मध्य प्रदेश Switch to English
अंजना सिंह द्वारा माउंट एल्ब्रूस पर नशा मुक्ति संदेश
चर्चा में क्यों?
मध्य प्रदेश के मैहर के अमरपाटन क्षेत्र की 26 वर्षीय अंजना सिंह ने यूरोप की सबसे ऊँची चोटी माउंट एल्ब्रूस (18,510 फीट) पर “नशे से दूरी है ज़रूरी” संदेश वाला बैनर फहराया।
- यह पहल मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और नशे की लत से उबरने में सहायता करने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।
- मैहर पुलिस किशोरियों को सुरक्षा, सामाजिक जोखिमों के बारे में शिक्षित करने तथा उन्हें शिक्षा और कैरियर लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिये प्रेरित करने हेतु 'प्रबोधिनी' कार्यक्रम भी चला रही है।
मुख्य बिंदु
- अंजना सिंह के बारे में:
- वह लगभग 72 घंटों में माउंट एल्ब्रूस की चोटी पर पहुँचीं और बैनर के संदेश के लिये हिंदी को प्राथमिक भाषा के रूप में गर्व से प्रचारित किया।
- माउंट एल्ब्रूस से लौटने पर, उन्हें नशा-विरोधी अभियान में उनके योगदान के लिये वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया।
- अपनी पर्वतारोहण उपलब्धियों के अलावा, सिंह अपने ज़िले में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी काम करती हैं।
- यह पहल महिलाओं को सशक्त बनाने तथा उनकी शिक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- माउंट एल्ब्रूस
- माउंट एल्ब्रूस, कॉकस पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी है, जो दक्षिणी रूस में, जॉर्जिया की सीमा के उत्तर में स्थित है और इसे यूरोप की सबसे ऊँची चोटी (5642 मीटर) के रूप में जाना जाता है।
- कॉकस पर्वतमाला एक लंबी (1200 किमी से अधिक) एवं बीहड़ शृंखला है, जो काला सागर को कैस्पियन सागर से जोड़ती है।
- एल्ब्रूस एक प्राचीन ज्वालामुखी (सुप्त ज्वालामुखी) है, इसमें लगभग 2000 वर्षों से विस्फोट नहीं हुआ है।
- एल्ब्रूस की संरचना में दो ज्वालामुखी शिखर (पूर्व और पश्चिम) शामिल हैं।
- ये शिखर ट्रेकिंग एवं पर्वतारोहण के लिये लोकप्रिय स्थल हैं; इनके मध्य स्थित सैडल (खाई/संयोग बिंदु) इस क्षेत्र तक पहुँचने का मार्ग प्रदान करता है।
प्रबोधिनी अभियान
- यह अभियान अक्तूबर 2024 में प्रारंभ किया गया था और तब से इसने स्कूलों तथा गाँवों तक व्यापक पहुँच बनाई है।
- इस अभियान को ज़िले में किशोर लड़कियों को शिक्षित करने हेतु शुरू किया गया था, जो सुरक्षा, सामाजिक जोखिमों पर केंद्रित है और बालिकाओं को शैक्षिक एवं करियर लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित करता है।
- पुलिस टीमें स्कूलों और गाँवों का दौरा करती हैं, जिसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना तथा युवा लड़कियों की कमज़ोरियों को कम करना है।
- अभियान के निरंतर विस्तार के एक भाग के रूप में, स्कूली छात्राओं के लिये एक व्हाट्सएप समूह बनाया जाएगा, ताकि जागरूक और सशक्त युवा लड़कियों का एक मज़बूत नेटवर्क तैयार किया जा सके, जो दुर्व्यवहार की पहचान कर सकें, उसकी रिपोर्ट कर सकें तथा अन्य लोगों को भी इसी प्रकार की कार्रवाई के लिये प्रेरित कर सकें।


राजस्थान Switch to English
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS)
चर्चा में क्यों?
राजस्थान सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिये राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) के तहत 765.78 करोड़ रुपए की निवेश प्रोत्साहन राशि वितरित की है।
मुख्य बिंदु
- RIPS 2024 के बारे में:
- यह राजस्थान सरकार की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य विनिर्माण, सेवाएँ, नवीकरणीय ऊर्जा, MSME, स्टार्टअप और सनराइज़ सेक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना है।
- यह योजना अक्तूबर 2023 में यूके रोड शो के दौरान प्रारंभ की गई थी और इसका संचालन 31 मार्च 2029 तक किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर इसमें संशोधन भी किया जा सकता है।
- प्राथमिक क्षेत्र और श्रेणियाँ:
- इस योजना के अंतर्गत विनिर्माण, सेवाएँ, सनराइज़ सेक्टर, MSME, स्टार्टअप, औद्योगिक अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
- इसके अतिरिक्त, योजना में महिलाओं, युवाओं तथा स्टार्टअप्स पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है।
- लॉजिस्टिक अवसंरचना में निवेश करने के लिये न्यूनतम निवेश सीमा निर्धारित की गई है, जिसमें वेयरहाउस अथवा कोल्ड चेन हेतु 2 करोड़ रुपए, जबकि मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क हेतु 50 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक है।
- प्रमुख प्रोत्साहन:
- पूंजीगत सब्सिडी: कुछ क्षेत्रों के लिये पात्र निवेश का 28% तक।
- SGST प्रतिपूर्ति: एक निर्धारित अवधि के लिये राज्य GST का 75% तक।
- स्टांप ड्यूटी प्रतिपूर्ति: अधिकतम 75% की छूट तथा शेष राशि की प्रतिपूर्ति।
- नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्यान:
- बिजली शुल्क में 100% छूट, स्टांप शुल्क और परिवर्तन शुल्क में 75% छूट (शेष प्रतिपूर्ति), बैंकिंग तथा ट्रांसमिशन छूट एवं हरित हाइड्रोजन व ऊर्जा भंडारण के लिये विशेष प्रोत्साहन।
- पात्रता:
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यह प्रोत्साहन नए/विस्तार निवेश और उन परियोजनाओं के लिये लागू हैं, जो या तो नीति की प्रभावी अवधि में या अधिकार प्राप्ति के दो वर्षों के भीतर व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ करें,जो भी बाद में हो।
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पात्र इकाइयाँ राजनिवेश पोर्टल के माध्यम से सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली का लाभ ले सकती हैं, जिससे आवेदन और अनुमोदन प्रक्रिया सरल हो जाती है।
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कार्यान्वयन और विस्तार:
- राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के अनुसार, राजस्थान ने अब तक 35 लाख करोड़ रुपए के समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये हैं, जिनमें से 4.12 लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएँ कार्यान्वयन की प्रक्रिया में हैं।
- घरेलू और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने हेतु नियमित भागीदारी सम्मेलन तथा रोड शो आयोजित किये जा रहे हैं।
- राजस्थान सरकार 11-12 दिसंबर 2025 को जयपुर में राइजिंग राजस्थान पार्टनरशिप कॉन्क्लेव का आयोजन करेगी, जिसका उद्देश्य उद्योग जगत के अग्रणी संस्थानों, राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय निकायों के साथ साझेदारी को मज़बूत करना और राज्य में निवेश एवं सहयोग की गति को निरंतर बनाए रखना है।
राजस्थान के बारे में मुख्य तथ्य
- क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है।
- यह लगभग 3.42 लाख वर्ग किमी के भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है, जो भारत के कुल भूमि क्षेत्र का 10.41% है।
- यह देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है और पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा गुजरात राज्यों से घिरा हुआ है।
- वित्त वर्ष 2023-24 के लिये राजस्थान का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 182.02 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा; वहीं स्थिर मूल्यों (2011-12) पर GSDP वृद्धि दर 8.03% रही।


उत्तर प्रदेश Switch to English
ऑपरेशन महाकाल
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने ‘ऑपरेशन महाकाल’ के माध्यम से भू-माफिया और जबरन वसूली गिरोहों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की शुरुआत की है।
मुख्य बिंदु
- अभियान के बारे में:
- यह अभियान 5 अगस्त 2025 को प्रारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य अवैध भूमि कब्ज़ा गतिविधियों की पहचान करना, उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करना तथा इन गतिविधियों को संचालित करने वाले न केवल अपराधियों, बल्कि उन्हें सहयोग देने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों को भी चिह्नित कर सख्ती से कार्रवाई करना है।
- ऑपरेशन के चरण: ऑपरेशन दो चरणों में संचालित किया जा रहा है:
- प्रथम चरण (5 सितंबर 2025 तक): इसमें भूमि कब्ज़ा और जबरन वसूली में संलिप्त संदिग्ध व्यक्तियों की सूची तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- द्वितीय चरण (15 सितंबर 2025 से प्रारंभ): इस चरण में कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसमें संपत्ति ज़ब्ती तथा आरोप दर्ज करने की प्रक्रिया शामिल होगी।
- सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई:
- भूमि माफिया का संबंध अनेक श्वेतपोश पेशेवरों से है, जिनमें सरकारी कर्मचारी, जनप्रतिनिधि तथा पत्रकार शामिल हैं।
- इन समूहों के बीच हुई मिलीभगत की गहराई से जाँच की जाएगी और उनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


राजस्थान Switch to English
जैसलमेर को मराठा साम्राज्य का हिस्सा मानने पर विवाद
चर्चा में क्यों?
NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की पाठ्यपुस्तक में जैसलमेर को मराठा साम्राज्य का हिस्सा दर्शाए जाने के दावे के बाद एक ऐतिहासिक विवाद उत्पन्न हो गया है।
मुख्य बिंदु
जैसलमेर और मराठा संबंधों पर इतिहासकारों के मत
- राजपूतों के तर्क:
- जैसलमेर के 44वें महारावल, चैतन्य राज सिंह के नेतृत्व में शाही परिवार ने इस चित्रण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे एक गंभीर ऐतिहासिक त्रुटि करार दिया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जैसलमेर पर मराठों के प्रभाव का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। यह क्षेत्र मुगलों एवं अंग्रेज़ों सहित विभिन्न आक्रांताओं के दौर में भी स्वतंत्र बना रहा।
- ऐतिहासिक विवरणों से स्पष्ट होता है कि क्षेत्र के राजपूत शासकों ने अपनी सत्ता एवं संप्रभुता की रक्षा की तथा जैसलमेर में न तो मराठा हस्तक्षेप हुआ और न ही कोई कराधान (taxation) लागू किया गया।
- मराठों के तर्क:
- मराठा इतिहासकार वर्ष 1752 के अहदनामा (जिसे मुगल सम्राट अहमद शाह बहादुर और मराठा सेनानायक मल्हारराव होल्कर तथा माधवराव शिंदे के बीच किया गया समझौता माना जाता है) का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि यद्यपि मराठों का जैसलमेर पर दिन-प्रतिदिन का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं था, तथापि जैसलमेर सहित राजपूत राज्यों से चौथ और सरदेशमुखी कर वसूले जाते थे।
- पुणे के इतिहासकार पांडुरंग बलकवाडे ने पेशवा प्रशासन के अभिलेखों का हवाला दिया है, जिनके अनुसार अजमेर (मेवाड़) क्षेत्र से नियमित रूप से चौथ वसूली का उल्लेख मिलता है।
- जैसलमेर
- स्थान एवं महत्त्व: जैसलमेर, जिसे अक्सर "स्वर्ण नगरी" कहा जाता है, पश्चिमी राजस्थान में पाकिस्तान सीमा और थार रेगिस्तान के निकट स्थित है।
- इसका प्रमुख स्थल जैसलमेर किला है, जिसे सोनार किला (स्वर्ण किला) भी कहा जाता है, जो एक जीवित किला होने के कारण अद्वितीय है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: जैसलमेर की स्थापना वर्ष 1156 में यदुवंशी वंश के वंशज रावल जैसल ने की थी। लोदुर्वा की गद्दी से वंचित होने के बाद, जैसल ने ऋषि ईसुल (स्थानीय साधु) की भविष्यवाणी के अनुसार एक नई राजधानी की तलाश की।
- सांस्कृतिक विरासत: जैसलमेर की सांस्कृतिक और स्थापत्य सुंदरता इसकी राजपूत विरासत से प्रभावित है, जिसमें भाटी राजपूतों का भी प्रभाव है।
- भूवैज्ञानिक महत्त्व: जैसलमेर में वुड फॉसिल पार्क (आकल) में थार रेगिस्तान के जीवाश्मों को प्रदर्शित किया गया है, जो 180 मिलियन वर्ष पुराने भूवैज्ञानिक इतिहास की झलक दिखाते हैं।
- स्वतंत्रता के बाद: जैसलमेर राज्य ने 7 अप्रैल 1949 को भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किये और भारतीय संघ में विलय हो गया।
मराठा
- उद्गम एवं भाषा:
- मराठा, जिनकी भाषा मराठी है, दक्कन के पठार के मूल निवासी हैं, जो मुख्यतः वर्तमान महाराष्ट्र में स्थित हैं।
- शिवाजी महाराज और मराठा शक्ति का उदय:
- वर्ष 1630 में जन्मे शिवाजी, भोंसले वंश से संबंधित थे और उन्होंने स्वराज्य (सत्ता/संप्रभुता) स्थापित करने का लक्ष्य रखा।
- मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने पुणे क्षेत्र के किलों पर नियंत्रण प्राप्त करना प्रारंभ किया और अपना प्रभाव बढ़ाया।
- उन्होंने बीजापुर सल्तनत के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध रणनीति अपनाई और अफज़ल खान जैसे सेनापतियों को पराजित किया।
- शिवाजी की मृत्यु के बाद, संभाजी (शिवाजी के पुत्र) छत्रपति बने। उन्हें औरंगजेब ने बंदी बनाकर मृत्युदंड दे दिया।
- मराठा संगठनात्मक परिवर्तन:
- शिवाजी की मृत्यु के पश्चात मराठा सत्ता विकेंद्रीकृत हो गई और पेशवा का प्रभाव बढ़ गया।
- मराठों ने पूरे भारत में विस्तार किया और कुछ समय के लिये लाहौर, अटक तथा पेशावर के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण किया।


उत्तराखंड Switch to English
उत्तरकाशी ज़िले में आकस्मिक बाढ़
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में भारी वर्षा के कारण खीर गंगा नदी में आकस्मिक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने व्यापक तबाही मचाई है।
- समुद्र तल से 8,600 फीट की ऊँचाई पर स्थित लोकप्रिय पर्यटन स्थल धराली कस्बे में बाढ़ ने भारी जनहानि की है और अनेक लोगों के लापता होने की आशंका है।
मुख्य बिंदु
- आकस्मिक बाढ़ आने के कारण:
- विशेषज्ञों के अनुसार, धराली गाँव में आई बाढ़ का कारण बादल फटना (Cloudburst) नहीं बल्कि ग्लेशियर झील विस्फोट (Glacial Lake Outburst Flood - GLOF) अथवा हिमनद खंडन (Glacier Collapse) हो सकता है।
- भारतीय मौसम विभाग (IMD) के डाटा के अनुसार, आपदा के दौरान क्षेत्र में न्यूनतम वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य बादल फटने की स्थिति से कहीं कम थी, जिसके कारण विशेषज्ञों ने ग्लेशियर फटने या GLOF की संभावना जताई, जिसकी पुष्टि उपग्रह चित्रों से होती है, जिसमें धराली के ऊपर महत्त्वपूर्ण ग्लेशियर और हिमनद झीलें दिखाई गई हैं।
- आपदा जोखिम:
- वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के अनुसार, उत्तराखंड में 1,266 ग्लेशियर झीलें हैं, जिनमें से कई छोटे-बड़े जल निकाय नीचे बहने वाले क्षेत्रों के लिये गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने इनमें से 13 झीलों को उच्च जोखिम वाली तथा 5 को अत्यंत खतरनाक श्रेणी में रखा है।
- ऐसी आपदाएँ तब होती हैं जब ऊँचाई वाले क्षेत्रों में जल संचय अचानक नीचे की ओर प्रवाहित होता है; केवल भारी वर्षा से इस प्रकार की विनाशकारी घटनाएँ संभव नहीं हो सकतीं।
आकस्मिक बाढ़ (Flash Flood)
- परिभाषा:
- फ्लैश फ्लड तीव्र वर्षा के दौरान या उसके तुरंत बाद जल स्तर में अचानक वृद्धि है। वे अत्यधिक स्थानीयकृत और अल्पकालिक घटनाएँ हैं, जो सामान्यतः वर्षा के 6 घंटे के भीतर घटित होती हैं।
- कारण:
- फ्लैश फ्लड मुख्यतः तीव्र वर्षा के कारण होती है, जो मृदा की अवशोषण क्षमता और जल निकासी प्रणालियों को प्रभावित करती है।
- अत्यधिक वर्षा के अतिरिक्त, अचानक तापमान वृद्धि, बाँध या तटबंधों के टूटने, हिम या मलबे के जाम होने, तथा हिमनद झीलों के अचानक फटने के कारण तेज़ी से हिम विगलन से भी फ्लैश फ्लड आ सकती है।
- इसके अतिरिक्त, सड़कों और इमारतों जैसी अभेद्य सतहों वाले शहरीकरण से अपवाह बढ़ता है, जल अवशोषण कम होता है तथा बाढ़ का खतरा बढ़ता है।
ग्लेशियल झील विस्फोट (GLOF)
- परिचय:
- GLOF एक प्रकार की विनाशकारी बाढ़ है, जो तब होती है जब किसी ग्लेशियर झील को रोकने वाला प्राकृतिक बाँध टूट जाता है और बड़ी मात्रा में जल एकाएक बाहर निकलता है।
- इस प्रकार की बाढ़ सामान्यतः ग्लेशियरों के तेज़ी से पिघलने, भारी वर्षा अथवा पिघले पानी के प्रवाह से झील में जल के जमाव के कारण होती है।
- फरवरी 2021 में उत्तराखंड के चमोली ज़िले में आकस्मिक बाढ़ आई थी, जिसके बारे में संदेह है कि यह GLOF के कारण हुई थी।
- कारण
- ये बाढ़ कई कारकों से उत्पन्न हो सकती हैं, जिनमें ग्लेशियर के आयतन में परिवर्तन, झील के जलस्तर में बदलाव तथा भूकंप शामिल हैं।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अनुसार, हिंदू कुश हिमालय के अधिकांश भागों में जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदों के पीछे हटने से कई नई हिमनद झीलों का निर्माण हुआ है, जो GLOF का प्रमुख कारण हैं।


उत्तर प्रदेश Switch to English
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन
चर्चा में क्यों?
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का लंबी बीमारी के बाद 5 अगस्त 2025 को 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
- उन्होंने जम्मू-कश्मीर सहित पाँच राज्यों के राज्यपाल के रूप में कार्य किया और वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के निरसन के दौरान महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्य बिंदु
- प्रारंभिक जीवन: सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के हिसावड़ा गाँव में हुआ था।
- राजनीतिक यात्रा:
- वर्ष 1965 में मेरठ कॉलेज से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया।
- विधानसभा सदस्य: वर्ष 1974 में बागपत से विधायक निर्वाचित हुए।
- एक संक्षिप्त अंतराल के बाद वर्ष 1984 में पुनः राज्यसभा के सदस्य बने।
- राज्यसभा: वर्ष 1980 में राज्यसभा में प्रवेश किया।
- लोकसभा: वर्ष 1989 में अलीगढ़ से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए।
- राज्यपाल पद:
- बिहार (2017–2018)
- ओडिशा (2018 में अतिरिक्त प्रभार)
- जम्मू-कश्मीर (2018–2019)
- गोवा (2019–2020)
- मेघालय (2020–2022)


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पिंगली वेंकैया जयंती
चर्चा में क्यों?
2 अगस्त, 2025 को प्रधानमंत्री ने पिंगली वेंकैया की 149वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत के राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया, जो राष्ट्र की एकता, विविधता तथा स्वतंत्रता का प्रतीक है।
- प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपने घरों पर तिरंगा फहराकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का समर्थन करने का भी आग्रह किया।
मुख्य बिंदु
पिंगली वेंकैया के बारे में:
- उनका जन्म 2 अगस्त, 1876 को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के पास भटलापेनुमरु गाँव में हुआ था और 4 जुलाई,1963 को 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
- उन्होंने 1899-1902 के दौरान द्वितीय बोअर युद्ध में भाग लिया।
- वर्ष 1913 में उन्होंने आंध्र प्रदेश के बापटला में जापानी भाषा में 'जापान वेंकैया' नामक व्याख्यान दिया।
- कंबोडिया कपास पर अनुसंधान के कारण वे ‘पट्टी वेंकय्या’ नाम से भी प्रसिद्ध थे।
- वर्ष 2009 में उनके योगदान के सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया गया।
ध्वज का विकास
- वर्ष 1916 में पिंगली वेंकैया ने भारत के लिये एक राष्ट्रीय ध्वज शीर्षक से एक पुस्तिका प्रकाशित की, जिसमें भारत के संभावित ध्वज के लिये लगभग 30 डिज़ाइन प्रस्तुत किये गए, जो अन्य देशों के ध्वजों से प्रेरित थे।
- राष्ट्रीय ध्वज के लिये वेंकैया के डिज़ाइन को अंततः वर्ष 1921 में विजयवाड़ा में कॉन्ग्रेस की बैठक में महात्मा गांधी द्वारा अनुमोदित किया गया था।
- प्रारंभिक ध्वज, जिसे स्वराज ध्वज कहा जाता था, में दो लाल और हरे रंग की पट्टियाँ थीं (जो हिंदू तथा मुस्लिम धार्मिक समुदायों का प्रतिनिधित्व करती थीं)। ध्वज में एक चरखा भी था, जो स्वराज का प्रतिनिधित्व करता था।
- महात्मा गांधी ने वेंकैया को इसमें शांति का प्रतीक दर्शाने हेतु सफेद पट्टी जोड़ने की सलाह दी।
- ध्वज समिति (1931) ने लाल रंग को बदलकर केसरिया किया और रंगों को क्रमशः केसरिया (ऊपर), सफेद (मध्य) तथा हरा (नीचे) निर्धारित किया। सफेद पट्टी के मध्य में चरखा अंकित किया गया।
- इन रंगों का समुदायों से नहीं, बल्कि गुणों से संबंध था, केसरिया साहस और बलिदान, सफेद सत्य और शांति तथा हरा विश्वास और शक्ति का प्रतीक था। चरखा जनकल्याण का प्रतीक था।
- स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय ध्वज समिति ने चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को ध्वज में सम्मिलित किया।

