प्रारंभिक परीक्षा
माइक्रोप्लास्टिक के जोखिम में सुंदरबन
- 21 Apr 2026
- 73 min read
चर्चा में क्यों?
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), कोलकाता के एक अध्ययन में यह सामने आया है कि माइक्रोप्लास्टिक्स सुंदरबन में खाद्य जाल को बाधित कर रहे हैं तथा कार्बन चक्र को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे इस महत्त्वपूर्ण ब्लू-कार्बन पारिस्थितिक तंत्र की स्थिरता को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
सुंदरबन पर अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?
- चिंताजनक प्रदूषण स्तर: अध्ययन में सागर द्वीप के निकट स्थित मूरीगंगा मुहाना में माइक्रोप्लास्टिक्स की उच्च सांद्रता पाई गई।
- मानसून ऋतु के दौरान माइक्रोप्लास्टिक का स्तर लगभग 40% तक बढ़ गया। भारी वर्षा के कारण अंदरूनी शहरी कचरा, ‘रंगहीन कण’ तथा पुराने क्षतिग्रस्त प्लास्टिक नदियों और नालों के माध्यम से सीधे डेल्टा क्षेत्र में पहुँच जाते हैं।
- स्रोत: पहचाने गए प्लास्टिक कणों में लगभग आधे रेशों (संभवतः वस्त्रों से उत्पन्न) के रूप में थे, इसके बाद टुकड़ों (Fragments) का स्थान रहा।
- सबसे सामान्य सामग्री पॉलीप्रोपाइलीन (पैकेजिंग में प्रयुक्त) तथा पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) (पानी की बोतलों में प्रयुक्त) पाई गई।
- ‘प्लास्टिस्फीयर’ का निर्माण: हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग से पता चला कि प्लास्टिक कण मौसमीय प्रभाव के कारण क्षतिग्रस्त होकर दरारें बना रहे हैं और खंडित होकर नैनोप्लास्टिक्स में परिवर्तित हो रहे हैं।
- इन दरारों में बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीवों के जटिल समुदाय विकसित हो जाते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से ‘प्लास्टिस्फीयर’ कहा जाता है।
- कार्बन भंडार: चूँकि ये प्लास्टिक लगभग 90% कार्बन से बने होते हैं, इसलिये ये कृत्रिम कार्बन सिंक के रूप में कार्य कर रहे हैं। इनके अपघटन के दौरान ये जल में विलेय कार्बनिक कार्बन (DOC) का उत्सर्जन करते हैं।
लीच किया हुआ (रिसाव से निकला) DOC (Dissolved Organic Carbon - घुलनशील कार्बनिक कार्बन) एक कृत्रिम खाद्य स्रोत के रूप में कार्य करता है। यह समुद्री बैक्टीरिया को प्राकृतिक स्तर से कहीं अधिक तेजी से बढ़ने और अपनी संख्या बढ़ाने में सक्षम बनाता है, जिससे सूक्ष्मजीवों की गतिशीलता (microbial dynamics) बदल जाती है और कार्बन चक्र की गति तेज हो जाती है।- रिसकर निकला DOC एक कृत्रिम खाद्य स्रोत का कार्य करता है, जिससे समुद्री बैक्टीरिया प्राकृतिक स्तरों से कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ने और अपनी संख्या बढ़ाने में सक्षम बनाता है, इसके परिणामस्वरूप सूक्ष्मजीवों की गतिशीलता में बदलाव आता है और कार्बन चक्र की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है।
- माइक्रोप्लास्टिक्स पर मौजूद सूक्ष्मजीव जैवजनित कार्बन का उत्पादन करके इसमें और योगदान देते हैं, जिससे प्राकृतिक कार्बन चक्र में व्यवधान और अधिक बढ़ जाता है।
- रिसकर निकला DOC एक कृत्रिम खाद्य स्रोत का कार्य करता है, जिससे समुद्री बैक्टीरिया प्राकृतिक स्तरों से कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ने और अपनी संख्या बढ़ाने में सक्षम बनाता है, इसके परिणामस्वरूप सूक्ष्मजीवों की गतिशीलता में बदलाव आता है और कार्बन चक्र की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है।
- ‘ब्लू कार्बन’ दक्षता के लिये खतरा: मैंग्रोव महत्त्वपूर्ण ‘ब्लू कार्बन’ पारिस्थितिक तंत्र हैं, जो सामान्यतः वायुमंडलीय CO₂ को अवशोषित करने और संगृहीत करने में अत्यंत कुशल होते हैं।
- शोधकर्त्ताओं ने चेतावनी दी है कि प्लास्टिक से उत्पन्न कृत्रिम कार्बन का प्रवेश और उससे होने वाली सूक्ष्मजीवों की तीव्र वृद्धि प्राकृतिक कार्बन चक्र को बाधित कर सकती है, जिससे सुंदरबन एक कार्बन सिंक (अर्थात वे “कम ब्लू” बन सकते हैं) के रूप में कम प्रभावी हो सकते हैं।
माइक्रोप्लास्टिक्स और नैनोप्लास्टिक्स
- परिभाषाएँ और पैमाना: दोनों के बीच मुख्य अंतर उनके सूक्ष्म आकार में होता है:
- माइक्रोप्लास्टिक्स: इन्हें 5 मिलीमीटर (5 mm) से छोटे प्लास्टिक कणों, रेशों या दानों के रूप में परिभाषित किया जाता है। इनका आकार तिल के बीज के बराबर या उससे भी छोटा होता है।
- नैनोप्लास्टिक्स: ये माइक्रोप्लास्टिक्स के अत्यंत सूक्ष्म टूटे हुए कण होते हैं, जिन्हें सामान्यतः 1 माइक्रोमीटर (1 μm या 1,000 नैनोमीटर) से छोटे आकार के रूप में परिभाषित किया जाता है।
- वर्गीकरण: इनके उद्गम के आधार पर इन सूक्ष्म प्लास्टिक कणों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
- प्राथमिक माइक्रोप्लास्टिक्स: ये वे सूक्ष्म प्लास्टिक कण हैं जिन्हें जानबूझकर व्यावसायिक उपयोग के लिये छोटे आकार में निर्मित किया जाता है।
- इसके उदाहरणों में चेहरे के स्क्रब और टूथपेस्ट में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोबीड्स (सूक्ष्म प्लास्टिक कण) तथा सिंथेटिक कपड़ों (जैसे– पॉलिएस्टर और नायलॉन) से धुलाई के दौरान निकलने वाले माइक्रोफाइबर शामिल हैं।
- द्वितीयक माइक्रोप्लास्टिक्स: ये बड़े प्लास्टिक उत्पादों (जैसे– पानी की बोतलें, मछली पकड़ने के जाल और प्लास्टिक बैग) के पर्यावरणीय प्रभावों (जैसे– धूप, हवा, पानी तथा रासायनिक अपक्षय) के कारण टूटकर छोटे कणों में बदलने से बनते हैं।
- सूर्य से आने वाली पराबैंगनी (UV) किरणों, समुद्री लहरों और तापमान में उतार-चढ़ाव के संपर्क में आने से प्लास्टिक भंगुर (कमज़ोर) हो जाता है और टूटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर जाता है।
- प्राथमिक माइक्रोप्लास्टिक्स: ये वे सूक्ष्म प्लास्टिक कण हैं जिन्हें जानबूझकर व्यावसायिक उपयोग के लिये छोटे आकार में निर्मित किया जाता है।
- पर्यावरणीय प्रभाव
- जैव-संचयन और जैव-आवर्द्धन: माइक्रोप्लास्टिक्स को समुद्री जीव अक्सर भोजन समझकर खा लेते हैं, जिनमें छोटे ज़ूप्लैंकटन से लेकर बड़े व्हेल तक शामिल हैं।
- एक बार निगल लेने के बाद ये माइक्रोप्लास्टिक्स पाचन तंत्र में रुकावट पैदा कर सकते हैं या भोजन करने के व्यवहार को बदल सकते हैं, ये प्लास्टिक शरीर में जमा होते जाते हैं और खाद्य शृंखला में ऊपर की ओर बढ़ते हुए उनकी सांद्रता और भी अधिक सघन होती जाती है।
- “ट्रोजन हॉर्स” प्रभाव: प्लास्टिक रासायनिक स्पंज की तरह काम करते हैं। वे आसपास के पानी से ज़हरीले प्रदूषकों को अवशोषित कर उन्हें केंद्रित कर लेते हैं, जैसे– भारी धातुएँ और स्थायी कार्बनिक प्रदूषक (POPs)।
- जब कोई जानवर प्लास्टिक खाता है, तो वह इन विषाक्त पदार्थों की एक सांद्रित खुराक को भी निगल लेता है।
- जैव-संचयन और जैव-आवर्द्धन: माइक्रोप्लास्टिक्स को समुद्री जीव अक्सर भोजन समझकर खा लेते हैं, जिनमें छोटे ज़ूप्लैंकटन से लेकर बड़े व्हेल तक शामिल हैं।
सुंदरबन से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?
- भौगोलिक स्थिति: सुंदरबन दुनिया का सबसे बड़ा सतत मैंग्रोव वन है, जो गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के डेल्टा पर बंगाल की खाड़ी में गिरने वाला है।
- यह एक अद्वितीय मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र है, जो भूमि और समुद्र के बीच स्थित है, जिसमें ज्वारीय जल द्वारा लगातार आकारित द्वीपों का एक मोज़ेक शामिल है और यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भारत (पश्चिम बंगाल राज्य के भीतर) और बांग्लादेश में फैला हुआ है।
- पारिस्थितिकीय महत्त्व:
- 'सुंदरी' वृक्ष: वन का नाम सुंदरी वृक्ष (हेरिटिएरा फोम्स) से लिया गया है, जो इस क्षेत्र की एक प्रमुख मैंग्रोव प्रजाति है जो अपनी कठोर लकड़ी और न्यूमेटोफोरस (विशिष्ट श्वसन जड़ें जो कीचड़ से ऊपर की ओर बढ़ती हैं) के लिये जानी जाती है।
- ब्लू कार्बन सिंक: मैंग्रोव वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड को अत्यधिक कुशलता से अवशोषित करते हैं और इसे अपनी बायोमास तथा नीचे की मिट्टी में संगृहीत करते हैं।
- यह सुंदरबन को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष में एक महत्त्वपूर्ण "ब्लू कार्बन" ईकोसिस्टम बनाता है।
- प्राकृतिक ढाल: सघन मैंग्रोव नेटवर्क एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक बायो-शील्ड के रूप में कार्य करता है, जो पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय समुदायों को बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले तूफान, सुनामी और चक्रवातों के विनाशकारी प्रभावों से बचाता है।
- जैव विविधता और वन्यजीव:
- रॉयल बंगाल टाइगर: सुंदरबन दुनिया का एकमात्र मैंग्रोव वन है जहाँ बाघ निवास करते हैं।
- समृद्ध जीव: यह पारिस्थितिक तंत्र वन्यजीवों की एक विशाल शृंखला का समर्थन करता है, जिसमें खारे पानी का मगरमच्छ (एस्टुआरिन क्रोकोडाइल), गंभीर रूप से लुप्तप्राय उत्तरी नदी टेरापिन (बटागुर बास्का) और गंगा डॉल्फिन शामिल हैं।
- संरक्षण और वैश्विक स्थिति: सुंदरबन के भारतीय भाग में कई अतिव्यापी संरक्षण टैग हैं:
- बाघ अभयारण्य: वर्ष 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत बाघ अभयारण्य घोषित किया गया।
- राष्ट्रीय उद्यान: वर्ष 1984 में राष्ट्रीय उद्यान में अपग्रेड किया गया।
- यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल: सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष वर्ष 1987 में विश्व धरोहर स्थल नामित किया गया था (बांग्लादेशी भाग को 1997 में जोड़ा गया था)।
- बायोस्फीयर रिज़र्व: वर्ष 1989 में भारत सरकार द्वारा बायोस्फीयर रिज़र्व नामित किया गया और वर्ष 2001 में यूनेस्को के मैन एंड द बायोस्फीयर (MAB) कार्यक्रम के तहत मान्यता प्राप्त की।
- रामसर स्थल: भारतीय सुंदरबन को वर्ष 2019 में रामसर कन्वेंशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि घोषित किया गया था, जो इसे भारत के सबसे बड़ा रामसर स्थल के रूप में चिह्नित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. 'ब्लू-कार्बन ईकोसिस्टम' क्या हैं?
मैंग्रोव, समुद्री घास और लवणीय दलदल जैसे ईकोसिस्टम जो वायुमंडलीय CO₂ को कुशलतापूर्वक ग्रहण और संगृहीत करते हैं।
2. प्लास्टिस्फीयर क्या हैं?
माइक्रोप्लास्टिक सतहों पर बनने वाले सूक्ष्मजीवी समुदाय, जो समुद्री पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को बदल देते हैं।
3. माइक्रोप्लास्टिक सुंदरबन के लिये हानिकारक क्यों हैं?
ये कृत्रिम कार्बन स्रोतों के रूप में कार्य करते हैं, खाद्य जाल को बाधित करते हैं और कार्बन पृथक्करण दक्षता को कम करते हैं।
4. सुंदरबन का क्या महत्त्व है?
यह दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और एक महत्त्वपूर्ण जलवायु बफर है।
5. माइक्रोप्लास्टिक कार्बन चक्र को कैसे प्रभावित करते हैं?
ये डिकंपोज ऑर्गनिक कार्बन (DOC) उत्सर्जित करते हैं और जैविक कार्बन उत्पादन को बढ़ावा देते हैं, जिससे प्राकृतिक कार्बन गतिशीलता परिवर्तित होती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. निम्नलिखित संरक्षित क्षेत्रों पर विचार कीजिये: (2012)
- बाँदीपुर
- भितरकनिका
- मानस
- सुंदरबन
उपर्युक्त में से किसे टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया है?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. मैंग्रोव के रिक्तीकरण के कारणों पर चर्चा कीजिये और तटीय पारिस्थितिकी का अनुरक्षण करने में इनके महत्त्व को स्पष्ट कीजिये। (2019)
