18 जून को लखनऊ शाखा पर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के ओपन सेमिनार का आयोजन।
अधिक जानकारी के लिये संपर्क करें:

  संपर्क करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


भारतीय राजनीति

हिंदी भाषा विवाद

  • 21 Oct 2022
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

हिंदी, भाषा आयोग, राजभाषा अधिनियम 1963 के प्रचार से संबंधित संवैधानिक प्रावधान।

मेन्स के लिये:

आधिकारिक/राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी का उपयोग, त्रिभाषा सूत्र, हिंदी विरोधी आंदोलन आदि।

चर्चा में क्यों?

भारत के राष्ट्रपति को सौंपी गई राजभाषा समिति की रिपोर्ट के 11वें खंड पर कुछ दक्षिणी राज्यों की नाराज़गी की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं (वे रिपोर्ट को उन पर हिंदी थोपने के प्रयास के रूप में देखते हैं)।

पैनल की सिफारिशें:

  • हिंदी भाषी राज्यों में IIT, IIM और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षा का माध्यम हिंदी होना चाहिये।
  • प्रशासन में संचार के लिये इस्तेमाल की जाने वाली भाषा हिंदी होनी चाहिये और पाठ्यक्रम को हिंदी में पढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिये।
  • अन्य राज्यों में उच्च न्यायालय, जहाँ कार्यवाही अंग्रेज़ी या एक क्षेत्रीय भाषा में की जाती है, हिंदी में अनुवाद उपलब्ध करा सकते हैं, क्योंकि अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों के फैसले अक्सर निर्णयों में उद्धृत होते हैं।
    • उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा और राजस्थान में निचली अदालतें पहले से ही हिंदी का उपयोग करती हैं।
  • हिंदी भाषी राज्यों में केंद्र सरकार के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों द्वारा हिंदी के उपयोग को उनकी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) में दर्शाया जाएगा।
  • यह समिति की ज़िम्मेदारी और उत्तरदायित्व होगा कि आधिकारिक संचार में हिंदी भाषा को बढ़ावा दिया जाए।
  • आधिकारिक दस्तावेज़ं और निमंत्रणं पत्रों में भाषा को सरल बनाने के लिये विशिष्ट प्रस्ताव हैं।
    • "आधिकारिक संचार में अंग्रेज़ी भाषा के उपयोग को कम करने और हिंदी के उपयोग को बढ़ाने के लिये प्रयास किया जाना चाहिये"।
    • "कई सरकारी नौकरियों में हिंदी का ज्ञान अनिवार्य होगा"।

सिफारिशें राज्य सरकारों, उनके संस्थानों और विभागों हेतु लक्षित:

  • तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों को राजभाषा अधिनियम, 1963 एवं नियमों और विनियमों (अधिनियम के), 1976 के अनुसार छूट दी गई है।
  • कानून केवल 'A' श्रेणी के उन राज्यों में लागू किया गया है, जिनमें आधिकारिक भाषा हिंदी है।"
    • नियमों के अनुसार, श्रेणी 'A' में बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं।
    • श्रेणी 'B' में गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़, दमन एवं दीव तथा दादरा व नगर हवेली शामिल हैं।
    • अन्य राज्य, जहाँ हिंदी का उपयोग 65% से कम है, श्रेणी 'C' के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।
  • समिति ने सुझाव दिया है कि श्रेणी 'A' के राज्यों में हिंदी का शत-प्रतिशत प्रयोग करने का प्रयास किया जाना चाहिये।
    • श्रेणी 'A' के राज्यों में IIT, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों (KV) में शिक्षा का माध्यम हिंदी होनी चाहिये, जबकि अन्य राज्यों में क्षेत्रीय भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिये।
  • समिति के अनुसार, सरकारी विभागों में हिंदी का प्रयोग:
    • रक्षा और गृह मंत्रालयों में हिंदी का प्रयोग शत-प्रतिशत है लेकिन शिक्षा मंत्रालय अभी तक उस स्तर तक नहीं पहुँचा है।
    • भाषा के उपयोग का आकलन करने के लिये समिति के कुछ मानदंड थे।
      • दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया, BHU और AMU सहित कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में हिंदी का प्रयोग केवल 25-35% है, जबकि इसे शत-प्रतिशत होना चाहिये था।

राजभाषा पर संसदीय समिति:

  • राजभाषा पर संसदीय समिति का गठन वर्ष 1976 में राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के तहत किया गया था।
  • संविधान के अनुच्छेद 351 द्वारा अनिवार्य रूप से हिंदी के सक्रिय प्रचार के साथ आधिकारिक संचार में हिंदी के उपयोग की समीक्षा और प्रचार के लिये राजभाषा समिति का गठन किया गया था।
  • समिति की पहली रिपोर्ट वर्ष 1987 में प्रस्तुत की गई थी।
  • समिति का गठन और अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करेता है और वर्ष 1963 के अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, 30 सदस्य (लोकसभा से 20 सांसद और राज्यसभा से 10 सांसद) हैं।
  • अन्य संसदीय पैनल संसद को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं, जबकि इसके विपरीत यह पैनल अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जो "रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखेगा और सभी राज्य सरकारों को भेजेगा।

हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने हेतु सरकार के प्रयास:

  • त्रिभाषा सूत्र (कोठारी आयोग 1968):
    • पहली भाषा: यह मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा होगी।
    • दूसरी भाषा: हिंदी भाषी राज्यों में यह अन्य आधुनिक भारतीय भाषाएँ या अंग्रेज़ी होगी। गैर-हिंदी भाषी राज्यों में यह हिंदी या अंग्रेज़ी होगी।
    • तीसरी भाषा: हिंदी भाषी राज्यों में यह अंग्रेज़ी या आधुनिक भारतीय भाषा होगी। गैर-हिंदी भाषी राज्य में यह अंग्रेज़ी या आधुनिक भारतीय भाषा होगी।
  • वर्ष 2020 की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में भी "हिंदी, “संस्कृत” और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया था। NEP का मानना है कि कक्षा 5 से संभवतः कक्षा 8 तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा शिक्षा का माध्यम होगी।
    • NEP 2020 में बहुभाषावाद और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिये त्रिभाषा फॉर्मूले पर ज़ोर देने का निर्णय लिया गया।

अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की तुलना में भारत में हिंदी की स्थिति:

  • वर्ष 2011 की भाषायी जनगणना के अनुसार: भारत में 121 मातृभाषाएँ हैं।
    • 8 करोड़ व्यक्तियो या यूं कहें कि 43.6% आबादी ने हिंदी को अपनी मातृभाषा घोषित किया और 11% आबादी ने हिंदी को अपनी दूसरी भाषा के रूप में बताया है।
      • अतः 55% आबादी हिंदी को या तो मातृभाषा के रूप में या अपनी दूसरी भाषा के रूप में जानती है।
    • 72 करोड़ उपयोगकर्त्ताओं और 8% जनसंख्या के साथ, बांग्ला भारत में दूसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।
    • बांग्ला, मलयालम और उर्दू भाषाओँ में गिरावट आई है लेकिन हिंदी और पंजाबी बोलने वालों की संख्या बढ़ी है।
    • वर्ष 1971 से वर्ष 2011 के बीच हिंदी बोलने वालों की संख्या 2.6 गुना बढ़कर 20.2 करोड़ से 52.8 करोड़ हो गई।

हिंदी की संवैधानिक स्थिति:

  • भारतीय संविधान की अनुसूची 8 में हिंदी सहित 22 आधिकारिक भाषाएँ हैं।
  • अनुच्छेद 351: यह हिंदी भाषा को विकसित करने के लिये इसके प्रसार का प्रावधान करता है ताकि यह भारत की मिश्रित संस्कृति में सभी के लिये अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में कार्य कर सके।
  • अनुच्छेद 348 (2) यह भी प्रावधान करता है कि अनुच्छेद 348 (1) के प्रावधानों के बावजूद किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी या किसी भी आधिकारिक उद्देश्य के लिये इस्तेमाल की जाने वाली किसी अन्य भाषा के उपयोग को अधिकृत कर सकता है।
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के अनुसार, देवनागरी लिपि में हिंदी, संघ की आधिकारिक भाषा होगी।
  • राजभाषा अधिनियम, 1963 धारा 7 के तहत प्रावधान करता है कि अंग्रेज़ी भाषा के अलावा किसी राज्य में हिंदी या राजभाषा का उपयोग, भारत के राष्ट्रपति की सहमति से राज्य के राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय द्वारा दिये गए निर्णय, आज्ञा आदि प्रयोजन के लिये अधिकृत किया जा सकता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यूनिसेफ द्वारा 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया गया है।
  2. बांग्ला को राष्ट्रीय भाषाओं में से एक बनाने की मांग पाकिस्तान की संविधान सभा में उठाई गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: B

व्याख्या:

  • पाकिस्तान की संविधान सभा ने 23 फरवरी, 1948 को कराची में अपने सत्र में प्रस्ताव दिया कि सदस्यों को विधानसभा में उर्दू या अंग्रेजी में बोलना होगा। पूर्वी पाकिस्तान कॉन्ग्रेस पार्टी के एक सदस्य धीरेंद्रनाथ दत्ता ने बांग्ला को संविधान सभा की एक भाषा के रूप में शामिल करने के लिये संशोधन प्रस्ताव पेश किया। उसी वर्ष, पाकिस्तान के डोमिनियन की सरकार ने उर्दू को एकमात्र राष्ट्रीय भाषा के रूप में अपनाया, जिसका पूर्वी बंगाल के बांग्ला भाषी बहुमत वाले क्षेत्र में व्यापक विरोध हुआ।
  • ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों और अन्य राजनीतिक कार्यकर्त्ताओं ने कानून की अवहेलना की और 21 फरवरी, 1952 को एक विरोध प्रदर्शन किया। वर्षों के संघर्ष के बाद सरकार ने नरमी बरतते हुए वर्ष 1956 में बांग्ला भाषा को आधिकारिक दर्जा दिया। बांग्लादेश में, 21 फरवरी को भाषा आंदोलन दिवस मनाया जाता है। अत: कथन 2 सही है।
  • प्रतिवर्ष 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। यह यूनेस्को द्वारा घोषित किया गया था, न कि यूनिसेफ द्वारा। यह भाषा आंदोलन और दुनिया भर के लोगों के जातीय अधिकारों के लिये सम्मान प्रदर्शन है। अतः कथन 1 सही नहीं है

अतः विकल्प B सही उत्तर है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2
× Snow