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जल जीवन मिशन 2.0: विस्तार और पुनर्गठन

  • 12 Mar 2026
  • 18 min read

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (JJM) को दिसंबर 2028 तक विस्तार देने की स्वीकृति प्रदान की है। JJM 2.0 का यह नया चरण, राष्ट्रीय प्राथमिकता को केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित रखने के स्थान पर सतत और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में अग्रसर करता है।

मुख्य बिंदु:

  • विस्तारित समय-सीमा: सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में 100% संतृप्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मिशन की अवधि को अब दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
  • वित्तीय परिव्यय में वृद्धि: मिशन का कुल बजट बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • केंद्रीय सहायता: केंद्रीय वित्तीय सहायता बढ़ाकर 3.59 लाख करोड़ रुपये कर दी गई है, जो वर्ष 2019 के मूल आवंटन की तुलना में 1.51 लाख करोड़ रुपये अधिक है।
  • संरचनात्मक सुधार: मिशन के क्रियान्वयन को इस प्रकार पुनर्गठित किया जा रहा है कि ‘अवसंरचना-केंद्रित’ मॉडल से आगे बढ़कर ‘उपयोगिता-आधारित सेवा वितरण’ दृष्टिकोण को अपनाया जा सके।
  • JJM 2.0 के अंतर्गत नई पहल: दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये पुनर्गठित मिशन के तहत अनेक शासन तथा डिजिटल सुधार लागू किये जा रहे हैं-
    • सुजलम भारत डिजिटल ढाँचा : एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक गाँव को एक विशिष्ट सुजल गाँव/सेवा क्षेत्र ID प्रदान की जाएगी। इससे जल स्रोत से लेकर प्रत्येक घरेलू नल तक की संपूर्ण आपूर्ति शृंखला का मानचित्रण संभव हो सकेगा।
    • जल अर्पण पहल: सामुदायिक स्वामित्व को सुदृढ़ करने के लिये ग्राम पंचायतों तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को जल योजनाओं के संचालन और हस्तांतरण की प्रक्रिया में औपचारिक रूप से सम्मिलित किया जाएगा।
    • हर घर जल प्रमाणन: कोई भी ग्राम पंचायत स्थानीय स्तर पर पर्याप्त संचालन एवं रख-रखाव (O&M) व्यवस्था सुनिश्चित करने के पश्चात ही स्वयं को ‘हर घर जल’ के रूप में प्रमाणित कर सकेगी।
    • जल उत्सव: यह एक वार्षिक सामुदायिक-नेतृत्व वाला कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य ग्राम स्तर पर जल प्रणालियों के कार्यनिष्पादन की समीक्षा करना तथा जल स्थिरता को प्रोत्साहित करना है।
  • वर्तमान प्रगति और प्रभाव: मार्च 2026 तक, वर्ष 2019 में मिशन के आरंभ के बाद से उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है-
    • कवरेज में वृद्धि: नल के जल कनेक्शन वर्ष 2019 में 17% (3.23 करोड़) से बढ़कर अब ग्रामीण परिवारों के लगभग 81.6% (15.80 करोड़) तक पहुँच चुके हैं।

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