उत्तराखंड Switch to English
उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने राज्य में अवैध जुआ और सट्टेबाज़ी की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिये उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026 को मंजूंरी दे दी है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य औपनिवेशिक काल के सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 को अधिक कड़े प्रावधानों और दंड के साथ प्रतिस्थापित करना है।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: यह विधेयक राज्य में अवैध जुआ, सट्टेबाज़ी नेटवर्क और जुआ घरों को नियंत्रित करने के लिये अधिक कड़े कानूनी प्रावधानों तथा सख्त दंड का प्रावधान करता है।
- यह कानून सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 का स्थान लेगा, जिसे आधुनिक सट्टेबाज़ी और संगठित द्यूत गतिविधियों से निपटने में पुराना तथा अप्रभावी माना जाता था।
- जुआ खेलने पर दंड:
- सड़कों या गलियों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने पर 3 महीने तक का कारावास या ₹5,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- किसी आवास के अंदर जुआ गतिविधियों का आयोजन करने पर 2 वर्ष तक का कारावास या ₹10,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
- जुआ घर (गैंबलिंग डेन) चलाने पर 5 वर्ष तक का कारावास और ₹1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है, जबकि संगठित सट्टेबाजी नेटवर्क को 3–5 वर्ष तक का कारावास तथा ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
- प्रवर्तन शक्तियाँ: यह विधेयक पुलिस को जुआ गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के लिये अधिक अधिकार देता है, जिसमें छापेमारी, गिरफ्तारी और सट्टेबाज़ी से जुड़े अवैध संपत्तियों की ज़ब्ती शामिल है।
- यह कानून भौतिक जुआ घरों के साथ-साथ आधुनिक संगठित सट्टेबाज़ी नेटवर्क दोनों को अपने दायरे में लाता है, जिससे व्यापक नियामक व्यवस्था सुनिश्चित होती है।
- मुख्य फोकस: सरकार का उद्देश्य जुआ गतिविधियों से जुड़े सामाजिक मुद्दों जैसे आर्थिक संकट, अपराध और शोषण को कम करना है।
- महत्त्व: प्रस्तावित कानून राज्य में कानून प्रवर्तन को मज़बूत करने, संगठित सट्टेबाज़ी गिरोहों पर नियंत्रण लगाने और जुए से जुड़ी सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं को दूर करने का प्रयास करता है।
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और पढ़ें: ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम, 2025 |

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
बालेंद्र शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने के लिये तैयार
चर्चा में क्यों?
नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में 35 वर्षीय संरचनात्मक अभियंता (स्ट्रक्चरल इंजीनियर) और पूर्व रैपर बालेंद्र शाह (जिन्हें लोकप्रिय रूप से बालेन के नाम से जाना जाता है) नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।
मुख्य बिंदु:
- निर्णायक जनादेश: राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए प्रतिनिधि सभा की 165 प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों में से 125 सीटें जीतीं। अनुमान है कि 275 सदस्यीय संसद में पार्टी को दो-तिहाई बहुमत प्राप्त होगा।
- ‘बालेन वेव’: बालेंद्र शाह ने झापा-5 में अपने पारंपरिक गढ़ में अनुभवी राजनेता और चार बार के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को लगभग 50,000 मतों के अंतर से पराजित किया।
- ऐतिहासिक उपलब्धियाँ: बालेंद्र शाह मधेसी समुदाय से आने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे और साथ ही पारंपरिक राजनीति से बाहर के पहले व्यक्ति होंगे जो देश का नेतृत्व करेंगे।
- परिवर्तन का उत्प्रेरक: यह चुनाव वर्ष 2025 के अंत में युवाओं के नेतृत्व में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद हुआ, जिनमें भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और डिजिटल सेंसरशिप के खिलाफ आवाज़ उठाई गई थी। इन प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप पिछली सरकार भंग कर दी गई और एक अंतरिम प्रशासन स्थापित किया गया।
- RSP का उदय: वर्ष 2022 में स्थापित इस पार्टी ने ‘जनरेशन चेंज’ के नारे के साथ चुनाव लड़ा, जिसमें तकनीकी-आधारित शासन (टेक्नोक्रेटिक गवर्नेंस), पारदर्शिता और आर्थिक पुनरुत्थान पर ज़ोर दिया गया।
- कूटनीतिक महत्त्व: यह जीत नेपाली कांग्रेस, CPN-UML और माओवादी दलों के बीच सत्ता के पारंपरिक परिवर्तन की राजनीति से एक बड़ा बदलाव दर्शाती है।
- मुख्य नीतिगत लक्ष्य: नेपाल की GDP को 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने और प्रति व्यक्ति आय को 3,000 डॉलर तक दोगुना करने का संकल्प है।
- रोज़गार: युवाओं के बड़े पैमाने पर विदेश पलायन को रोकने के लिये पाँच वर्षों में 1.2 मिलियन नौकरियाँ सृजित करने की प्रतिबद्धता है।

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
WHO: चिली अमेरिका महाद्वीप का पहला कुष्ठ रोग मुक्त देश
चर्चा में क्यों?
एक ऐतिहासिक जन-स्वास्थ्य उपलब्धि के रूप में चिली आधिकारिक तौर पर अमेरिका क्षेत्र का पहला देश बन गया है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कुष्ठ रोग (हैनसेन रोग) को जन-स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के लिये प्रमाणित किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- WHO द्वारा सत्यापन: यह घोषणा 10 मार्च, 2026 को एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय आयोग द्वारा की गई कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद की गई।
- क्षेत्रीय उपलब्धि: चिली अमेरिका क्षेत्र (PAHO/WHO) का पहला देश है जिसने यह उपलब्धि हासिल की है, जिससे ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के लिये एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण स्थापित हुआ है।
- उन्मूलन की परिभाषा: WHO के अनुसार, उन्मूलन का अर्थ है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति 10,000 आबादी पर 1 से कम मामलों की प्रचलन दर होना।
- निरंतर प्रयास: यह सत्यापन कई वर्षों तक चले मज़बूत निगरानी तंत्र, शीघ्र निदान और चिली की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से प्रदान की जाने वाली निशुल्क बहु-औषधि उपचार (MDT) के परिणामस्वरूप संभव हुआ।
- वैश्विक कुष्ठ रोग रणनीति (2021–2030): इसका लक्ष्य ‘टुवर्ड्स ज़ीरो लेप्रोसी’ है, जिसमें शून्य संक्रमण, शून्य रोग और शून्य कलंक/भेदभाव पर ज़ोर दिया गया है।
- जन-स्वास्थ्य अवसंरचना की पुष्टि: चिली की सफलता यह दर्शाती है कि कुष्ठ रोग सेवाओं को सामान्य प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में एकीकृत करना कितना प्रभावी हो सकता है।
- कलंक में कमी: प्रमाणीकरण 'कुष्ठरोगी' शब्द से जुड़े प्राचीन सामाजिक कलंक को मिटाने में सहायता करता है, जिससे मानवाधिकारों को बढ़ावा मिलता है।
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और पढ़ें: कुष्ठ रोग |


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