रैपिड फायर
DRDO ने गगनयान के ड्रोग पैराशूट का परीक्षण किया
भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ने एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (TBRL) के ‘रेल ट्रेक रॉकेट स्लेड’ केंद्र में गगनयान कार्यक्रम के लिये पैराशूट का क्वालीफिकेशन स्तर का लोड परिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
- RTRS की क्षमताएँ: रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) एक अत्यंत उन्नत, गतिशील, स्थल-आधारित परीक्षण सुविधा है, जिसका व्यापक रूप से उच्च-गति एयरोडायनामिक और बैलिस्टिक मूल्यांकनों के लिये उपयोग किया जाता है।
- ड्रोग पैराशूट का महत्त्व: यह परीक्षण क्रू मॉड्यूल के सुरक्षित अवतरण और पुनर्प्राप्ति को सुनिश्चित करने के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है और यह भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की ओर प्रगति को दर्शाता है।
- यह मुख्य ब्रेक के रूप में कार्य करता है, क्रू मॉड्यूल को स्थिर और धीमा करता है, ताकि मुख्य पैराशूट खुलने से पहले अंतरिक्ष यात्रियों का सुरक्षित जल अवतरण सुनिश्चित किया जा सके।
- अधिकतम उड़ान स्थितियों से भी अधिक लोड पर परीक्षण करने से पैराशूट के डिज़ाइन में मौजूद अतिरिक्त सुरक्षा मार्जिन का प्रमाण मिलता है।
गगनयान:
- परिचय: यह भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य 3 अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी. ऊँचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 3 दिन के लिये भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है।
- इस मिशन में प्रमुख परीक्षण शामिल हैं जैसे कि इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT), पैड एबॉर्ट टेस्ट (PAT) और टेस्ट व्हीकल (TV) उड़ानें, जो मानवयुक्त मिशन से पहले सुरक्षा प्रणालियों की पुष्टि के लिये किये जाते हैं।
- मिशन के चरण: इसमें पहले मानवरहित परीक्षण मिशन होंगे, जिसके बाद पहला मानवयुक्त मिशन लॉन्च किया जाएगा, जिसकी उम्मीद प्रारंभिक 2027 में है।
- गगनयान के लिये अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण: भारत के गगनयान अंतरिक्ष यात्री नामित हैं: ग्रुप कैप्टन प्रसांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला। इनका प्रारंभिक प्रशिक्षण रूस में पूर्ण हो चुका है तथा वर्तमान में वे भारत में मिशन-विशिष्ट प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
- अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिये प्रमुख तकनीकें: ह्यूमन-रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3), जो ISRO के LVM3 रॉकेट का संशोधित संस्करण है, को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी. ऊँचाई वाले लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक सुरक्षित रूप से ले जा सके। इसमें सॉलिड, लिक्विड और क्रायोजेनिक स्टेज का ऐसा संयोजन है जो मानव सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
- HLVM3 में एक क्रू एस्केप सिस्टम (CES) शामिल है, जिसमें उच्च-बर्न-रेट मोटर्स हैं, जो लॉन्च के दौरान आपात स्थिति में सुरक्षित एबॉर्ट की सुविधा प्रदान करते हैं।
- ऑर्बिटल मॉड्यूल में दो मुख्य घटक शामिल हैं:
- क्रू मॉड्यूल: यह अंतरिक्ष यात्रियों के लिये दबावयुक्त, पृथ्वी-समान वातावरण प्रदान करता है और सुरक्षित पुनः प्रवेश सुनिश्चित करता है।
- सर्विस मॉड्यूल: यह ऑर्बिट में मिशन का समर्थन करता है, जिसमें प्रोपल्शन, पावर और थर्मल नियंत्रण प्रणालियाँ शामिल हैं।
रैपिड फायर
विश्व सामाजिक न्याय दिवस 2026
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने 20 फरवरी, 2026 को विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें राष्ट्र की संवैधानिक प्रतिबद्धता एवं सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय के साथ-साथ स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व को दोहराया गया।
विश्व सामाजिक न्याय दिवस
- परिचय: यह प्रत्येक वर्ष 20 फरवरी को मनाया जाता है और यह संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक मंच है, जो गरीबी उन्मूलन, योग्य रोज़गार, लैंगिक समानता तथा सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देता है।
- वर्ष 2026 का विषय, "सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय के प्रति नवीनीकृत प्रतिबद्धता", इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की तीव्र आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- शुरुआत: इसका आधार वर्ष 1995 के कोपेनहेगन घोषणापत्र में है और इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2007 में घोषित किया गया था, जबकि इसका पहला आयोजन वर्ष 2009 में हुआ।
सामाजिक न्याय के स्तंभ:
- मुख्य संस्थाएँ:
- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO): योग्य रोज़गार एजेंडा के लिये।
- संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामले विभाग (UNDESA): नीति एकीकरण के लिये।
- सिविल सोसाइटी संगठन: सामाजिक न्याय को आर्थिक, श्रम, जलवायु और डिजिटल रणनीतियों में शामिल करने का समर्थन करते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने 10 जून, 2008 को सर्वसम्मति से समान वैश्वीकरण के लिये सामाजिक न्याय पर घोषणापत्र अपनाया।
- SDG से अनुरूपता: यह प्रत्यक्ष रूप से SDG 1 (गरीबी उन्मूलन), SDG 8 (उचित रोज़गार) और SDG 10 (असमानताओं में कमी) का समर्थन करने पर केंद्रित है।
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और पढ़ें: विश्व सामाजिक न्याय दिवस 2025 |
प्रारंभिक परीक्षा
ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट
चर्चा में क्यों?
ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) ने पिछले 2.5 दशकों में एक वैकल्पिक गेमिंग घटक से विकसित होकर—जिसे मूल रूप से 1999 में एनवीडिया द्वारा GeForce 256 के रूप में वीडियो गेम ग्राफिक्स को बेहतर बनाने के लिये विकसित किया गया था—डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्य अवसंरचना का रूप ले लिया है।
- GPU अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के लिये अनिवार्य हो गया है, क्योंकि इसका विशेष आर्किटेक्चर विशाल पैरेलल प्रोसेसिंग के लिये डिज़ाइन किया गया है।
ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट क्या है?
- परिचय: GPU एक अत्यंत शक्तिशाली संख्यात्मक प्रोसेसर है, जिसे कई सरल गणनाएँ समानांतर (सिमल्टेनियस) रूप से करने के लिये बनाया गया है। CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) के विपरीत, जो कुछ जटिल कार्यों को तेज़ी से टास्क-स्विचिंग के साथ करता है, GPU बड़े और दोहराए जाने वाले कार्यभार में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है।
- एक 1920x1080 स्क्रीन में प्रत्येक फ्रेम में 2.07 मिलियन पिक्सल होते हैं; 60 फ्रेम प्रति सेकंड की गति से, GPU प्रति सेकंड 120 मिलियन से अधिक पिक्सल अपडेट करता है, जहाँ हर पिक्सल का रंग प्रकाश, टेक्सचर, शैडो और सामग्री की विशेषताओं पर आधारित होता है।
- GPU का कार्यप्रणाली: किसी दृश्य को रेंडर करने के लिये वीडियो गेम GPU को त्रिभुजों (triangles) से बने ऑब्जेक्ट्स की सूची भेजता है, जिसे GPU रेंडरिंग पाइपलाइन नामक चार-चरणीय प्रक्रिया के माध्यम से संसाधित करता है।
- वर्टेक्स प्रोसेसिंग: मैट्रिक्स गणित का उपयोग करके यह निर्धारित करना कि प्रत्येक त्रिभुज के वर्टेक्स स्क्रीन (जैसे– ऑब्जेक्ट को घुमाना, कैमरा परिप्रेक्ष्य लागू करना) पर कहाँ दिखाई देंगे।
- रैस्टराइज़ेशन: त्रिभुज की ज्यामिति को पिक्सल उम्मीदवारों में बदलना, यह तय करना कि कौन-से पिक्सल प्रत्येक त्रिभुज द्वारा ढके जाएंगे।
- फ्रैगमेंट/पिक्सल शेडिंग: अंतिम रंग निर्धारित करना, जिसमें टेक्सचर देखना, प्रकाश की गणना, छायाएँ लागू करना और परावर्तन जोड़ना शामिल है।
- फ्रेम बफर में लेखन: तैयार पिक्सल के रंगों को उस मेमोरी क्षेत्र में सेव करना, जिसे डिस्प्ले सिस्टम पढ़कर स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है।
- शेडर और VRAM: शेडर छोटे प्रोग्राम होते हैं जो कई वर्टेक्स या पिक्सल पर समानांतर गणना करते हैं, जिससे GPU बड़े पैमाने पर डेटा, जैसे– 3D मॉडल, टेक्सचर और अंतिम इमेज को तेज़ी से पढ़ने और लिखने में सक्षम होता है।
- इस गति को प्राप्त करने के लिये GPUs विशेष उच्च-बैंडविड्थ VRAM (वीडियो RAM) का उपयोग करते हैं ताकि बड़े पैमाने पर डेटा को तेज़ी से स्थानांतरित किया जा सके, जबकि छोटे, तेज़ कैश एवं साझा मेमोरी यह सुनिश्चित करते हैं कि मेमोरी एक्सेस बाधा न बने, और बार-बार वही डेटा लाने की आवश्यकता कम हो।
- GPU की स्थिति: यह या तो मदरबोर्ड पर या ग्राफिक्स कार्ड पर एक अलग चिप के रूप में होता है। इस स्थिति में, यह VRAM चिप्स से घिरा हुआ एक हीट सिंक (heat sink) के नीचे स्थित होता है। लैपटॉप और स्मार्टफोन जैसे उपकरणों में यह अक्सर CPU के साथ एक ही 'सिस्टम-ऑन-अ-चिप' (SoC) डाई (die) पर एकीकृत होता है।
- GPU बनाम CPU: GPU और CPU दोनों ही समान सिलिकॉन ट्रांज़िस्टर और फैब्रिकेशन नोड्स (जैसे– 3-5 nm श्रेणी) का उपयोग करते हैं, परंतु उनका माइक्रोआर्किटेक्चर मौलिक रूप से भिन्न होता है। जहाँ CPU अपने डाई एरिया (Die Area) का बड़ा हिस्सा कॉम्प्लेक्स कंट्रोल लॉज़िक और कैश मेमोरी को समर्पित करता है, वहीं GPU का अधिकांश स्थान पैरेलल कंप्यूट ब्लॉक्स, चौड़े डेटा पाथ और मेमोरी कंट्रोलर्स के लिये आरक्षित होता है।
- परिणामस्वरूप, उच्च-स्तरीय GPU में अधिक ट्रांज़िस्टर होते हैं और वे आकार में भी बड़े होते हैं। डेटा के तीव्र स्थानांतरण के लिये, कुछ पैकेज में उच्च-बैंडविड्थ डीआरएएम को डाई (Die) के निकट रखा जाता है। इस आर्किटेक्चर के कारण GPU भारी मात्रा में डेटा को समानांतर रूप से कुशलतापूर्वक संसाधित करने में सक्षम होते हैं।
- वैश्विक अभिनेता: तकनीकी रूप से एनवीडिया का GPU बाज़ार पर एकाधिकार नहीं है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में इसका लगभग पूर्ण प्रभुत्व है। डिस्क्रीट GPU के बाज़ार में, जो पर्सनल कंप्यूटरों के लिये बेचे जाते हैं, एनवीडिया की हिस्सेदारी लगभग 90% है। शेष हिस्सेदारी एएमडी और इंटेल के पास है। डेटा केंद्रों में एनवीडिया की स्थिति और भी मज़बूत है। इसकी सफलता का मुख्य कारण इसके हार्डवेयर प्रदर्शन के साथ-साथ इसका क्यूडा (CUDA) सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म एनवीडिया के GPU पर सामान्य-उद्देशीय गणना को संभव बनाता है, जिससे डेटा सेंटर अनुप्रयोगों में इसका उपयोग बढ़ जाता है।
भारत द्वारा GPU विकसित करने की पहल
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) क्या है?
उत्तर: GPU एक समानांतर-प्रसंस्करण सेमीकंडक्टर चिप है, जिसे एक साथ हज़ारों गणनाएँ करने के लिये डिज़ाइन किया गया है। यह ग्राफिक्स रेंडरिंग और AI कार्यों के लिये विशेष रूप से उपयुक्त होता है।
प्रश्न: GPU CPU से कैसे अलग है?
उत्तर: CPU अपनी मज़बूत नियंत्रण प्रणाली के साथ जटिल और क्रमिक कार्यों के संचालन के लिये बेहतर है। इसके विपरीत, GPU में अधिक कोर होते हैं, जो दोहराए जाने वाले गणितीय कार्यों को एक साथ (समानांतर रूप से) निष्पादित करने के लिये डिज़ाइन किये गए हैं।
प्रश्न: CUDA क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: CUDA NVIDIA का स्वामित्व वाला पैरेलल कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है, जो GPU पर सामान्य प्रयोजन की प्रोसेसिंग को सक्षम बनाता है। इससे AI विकास में एक विशेष तकनीकी पारिस्थितिक तंत्र पर निर्भरता बढ़ती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
Q. विकास की वर्तमान स्थिति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है?
- औद्योगिक इकाइयों में विद्युत की खपत कम करना
- सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना
- रोगों का निदान
- टेक्स्ट से स्पीच में परिवर्तन
- विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1, 2, 3 और 5
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 4 और 5
(d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: (b)
चर्चित स्थान
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से बंद किया
ईरान ने हाल ही में "स्मार्ट कंट्रोल ऑफ द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़" नामक कोडनेम के तहत लाइव-फायर नौसैनिक अभ्यास करने के लिये होर्मुज़ जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की है।
- यह कदम जिनेवा में ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्त्ता के दूसरे दौर के साथ संगत है।
- भौगोलिक अवस्थिति: होर्मुज़ जलडमरूमध्य एक सँकरा चोकपॉइंट (55-95 किमी. चौड़ा) और सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जो उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित है।
- यह तेल से समृद्ध फारस की खाड़ी (पश्चिम) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर (पूर्व) से जोड़ता है। यह फारस की खाड़ी से खुले महासागर तक जाने का एकमात्र समुद्री मार्ग है।
- वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा: यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिये एक महत्त्वपूर्ण मार्ग है, जिसके सँकरे समुद्री परिवहन मार्गों से विश्व के लगभग 20% तेल और गैस का परिवहन होता है।
- सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख निर्यातक देश इस मार्ग पर निर्भर हैं जिसमें से 80% से अधिक तेल एशियाई बाज़ारों, विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की ओर जाता है।
- भारत पर प्रभाव: भारत के लिये आर्थिक हित व्यापक हैं, क्योंकि भारत के कच्चे तेल का लगभग 50% और प्राकृतिक गैस आयात का लगभग 60% प्रत्यक्ष रूप से इसी जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है।
- वैकल्पिक मार्ग: हालाँकि सऊदी अरब और यूएई जैसे प्रमुख उत्पादकों ने वैकल्पिक पाइपलाइन विकसित की हैं, लेकिन ये वैकल्पिक मार्ग सामान्यत: होर्मुज़ पारगमन मात्रा के केवल एक अंश को ही समायोजित कर सकते हैं।
- ऐतिहासिक उदाहरण: ईरान ने ऐतिहासिक रूप से जलडमरूमध्य का प्रयोग दबाव बनाने के लिये किया है, 1980 के दशक के ईरान-इराक "टैंकर वॉर" के दौरान और वर्ष 2012 में ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में इसे बंद करने की धमकी दी थी, हालाँकि पूर्ण रूप से इसे कभी भी बंद नहीं किया गया।
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और पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य |
रैपिड फायर
छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती
केंद्रीय गृह मंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती (19 फरवरी) पर उनका वंदन करते हुए हिंदवी स्वराज की स्थापना और राष्ट्र के सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के प्रति उनके आजीवन समर्पण को याद किया।
- छत्रपति शिवाजी महाराज: यह पुणे के पास शिवनेरी किले में 19 फरवरी, 1630 को जन्मे, मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक दूरदर्शी नेतृत्वकर्त्ता थे, जिन्होंने मुगल शासन का विरोध तथा स्वशासन का समर्थन किया।
- शिवाजी महाराज द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध: प्रतापगढ़ का युद्ध (1659), पवन खिंड का युद्ध (1660), सूरत का युद्ध (1664), पुरंदर का युद्ध (1665), सिंहगढ़ का युद्ध (1670) और संगमनेर का युद्ध (1679)।
- वाघ नख का उपयोग शिवाजी ने वर्ष 1659 में प्रतापगढ़ के युद्ध में अफज़ल खान को मारने के लिये किया था।
- हिंदवी स्वराज की परिकल्पना: कम उम्र में ही शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज (स्वशासन) की स्थापना का संकल्प लिया था, जो स्वदेशी संप्रभुता, नैतिक शासन और विदेशी प्रभुत्व से मुक्त राजनीतिक स्वतंत्रता की प्रगतिशील अवधारणा थी।
- उन्होंने स्वधर्म (अपना धर्म/कर्त्तव्य), स्वराज (स्वशासन) और स्वभाषा (अपनी भाषा) के मूल आदर्शों के इर्द-गिर्द जनता को सफलतापूर्वक एकजुट किया और प्रशासन की भाषाओं के रूप में फारसी के स्थान पर मराठी और संस्कृत को अपनाया।
- सैन्य और नौसैनिक प्रतिभा: उन्होंने समाज के सभी वर्गों से मिलकर एक विशाल, समावेशी सेना का गठन किया।
- उन्हें उनकी नवोन्मेषी गुरिल्ला युद्ध रणनीति (गनिमी कावा) के लिये विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, पश्चिमी तट की रक्षा के लिये एक मज़बूत बेड़ा और सिंधुदुर्ग जैसे तटीय किलों के निर्माण के कारण, उन्हें ‘भारतीय नौसेना के जनक’ के रूप में भी जाना जाता है।
- प्रगतिशील प्रशासन: उनकी कुशल शासनकला (जो उनके अदम्य साहस की तरह ही उल्लेखनीय थी) अष्टप्रधान मंडल (आठ मंत्रियों की परिषद) पर आधारित एक प्रगतिशील प्रशासन प्रणाली थी।
- शिवाजी ने प्रत्यक्ष रूप से किसानों से कर संग्रह करने की व्यवस्था शुरू की, जिससे बिचौलियों के शोषण को समाप्त किया जा सका।
- उपाधियाँ और महत्त्व: उन्हें छत्रपति, शककर्त्ता, क्षत्रिय कुलवंत और हिंदव धर्मोधारक जैसी उपाधियों से विभूषित किया गया था। ये उपाधियाँ उनकी संप्रभुता, महान योद्धा परंपरा और धर्म के संरक्षक के रूप में उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।
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