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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-जर्मनी संबंध

  • 14 Jan 2026
  • 82 min read

प्रिलिम्स के लिये: मिलान, इंडियन ओशन नेवल सिंपोज़ियम, तरंग शक्ति, सेमीकंडक्टर 

मेन्स के लिये: भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी: विकास और महत्त्व, वैश्विक शासन सुधारों में मध्य देशों की भूमिका

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों? 

भारत और जर्मनी ने जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के दौरान अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई गति प्रदान की है, जो रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष और कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।

सारांश

  • जर्मन चांसलर की यात्रा ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा प्रदान की, जिससे रक्षा, प्रौद्योगिकी, जलवायु कार्रवाई, हिंद-प्रशांत सुरक्षा और वैश्विक शासन संबंधी सुधारों में सहयोग का विस्तार हुआ।
  • यह साझेदारी मज़बूत गति के बावज़ूद भू-राजनीतिक मतभेदों, रक्षा असमानताओं और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार प्रगति की धीमी गति से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करती है, जिसके लिये गहन आर्थिक एकीकरण और रणनीतिक समन्वय की आवश्यकता है।

जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के प्रमुख परिणाम क्या हैं?

  • रक्षा औद्योगिक सहयोग: रक्षा के सह‑विकास, सह‑उत्पादन और प्रौद्योगिकी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिये एक संयुक्त रोडमैप पर सहमति बनी, जिसमें जर्मनी ने तीव्र निर्यात अनुमोदन के लिये प्रतिबद्धता व्यक्त की।
    • जर्मनी ने भारतीय नौसेना और वायुसेना के अभ्यासों, जैसे– मिलान, इंडियन ओशन नेवल सिंपोज़ियम और तरंग शक्ति में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की।
    • दोनों पक्षों ने ट्रैक 1.5 विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद स्थापित किया, जो सरकारी अधिकारियों और गैर‑सरकारी विशेषज्ञों के बीच संरचित लेकिन अनौपचारिक वार्त्ता के माध्यम से रणनीतिक समझ और नीतिगत समन्वय को सुदृढ़ करेगा।
  • वीज़ा‑फ्री एयरपोर्ट ट्रांज़िट: भारतीय पासपोर्टधारकों को जर्मन हवाई अड्डों से वीज़ा‑फ्री ट्रांज़िट की अनुमति दी जाएगी, जिससे यात्रा और गतिशीलता सुगम होगी।
  • शिक्षा और कौशल विकास: एक उच्च शिक्षा रोडमैप अपनाया गया, जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर खोलने के लिये आमंत्रित किया गया और नवीकरणीय ऊर्जा कौशल विकास के लिये सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की घोषणा की गई।
  • क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर: आपूर्ति शृंखला के लचीलापन को बढ़ाने के लिये दोनों पक्षों ने क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम पर सहयोग करने हेतु सहमति व्यक्त की।
  • डिजिटल और उभरती प्रौद्योगिकियाँ: इंडो‑जर्मन डिजिटल डायलॉग कार्ययोजना (2026–27) को अंतिम रूप दिया गया, जिसमें AI, डेटा गवर्नेंस, दूरसंचार और इंडस्ट्री 4.0 जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया।
  • इंडो‑पैसिफिक और संपर्क सहयोग: इंडो‑पैसिफिक पर एक द्विपक्षीय संवाद शुरू हुआ, ताकि नियम‑आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था को समर्थन मिल सके। 
  • वैश्विक शासन में सुधार: भारत और जर्मनी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित वैश्विक संस्थाओं में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया, विशेषकर G4 फ्रेमवर्क के माध्यम से। 
  • आतंकवाद‑रोधी सहयोग: भारत और जर्मनी ने सीमा-पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की, संयुक्त राष्ट्र-नामित 1267 शासन के तहत आतंकवादी समूहों के खिलाफ सहयोग की पुष्टि की, परस्पर कानूनी सहायता संधि की पुष्टि का स्वागत किया और आतंकवादी वित्तपोषण तथा सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ खुफिया साझाकरण, कानूनी सहयोग और कार्रवाई को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की।

भारत-जर्मनी संबंधों के मुख्य पहलू क्या हैं?

  • आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध: भारत और जर्मनी के बीच वस्तु और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2024 में 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, जो भारत–यूरोपीय संघ कुल व्यापार का 25% से अधिक हिस्सा है।
    • जर्मनी वर्ष 2024–25 में भारत का आठवाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया, जबकि वर्ष 2024 में भारत, जर्मनी का 23वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक एकीकरण की गहराई को दर्शाता है। 
    • मेक इन इंडिया मित्तेलस्टैंड (MIIM) कार्यक्रम जर्मनी की लघु और मध्यम उद्यम (SMEs) तथा पारिवारिक स्वामित्व वाली कंपनियों को भारत में निवेश और उत्पादन करने के लिये समर्थन प्रदान करता है।
  • विकास सहयोग: हरित और सतत विकास साझेदारी के तहत जर्मनी ने वर्ष 2030 तक वार्षिक 1 अरब यूरो का योगदान देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जो जलवायु कार्रवाई, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत शहरी विकास, जल, वन और कृषि के क्षेत्रों में समर्थन प्रदान करेगा।
    • दोनों देश त्रिकोणीय विकास सहयोग (Triangular Development Cooperation) के माध्यम से भी सहयोग करते हैं, ताकि तीसरे देशों में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप विकास परियोजनाओं को लागू किया जा सके।
  • रक्षा: भारत–जर्मनी रक्षा सहयोग 2006 के रक्षा सहयोग समझौते और 2019 के इसके क्रियान्वयन प्रावधान पर आधारित है, जिसे नियमित उच्च-स्तरीय रक्षा संवादों द्वारा समर्थित किया जाता है।
    • सैन्य संबंधों को नौसैनिक बंदरगाह दौरों और PASSEX अभ्यासों के माध्यम से गहरा किया गया है। वायुसेना सहयोग अभ्यास तरंग शक्ति के माध्यम से बढ़ा है, जो बढ़ती अंतःसंचालन क्षमता और रणनीतिक विश्वास को दर्शाता है।

Germany

भारत-जर्मनी संबंधों में क्या चुनौतियाँ हैं?

  • रूस–यूक्रेन संघर्ष पर मतभेद: जर्मनी रूस–यूक्रेन संघर्ष पर निकट समन्वय की चाह रखता है, जबकि भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा संबंधों को जारी रखता है, जिससे पूर्ण राजनीतिक संगति सीमित रहती है।
  • रक्षा सहयोग में विषमता: रक्षा संबंध बेहतर हो रहे हैं, लेकिन भारत की लंबे समय से रूस पर निर्भरता, जर्मन रक्षा निर्यात की उच्च लागत और शर्तें तथा प्रमुख सौदों (जैसे - पनडुब्बियाँ) के अंतिम रूप में विलंब के कारण ये संबंध सीमित बने हुए हैं।
  • असमान आर्थिक सहभागिता: हालाँकि द्विपक्षीय व्यापार बढ़ रहा है, फिर भी यह जर्मनी–चीन व्यापार की तुलना में सीमित है, जिससे जर्मनी की विविधीकरण महत्त्वाकांक्षाओं और वर्तमान भारत–जर्मनी आर्थिक एकीकरण के स्तर में अंतर स्पष्ट होता है।
    • जर्मनी चीन को मुख्यतः एक प्रणालीगत आर्थिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखता है, जबकि भारत इसे प्रत्यक्ष सुरक्षा और क्षेत्रीय खतरे के रूप में मानता है। इस खतरे की भिन्न धारणा के कारण इंडो-पैसिफिक में दोनों देशों के मध्य रणनीतिक समन्वय सीमित होता है।
  • भारत–यूरोपीय संघ व्यापार ढाँचे में धीमी प्रगति: भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर लंबी वार्त्ता दीर्घकालिक अवधि के निवेश और आपूर्ति शृंखला नियोजन में अनिश्चितता पैदा करती है, जिससे द्विपक्षीय संबंध प्रभावित होते हैं।
  • प्रवासन और एकीकरण संबंधी चुनौतियाँ: यद्यपि प्रवासन एवं विद्यार्थियों के आवागमन में वृद्धि हुई है, किंतु भाषा की बाधाएँ, योग्यताओं की मान्यता और सामाजिक एकीकरण जैसी समस्याएँ अभी भी बनी हुई हैं।

भारत-जर्मनी संबंधों को बेहतर बनाने हेतु क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

  • आर्थिक और व्यापारिक एकीकरण को गति देना: भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को शीघ्र निष्कर्ष तक पहुँचाने का प्रयास करना, नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और आपूर्ति शृंखला साझेदारी को सुदृढ़ करना, ताकि चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके।
  • जलवायु और हरित संक्रमण को मज़बूत करना: हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत गतिशीलता और जलवायु-प्रतिरोधी अवसंरचना के लिये GSDP का उपयोग करना।
  • SME और मित्तेलस्टैंड की भागीदारी को बढ़ावा देना: मेक इन इंडिया मित्तेलस्टैंड (MIIM) जैसे कार्यक्रमों का विस्तार करके जर्मन SMEs को भारतीय निर्माण और नवाचार पारिस्थितिक तंत्र में आकर्षित करना।
    • यह यूरोप की चीन पर निर्भरता को कम करेगा और भारत को यूरोपीय संघ (EU) केंद्रित मूल्य शृंखलाओं (Value Chains) में गहराई से स्थापित करेगा, विशेष रूप से आसियान (ASEAN) और अफ्रीका की ओर उन्मुख निर्यातों हेतु।
  • वैश्विक शासन में एक साझा मानक विकल्प का निर्माण: भारत और जर्मनी को मूल्य-आधारित, फिर भी अवज्ञापरक नहीं, ऐसे वैश्विक शासन मॉडल का संयुक्त नेतृत्व करना चाहिये, जो लोकतांत्रिक, समावेशी, विकासोन्मुख हो तथा संप्रभुता व विविधता का सम्मान करता हो। 
    • इस तरह का दृष्टिकोण सत्तावादी पुनरावृत्ति (Authoritarian Revisionism) और पश्चिमी एकपक्षीयता (Western Unilateralism) दोनों के लिये एक विश्वसनीय विकल्प प्रदान करेगा, साथ ही उन्हें उत्तरदायी और स्थिरीकरणकारी वैश्विक हितधारक के रूप में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ाने में सहायता करेगा।
    • भारत-जर्मनी त्रिकोणीय विकास सहयोग को अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य देखभाल, कौशल विकास और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में बढ़ाया जाना चाहिये।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (आधार जैसे प्लेटफॉर्म, UPI, ONDC) और यूरोपीय संघ डिजिटल शासन ढाँचे के बीच अंतरसंचालनीयता (Interoperability) को इंडो-जर्मन डिजिटल संवाद के माध्यम से बढ़ावा दिया जाना चाहिये।

निष्कर्ष

भारत-जर्मनी संबंध रक्षा, प्रौद्योगिकी, जलवायु कार्रवाई और वैश्विक शासन में रणनीतिक गहराई प्राप्त कर रहे हैं। भले ही भू-राजनीति और व्यापार को लेकर मतभेद हों, यह साझेदारी प्रबल गतिशीलता प्रदर्शित करती है। सुदृढ़ आर्थिक एकीकरण और साझा मूल्य दोनों देशों को स्थिरीकरणकारी वैश्विक साझेदार बना सकते हैं।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने में भारत-जर्मनी सहयोग की भूमिका का मूल्यांकन कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. जर्मनी के चांसलर के भारत दौरे का प्रमुख महत्त्व क्या था?
इस दौरे ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने का संकेत दिया और रक्षा, प्रौद्योगिकी, जलवायु कार्रवाई तथा वैश्विक शासन में सहयोग को विस्तारित किया।

2. इस दौरे के मुख्य रक्षा परिणाम क्या हैं?
डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप, MILAN और तरंग शक्ति अभ्यासों में भागीदारी और ट्रैक 1.5 सुरक्षा संवाद की शुरुआत।

3. भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता भारत-जर्मनी संबंधों के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह व्यापार को बढ़ावा, निवेश को आकर्षित करने और सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं के माध्यम से चीन पर अधिक निर्भरता को कम करने में सहायता कर सकता है।

4. ग्रीन और सतत विकास साझेदारी (GSDP) क्या है?
यह एक ढाँचा है जिसके अंतर्गत जर्मनी 2030 तक प्रतिवर्ष 1 अरब यूरो भारत में जलवायु कार्रवाई, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास के लिये प्रतिबद्ध है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

प्रिलिम्स 

प्रश्न. ‘व्यापक-आधारयुक्त व्यापार और निवेश करार' (ब्रॉड-बेस्ड ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट/BTIA)' कभी-कभी समाचारों में भारत तथा निम्नलिखित में से किस एक के बीच बातचीत के संदर्भ में दिखाई पड़ता है। (2017)

(a) यूरोपीय संघ

(b) खाड़ी सहयोग परिषद

(c) आर्थिक सहयोग और विकास संगठन

(d) शंघाई सहयोग संगठन

उत्तर: A


मेन्स 

प्रश्न. ‘यूरोपीय प्रतिस्पर्द्धा की दुर्घटनाओं द्वारा अफ्रीका को कृत्रिम रूप से निर्मित छोटे-छोटे राज्यों में काट दिया गया।’ विश्लेषण कीजिये। (2013)

प्रश्न. किस सीमा तक जर्मनी को दो विश्व युद्धों का कारण बनने का ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है? समालोचनात्मक चर्चा कीजिये। (2015)

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