रैपिड फायर
भारत में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की कमी
- 14 Mar 2026
- 19 min read
भारत का उद्यम क्षेत्र अभूतपूर्व सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है क्योंकि कुशल साइबर सुरक्षा पेशेवरों की भारी कमी के कारण महत्त्वपूर्ण डिजिटल संपत्तियाँ तेज़ी से परिष्कृत साइबर हमलों के प्रति असुरक्षित हो गई हैं।
- प्रतिभा की कमी: भारत में साइबर सुरक्षा पेशेवरों की कमी एक गंभीर चुनौती है। वर्तमान में, जहाँ लगभग 3,80,000 पेशेवर कार्यरत हैं, वहीं उद्यमों में इनकी मांग 12 लाख से अधिक है। विशेष रूप से, क्लाउड, प्लेटफॉर्म और उद्यम जोखिम के गहन अनुभव की आवश्यकता वाले पदों में 30-40% तक की भारी कमी का अनुमान है, जिससे यह 'प्रतिभा की कमी' और भी अधिक गंभीर हो जाती है।
- यह कमी उन विशिष्ट क्षेत्रों में विशेष रूप से अधिक है, जो आधुनिक उद्यम की सुरक्षा के लिये अपरिहार्य हैं। इन क्षेत्रों में पहचान और पहुँच वास्तुकला, खतरे की खुफिया जानकारी, प्लेटफॉर्म सुरक्षा, विशेषाधिकार प्राप्त पहुँच प्रबंधन, डिजिटल फोरेंसिक्स और क्लाउड-नेटिव सुरक्षा सम्मिलित हैं।
- भर्ती प्रक्रिया में विस्तार: साइबर सुरक्षा क्षेत्र में अब भर्ती प्रक्रिया सबसे लंबी हो गई है, जिसमें औसतन 90 दिनों से अधिक का समय लगता है। इसके परिणामस्वरूप, नौकरी के प्रस्ताव स्वीकार करने की दर भी घट गई है, जो पहले के 80-85% से कम होकर लगभग 70% रह गई है।
- नेतृत्व का अभाव: नेतृत्व का अभाव एक ‘रणनीतिक शून्यता’ को जन्म देता है। लंबी अवधि तक पद रिक्त रहने के कारण खतरों की पहचान में देरी होती है, घटनाओं पर प्रतिक्रिया खंडित हो जाती है, निवारण की लागत बढ़ जाती है तथा अनुपालन में विलंब होता है।
- खतरों का बढ़ता दायरा: वर्ष 2025 की पहली छमाही में स्पाइवेयर हमलों में 273% की भारी वृद्धि देखी गई है। इन हमलों का मुख्य निशाना कॉर्पोरेट जगत के संवेदनशील सौदे, वित्तीय प्रवाह और बौद्धिक संपदा के ‘डेटा गोल्डमाइन’ हैं। इसके अतिरिक्त, पासवर्ड चुराने वाले मैलवेयर की संख्या में लगभग 18% की वृद्धि हुई, जो बढ़कर 111,281 तक पहुँच गई।
- डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) की एक रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच उद्यम एंडपॉइंट्स पर 265.52 मिलियन मैलवेयर डिटेक्शन दर्ज किये गए, जो लगभग 505 डिटेक्शन प्रति मिनट के बराबर है।
- संगठनात्मक अनुकूलन रणनीतियाँ: शोध से पता चलता है कि भारत में 92% वरिष्ठ आईटी सुरक्षा पेशेवर विशेषज्ञता और चौबीसों घंटे निगरानी के लिये सुरक्षा कार्यों की आउटसोर्सिंग करने या 'सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर एज़ अ सर्विस' (SOCaaS) मॉडल को अपनाने को प्राथमिकता देते हैं।
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