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राज्यसभा चुनाव

  • 19 Feb 2026
  • 69 min read

स्रोत: द हिंदू  

चर्चा में क्यों?  

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 10 राज्यों में राज्यसभा की 37 सीटों के लिये द्विवार्षिक चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया है।

राज्यसभा के बारे में मुख्य तथ्य क्या हैं? 

  • राज्यसभा: राज्यों की परिषद अर्थात् राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है। 
    • राज्यसभा में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि और भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत व्यक्ति शामिल होते हैं। 
  • संवैधानिक प्रावधान: संविधान का अनुच्छेद 80 राज्यसभा की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित करता है, जिसमें साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्य शामिल हैं । 
    • वर्तमान में सदन में 245 सदस्य हैं जिनमें से 233 सदस्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों (दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू एवं कश्मीर) का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा 12 मनोनीत सदस्य हैं। 
  • सीटों का आवंटन:  चौथी अनुसूची के अनुसार जनसंख्या के आधार पर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सीटें आवंटित की जाती हैं । 
  • पात्रता:  संविधान का अनुच्छेद 84 संसद की सदस्यता के लिये योग्यता निर्धारित करता है 
    • राज्यसभा के लिये पात्रता हेतु व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिये, तीसरी अनुसूची के अनुसार निर्वाचन आयोग द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञा लेनी चाहिये, उसकी आयु कम-से-कम 30 वर्ष होनी चाहिये और संसद द्वारा कानून के माध्यम से निर्धारित कोई अतिरिक्त योग्यता होनी चाहिये। 
  • कार्यकाल: राज्यसभा एक स्थायी सदन है और भंग नहीं किया जा सकता; इसके एक-तिहाई सदस्य प्रति दो वर्षों में सेवानिवृत्त होते हैं और प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। 
    • त्यागपत्र, मृत्यु अथवा अयोग्यता के कारण रिक्त हुई सीटों को भरने के लिये उपचुनाव आयोजित किये जाते हैं तथा निर्वाचित सदस्य केवल मूल कार्यकाल के शेष समय के लिये ही कार्य करता है। 
    • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिये निर्वाचित सदस्य केवल अपने पूर्ववर्ती के कार्यकाल के शेष समय के लिये ही कार्य करता है । 
  • सभापति: भारत के उपराष्ट्रपति सदन के पदेन सभापति के रूप में कार्य करते हैं ।

राज्यसभा की विशेष शक्तियाँ 

  • अनुच्छेद 249 के तहत यदि राज्यसभा ने उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम-से-कम दो-तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित संकल्प द्वारा घोषित किया है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद राज्य सूची में प्रगणित ऐसे विषय के संबंध में, जो उस संकल्प में विनिर्दिष्ट है, विधि बनाए तो जब तक वह संकल्प प्रवृत्त है, संसद के लिये उस विषय के संबंध में भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिये विधि बनाना विधिपूर्ण होगा। 
  • इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 312 के तहत, राज्यसभा के पास समान दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता के साथ नवीन अखिल भारतीय सेवाओं (जो संघ और राज्यों दोनों के लिये साझा हों) के सृजन की प्रक्रिया शुरू करने का अनन्य अधिकार है। 
  • विधायी कार्यों के अतिरिक्त, राज्यसभा आपातकाल के दौरान शासन की निरंतरता सुनिश्चित करती है। 
    • अनुच्छेद 352, 356 और 360 के तहत यदि आपातकाल की उद्घोषणा उस समय की जाती है जब लोकसभा भंग हो, तो राज्यसभा के पास उस उद्घोषणा को अनुमोदित करने और अवर सदन के पुनर्गठन तक उसे प्रभावी रखने की शक्ति होती है।

चुनाव प्रक्रिया 

  • चुनाव प्रणाली: सदस्यों का चुनाव राज्यों एवं संघशासित क्षेत्रों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अंतर्गत अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। 
    • इस प्रणाली में विधायक (MLA) किसी एक प्रत्याशी को मत देने के स्थान पर मतपत्र पर प्रत्याशियों को अपनी वरीयता के क्रम (1, 2, 3 आदि) में अंकित करते हैं। 
      • निर्वाचित घोषित होने हेतु प्रत्याशी को निर्धारित निर्वाचन कोटा प्राप्त करना अनिवार्य होता है। 
      • यदि कोई प्रत्याशी आवश्यक कोटा से अधिक मत प्राप्त कर लेता है, तो अधिशेष मतों को द्वितीयक वरीयता के अनुपात में अगले प्रत्याशी को हस्तांतरित किया जाता है। 
    • यदि सभी रिक्त स्थान नहीं भरते, तो न्यूनतम मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशी को बाहर कर दिया जाता है तथा उसके मत शेष प्रत्याशियों में आगामी वरीयताओं के आधार पर पुनर्वितरित किये जाते हैं। 
  • निर्वाचक मंडल: केवल राज्यों एवं संघशासित क्षेत्रों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (MLAs) ही निर्वाचन में भाग लेते हैं। 
    • वर्ष 2003 से पूर्व: प्रत्याशी को उसी राज्य का निवासी होना अनिवार्य था, जहाँ से वह चुनाव लड़ रहा हो। 
    • वर्ष 2003 के पश्चात: प्रत्याशी भारत के किसी भी संसदीय चुनाव क्षेत्र का मतदाता हो सकता है। यह प्रावधान लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा अधिवास संबंधी अनिवार्यता हटाए जाने के परिणामस्वरूप लागू हुआ। 
  • ‘ओपन बैलेट’ प्रणाली: राजनीतिक दलों से संबद्ध विधायकों के लिये मतदान पूर्णतः गोपनीय नहीं होता।  
    • प्रत्येक दल का विधायक अपना चिह्नित मतपत्र मतपेटी में डालने से पूर्व दल के अधिकृत एजेंट को प्रदर्शित करता है, जिससे क्रॉस-वोटिंग तथा धनबल के प्रभाव को निरुत्साहित किया जा सके। 
      • निर्दलीय विधायक अपना मतपत्र किसी को प्रदर्शित नहीं करते। 
  • दल-बदल निरोधक प्रावधान: उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्यसभा के चुनाव में दल के व्हिप के विरुद्ध मतदान करने पर संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के अंतर्गत अयोग्यता लागू नहीं होती। 
    • हालाँकि, संबंधित राजनीतिक दल अनुशासनात्मक कार्रवाई (निलंबन अथवा निष्कासन) कर सकता है, किंतु विधायक अपनी विधानसभा सदस्यता बनाए रखता है। 
  • नोटा: सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2018 में (शैलेश मनुभाई परमार बनाम भारत संघ मामले में) राज्यसभा चुनावों के लिये ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ (NOTA) विकल्प को निरस्त कर दिया था। 
    • नोटा आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत तथा एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली की मूल भावना को निष्प्रभावी कर देता है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 

1. राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन कैसे होता है?
राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित विधायकों (MLA) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व की पद्धति के अंतर्गत एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली के माध्यम से चुने जाते हैं।

2. राज्यसभा की अधिकतम तथा वर्तमान सदस्य संख्या क्या है?
अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250   निर्धारित की गई है, जबकि वर्तमान सदस्य संख्या 245 है, जिनमें से 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है।

3. राज्यसभा चुनावों में खुली मतपत्र प्रणाली का उद्देश्य क्या है?
यह व्यवस्था वर्ष 2003 में लागू की गई तथा कुलदीप नायर (2006) मामले में इसे वैध ठहराया गया। इसका उद्देश्य दल-बदल की प्रक्रिया एवं भ्रष्टाचार को रोकना है, जिसके लिये राजनीतिक दलों के विधायकों को अपने अधिकृत एजेंट को मतपत्र दिखाना आवश्यक होता है।

4. क्या दलबदल विरोधी कानून राज्यसभा चुनावों पर लागू होता है?
नहीं। राज्यसभा चुनाव में दल के प्रत्याशी के विरुद्ध मतदान करने पर दसवीं अनुसूची के अंतर्गत अयोग्यता नहीं होती, यद्यपि संबंधित राजनीतिक दल अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।

5. संविधान के अंतर्गत राज्यसभा की विशेष शक्तियाँ क्या हैं?
राज्यसभा संसद को राज्य सूची के विषयों पर विधि निर्माण हेतु अधिकृत कर सकती है (अनुच्छेद 249), अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन की अनुमति दे सकती है (अनुच्छेद 312) तथा लोकसभा के विघटन की स्थिति में आपातकालीन उद्घोषणाओं को अनुमोदित कर सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स

प्रश्न. राज्यसभा की लोकसभा के समान शक्तियाँ किस क्षेत्र में हैं? (2020)

(a) नई अखिल भारतीय सेवाएँ गठित करने के विषय में

(b) संविधान में संशोधन करने के विषय में

(c) सरकार को हटाने के विषय में

(d) कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत करने के विषय में

उत्तर: (b)

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2016) 

  1. लोकसभा में लंबित कोई विधेयक उसके सत्रावसान पर व्यपगत (लैप्स) हो जाता है।
  2. राज्यसभा में लंबित कोई विधेयक, जिसे लोकसभा ने पारित नहीं किया है, लोकसभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होगा।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये: 

(a) केवल 1 

(b) केवल 2 

(c) 1 और 2 दोनों 

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (B)

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2015)

  1. राज्यसभा के पास धन विधेयक को अस्वीकार करने या संशोधन करने का कोई अधिकार नहीं है।  
  2. राज्यसभा अनुदान की मांगों पर मतदान नहीं कर सकती है।  
  3. राज्यसभा वार्षिक वित्तीय विवरण पर चर्चा नहीं कर सकती है। 

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1  

(b) केवल 1 और 2  

(c) केवल 2 और  3  

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) 

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