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ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से बंद किया

  • 20 Feb 2026
  • 15 min read

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया

ईरान ने हाल ही में "स्मार्ट कंट्रोल ऑफ द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़" नामक कोडनेम के तहत लाइव-फायर नौसैनिक अभ्यास करने के लिये होर्मुज़ जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की है।

  • यह कदम जिनेवा में ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्त्ता के दूसरे दौर के साथ संगत है।
  • भौगोलिक अवस्थिति: होर्मुज़ जलडमरूमध्य एक सँकरा चोकपॉइंट (55-95 किमी. चौड़ा) और सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जो उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित है।
    • यह तेल से समृद्ध फारस की खाड़ी (पश्चिम) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर (पूर्व) से जोड़ता है। यह फारस की खाड़ी से खुले महासागर तक जाने का एकमात्र समुद्री मार्ग है।
  • वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा: यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिये एक महत्त्वपूर्ण मार्ग है, जिसके सँकरे समुद्री परिवहन मार्गों से विश्व के लगभग 20% तेल और गैस का परिवहन होता है।
    • सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख निर्यातक देश इस मार्ग पर निर्भर हैं जिसमें से 80% से अधिक तेल एशियाई बाज़ारों, विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की ओर जाता है।
  • भारत पर प्रभाव: भारत के लिये आर्थिक हित व्यापक हैं, क्योंकि भारत के कच्चे तेल का लगभग 50% और प्राकृतिक गैस आयात का लगभग 60% प्रत्यक्ष रूप से इसी जलडमरूमध्य से होकर गुरता है।
  • वैकल्पिक मार्ग: हालाँकि सऊदी अरब और यूएई जैसे प्रमुख उत्पादकों ने वैकल्पिक पाइपलाइन विकसित की हैं, लेकिन ये वैकल्पिक मार्ग सामान्यत: होर्मुज़ पारगमन मात्रा के केवल एक अंश को ही समायोजित कर सकते हैं।
  • ऐतिहासिक उदाहरण: ईरान ने ऐतिहासिक रूप से जलडमरूमध्य का प्रयोग दबाव बनाने के लिये किया है, 1980 के दशक के ईरान-इराक "टैंकर वॉर" के दौरान और वर्ष 2012 में ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में इसे बंद करने की धमकी दी थी, हालाँकि पूर्ण रूप से इसे कभी भी बंद नहीं किया गया।

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