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DRDO ने गगनयान के ड्रोग पैराशूट का परीक्षण किया

  • 20 Feb 2026
  • 24 min read

स्रोत: पीआईबी

भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ने एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (TBRL) के ‘रेल ट्रेक रॉकेट स्लेड’ केंद्र में गगनयान कार्यक्रम के लिये पैराशूट का क्वालीफिकेशन स्तर का लोड परिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

  • RTRS की क्षमताएँ: रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) एक अत्यंत उन्नत, गतिशील, स्थल-आधारित परीक्षण सुविधा है, जिसका व्यापक रूप से उच्च-गति एयरोडायनामिक और बैलिस्टिक मूल्यांकनों के लिये उपयोग किया जाता है।
  • ड्रोग पैराशूट का महत्त्व: यह परीक्षण क्रू मॉड्यूल के सुरक्षित अवतरण और पुनर्प्राप्ति को सुनिश्चित करने के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है और यह भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की ओर प्रगति को दर्शाता है।
    • यह मुख्य ब्रेक के रूप में कार्य करता है, क्रू मॉड्यूल को स्थिर और धीमा करता है, ताकि मुख्य पैराशूट खुलने से पहले अंतरिक्ष यात्रियों का सुरक्षित जल अवतरण सुनिश्चित किया जा सके।
    • अधिकतम उड़ान स्थितियों से भी अधिक लोड पर परीक्षण करने से पैराशूट के डिज़ाइन में मौजूद अतिरिक्त सुरक्षा मार्जिन का प्रमाण मिलता है।

गगनयान:

  • परिचय: यह भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य 3 अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी. ऊँचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 3 दिन के लिये भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है।
  • मिशन के चरण: इसमें पहले मानवरहित परीक्षण मिशन होंगे, जिसके बाद पहला मानवयुक्त मिशन लॉन्च किया जाएगा, जिसकी उम्मीद प्रारंभिक 2027 में है।
  • गगनयान के लिये अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण: भारत के गगनयान अंतरिक्ष यात्री नामित हैं: ग्रुप कैप्टन प्रसांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला। इनका प्रारंभिक प्रशिक्षण रूस में पूर्ण हो चुका है तथा वर्तमान में वे भारत में मिशन-विशिष्ट प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
  • अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिये प्रमुख तकनीकें: ह्यूमन-रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3), जो ISRO के LVM3 रॉकेट का संशोधित संस्करण है, को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी. ऊँचाई वाले लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक सुरक्षित रूप से ले जा सके। इसमें सॉलिड, लिक्विड और क्रायोजेनिक स्टेज का ऐसा संयोजन है जो मानव सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
    • HLVM3 में एक क्रू एस्केप सिस्टम (CES) शामिल है, जिसमें उच्च-बर्न-रेट मोटर्स हैं, जो लॉन्च के दौरान आपात स्थिति में सुरक्षित एबॉर्ट की सुविधा प्रदान करते हैं।
    • ऑर्बिटल मॉड्यूल में दो मुख्य घटक शामिल हैं:
      • क्रू मॉड्यूल: यह अंतरिक्ष यात्रियों के लिये दबावयुक्त, पृथ्वी-समान वातावरण प्रदान करता है और सुरक्षित पुनः प्रवेश सुनिश्चित करता है।
      • सर्विस मॉड्यूल: यह ऑर्बिट में मिशन का समर्थन करता है, जिसमें प्रोपल्शन, पावर और थर्मल नियंत्रण प्रणालियाँ शामिल हैं।

और पढ़ें: गगनयान मिशन के लिये इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट

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