया है।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): वर्ष 2023 में फिनलैंड का भारत में निवेश करने वाले देशों में 40वाँ स्थान रहा।
- हालाँकि वास्तविक निवेश कहीं अधिक होगा क्योंकि नोकिया (Nokia) जैसी कई फिनिश कंपनियाँ 1990 के दशक से ही भारत में मौजूद हैं और उनके द्वारा किये जाने वाले आगामी विस्तार को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के रूप में नहीं गिना जाता है।
- प्रौद्योगिकी और डिजिटल सहयोग: वर्ष 2019 में दोनों देशों के बीच डिजिटलीकरण पर एक आशय की संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये गए थे।
- दोनों देश 5G और 6G संचार, साइबर सुरक्षा, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और स्टार्टअप ईकोसिस्टम जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग कर रहे हैं।
- फिनलैंड के वास्तुकारों के समर्थन से भारत ने चिनाब नदी पर विश्व के सबसे ऊँचे रेलवे सेतु का निर्माण किया और असम में नुमालीगढ़ में सबसे बड़ी बाँस-से-जैव इथेनॉल रिफाइनरी स्थापित की।
- भारतीय प्रवासी: फिनलैंड में लगभग 20,000 भारतीय रहते हैं, जो फिनलैंड की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विविधता में महत्त्वपूर्ण योगदानकर्त्ता हैं, हालाँकि फिनलैंड की जनसंख्या लगभग 5.6 मिलियन अपेक्षाकृत कम है।
भारत-फिनलैंड संबंधों में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
- व्यापार घाटा: व्यापार संतुलन निरंतर रूप से फिनलैंड के पक्ष में बना हुआ है। भारत के निर्यात मुख्यतः पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित हैं (वस्त्र, परिधान, मशीनरी), हालाँकि यह उच्च-मूल्य प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आयात करता है।
- गहन लॉजिस्टिकल कनेक्टिविटी का अभाव: प्रमुख यूरोपीय आर्थिक केंद्रों (जर्मनी, फ्राँस, यूनाइटेड किंगडम) के विपरीत, भारत एवं हेलसिंकी (फिनलैंड की राजधानी) के मध्य प्रत्यक्ष लॉजिस्टिकल कनेक्टिविटी तुलनात्मक रूप से कमज़ोर है।
- कनेक्टिविटी का यह अभाव मालवाहन लागत एवं परिवहन समय में वृद्धि करता है, जो स्वाभाविक रूप से उच्च-आवृत्ति व्यवसाय-से-व्यवसाय (B2B) लेन-देन एवं सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला एकीकरण को निरुत्साहित करता है।
- रूसी कारक (Russia Factor): रूस के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले फिनलैंड ने दशकों की सैन्य असंलग्नता त्यागकर नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाईज़ेशन (नाटो) में प्रवेश किया है तथा रूस के विरुद्ध कठोर पश्चिमी प्रतिबंधों का समर्थन करता है।
- भारत तथापि रणनीतिक स्वायत्तता नीति का पालन करता है, मॉस्को के साथ आर्थिक, ऊर्जा एवं रक्षा संबंध बनाए रखता है, जिससे रणनीतिक दृष्टिकोण में भिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।
भारत-फिनलैंड संबंधों को सुदृढ़ करने के लिये क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
- यूरोपीय संघ - भारत मुक्त व्यापार समझौता: हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के साथ, भारतीय निर्यात क्षेत्र (जैसे– वस्त्र, औषधि एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ) को 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार के दोगुने करने के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु फिनलैंड बाज़ार का दोहन करना चाहिये।
- कौशल पारिस्थितिक तंत्र: कौशल भारत मिशन के अंतर्गत भारत को अपने व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण मानकों को यूरोपीय मानकों के साथ सक्रिय रूप से संरेखित करना चाहिये ताकि नवीन हस्ताक्षरित प्रवास एवं गतिशीलता समझौता ज्ञापन का पूर्ण उपयोग हो सके।
- हरित संक्रमण का नेतृत्व: वर्ष 2026 में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था फोरम (WCEF) के सह-आयोजन से भारत को चक्रीय अर्थव्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्थायी विकास में वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व स्थापित करने का अद्वितीय मंच प्राप्त हुआ।
- वैश्विक शांतिदूत की भूमिका: वैश्विक आपूर्ति शृंखला को अस्थिर करने वाले संघर्षों की निरंतरता के बीच भारत को फिनलैंड/यूरोपीय संघ जैसे पश्चिमी देशों एवं वैश्विक दक्षिण दोनों के साथ अपने सुदृढ़ संबंधों का लाभ उठाकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिये।
फिनलैंड से संबंधित प्रमुख बिंदु
- भौगोलिक स्थिति: फिनलैंड उत्तरी यूरोप में स्थित है तथा फेनोस्केनेडियन प्रायद्वीप के महत्त्वपूर्ण भाग का निर्माण करता है।
- यह रूस (पूर्व), स्वीडन (पश्चिम) तथा नॉर्वे (उत्तर) के साथ स्थलीय सीमाएँ साझा करता है।
- यह देश पश्चिम में बोथनिया की खाड़ी, दक्षिण में फिनलैंड की खाड़ी तथा दक्षिण-पश्चिम में बाल्टिक सागर से घिरा हुआ है।
- भौतिक भूगोल: फिनलैंड को "हज़ार झीलों का देश" की उपाधि से नवाज़ा गया है, यहाँ 188,000 से अधिक झीलें हैं, जिनमें साइमा झील सबसे बड़ी है।
- उत्तरी क्षेत्र लैपलैंड अधिकांशतः आर्कटिक वृत्त के भीतर अवस्थित है तथा यह स्वदेशी सामी लोगों का निवास स्थान है।
- भूराजनीतिक एवं सामरिक महत्त्व: फिनलैंड ने अप्रैल 2023 में नाटो की सदस्यता ग्रहण की, जिससे रूस–यूक्रेन युद्ध के पश्चात दशकों से चली आ रही उसकी सैन्य असंलग्नता की नीति समाप्त हो गई और इसके परिणामस्वरूप रूस के साथ नाटो की स्थलीय सीमा में उल्लेखनीय विस्तार हुआ।
- यह वर्ष 1995 से यूरोपीय संघ तथा नॉर्डिक परिषद का सदस्य है, जो नॉर्डिक देशों में क्षेत्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करती है।
- आर्कटिक शासन में भूमिका: फिनलैंड आर्कटिक परिषद के आठ स्थायी सदस्यों में से एक है (भारत पर्यवेक्षक), जिससे इसे आर्कटिक शासन, जलवायु अनुसंधान तथा ध्रुवीय सहयोग में महत्त्वपूर्ण भूमिका प्राप्त है।
- यह भारत की आर्कटिक नीति एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये महत्त्वपूर्ण साझेदार है।
- पर्यावरणीय एवं आर्थिक विशेषताएँ: फिनलैंड यूरोप का वानिकी-प्रधान देश है, जिसमें 70% से अधिक वन आवरण टैगा (उष्णकटिबंधीय) वनों से आच्छादित है।
- इसने वर्ष 2035 तक कार्बन तटस्थता का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है तथा वर्ष 2016 में राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था मार्गदर्शिका अपनाने वाला प्रथम देश बना और वर्ष 2017 में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) का आयोजन किया।
- सामाजिक एवं शासन सूचकांक: फिनलैंड विगत आठ वर्षों (2018–25) से वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में विश्व का सबसे सुखी देश रहा है, जो मज़बूत सामाजिक कल्याण व्यवस्था एवं संस्थाओं में उच्च विश्वास को दर्शाता है।
- यह विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक एवं भ्रष्टाचार बोध सूचकांक में शीर्ष देशों में सम्मिलित है, जो सुदृढ़ शासन एवं पारदर्शिता को प्रतिबिंबित करता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. डिजिटल नवाचार और स्थिरता के क्षेत्रों में नॉर्डिक देशों, विशेष रूप से फिनलैंड के साथ भारत की साझेदारी के सामरिक महत्त्व पर चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. डिजिटलीकरण और स्थिरता में भारत-फिनलैंड सामरिक साझेदारी का क्या महत्त्व है?
यह उभरती प्रौद्योगिकियों, हरित ऊर्जा, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और नवाचार पारिस्थितिक तंत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करती है, जिससे दोनों देश प्रौद्योगिकी-संचालित और सतत भविष्य की ओर अग्रसर होते हैं।
2. भारत और फिनलैंड के बीच प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी क्या है?
यह कुशल भारतीय पेशेवरों, विशेषकर श्रम की कमी का सामना कर रहे प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में, के फिनलैंड आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिये एक रूपरेखा प्रदान करती है।
3. विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) क्या है?
WCEF एक वैश्विक मंच है जो चक्रीय अर्थव्यवस्था की अवधारणा और प्रथाओं को बढ़ावा देता है, वर्ष 2026 के संस्करण की सह-मेज़बानी भारत फिनलैंड के इनोवेशन फंड SITRA के साथ मिलकर करेगा।
4. भारत की आर्कटिक नीति के लिये फिनलैंड सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्यों है?
फिनलैंड आर्कटिक परिषद का स्थायी सदस्य है, जो इसे आर्कटिक अनुसंधान, जलवायु अध्ययन और ध्रुवीय शासन सहयोग के लिये एक महत्त्वपूर्ण भागीदार बनाता है।
5. कौन-सी चुनौती भारत-फिनलैंड व्यापार संबंधों को प्रभावित करती है?
व्यापार संतुलन फिनलैंड के पक्ष में है, क्योंकि भारत मुख्य रूप से पारंपरिक वस्तुओं का निर्यात करता है जबकि फिनलैंड से उच्च मूल्य वाली प्रौद्योगिकी और औद्योगिक उपकरणों का आयात करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
मेन्स
प्रश्न. 'नाटो का विस्तार एवं सुदृढीकरण और एक मज़बूत अमेरिका-यूरोप रणनीतिक साझेदारी भारत के लिये अच्छा काम करती है।' इस कथन के बारे मे आपकी क्या राय है? अपने उत्तर के समर्थन में कारण और उदाहरण दीजिये। (2023)
