प्रारंभिक परीक्षा
भारत के ड्रोन ईकोसिस्टम का विस्तार
चर्चा में क्यों?
हालिया सरकारी आँकड़े भारत के विनियमित ड्रोन ईकोसिस्टम के तीव्र विस्तार पर प्रकाश डालते हैं, जो प्रशासन, कृषि, अवसंरचना निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा को रूपांतरित कर रहा है।
भारत का ड्रोन नियामक ढाँचा क्या है?
- नियामक ढाँचा: ड्रोन नियम, 2021 (वर्ष 2022 और 2023 के संशोधनों के साथ) ने प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और परिचालन दायरे का विस्तार करके भारत के ड्रोन ईकोसिस्टम को महत्त्वपूर्ण रूप से उदार बनाया है।
- इनमें हुए सुधारों के तहत अनुमोदन और फॉर्म की संख्या घटाई गई, शुल्क को युक्तिसंगत किया गया, ग्रीन एयरस्पेस तक पहुँच का विस्तार किया गया, व्यापक नागरिक उपयोग की अनुमति दी गई और पारंपरिक पायलट लाइसेंस के स्थान पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा जारी किये जाने वाले रिमोट पायलट सर्टिफिकेट लागू किये गए।
- डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म: 'डिजिटल स्काई' प्लेटफॉर्म और 'नागर विमानन हेतु ई-गवर्नेंस' (eGCA) सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से ड्रोन पंजीकरण, पायलट सर्टिफिकेशन, 'टाइप सर्टिफिकेशन' और एयरस्पेस अनुमति की सुविधा प्रदान करते हैं।
- फरवरी 2026 तक, 38,500 से अधिक ड्रोन पंजीकृत किये गए और लगभग 39,900 रिमोट पायलट सर्टिफिकेट जारी किये गए, जिससे देश भर में विनियमित ड्रोन संचालन सक्षम हुआ है।
- विनिर्माण सहायता: ₹120 करोड़ के परिव्यय वाली उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना घरेलू ड्रोन और उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देती है और स्टार्टअप्स एवं MSME को सहायता प्रदान करती है।
- कर प्रोत्साहन: ड्रोन पर GST को घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे लागत कम हुई है और वाणिज्यिक अभिग्रहण एवं प्रशिक्षण संबंधी बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा मिला है।
- क्षमता निर्माण: स्वायान कार्यक्रम प्रशिक्षण और साझेदारी के माध्यम से मानवरहित विमान प्रणालियों (UAS) में मानव संसाधन विकास पर केंद्रित है, जबकि नेशनल इनोवेशन चैलेंज फॉर ड्रोन एप्लीकेशन एंड रिसर्च (NIDAR) स्वायत्त ड्रोन नवाचार और स्टार्टअप इन्क्यूबेशन को प्रोत्साहित करती है।
ड्रोन के प्रमुख अनुप्रयोग क्या हैं?
- कृषि क्षेत्र: नमो ड्रोन दीदी योजना, नवंबर 2023 में शुरू की गई, जिसका उद्देश्य महिला स्व सहायता समूहों (SHG) को आधुनिक कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने, कृषि दक्षता और फसल उत्पादकता में सुधार करने, निवेश लागत को कम करने और महिलाओं के लिये सतत आजीविका अवसरों का सृजन करने के लिये ड्रोन प्रदान करना है।
- भूमि मानचित्रण (स्वामित्व योजना): स्वामित्व योजना के तहत, ड्रोन सर्वेक्षण ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का मानचित्र तैयार करते हैं, जिससे भूमि विवाद कम होते हैं और बैंक ऋण तक पहुँच में सुधार होता है, लगभग 3.28 लाख गाँवों में मानचित्रण पूरा किया गया है, जिसमें 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किये गए हैं।
- राजमार्ग निगरानी (NHAI परियोजनाएँ): मासिक ड्रोन रिकॉर्डिंग निर्माण प्रगति पर नज़र रखती हैं, परियोजना चरणों की तुलना करने में सक्षम बनाती हैं और विवाद समाधान तथा गुणवत्ता सत्यापन में डिजिटल साक्ष्य के रूप में कार्य करती हैं।
- आपदा प्रबंधनः प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ड्रोन भारत की प्रतिक्रिया को बढ़ा रहे हैं, नॉर्थ-ईस्ट सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन एंड रीच (NECTAR) ने एक विशेष ड्रोन प्रणाली विकसित की है जो लंबे समय तक वायु में स्थिर रह सकती है, भारी उपकरण ले जा सकती है, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर सकती है तथा बचाव दलों को स्थितियों का त्वरित आकलन करने और तेज़ी से बेहतर समन्वित खोज और बचाव अभियान चलाने में मदद करने के लिये लाइव हवाई दृश्य प्रसारित कर सकती है।
- रेलवे निगरानीः रेलवे ट्रैक, पुल और यार्डों का निरीक्षण करने के लिये ड्रोन तैनात करती है, जबकि रेलवे सुरक्षा बल उनका उपयोग निगरानी, भीड़ निगरानी और अतिक्रमण को रोकने के लिये करता है।
- रक्षा क्षेत्र: ड्रोन सीमा निगरानी, खुफिया जानकारी एकत्र करने और सटीक हमलों में सहायता करते हैं, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर में देखा गया है, साथ ही, महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा करने और खतरों का तेज़ी से जवाब देने के लिये वायु रक्षा प्रणालियों और रडार नेटवर्क के साथ काम करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. स्वामित्व योजना क्या है?
यह ड्रोन-आधारित ग्रामीण मानचित्रण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य संपत्ति अभिलेखीकरण तथा भूमि विवादों के समाधान को सुनिश्चित करना है।
2. डिजिटल स्काई क्या है?
यह भारत में ड्रोन पंजीकरण, प्रमाणीकरण तथा वायु-क्षेत्र अनुमतियों हेतु एक ऑनलाइन मंच है।
3. नमो ड्रोन दीदी क्या है?
यह एक योजना है जिसके अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि सटीक कृषि को बढ़ावा दिया जा सके और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ हो।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा के विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित गतिविधियों पर विचार कीजिये: (2020)
1. खेत में कीटनाशकों का छिड़काव।
2. सक्रिय ज्वालामुखियों के क्रेटर्स का निरीक्षण।
3. डीएनए विश्लेषण हेतु स्पाउटिंग व्हेल से साँस के नमूने एकत्र करना।
प्रौद्योगिकी के वर्तमान स्तर पर ड्रोन का उपयोग करके उपरोक्त में से कौन-सी गतिविधियों को सफलतापूर्वक किया जा सकता है?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
रैपिड फायर
सर्वम-30B और सर्वम-105B
बंगलूरू स्थित सर्वम AI ने दो नए लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) का अनावरण किया है: सर्वम-30B (30 अरब पैरामीटर वाला मॉडल) और सर्वम-105B (105 अरब पैरामीटर वाला मॉडल)। यह घोषणा इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 में ‘विक्रम’ कार्यक्रम के तहत की गई।
- समिट में सर्वम AI ने विक्रम नामक बहुभाषी चैटबॉट प्रस्तुत किया, जो भारतीय भाषाओं में सहज बातचीत की सुविधा देता है। इसे भौतिक विज्ञानी विक्रम साराभाई के सम्मान में नामित किया गया है, ताकि देशी वैज्ञानिक नवाचार को प्रतिबिंबित किया जा सके।
- यह लॉन्च ओपन AI द्वारा 'IndQA' पेश किये जाने के बीच हुआ है, जो भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों की समझ का आकलन करने वाला एक बेंचमार्क है। यह भारत पर बढ़ते वैश्विक ध्यान को दर्शाता है।
- स्वदेशी विकास: यह 30 बिलियन पैरामीटर वाला बहुभाषी मॉडल वास्तविक समय की बातचीत के लिये डिज़ाइन किया गया है, जिसमें 32,000-टोकन का संदर्भ विंडो है (एक बार में पढ़ने और याद रखने योग्य टेक्स्ट की मात्रा)। यह लंबी बातचीत के लिये मज़बूत तर्क तथा निर्देश पालन क्षमता प्रदान करता है।
- 105 बिलियन पैरामीटर वाला मॉडल जिसमें 128,000-टोकन का संदर्भ विंडो है, यह जटिल तर्क, बहु-स्तरीय समस्या समाधान और भारतीय भाषाओं में लंबी-आकार की विश्लेषणात्मक बातचीत के लिये उपयुक्त है।
- दोनों मॉडल मिश्रित-विशेषज्ञ आर्किटेक्चर का उपयोग करते हैं, जिसमें केवल संगणना के दौरान प्रासंगिक घटक सक्रिय होते हैं, ताकि लागत कम की जा सके और उच्च प्रदर्शन बनाए रखा जा सके।
- पैरामीटर AI मॉडल के इंटरनल वेरिएबल या उसके “ब्रेन सेल्स” होते हैं, जो प्रशिक्षण के दौरान सीखे जाते हैं; उच्च पैरामीटर संख्या सामान्यतः अधिक जटिलता, तर्क‑क्षमता और सूक्ष्म कार्यों को सँभालने की अधिक क्षमता वाले मॉडल की ओर संकेत करती है।
- प्रमुख विशेषता और क्षमता
- भारतीय भाषाओं में महारथ: GPT-4 जैसे वैश्विक मॉडलों के विपरीत, जो मुख्य रूप से अंग्रेज़ी डेटा पर प्रशिक्षित हैं, सर्वम को सभी 22 भारतीय भाषाओं में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिये बनाया गया है, जिसमें वॉइस-फर्स्ट ऑप्टि
- माइज़ेशन के साथ, 105B-पैरामीटर (डीपसीक के 600B R1 मॉडल के आकार का एक-छठा हिस्सा) के बावजूद AI को जनता के लिये अधिक सुलभ बनाया गया है।
- यह भारतीय भाषाओं में "डेटा की कमी" की समस्या को दूर करता है, जिससे स्थानीय बोलियों में सटीक अनुवाद और कंटेंट जनरेशन संभव हो पाता है।
- ओपन सोर्स: इन मॉडलों को ओपन सोर्स के रूप में जारी किया जाएगा, जिसका अर्थ है कि डेवलपर्स और शोधकर्त्ता ‘सर्वम' के आधार पर अपने स्वयं के एप्लिकेशन बनाने के लिये इसके कोड और वेट्स तक पहुँच सकते हैं।
- प्रशिक्षण बुनियादी ढाँचा: LLM को प्रशिक्षित करने के लिये अत्यधिक कंप्यूटिंग शक्ति की आवश्यकता होती है। इन मॉडलों को IndiaAI मिशन के 'कॉमन कंप्यूट प्रोग्राम' के माध्यम से एक्सेस किये गए GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स) का उपयोग करके प्रशिक्षित किया गया है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी की सफलता को दर्शाता है।
- IndiaAI मिशन के तहत सर्वम AI को शासन और सार्वजनिक सेवाओं के लिये एक ओपन-सोर्स 120B-पैरामीटर मॉडल के साथ भारत का पहला सोवरेन LLM ईकोसिस्टम निर्माण के लिये चुना गया है।
- सर्वम AI के अतिरिक्त, सोकेट AI रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों के लिये भारत-केंद्रित मॉडल विकसित करेगा। वहीं Gnani ने अपना मॉडल लॉन्च किया है और Gan AI एक 70B-पैरामीटर वाला मल्टीलिंगुअल 'टेक्स्ट-टू-स्पीच' फाउंडेशन मॉडल का निर्माण कर रहा है।
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रैपिड फायर
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का द्वितीय चरण
केंद्र सरकार वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) के द्वितीय चरण का शुभारंभ करने जा रही है, जिसके अंतर्गत इसके रणनीतिक दायरे को चीन सीमा से आगे बढ़ाते हुए अब पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्याँमार की सीमाओं पर स्थित 1,954 सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गाँवों को शामिल किया जाएगा।
- वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP): इसे वर्ष 2023 में प्रारंभ किया गया था। इसका मूल उद्देश्य चीन सीमा से लगे हुए गाँवों के विकास को प्रोत्साहित करना था।
- VVP-II एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसमें 100% वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। इसे अप्रैल 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया।
- VVP-II के अंतर्गत शामिल राज्य: यह कार्यक्रम अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल में लागू किया जाएगा।
- वित्तीय प्रावधान: VVP-II के लिये कुल 6,839 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसे वित्तीय वर्ष 2028-29 तक लागू किया जाएगा। प्रति गाँव 3 करोड़ रुपए व्यय करने का प्रस्ताव है।
- सामरिक उद्देश्य: इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों की जनसंख्या के शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन को रोकना है, जिससे सुरक्षा शून्यता उत्पन्न होती है तथा जनसांख्यिकीय परिवर्तन की स्थिति बनती है। इसके लिये सतत आजीविका के अवसर सृजित किये जाएंगे।
- सीमावर्ती जनसंख्या की भूमिका: इस पहल का उद्देश्य स्थानीय निवासियों को सीमा सुरक्षा बलों के “आँख और कान” के रूप में सशक्त बनाना तथा उन्हें अवैध गतिविधियों और सीमा-पार अपराधों से दूर रखना है।
- व्यापक विकास: इस रणनीति में मौजूदा सरकारी योजनाओं की संपूर्ण कवरेज, बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ बनाना और इन गाँवों को "विकास केंद्र" के रूप में विकसित करना शामिल है, ताकि राष्ट्र के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक समावेशन सुनिश्चित किया जा सके।
- विश्वास निर्माण: गृह मंत्रालय द्वारा “सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील” आउटरीच गतिविधियों पर बल दिया गया है, ताकि सीमा सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास स्थापित हो तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिये उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके।
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रैपिड फायर
लॉगरहेड टर्टल
एक अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन लॉगरहेड सी टर्टल की प्रजनन क्षमता और शारीरिक संरचना को कमज़ोर कर रहा है, जिससे उनके दीर्घकालिक अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
- परिचय: लॉगरहेड सी टर्टल (केरेट्टा-केरेट्टा) एक सर्वाहारी समुद्री सरीसृप है, जिसे सी टर्टल की सात विद्यमान प्रजातियों में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- इसका नाम इसके बड़े, चौकोर आकार के सिर पर रखा गया है, इसके जबड़े की मांसपेशियाँ इतनी शक्तिशाली होती हैं कि यह कठोर खोल वाले शिकार को भी कुचल सकती हैं।
- वैश्विक वितरण: लॉगरहेड टर्टल अटलांटिक महासागर, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के साथ-साथ भूमध्य सागर में पाया जाता है, जिसकी दस मान्यता प्राप्त उप-प्रजातियाँ हैं।
- खतरे: महासागरों की उष्णता और घटती समुद्री खाद्य आपूर्ति के कारण मादा लॉगरहेड अब कम बार प्रजनन कर रही हैं — प्रत्येक दो वर्ष से बदलकर चार वर्ष के अंतराल पर—और प्रति घोंसला कम अंडे दे रही हैं।
- “कैपिटल ब्रीडर” होने के नाते ये कछुए प्रजनन के लिये कई वर्षों तक भोजन खोजकर संचित की गई ऊर्जा पर निर्भर रहते हैं। नर और मादा दोनों ही भोजन स्थलों और अंडे देने वाले समुद्रतटों के बीच सैकड़ों से लेकर हज़ारों किमी. तक की प्रजनन यात्राएँ करते हैं। हालाँकि सैटेलाइट आँकड़ों से महासागरीय क्लोरोफिल में कमी दिखती है, जो भोजन की उपलब्धता घटने का संकेत है, यह इनके ऊर्जा भंडार को क्षीण कर रही है।
- संरक्षण स्थिति: इस प्रजाति को IUCN द्वारा 'सुभेद्य' के रूप में मूल्यांकित किया गया है। इसे वर्ष 1979 में वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण हेतु अभिसमय (CMS) के परिशिष्ट II में शामिल किया गया था और 1985 में परिशिष्ट I में उन्नत किया गया। भारत में यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तंत्र: लॉगरहेड पर विभिन्न CMS के माध्यम से संरक्षण लागू है, जिनमें अफ्रीका के अटलांटिक तट और हिंद महासागर–दक्षिण‑पूर्व एशिया क्षेत्रों के लिये समझौता ज्ञापन (MOU) और दक्षिण प्रशांत महासागर के लिये एक एकल प्रजाति कार्ययोजना शामिल हैं।
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रैपिड फायर
चावल आपूर्ति पर भारतीय खाद्य निगम–विश्व खाद्य कार्यक्रम के बीच समझौता ज्ञापन
भारतीय खाद्य निगम (FCI) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने वैश्विक भूख राहत अभियानों के समर्थन हेतु चावल की आपूर्ति के लिये एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये।
- मानवीय साझेदारी: इस समझौता ज्ञापन के तहत FCI द्वारा वैश्विक मानवीय सहायता हेतु WFP को 200,000 मीट्रिक टन चावल (अधिकतम 25% टूटा हुआ) की आपूर्ति की जाएगी। यह समझौता 5 वर्षों के लिये वैध है तथा पारस्परिक सहमति से इसका विस्तार किया जा सकता है।
- वैश्विक खाद्य सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता: इस साझेदारी के माध्यम से भारत संवेदनशील और वंचित आबादी तक “आशा, पोषण और गरिमा” का निर्यात कर रहा है। यह वैश्विक समुदाय के साथ मिलकर भूख और कुपोषण के विरुद्ध संघर्ष करने की उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम
- स्थापना और अधिदेश: विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की स्थापना वर्ष 1961 में संयुक्त राष्ट्र महासभा और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा की गई थी।
- यह संयुक्त राष्ट्र के अधीन कार्य करता है तथा इसका द्वैध अधिदेश है, जिसमें आपातकालीन खाद्य राहत प्रदान करना और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा एवं स्थिरता को समर्थन देना शामिल है।
- मान्यता: विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को वर्ष 2020 में भूख से लड़ने, युद्ध में भुखमरी को हथियार के रूप में प्रयोग करने से रोकने तथा खाद्य सहायता के माध्यम से शांति को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिये नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- भारत-WFP सहयोग ढाँचा: भारत फोर्टिफाइड राइस रोलआउट, ग्रेन ATM (अन्नपूर्णा उपकरण), जन पोषण केंद्र, स्मार्ट वेयरहाउसिंग तथा मोबाइल भंडारण इकाइयों (फ्लोस्पैन) जैसी नवोन्मेषी पहलों के माध्यम से WFP के साथ सहयोग करता है।
प्रारंभिक परीक्षा
राज्यसभा चुनाव
चर्चा में क्यों?
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 10 राज्यों में राज्यसभा की 37 सीटों के लिये द्विवार्षिक चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया है।
राज्यसभा के बारे में मुख्य तथ्य क्या हैं?
- राज्यसभा: राज्यों की परिषद अर्थात् राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है।
- राज्यसभा में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि और भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत व्यक्ति शामिल होते हैं।
- संवैधानिक प्रावधान: संविधान का अनुच्छेद 80 राज्यसभा की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित करता है, जिसमें साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्य शामिल हैं ।
- वर्तमान में सदन में 245 सदस्य हैं जिनमें से 233 सदस्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों (दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू एवं कश्मीर) का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा 12 मनोनीत सदस्य हैं।
- सीटों का आवंटन: चौथी अनुसूची के अनुसार जनसंख्या के आधार पर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सीटें आवंटित की जाती हैं ।
- पात्रता: संविधान का अनुच्छेद 84 संसद की सदस्यता के लिये योग्यता निर्धारित करता है
- राज्यसभा के लिये पात्रता हेतु व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिये, तीसरी अनुसूची के अनुसार निर्वाचन आयोग द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञा लेनी चाहिये, उसकी आयु कम-से-कम 30 वर्ष होनी चाहिये और संसद द्वारा कानून के माध्यम से निर्धारित कोई अतिरिक्त योग्यता होनी चाहिये।
- कार्यकाल: राज्यसभा एक स्थायी सदन है और भंग नहीं किया जा सकता; इसके एक-तिहाई सदस्य प्रति दो वर्षों में सेवानिवृत्त होते हैं और प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है।
- त्यागपत्र, मृत्यु अथवा अयोग्यता के कारण रिक्त हुई सीटों को भरने के लिये उपचुनाव आयोजित किये जाते हैं तथा निर्वाचित सदस्य केवल मूल कार्यकाल के शेष समय के लिये ही कार्य करता है।
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिये निर्वाचित सदस्य केवल अपने पूर्ववर्ती के कार्यकाल के शेष समय के लिये ही कार्य करता है ।
- सभापति: भारत के उपराष्ट्रपति सदन के पदेन सभापति के रूप में कार्य करते हैं ।
राज्यसभा की विशेष शक्तियाँ
- अनुच्छेद 249 के तहत यदि राज्यसभा ने उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम-से-कम दो-तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित संकल्प द्वारा घोषित किया है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद राज्य सूची में प्रगणित ऐसे विषय के संबंध में, जो उस संकल्प में विनिर्दिष्ट है, विधि बनाए तो जब तक वह संकल्प प्रवृत्त है, संसद के लिये उस विषय के संबंध में भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिये विधि बनाना विधिपूर्ण होगा।
- इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 312 के तहत, राज्यसभा के पास समान दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता के साथ नवीन अखिल भारतीय सेवाओं (जो संघ और राज्यों दोनों के लिये साझा हों) के सृजन की प्रक्रिया शुरू करने का अनन्य अधिकार है।
- विधायी कार्यों के अतिरिक्त, राज्यसभा आपातकाल के दौरान शासन की निरंतरता सुनिश्चित करती है।
- अनुच्छेद 352, 356 और 360 के तहत यदि आपातकाल की उद्घोषणा उस समय की जाती है जब लोकसभा भंग हो, तो राज्यसभा के पास उस उद्घोषणा को अनुमोदित करने और अवर सदन के पुनर्गठन तक उसे प्रभावी रखने की शक्ति होती है।
चुनाव प्रक्रिया
- चुनाव प्रणाली: सदस्यों का चुनाव राज्यों एवं संघशासित क्षेत्रों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अंतर्गत अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।
- इस प्रणाली में विधायक (MLA) किसी एक प्रत्याशी को मत देने के स्थान पर मतपत्र पर प्रत्याशियों को अपनी वरीयता के क्रम (1, 2, 3 आदि) में अंकित करते हैं।
- निर्वाचित घोषित होने हेतु प्रत्याशी को निर्धारित निर्वाचन कोटा प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
- यदि कोई प्रत्याशी आवश्यक कोटा से अधिक मत प्राप्त कर लेता है, तो अधिशेष मतों को द्वितीयक वरीयता के अनुपात में अगले प्रत्याशी को हस्तांतरित किया जाता है।
- यदि सभी रिक्त स्थान नहीं भरते, तो न्यूनतम मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशी को बाहर कर दिया जाता है तथा उसके मत शेष प्रत्याशियों में आगामी वरीयताओं के आधार पर पुनर्वितरित किये जाते हैं।
- इस प्रणाली में विधायक (MLA) किसी एक प्रत्याशी को मत देने के स्थान पर मतपत्र पर प्रत्याशियों को अपनी वरीयता के क्रम (1, 2, 3 आदि) में अंकित करते हैं।
- निर्वाचक मंडल: केवल राज्यों एवं संघशासित क्षेत्रों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (MLAs) ही निर्वाचन में भाग लेते हैं।
- वर्ष 2003 से पूर्व: प्रत्याशी को उसी राज्य का निवासी होना अनिवार्य था, जहाँ से वह चुनाव लड़ रहा हो।
- वर्ष 2003 के पश्चात: प्रत्याशी भारत के किसी भी संसदीय चुनाव क्षेत्र का मतदाता हो सकता है। यह प्रावधान लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा अधिवास संबंधी अनिवार्यता हटाए जाने के परिणामस्वरूप लागू हुआ।
- ‘ओपन बैलेट’ प्रणाली: राजनीतिक दलों से संबद्ध विधायकों के लिये मतदान पूर्णतः गोपनीय नहीं होता।
- प्रत्येक दल का विधायक अपना चिह्नित मतपत्र मतपेटी में डालने से पूर्व दल के अधिकृत एजेंट को प्रदर्शित करता है, जिससे क्रॉस-वोटिंग तथा धनबल के प्रभाव को निरुत्साहित किया जा सके।
- निर्दलीय विधायक अपना मतपत्र किसी को प्रदर्शित नहीं करते।
- प्रत्येक दल का विधायक अपना चिह्नित मतपत्र मतपेटी में डालने से पूर्व दल के अधिकृत एजेंट को प्रदर्शित करता है, जिससे क्रॉस-वोटिंग तथा धनबल के प्रभाव को निरुत्साहित किया जा सके।
- दल-बदल निरोधक प्रावधान: उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्यसभा के चुनाव में दल के व्हिप के विरुद्ध मतदान करने पर संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के अंतर्गत अयोग्यता लागू नहीं होती।
- हालाँकि, संबंधित राजनीतिक दल अनुशासनात्मक कार्रवाई (निलंबन अथवा निष्कासन) कर सकता है, किंतु विधायक अपनी विधानसभा सदस्यता बनाए रखता है।
- नोटा: सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2018 में (शैलेश मनुभाई परमार बनाम भारत संघ मामले में) राज्यसभा चुनावों के लिये ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ (NOTA) विकल्प को निरस्त कर दिया था।
- नोटा आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत तथा एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली की मूल भावना को निष्प्रभावी कर देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन कैसे होता है?
राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित विधायकों (MLA) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व की पद्धति के अंतर्गत एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली के माध्यम से चुने जाते हैं।
2. राज्यसभा की अधिकतम तथा वर्तमान सदस्य संख्या क्या है?
अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 निर्धारित की गई है, जबकि वर्तमान सदस्य संख्या 245 है, जिनमें से 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है।
3. राज्यसभा चुनावों में खुली मतपत्र प्रणाली का उद्देश्य क्या है?
यह व्यवस्था वर्ष 2003 में लागू की गई तथा कुलदीप नायर (2006) मामले में इसे वैध ठहराया गया। इसका उद्देश्य दल-बदल की प्रक्रिया एवं भ्रष्टाचार को रोकना है, जिसके लिये राजनीतिक दलों के विधायकों को अपने अधिकृत एजेंट को मतपत्र दिखाना आवश्यक होता है।
4. क्या दलबदल विरोधी कानून राज्यसभा चुनावों पर लागू होता है?
नहीं। राज्यसभा चुनाव में दल के प्रत्याशी के विरुद्ध मतदान करने पर दसवीं अनुसूची के अंतर्गत अयोग्यता नहीं होती, यद्यपि संबंधित राजनीतिक दल अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।
5. संविधान के अंतर्गत राज्यसभा की विशेष शक्तियाँ क्या हैं?
राज्यसभा संसद को राज्य सूची के विषयों पर विधि निर्माण हेतु अधिकृत कर सकती है (अनुच्छेद 249), अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन की अनुमति दे सकती है (अनुच्छेद 312) तथा लोकसभा के विघटन की स्थिति में आपातकालीन उद्घोषणाओं को अनुमोदित कर सकती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. राज्यसभा की लोकसभा के समान शक्तियाँ किस क्षेत्र में हैं? (2020)
(a) नई अखिल भारतीय सेवाएँ गठित करने के विषय में
(b) संविधान में संशोधन करने के विषय में
(c) सरकार को हटाने के विषय में
(d) कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत करने के विषय में
उत्तर: (b)
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2016)
- लोकसभा में लंबित कोई विधेयक उसके सत्रावसान पर व्यपगत (लैप्स) हो जाता है।
- राज्यसभा में लंबित कोई विधेयक, जिसे लोकसभा ने पारित नहीं किया है, लोकसभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होगा।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (B)
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2015)
- राज्यसभा के पास धन विधेयक को अस्वीकार करने या संशोधन करने का कोई अधिकार नहीं है।
- राज्यसभा अनुदान की मांगों पर मतदान नहीं कर सकती है।
- राज्यसभा वार्षिक वित्तीय विवरण पर चर्चा नहीं कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
रैपिड फायर
दूरसंचार एवं डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में भारत–जर्मनी के मध्य सहयोग
भारत–जर्मनी सामरिक साझेदारी के अंतर्गत दूरसंचार एवं डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में संरचित सहयोग को आगे बढ़ाने हेतु दोनों देशों के मध्य एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। यह पहल वर्ष 2026 में आयोजित भारत–जर्मनी शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित संयुक्त आशय घोषणापत्र (Joint Declaration of Intent – JDI) पर आधारित है।
- संयुक्त अभिप्राय घोषणा (JDI) फ्रेमवर्क: यह दूरसंचार तथा डिजिटल शासन के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग के लिये एक दूरदर्शी एवं गैर-बाध्यकारी फ्रेमवर्क है। यह डिजिटल पारितंत्र में पारदर्शिता, विश्वसनीयता, नवाचार तथा प्रत्यास्थता जैसे साझा मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है।
- भारत में डिजिटल परिवर्तन एवं प्रमुख उपलब्धियाँ: भारत ने अपने डिजिटल सशक्तीकरण की निम्नलिखित उपलब्धियों को रेखांकित किया—
- 1.23 बिलियन से अधिक दूरसंचार उपभोक्ता तथा लगभग 1 बिलियन इंटरनेट उपयोगकर्त्ता।
- देश के लगभग 99.9% ज़िलों तक 5G कवरेज का विस्तार।
- प्रति GB औसत डेटा शुल्क लगभग 0.10 अमेरिकी डॉलर, जो वैश्विक स्तर पर न्यूनतम दरों में सम्मिलित है।
- एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 250 बिलियन लेन-देन संसाधित किये जाते हैं; इसे अनेक साझेदार देशों द्वारा अंतर-संचालनीय डिजिटल भुगतान मॉडल के रूप में अपनाया जा रहा है।
- जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता: जर्मनी ने क्वांटम एंक्रिप्शन तथा सुरक्षित सूचना प्रसारण के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किये, जिनमें 35 किमी. के लिंक पर लगातार 11 दिनों तक क्वांटम संचार के सफल प्रदर्शन का उदाहरण भी शामिल था, जो सुरक्षित संचार अवसंरचना के विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
- सहयोग के प्राथमिक क्षेत्र: दोनों पक्षों ने जिन प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता प्रदान की उनमें 5G एवं 5G-एडवांस्ड प्रौद्योगिकी सहित 6G मानकीकरण में प्रारंभिक सहभागिता, नेटवर्क आधुनिकीकरण, विश्वसनीय दूरसंचार संरचनाएँ, आपूर्ति शृंखला की प्रत्यास्थता, एज-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता, औद्योगिक-स्तरीय नेटवर्क स्लाइसिंग, ओपन RAN (रेडियो एक्सेस नेटवर्क) ईकोसिस्टम आदि शामिल हैं।
- बहुपक्षीय सहयोग: भारत ने जर्मनी से निम्नलिखित विषयों पर समर्थन का अनुरोध किया—
- अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) में रेडियोकम्युनिकेशन ब्यूरो के निदेशक पद हेतु भारत की उम्मीदवारी।
- वर्ष 2027–30 कार्यकाल के लिये ITU परिषद में भारत का पुनर्निर्वाचन।
- वर्ष 2030 में ITU प्लेनिपोटेंशियरी कॉन्फ्रेंस की मेज़बानी हेतु भारत का प्रस्ताव।
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रैपिड फायर
भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन ऊर्जा कार्यबल
भारत और ब्रिटेन ने अपतटीय पवन ऊर्जा के विकास में सहयोग को तीव्र करने के उद्देश्य से भारत–ब्रिटेन विज़न 2035 और चौथे ऊर्जा संवाद के तहत भारत–ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल की स्थापना की है।
- सहयोग के स्तंभ: सहयोग के तीन मुख्य स्तंभों को रेखांकित किया गया है:
- पारिस्थितिक तंत्र नियोजन और बाज़ार डिज़ाइन (जिसमें समुद्र तल की लीज़ और राजस्व सुनिश्चितता शामिल है),
- अवसंरचना और आपूर्ति शृंखलाएँ (पोत आधुनिकीकरण, स्थानीय विनिर्माण),
- वित्तपोषण और जोखिम न्यूनीकरण (मिश्रित वित्त, संस्थागत पूंजी)।
- हरित हाइड्रोजन मिशन के साथ समन्वय: अपतटीय पवन ऊर्जा तटीय औद्योगिक एवं हरित हाइड्रोजन क्लस्टरों को ऊर्जा प्रदान कर सकती है। भारत ने अपने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से प्रतिस्पर्द्धात्मक मूल्य प्राप्त किये हैं।
- रणनीतिक महत्त्व: अपतटीय पवन ऊर्जा को भारत के ऊर्जा संक्रमण के लिये रणनीतिक रूप से विशेषकर ग्रिड स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
अपतटीय पवन ऊर्जा
- परिचय: यह समुद्री वातावरण जैसे समुद्र या महासागर में स्थापित पवन टरबाइन से विद्युत उत्पादन को दर्शाता है, जिसमें अधिक मज़बूत और लगातार बहने वाली पवन ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।
- भारत में संभावनाएँ: चेन्नई स्थित राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) के अनुसार, भारत में अनुमानित अपतटीय पवन क्षमता लगभग 70 GW है, जो मुख्यतः गुजरात और तमिलनाडु की तटीय रेखाओं के पास केंद्रित है।
- भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 272 GW से अधिक हो चुकी है, जिसमें सौर ऊर्जा से 141 GW और पवन ऊर्जा से 55 GW प्राप्त होती है।
- नीतिगत एवं संस्थागत ढाँचा: राष्ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति (2015) समग्र ढाँचा प्रदान करती है, जिसमें नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करता है और राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) आकलन व सुविधा प्रदान करने वाली नोडल एजेंसी है।
- प्रारंभिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने हेतु सरकार ने व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना शुरू की है, जिसकी कुल योजना राशि 7,453 करोड़ रुपए है।
| और पढ़ें: भारत की अपतटीय पवन ऊर्जा के लिये रोडमैप |


