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भारतीय अर्थव्यवस्था

वर्षांत समीक्षा-2025: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय

प्रिलिम्स के लिये: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY), इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), इथेनॉल, कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG), सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति (HELP), 2016, सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR), व्यापार घाटा, महंगाई, होर्मुज़ जलडमरूमध्य, चाबहार बंदरगाह, महत्त्वपूर्ण खनिज, लिथियम, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA), राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM), स्माल मॉड्यूलर रिएक्टर            

मेन्स के लिये: वर्ष 2025 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की मुख्य उपलब्धियाँ, भारत के लिये  ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने में चुनौतियाँ और आगे की राह।

स्रोत: पी.आई.बी

चर्चा में क्यों?

वर्ष 2025 में, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने किफायती और सतत ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिये एक बहुआयामी रणनीति लागू की, जिसमें अवसंरचना का विस्तार, स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देना तथा ऊर्जा सुरक्षा के लिये रणनीतिक भंडारों को सुदृढ़ करना शामिल था।

  • ऊर्जा सुरक्षा का तात्पर्य किसी राष्ट्र के लिये किफायती मूल्य पर ऊर्जा स्रोतों की निर्बाध उपलब्धता से है, जो उसकी आर्थिक स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सतत विकास को सुनिश्चित करती है।

सारांश

  • वर्ष 2025 में भारत ने अवसंरचना विस्तार, स्वच्छ ईंधनों और नियामक सुधारों को समेकित करते हुए एक बहुआयामी ऊर्जा रणनीति अपनाई
  • विविधीकरण के बावजूद, उच्च आयात निर्भरता, भू-राजनीतिक जोखिम और महत्त्वपूर्ण खनिजों की कमी प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
  • दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिये घरेलू उत्पादन, भंडारण सहित स्वच्छ ऊर्जा, खनिज आत्मनिर्भरता और भू-रणनीतिक कूटनीति आवश्यक है।

वर्ष 2025 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या रहीं?

  • स्वच्छ रसोई ईंधन की उपलब्धता: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के अंतर्गत लगभग 10.35 करोड़ लाभार्थियों तक पहुँच बनाई गई। वित्त वर्ष 2025-26 के लिये 25 लाख नए कनेक्शनों को स्वीकृति दी गई, जबकि सरल ‘वंचना घोषणा’ प्रक्रिया ने नामांकन को आसान बनाया।
    • PMUY लाभार्थियों को ₹300 प्रति सिलेंडर की सब्सिडी से वित्त वर्ष 2025-26 में औसत रिफिल खपत बढ़कर लगभग 4.85 प्रति वर्ष हो गई, जो LPG के सतत उपयोग को दर्शाती है।
  • मार्केटिंग अवसंरचना का विस्तार: 90,000 से अधिक खुदरा आउटलेट्स का डिजिटलीकरण किया गया, 8,400 से अधिक CNG स्टेशन और लगभग 1.57 करोड़ PNG कनेक्शन स्थापित किये गए। 25,429 किमी गैस पाइपलाइन परिचालन में है (अतिरिक्त 10,459 किमी पर कार्य प्रगति पर है)।
  • स्वच्छ गतिशीलता एवं ईंधन: 27,400 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किये गए। 4,000 एनर्जी स्टेशन बहु-ईंधन हब के रूप में नियोजित हैं, जिनमें से 1,064 पहले ही परिचालन में हैं।
  • गैस ग्रिड एवं टैरिफ सुधार: एकीकृत पाइपलाइन टैरिफ व्यवस्था (वन नेशन, वन ग्रिड, वन टैरिफ) लगभग 90% पाइपलाइनों को शामिल करती है, जिससे क्षेत्रीय लागत असमानताएँ कम हुई हैं।
  • जैव ईंधन एवं सतत विमानन ईंधन (SAF): इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2024-25 में इथेनॉल मिश्रण 19.24% तक पहुँच गया।   
  • अपस्ट्रीम सुधार: तेल क्षेत्र (विनियमन एवं विकास) संशोधन अधिनियम, 2025 तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम, 2025 लागू किये गए। हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति (HELP), 2016 के तहत 3.78 लाख वर्ग किमी से अधिक क्षेत्रफल वाले ब्लॉकों का आवंटन किया गया, जिससे लगभग 4.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रतिबद्ध निवेश आकर्षित हुए।
  • सामरिक भंडार: सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) की चरण-II सुविधाओं को आगे बढ़ाया गया, जिससे आपूर्ति आघातों के विरुद्ध ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत हुई।
    • भारत की SPR सुविधाएँ विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलुरु (कर्नाटक) और पडूर (कर्नाटक) में स्थित हैं। चरण-II में चांदीखोल (ओडिशा) में एक नई सुविधा तथा पडूर में विस्तार शामिल है।

भारत के लिये ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

  • उच्च और बढ़ती आयात निर्भरता: भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85% और प्राकृतिक गैस की लगभग 50% आवश्यकता आयात से पूरी करता है। वित्त वर्ष 2024-2025 में घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन घटकर 28.7 मिलियन टन (MT) रह गया (वित्त वर्ष 2024 में 29.4 MT से), जिससे वैश्विक मूल्य आघातों के प्रति गंभीर संवेदनशीलता उत्पन्न होती है।
    • इस जोखिम का उदाहरण वर्ष 2022 के यूक्रेन संकट में देखने को मिला, जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 130 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई, जिससे भारत का व्यापार घाटा और मुद्रास्फीति गंभीर रूप से बढ़ गई।
  • भू-राजनीतिक संवेदनशीलता: रूस से भारत द्वारा तेल खरीद के कारण गंभीर आर्थिक प्रभाव सामने आए, जिनमें नायरा एनर्जी पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध, रूसी कंपनियों पर अमेरिका के प्रतिबंध तथा अमेरिका द्वारा लगाया गया 25% टैरिफ और अधिभार शामिल हैं।
    • भारत के कच्चे तेल आयात का अधिकांश भाग अस्थिर मध्य पूर्व क्षेत्र से आता है, जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे चोकपॉइंट्स से होकर गुजरता है और चाबहार बंदरगाह परियोजना के निलंबन जैसी बाधाओं का सामना करता है।
  • महत्त्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता: ऊर्जा संक्रमण के लिये आवश्यक लिथियम, कोबाल्ट और निकेल सहित 10 महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिये भारत 100% आयात-निर्भर है। यह स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रक्षा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों के लिये गंभीर जोखिम उत्पन्न करता है। चीन दुर्लभ मृदा प्रसंस्करण का 90% से अधिक, ग्रेफाइट प्रसंस्करण का 95% और परिष्कृत कोबाल्ट उत्पादन का 79% नियंत्रित करता है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना की बाधाएँ: जनवरी 2025 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता लगभग 217 GW तक पहुँच चुकी है, लेकिन ट्रांसमिशन में देरी, कॉरिडोर भीड़ तथा कमज़ोर माँग जैसी गंभीर सीमाओं का सामना करना पड़ रहा है।
    • बड़े पैमाने की सौर और पवन परियोजनाओं का 60% से अधिक केवल तीन राज्यों—गुजरात, राजस्थान तथा तमिलनाडु में केंद्रित है, जिससे अत्यधिक मौसमीय घटनाओं और युद्ध या हाइब्रिड खतरों जैसी भू-राजनीतिक तनावों के प्रति जोखिम बढ़ जाता है।
  • सामरिक पेट्रोलियम भंडार की अपर्याप्तता: भारत की कुल तेल भंडारण क्षमता और सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) मिलकर लगभग 77 दिनों की आवश्यकता को ही पूरा कर पाते हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की अनिवार्य 90-दिवसीय शर्त से 13 दिन कम है। भारत की परिमाणित भंडारण क्षमता केवल 39 मिलियन बैरल है, जो चीन के 550 मिलियन बैरल और जापान के 528 मिलियन बैरल की तुलना में बहुत कम है।
  • संसाधनों के लिये वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा: अफ्रीका व लैटिन अमेरिका में चीन के राज्य-समर्थित अनुबंध तथा यूरोपीय संघ की हाइड्रोजन आयात रणनीति महत्त्वपूर्ण खनिजों और भविष्य के ईंधनों के लिये वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा को और तीव्र कर देती हैं। चीन की साइनोपेक (Sinopec) और CNPC की तुलना में भारत के विदेशों में रणनीतिक अधिग्रहण सीमित हैं, जिससे इन ऊर्जा बाज़ारों में उसकी सौदेबाज़ी क्षमता कमज़ोर पड़ती है।

भारत का ऊर्जा स्रोत

  • पारंपरिक निर्भरता (2005 से पूर्व): कच्चे तेल के 70% से अधिक आयात पश्चिम एशिया से आते थे, मुख्यतः सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत और यूएई
  • प्रारंभिक विविधीकरण (2005-2015): आपूर्ति स्रोतों का विस्तार अफ्रीकी देशों (नाइजीरिया, अंगोला) और वेनेज़ुएला तक किया गया, हालाँकि पश्चिम एशिया अभी भी प्रमुख था (2011-12 में लगभग 60% हिस्सा)।
  • ईरान पर प्रतिबंधों का प्रभाव: वर्ष 2010 के बाद संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल आयात में तीव्र गिरावट आई, जो वर्ष 2011-12 में लगभग 11% से घटकर वर्ष 2010 के मध्य तक 7% से कम रह गया, हालाँकि वर्ष 2016 के बाद थोड़ी वृद्धि देखी गई।
  • वर्ष 2022 के बाद प्रमुख बदलाव: यूक्रेन संघर्ष के बाद, रूस भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्त्ता बन गया, इसका हिस्सा वर्ष 2021-22 में 2% से कम से बढ़कर वर्ष 2023-25 में लगभग 36% हो गया, जो महत्त्वपूर्ण मूल्य छूटों के कारण हुआ।
  • वर्तमान आयात मिश्रण: स्रोत अब अधिक संतुलित हैं: रूस (~35%), पश्चिम एशिया (40-45%), अफ्रीका (8-10%) और अमेरिका (10-12%)

भारत के लिये ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक उपाय क्या है?

  • घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना: तेल क्षेत्र (विनियमन एवं विकास) संशोधन अधिनियम, 2025 को पूरी तरह लागू करें, ताकि मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सके और फ्रंटियर बेसिनों जैसे कृष्णा-गोदावरी व  अंडमान द्वीप समूह में अन्वेषण के लिये मिशन अन्वेशन का विस्तार किया जा सके। इसके अतिरिक्त, मुंबई हाई जैसे परिपक्व क्षेत्रों में एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी (EOR) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके उत्पादन दरों में सुधार किया जाना चाहिये।
  • ऊर्जा आयातों का विविधीकरण: मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने के लिये भारत को नए आपूर्तिकर्त्ताओं जैसे गुयाना, ब्राज़ील और कज़ाकिस्तान के साथ दीर्घकालिक अनुबंध करना चाहिये तथा यदि प्रतिबंधों में छूट होती है तो रुपया-रियाल तंत्र के माध्यम से ईरानी आयात को पुनर्जीवित करना चाहिये।
    • साथ ही, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बायपास करने वाली पाइपलाइनों का उपयोग करना चाहिये, जैसे UAE की हबशान-फुजैरा पाइपलाइन और सऊदी अरामको की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, ताकि क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान आपूर्ति संबंधी संवेदनशीलता को कम किया जा सके।
  • भंडारण के साथ स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति प्रदान करना: नए सौर/पवन ऊर्जा प्रस्तावों में 4 घंटे की बैटरी भंडारण अनिवार्यता को एकीकृत करना और हाइड्रोजन-तैयार पाइपलाइन विकसित करते हुए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को बढ़ाना। 
    • इसके साथ ही, 2G/3G फीडस्टॉक का उपयोग करके वर्ष 2030 तक इथेनॉल मिश्रण को 30% तक बढ़ाना और शहरी गैस वितरण नेटवर्क में संपीड़ित बायोगैस मिश्रण जनादेश को लागू करना।
  • महत्त्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता का निर्माण: भारत को राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) को गति देनी चाहिये, PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से घरेलू शोधन क्षमता का निर्माण करना चाहिये और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने हेतु ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित करनी चाहिये। साथ ही, उसे दीर्घकालिक संसाधन सुरक्षा के लिये राष्ट्रीय भंडार स्थापित करना चाहिये और उन्नत पुनर्चक्रण के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिये।
  • भूरणीय ऊर्जा कूटनीति: सीमा पार नवीकरणीय ऊर्जा व्यापार के लिये अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG) पहल का समर्थन कीजिये। साथ ही, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक अनुकूलन बनाने के लिये अमेरिका, फ्राँस और रूस जैसे साझेदारों के साथ लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती करना।

निष्कर्ष:

वर्ष 2025 में भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति किफायत, विविधीकरण, स्थायित्व और रणनीतिक स्वायत्तता के बीच संतुलित दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है। जहाँ सुधारों, जैव-ईंधनों, गैस अवसंरचना और स्वच्छ परिवहन ने प्रणाली की मजबूती बढ़ाई है, वहीं आयात निर्भरता, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ, महत्त्वपूर्ण खनिजों की संवेदनशीलता और अपर्याप्त भंडारण क्षमता यह दर्शाती हैं कि व्यापक संरचनात्मक सुधारों और सक्रिय ऊर्जा कूटनीति की अब भी आवश्यकता है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. “ऊर्जा सुरक्षा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक महत्त्वपूर्ण भू-राजनीतिक चुनौती भी है।”

इस कथन की वर्ष 2025 में भारत की ऊर्जा नीतियों के संदर्भ में समालोचनात्मक समीक्षा कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. ऊर्जा सुरक्षा से क्या तात्पर्य है?
ऊर्जा सुरक्षा से तात्पर्य किफायती कीमतों पर ऊर्जा की निर्बाध उपलब्धता से है, जो आर्थिक स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सतत विकास के लिये आवश्यक है।

2. ऊर्जा आयात में विविधता लाने के बावजूद भारत इतना असुरक्षित क्यों है?
भारत अभी भी 85% कच्चे तेल का आयात करता है, भू-राजनीतिक बाधाओं का सामना करता है और आईईए मानदंडों की तुलना में पर्याप्त SPR क्षमता का अभाव है।

3. भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिये खनिजों पर निर्भरता एक प्रमुख कमजोरी क्यों है?
भारत स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्रों के लिये आवश्यक लिथियम और कोबाल्ट जैसे प्रमुख खनिजों के लिये 100% आयात पर निर्भर है, क्योंकि चीन वैश्विक प्रसंस्करण के 90% से अधिक को नियंत्रित करता है, जिससे आपूर्ति शृंखला में गंभीर जोखिम उत्पन्न होते हैं।

 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)  

प्रिलिम्स

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2019)

  1. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) भारत सरकार द्वारा स्थापित पहला नियामक निकाय है। 
  2. PNGRB के कार्यों में से एक गैस के लिये प्रतिस्पर्द्धी बाज़ार सुनिश्चित करना है। 
  3. PNGRB के फैसलों के खिलाफ अपील विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में की जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: b


प्रश्न. भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (IREDA) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?  (2015)

  1. यह एक पब्लिक लिमिटेड सरकारी कंपनी है। 
  2. यह एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c)


मेन्स

प्रश्न 1. "वहनीय (ऐफोर्डेबल), विश्वसनीय, धारणीय तथा आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच सतत् (सस्टेनबल) विकास लक्ष्यों (एस.डी.जी.) को प्राप्त करने के लिये अनिवार्य है।" भारत में इस संबंध में हुई प्रगति पर टिप्पणी कीजिये। (2018)


अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत की विदेश नीति का पुनर्समायोजन

प्रिलिम्स के लिये: H-1B, SCO, BRICS, भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारा (IMEC), OPEC, G7,  कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रा, चक्रवात दितवाह, क्वाड, INSTC, सेमीकंडक्टर, महत्त्वपूर्ण खनिज,  AI शिखर सम्मेलन।            

मेन्स के लिये: वर्ष 2025 में भारत के समक्ष आने वाली अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियाँ और भारत पर उनके प्रभाव। भविष्य में कूटनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कदम।

स्रोत: TH

चर्चा में क्यों?

वर्ष 2025 भारतीय विदेश नीति के लिये आघात और आश्चर्य का दौर बनकर उभरा, जब भारत को अनेक मोर्चों पर अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर उसने उल्लेखनीय कूटनीतिक सफलताएँ भी दर्ज कीं।

सारांश

  • भारत को अमेरिकी नीतियों में आए बदलावों, क्षेत्रीय अस्थिरता और पश्चिम एशिया के बढ़ते संघर्षों जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिससे रणनीतिक विश्वास और ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हुई।
  • इन चुनौतियों के बावजूद, भारत ने कनाडा के साथ संबंधों को पुनर्स्थापित करने, तालिबान के साथ व्यावहारिक संवाद शुरू करने और चीन के साथ मेल-मिलाप की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रगति की।
  • भारत का वर्तमान ध्यान 'बहुध्रुवीय कूटनीति' और 'मुद्दे-आधारित सहयोग' के माध्यम से अपनी वैश्विक स्थिति मज़बूत करने पर है। आंतरिक स्तर पर अपनी आर्थिक क्षमता (Resilience) बढ़ाने के साथ-साथ, आधुनिक व्यापार नीतियों और नए आर्थिक गलियारों के निर्माण जैसे वैश्विक एजेंडों का नेतृत्व कर रहा है।

वर्ष 2025 में भारत को किन कूटनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

  • संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंध: शुरुआती आशावाद के बावजूद, भारत को दंडात्मक टैरिफ (50% तक), रूसी तेल आयात को कम करने के लिये प्रतिबंधों से जुड़े दबाव (जैसे, नायरा एनर्जी) और H-1B , छात्र वीजा और निर्वासन पर प्रतिबंधात्मक उपायों का सामना करना पड़ा। 
    • ट्रंप के ऑपरेशन सिंदूर में मध्यस्थता करने, पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ बातचीत करने तथा पाकिस्तान के लिये F-16 लड़ाकू जेट के उन्नयन को मंजूरी देने के दावों ने सीमा पार आतंकवाद पर भारत के रुख को कमज़ोर तथा रणनीतिक विश्वास को कम किया।
  • क्षेत्रीय अस्थिरता: पहलगाम आतंकी हमले और 'ऑपरेशन सिंदूर' के कारण उपजे सैन्य तनाव, साथ ही पाकिस्तानी सेना प्रमुख द्वारा 'फील्ड मार्शल' के रूप में सत्ता के पूर्ण केंद्रीकरण ने द्विपक्षीय कूटनीति की संभावनाओं को भी समाप्त कर दिया।
    • भारत के लिये पड़ोसी देशों की परिस्थितियाँ भी चुनौतीपूर्ण रहीं, नेपाल में 'जेनरेशन जेड' (Gen-Z) के नेतृत्व वाले व्यापक जन-आंदोलन ने सत्ता पलट दी, तो वहीं बांग्लादेश में बढ़ती भारत-विरोधी भावना और अंतरिम सरकार के अधीन व्याप्त अस्थिरता ने नई रणनीतिक मुश्किलें खड़ी कर दीं।
  • पश्चिम एशिया में अस्थिरता: ईरान पर इज़रायल के हमलों की आलोचना करने में भारत की अनिच्छा ने दक्षिण अफ्रीकी संघ (SCO) और BRICS (ब्रिक्स) में असहजता उत्पन्न कर दी, जहाँ ईरान एक सदस्य है। साथ ही, इस संघर्ष ने भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारे (IMCE) को भी बाधित कर दिया, जिससे पश्चिम एशिया में भारत की संचार, व्यापार और क्षेत्रीय प्रभाव प्रभावित हुआ।
  • वैश्विक दक्षिणपंथी राजनीति का उदय: अमेरिका, यूरोप, जापान और चिली में देखी जा रही रूढ़िवादी, विदेश-विरोधी राजनीति की वैश्विक प्रवृत्ति ने एक कम पूर्वानुमानित और अधिक लेन-देन-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को जन्म दिया है, जो भारत की कूटनीतिक रणनीतियों के लिये चुनौती पेश करती है। इससे आव्रजन प्रतिबंध, विदेश-विरोधी भावना और रोजगार प्रतिस्पर्द्धा बढ़ सकती है, जिससे भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और अवसरों को खतरा उत्पन्न हो सकता है।
  • ऊर्जा और जलवायु नीति की दुविधाएँ: OPEC द्वारा तेल की अधिकता के कारण तेल की कीमतों में गिरावट ने नवीकरणीय ऊर्जा के लिये वैश्विक प्रयासों को कमज़ोर करने की धमकी दी है, एक ऐसा क्षेत्र जिसमें भारत का बड़ा निवेश और प्रतिबद्धताएँ हैं।
  • ऊर्जा और जलवायु संक्रमण की चुनौतियाँ: ओपेक (OPEC) द्वारा तेल की आपूर्ति में वृद्धि के कारण वैश्विक कीमतों में आई गिरावट ने नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ते प्रयासों के लिये संकट उत्पन्न कर दिया है। यह स्थिति विशेष रूप से भारत के लिये चिंताजनक है, क्योंकि भारत ने इस क्षेत्र में व्यापक निवेश किया है और अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ दोहराई हैं।

वर्ष 2025 में भारत की कूटनीतिक सफलताएँ क्या थीं?

  • कनाडा के साथ संबंधों में पुनःस्थापना: खालिस्तानी अलगाववादी की हत्या को लेकर उत्पन्न तनाव के बाद भारत–कनाडा संबंधों में सुधार एक प्रमुख कूटनीतिक उपलब्धि रही। भारत के प्रधानमंत्री की G7 आउटरीच के लिये यात्रा और कनाडा के नए प्रधानमंत्री के साथ उनकी वार्ता ने वीज़ा, राजनयिक कर्मचारियों और दूतों की बहाली को सुगम बनाया।
  • तालिबान के साथ सामरिक संवाद: उच्च-स्तरीय वार्ताओं के परिणामस्वरूप तालिबान के विदेश मंत्री की पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ दिल्ली की आधिकारिक यात्रा हुई। भारत ने तालिबान को अफगान दूतावास का अधिग्रहण करने की अनुमति दी और काबुल को 'शत्रु का शत्रु' के रूप में पुनः परिभाषित किया, जिससे पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच रणनीतिक लाभ उत्पन्न हुआ।
  • चीन के साथ संबंधों में सुधार: वर्ष 2025 में, भारत और चीन ने सावधानीपूर्वक पुनः जुड़ाव का अनुसरण किया, कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रा को पुनः आरंभ किया गया, वीज़ा और प्रत्यक्ष उड़ानों को बहाल किया और जलवैज्ञानिक डेटा साझाकरण को फिर से शुरू किया। भारत के प्रधानमंत्री की भेंट चीन के तियानजिन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन 2025 में चीन और रूस के राष्ट्रपतियों से हुई।
  • पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी का सुदृढ़ीकरण: भारत ने भूटान, श्रीलंका और मालदीव के साथ संबंधों को सफलतापूर्वक गहरा किया। एक उल्लेखनीय उपलब्धि चक्रवात दित्वाह के बाद श्रीलंका को भारत की 450 मिलियन अमरीकी डॉलर की सहायता राशि और त्वरित आपदा प्रतिक्रिया थी, जिसने इस क्षेत्र में एक विश्वसनीय प्रथम प्रतिक्रियादाता के रूप में इसकी प्रतिष्ठा को मज़बूत किया।

वर्ष 2025 में अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों के भारत पर क्या प्रभाव हैं?

  • सामरिक निश्चितता का क्षरण: सबसे बड़ा सामरिक प्रभाव यह था कि यह धारणा टूट गई कि अमेरिका एक पूर्वानुमेय साझेदार होगा। ट्रंप की लेन-देन आधारित नीतियों ने सीधे भारत के मूल हितों (आर्थिक विकास, आतंकवाद, ऊर्जा सुरक्षा) को खतरे में डाल दिया।
    • इससे भारत की विदेश नीति का मौलिक पुनर्मूल्यांकन आवश्यक हुआ और बहुध्रुवीय सहभागिता की दिशा में भारत के प्रयासों को गति मिली।
  • सामरिक स्वायत्तता की उच्च लागत: रूस और पश्चिम के बीच भारत का संतुलन बनाने का कार्य भौतिक रूप से महँगा सिद्ध हुआ, जैसा कि नयारा एनर्जी जैसी संस्थाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों से स्पष्ट है। इसने गुटनिरपेक्षता 2.0 की सीमाओं को उजागर किया और भारत को अधिक घरेलू लचीलापन की आवश्यकता पर बल मिला।
  • विदेश नीति का परिस्थितिजन्य व्यावहारीकरण: तालिबान, कनाडा और चीन के साथ भारत के कूटनीतिक संबंध सिद्धांतगत उपलब्धियों से अधिक व्यावहारिक अनुकूलन थीं। राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देकर, भारत ने मानक स्थितियों को अलग रखा - मानवाधिकार चिंताओं के बावजूद तालिबान से जुड़ना और पश्चिमी आलोचना के बावजूद पुतिन की मेज़बानी करना।
  • घरेलू-अंतर्राष्ट्रीय नीति संबंध: ट्रंप की वीज़ा नीतियों ने भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र और मध्यम वर्ग को प्रभावित किया, जबकि तेल मूल्य अस्थिरता ने मुद्रास्फीति और ऊर्जा लक्ष्यों को प्रभावित किया। इससे विदेश नीति का प्रभाव सीधे घरेलू जीवन पर पड़ा, जिससे सरकार की लोकप्रियता का संबंध अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाइयों से और अधिक सुदृढ़ हुआ।
  • आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ: सामरिक सिलीगुड़ी गलियारे के निकट बांग्लादेश में लालमोनिरहाट एयरफील्ड को चीन का उन्नयन और पाकिस्तान का निरंतर जुड़ाव भारत की पारंपरिक दो-मोर्चा युद्ध की चिंताओं को बढ़ाता है। सांप्रदायिक हिंसा और उग्रवादी समूह क्षेत्रीय ध्रुवीकरण को प्रोत्साहित करते हैं और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को लक्षित करने वाले अलगाववादी आंदोलनों को समर्थन दे सकते हैं।

भारत को आगे उभरती कूटनीतिक चुनौतियों का सामना कैसे करना चाहिये?

  • मुद्दा-आधारित सामंजस्य पर दृढ़ता: भारत को समुद्री सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विशिष्ट मुद्दों पर अमेरिका तथा क्वाड के साथ सहयोग करना चाहिये, साथ ही इन्हें व्यापार एवं रूस संबंधी विवादों से अलग रखना चाहिये।
    • यूरोप के साथ मुक्त व्यापार समझौते (जनवरी 2026 में हस्ताक्षर की संभावना) के माध्यम से एक प्रौद्योगिकी-आर्थिक भागीदारी को मज़बूत करना चाहिये, जिसका केंद्र बिंदु हरित प्रौद्योगिकी और वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाएँ हों।
    • इसके समानांतर, ब्रिक्स के भीतर, अपनी अध्यक्षता का उपयोग स्थानीय मुद्रा व्यापार और INSTC को IMEC से जोड़ने जैसे व्यावहारिक लाभ प्राप्त करने के लिये करना चाहिये।
  • प्रमुख शक्ति प्रतिद्वंद्विताओं से कूटनीति का पृथक्करण: भारत को चीन के साथ सीमा वार्ता और कार्यात्मक संबंध बनाए रखते हुए, स्वयं को एक लोकतांत्रिक वैकल्पिक प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहिये। साथ ही, सेमीकंडक्टर और महत्त्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सुदृढ़ घरेलू रणनीतियाँ विकसित करनी चाहिये।
  • नेबरहुड पर ध्यान देना: नेबरहुड फर्स्ट से नेबरहुड स्टेबिलिटी की ओर स्थानांतरण। इसमें आंतरिक पड़ोसी अस्थिरता को सुरक्षा खतरे के रूप में प्राथमिकता दी जा रही है। 
    • इसके लिये यह आवश्यक है कि क्षेत्र में किसी भी चुनावी परिणाम के साथ व्यावहारिक रूप से संवाद किया जाए और पाकिस्तान के प्रति दो-रास्ता नीति अपनाई जाए, यानी सार्वजनिक रूप से आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख तथा गोपनीय कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से स्थिर, गैर-हिंसात्मक स्थिति बनाए रखना।
  • वैश्विक एजेंडा निर्धारण के माध्यम से नेतृत्व: ईमानदार मध्यस्थ के रूप में AI समिट 2026 में समानतापूर्ण AI शासन ढाँचे का समर्थन करके भारत की भूमिका को वैश्विक पुल बनाने वाले के रूप में स्थापित करना। IMEC कॉरिडोर को गाज़ा की स्थिरता/स्टेबिलिटी से जुड़े आर्थिक शांति लाभ के रूप में पुनर्जीवित करना। यूक्रेन शांति वार्ता के लिये भारत को तटस्थ स्थल के रूप में प्रस्तुत करना, सभी पक्षों के साथ अपने संबंधों का लाभ उठाना।
  • घरेलू क्षमता और मज़बूती का विकास: सबसे मज़बूत कूटनीतिक आधार आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था है। FTAs (जैसे, भारत और न्यूज़ीलैंड FTA) का उपयोग आयात-निर्यात को विविधीकृत करने के लिये किया जाए ताकि बाहरी झटकों से सुरक्षा मिल सके। साथ ही रणनीतिक अनिश्चितता के मद्देनजर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को तेजी से बढ़ाना आवश्यक है, ताकि सभी प्रमुख विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम की जा सके।

निष्कर्ष

वर्ष 2025 में भारत की विदेश नीति ने अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना किया, जिससे आशावादी संपर्क से व्यावहारिक यथार्थवाद की ओर बदलाव हुआ। विभाजित विश्व में मार्गदर्शन के लिये रणनीतिक स्वायत्तता का उपयोग करना, मुद्दा-आधारित साझेदारियाँ बनाना, नेबरहुड स्टेबिलिटी को प्राथमिकता देना और घरेलू मज़बूती का निर्माण करना आवश्यक है ताकि महाशक्तियों के परिवर्तन और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा की जा सके।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. “वर्ष 2025 ने भारत की विदेश नीति के लिये एक रणनीतिक मोड़ को दर्शाया।” इस कथन के संदर्भ में भारत की कूटनीति में उभरती प्रमुख चुनौतियों और अनुकूलनों का विश्लेषण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. वर्ष 2025 में भारत के सामने मुख्य अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियाँ क्या थीं?
भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंध, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश में क्षेत्रीय अस्थिरता, पश्चिम एशिया के संघर्ष, ऊर्जा मूल्य में उतार-चढ़ाव तथा वैश्विक दक्षिणपंथी राजनीति में वृद्धि जैसी चुनौतियों का सामना किया।

2. भारत ने वर्ष 2025 में कौन से व्यापार समझौते किये?
भारत ने यू.के., ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते फाइनल किए, जबकि EU, U.S. और EAEU के साथ बातचीत जारी रही।

3. भारत ने वर्ष 2025 में कनाडा के साथ संबंधों को सफलतापूर्वक किस प्रकार पुनर्स्थापित किया?
भारत और कनाडा के बीच प्रधानमंत्री स्तर की वार्ता के बाद संबंधों को पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। रणनीतिक बदलाव के तहत जाँच प्रक्रियाओं और द्विपक्षीय संबंधों को अलग-अलग रखा गया, जिससे वीज़ा सेवाओं की बहाली और कूटनीतिक उपस्थिति को सामान्य बनाना संभव हो सका।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)  

मेन्स

प्रश्न. 'भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच संबंधों में खटास के प्रवेश का कारण वाशिंगटन का अपनी वैश्विक रणनीति में अभी तक भारत के लिये किसी ऐसे स्थान की खोज करने में विफलता है, जो भारत के आत्म-समादर और महत्त्वाकांक्षा को संतुष्ट कर सके।' उपयुक्त उदाहरणों के साथ स्पष्ट कीजिये। (2019)

प्रश्न. परियोजना 'मौसम' को भारत सरकार की अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों की सुदृढ़ करने की एक अद्वितीय विदेश नीति पहल माना जाता है। क्या इस परियोजना का एक रणनीतिक आयाम है? चर्चा कीजिये। (2015)

प्रश्न. भारत-श्रीलंका के संबंधों के संदर्भ में विवेचना कीजिये कि किस प्रकार आतंरिक (देशीय) कारक विदेश नीति को प्रभावित करते हैं। (2013)


UPSC

बाल संरक्षण मामलों में सज़ा का निलंबन

स्रोत: द हिंदू

सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने वर्ष 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में उत्तर प्रदेश के उन्नाव से एक पूर्व विधायक को जमानत देते हुए आजीवन कारावास की सज़ा निलंबित करने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय (HC) के आदेश पर रोक लगा दी। इस निर्णय ने सज़ा निलंबन और POCSO अधिनियम, 2012 की व्याख्या से जुड़े अहम प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

इस मामले से संबंधित मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • पृष्ठभूमि: इस मामले में विधायक को एक नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सज़ा दी गई। साथ ही पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मृत्यु के मामले में भी उसे दोषी ठहराया गया।
  • सजा निलंबन का कानूनी ढाँचा: भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 430 के तहत कोई दोषसिद्ध व्यक्ति सज़ा के निलंबन की मांग कर सकता है। हालाँकि गंभीर अपराधों या आजीवन कारावास के मामलों में सज़ा का निलंबन सामान्य नियम नहीं, बल्कि एक अपवाद है।
    • यह एक विवेकाधीन न्यायिक शक्ति है और यह सिर्फ़ सज़ा को निलंबित करती है, अपराध साबित होने के फैसले को नहीं।
  • ज़मानत देने हेतु दिल्ली उच्च न्यायालय का तर्क: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्य रूप से इस आधार पर सज़ा निलंबित की कि एक विधायक भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 21 के अंतर्गत “लोक सेवक” नहीं है, और इसलिये POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 5(c) के तहत गंभीर (एग्रेवेटेड) अपराध प्रथम दृष्टया सिद्ध नहीं होता।
    • न्यायालय ने उसके 7 वर्ष से अधिक के कारावास को भी ध्यान में रखा। काश्मीरा सिंह बनाम पंजाब राज्य (1977) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना था कि यदि बाद में दोषसिद्धि या सजा में संशोधन हो जाए, तो अत्यधिक लंबी कैद अन्याय का कारण बन सकती है।
  • सज़ा निलंबन पर न्यायिक मिसालें:
    • भगवान राम शिंदे गोसाई बनाम गुजरात राज्य (1999): सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अपील के दौरान निश्चित अवधि की सज़ा का निलंबन उदारतापूर्वक (Liberally) किया जाना चाहिये।
      • इसके विपरीत गंभीर अपराधों जैसे आजीवन कारावास के मामलों में, जैसा कि शिवानी त्यागी मामले (2024) में दोहराया गया, सज़ा का निलंबन दुर्लभ होता है और इसके लिये अपराध की प्रकृति, गंभीरता और उसे करने के तरीके का निष्पक्ष मूल्यांकन ज़रूरी होता है।
    • छोटेलाल यादव बनाम झारखंड राज्य (2025): आजीवन कारावास के मामलों में सज़ा का निलंबन केवल तब ही न्यायसंगत माना जाएगा जब निचली अदालत के निर्णय में स्पष्ट या गंभीर त्रुटि हो, जो संभावित बरी होने की संभावना को दर्शाती हो।
    • जामना लाल बनाम राजस्थान राज्य (2025): सर्वोच्च न्यायालय ने 20 वर्ष की POCSO सज़ा का निलंबन रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि निचली अदालत का यह निष्कर्ष कि पीड़िता नाबालिग थी, सज़ा निलंबन के दौरान हल्के में चुनौती नहीं दिया जा सकता और इसे पुनः जाँचा या पलटा नहीं जाना चाहिये।
  • दिल्ली उच्च न्यायालय की विवादास्पद व्याख्या: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक संकीर्ण व्याख्या अपनाई, जिसमें “लोक सेवक” की परिभाषा (IPC के अनुसार, जिसमें न्यायाधीश, सैन्य अधिकारी और मध्यस्थ शामिल हैं, लेकिन विधायक बाहर हैं) पर निर्भर किया गया।
    • यह दृष्टिकोण निचली अदालत की व्यापक व्याख्या से अलग था, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत “लोक सेवक” को किसी भी ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करती है जो सार्वजनिक कर्तव्य निभाता हो। यह अंतर महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे अपराधों पर बढ़ी हुई सज़ा लगती है।
    • केवल भारतीय दंड संहिता (IPC) ही “लोक सेवक” की परिभाषा देती है। POCSO अधिनियम, 2012 में “लोक सेवक” की कोई परिभाषा नहीं है।
  • सर्वोच्च न्यायालय का POCSO अधिनियम, 2012 की व्याख्या पर रुख: एटॉर्नी जनरल फॉर इंडिया बनाम सतीश (2021) जैसे फैसलों (जिसमें केवल “स्किन-टू-स्किन” संपर्क न होने पर इसे “शारीरिक संपर्क” नहीं माना जाएगा जैसी संकीर्ण व्याख्या को खारिज किया गया) और स्वतंत्र विचार बनाम भारत संघ (2017) (नाबालिग पत्नी के बलात्कार के लिये वैवाहिक अपवाद को सीमित कर पढ़ा गया) से स्पष्ट होता है कि बाल संरक्षण कानूनों की व्याख्या संकीर्ण या शाब्दिक नहीं बल्कि उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिये।

निष्कर्ष

सर्वोच्च न्यायालय का स्थगन/स्टे यह रेखांकित करता है कि जघन्य अपराधों के लिये आजीवन कारावास का निलंबन दुर्लभ होना चाहिये, इसके लिये स्पष्ट त्रुटि का उच्च मानक आवश्यक है, और POCSO जैसे बाल संरक्षण कानूनों की व्याख्या उनके विधान उद्देश्य को पूरा करने हेतु शाब्दिक नहीं बल्कि उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिये।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. सज़ा निलंबित करने में न्यायिक विवेक को दोषी के अधिकारों और अपराध की गंभीरता तथा सामाजिक हित के बीच संतुलन बनाना चाहिये। टिप्पणी कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. अपील के दौरान सज़ा को निलंबित करने की अनुमति कौन-सा कानूनी प्रावधान देता है?
BNS, 2023 की धारा 430 (पहले CrPC की धारा 389) के तहत, अपीलीय अदालत के पास सज़ा के क्रियान्वयन को निलंबित करने और अपील लंबित रहने तक ज़मानत देने का विवेकाधीन अधिकार है।

2. POCSO अधिनियम, 2012 की व्याख्या करने में SC का क्या नज़रिया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने बच्चों की सुरक्षा के लिये एक उद्देश्यपूर्ण व्याख्या को आवश्यक बताया है, जिसमें संकीर्ण या शाब्दिक व्याख्या से बचा जाता है, जैसा कि अटॉर्नी जनरल बनाम सतीश (2021) और स्वतंत्र विचार (2017) मामलों में देखा गया है।

3. भारत में सज़ा निलंबित करने में किन मार्गदर्शक का सहारा लिया जाता है?
मुख्य न्यायिक मिसालों में भगवान राम शिंदे गोसाई (1999), शिवानी त्यागी (2024), छोटेलाल यादव (2025) और जामना लाल (2025) शामिल हैं, जिन्होंने अपीलीय विवेकाधिकार तथा तथ्यात्मक निष्कर्षों की सुरक्षा के लिये शर्तें निर्धारित की हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा पिछले वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

प्रिलिम्स

प्रश्न. भारत के संविधान में शोषण के विरुद्ध अधिकार द्वारा निम्नलिखित में से कौन-से परिकल्पित हैं? (2017)

  1. मानव देह व्यापार और बंधुआ मज़दूरी (बेगारी) का निषेध
  2. अस्पृश्यता का उन्मूलन
  3. अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा
  4. कारखानों और खदानों में बच्चों के नियोजन का निषेध

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1, 2 और 4

(b) केवल 2, 3 और 4

(c) केवल 1 और 4

(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (c)


मेन्स

प्रश्न. राष्ट्रीय बाल नीति के मुख्य प्रावधानों का परीक्षण कीजिये तथा इसके कार्यान्वयन की स्थिति पर प्रकाश डालिये। (2016)


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