प्रारंभिक परीक्षा
अमेरिकी टॉरपीडो ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को डुबोया
चर्चा में क्यों?
एक अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट पर गॉल के निकट लगभग 40 नॉटिकल मील की दूरी पर ईरान के फ्रिगेट IRIS डेना को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। इस घटना ने अमेरिका–इज़रायल–ईरान संघर्ष को हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region – IOR) के और निकट ला दिया है तथा यह द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार है जब अमेरिका ने टॉरपीडो द्वारा किसी शत्रु जहाज़ को डुबोया है।
- घटना के पश्चात श्रीलंका ने इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन मैरिटाइम सर्च एंड रेस्क्यू (SAR कन्वेंशन 1979) के अंतर्गत अपने दायित्वों के अनुरूप नाविकों को बचाने के लिये नौसैनिक पोत तैनात किये।
इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन मैरिटाइम सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) क्या है?
- परिचय: SAR कन्वेंशन एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिसे वर्ष 1979 में इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइज़ेशन (IMO) के अंतर्गत अपनाया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्र में संकटग्रस्त व्यक्तियों को शीघ्र खोज एवं बचाव सहायता प्राप्त हो।
- मुख्य विशेषताएँ:
- वैश्विक खोज एवं बचाव प्रणाली: विश्व के महासागरों को विभिन्न SAR क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जहाँ प्रत्येक तटीय देश अपने क्षेत्र में बचाव अभियानों के समन्वय के लिये उत्तरदायी होता है।
- बचाव का दायित्व: इस अभिसमय के अनुसार जहाज़ों तथा तटीय राज्यों को समुद्र में संकटग्रस्त व्यक्तियों की सहायता करना अनिवार्य है, चाहे उनकी राष्ट्रीयता या स्थिति कुछ भी हो।
- समन्वय तंत्र: खोज एवं बचाव अभियानों के संगठन तथा प्रबंधन हेतु रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर्स (RCCs) की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: त्वरित बचाव एवं निकासी के लिये पड़ोसी देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया जाता है।
- भारत और SAR:
- भारत SAR कन्वेंशन, 1979 का हस्ताक्षरकर्त्ता है तथा भारत ने इसे वर्ष 2001 में अनुमोदित किया था। भारत में भारतीय तटरक्षक बल (ICG), इंडियन सर्च एंड रेस्क्यू रीजन (ISRR) में बचाव अभियानों का समन्वय करता है, जहाँ डायरेक्टर जनरल, ICG नेशनल मेरिटाइम सर्च एंड रेस्क्यू कोऑर्डिनेटिंग अथॉरिटी (NMSARCA) के रूप में कार्य करते हैं।
- ICG द्वारा INDSAR नामक एक स्वैच्छिक जहाज़ रिपोर्टिंग प्रणाली भी संचालित की जाती है, जो जहाज़ों की निगरानी करने तथा समुद्री संकट की स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सहायता करती है।.
- महत्त्व: SAR समुद्र में मानवीय सहायता सुनिश्चित करता है तथा समुद्री सुरक्षा एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ बनाता है।
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SAR वैश्विक समुद्री विधि का एक प्रमुख स्तंभ है, जो इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर द सेफ्टी ऑफ लाइफ एट सी (SOLAS), 1974 तथा यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS), 1982 जैसे कन्वेंशंस के सहयोग से समुद्री शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करता है।
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नोट: IRIS डेना पर हमला तब किया गया जब यह विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 में भाग लेने के बाद वापस लौट रहा था।
- IFR का आयोजन इंडियन नेवी द्वारा वैश्विक स्तर पर नौसेनाओं के मध्य विश्वास, इंटरऑपरेबिलिटी, तथा “ब्रिजेज ऑफ फ्रेंडशिप” स्थापित करने के उद्देश्य से किया जाता है।
- भारतीय जलक्षेत्र छोड़ने के तुरंत बाद किसी भागीदार पोत पर हमला नई दिल्ली को एक संवेदनशील कूटनीतिक स्थिति में डाल देता है, जहाँ उसे अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी तथा ईरान के साथ अपने सभ्यतागत एवं ऊर्जा संबंधों के बीच संतुलन साधना पड़ता है।
टॉरपीडो क्या है?
- परिचय: टॉरपीडो एक स्व-प्रेरित जलमग्न मिसाइल है, जिसे जहाज़ों या पनडुब्बियों को नष्ट करने के उद्देश्य से बनाया गया है। नौसैनिक खानों के विपरीत, यह पानी में स्वतंत्र रूप से गतिशील रहता है, लक्ष्य का पीछा करता है और सबसे प्रभावशाली बिंदु पर विस्फोट करता है, आमतौर पर जहाज़ के पतवार के नीचे।
- टॉरपीडो का विकास:
- प्रारंभिक उत्पत्ति: 'टॉरपीडो' शब्द मूल रूप से पानी के भीतर उपयोग किये जाने वाले विस्फोटक उपकरणों और समुद्री सुरंगों को संदर्भित करता था।
- नेपोलियन युद्धों (1803–1815) के दौरान आविष्कारक रॉबर्ट फुलटन ने इलेक्ट्रिक रे फिश से प्रेरित होकर पानी के भीतर विस्फोटक उपकरणों पर प्रयोग किया।
- स्पार टॉरपीडो: शुरुआती नौसैनिक सेनाएँ 'स्पार टॉरपीडो' का उपयोग करती थीं, जिसमें एक विस्फोटक को एक लंबे खंभे पर लगाया जाता था और उसे दुश्मन के जहाज़ों से टकराकर विस्फोट किया जाता था।
- ये हथियार प्रभावी थे, लेकिन हमले करने वाले दल के लिये अत्यंत खतरनाक थे।
- आधुनिक टॉरपीडो का आविष्कार: वर्ष 1866 में इंजीनियर रॉबर्ट व्हाइटहेड ने पहला स्वयं-प्रेरित टॉरपीडो विकसित किया। यह संपीडित वायु द्वारा संचालित था और इसमें स्वचालित गहराई नियंत्रण की सुविधा थी, जिससे यह पानी के भीतर स्वतंत्र रूप से यात्रा कर सकता था तथा दुश्मन के जहाज़ों पर दूर से हमला कर सकता था।
- इस आविष्कार ने टॉरपीडो को वास्तविक जलमग्न मार्गदर्शित हथियार में बदल दिया।
- प्रारंभिक उत्पत्ति: 'टॉरपीडो' शब्द मूल रूप से पानी के भीतर उपयोग किये जाने वाले विस्फोटक उपकरणों और समुद्री सुरंगों को संदर्भित करता था।
- कार्यप्रणाली: आधुनिक टॉरपीडो विद्युत बैटरी या तापीय प्रणोदन प्रणालियों का उपयोग करते हैं और 50 समुद्री मील से अधिक की गति से 50 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकते हैं। इनमें लक्ष्य का पता लगाने और उपयुक्त आक्रमण गहराई बनाए रखने के लिये उन्नत मार्गदर्शन प्रणालियाँ, ऑनबोर्ड सेंसर तथा कंप्यूटर लगे होते हैं।
- आधुनिक टॉरपीडो मुख्य रूप से ध्वनिक होमिंग (Acoustic Homing) प्रौद्योगिकी पर आधारित होते हैं।
- सक्रिय ध्वनिक टॉरपीडो सोनार सिग्नल उत्सर्जित करते हैं और लक्ष्यों से आने वाली प्रतिध्वनियों का पता लगाते हैं, जबकि निष्क्रिय ध्वनिक टॉरपीडो इंजन या प्रोपेलर द्वारा उत्पन्न शोर का अनुसरण करते हैं।
- आधुनिक टॉरपीडो मुख्य रूप से ध्वनिक होमिंग (Acoustic Homing) प्रौद्योगिकी पर आधारित होते हैं।
- विश्व युद्धों में टॉरपीडो: विश्व युद्धों के दौरान पनडुब्बियाँ टॉरपीडो हमलों के लिये सबसे प्रभावी मंच बनकर उभरीं हैं।
- द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी के यू-बोट बेड़े ने मित्र राष्ट्रों के हज़ारों जहाज़ों को डुबो दिया, जिसके परिणामस्वरूप कन्वॉय प्रणाली, सोनार पहचान तकनीक तथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) रणनीतियों का विकास हुआ।
- आधुनिक टॉरपीडो के प्रकार: आधुनिक टॉरपीडो मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:
- हेवीवेट टॉरपीडो: प्रायः पनडुब्बियों से प्रक्षेपित किये जाते हैं और बड़े युद्धपोतों को नष्ट करने के लिये उपयोग किये जाते हैं।
- लाइटवेट टॉरपीडो: पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिये जहाजों, विमानों या हेलीकॉप्टरों से लॉन्च किया जाता है।
- कुछ प्रणालियाँ मिसाइल तथा टॉरपीडो प्रौद्योगिकी का संयोजन करती हैं जिससे आक्रमण की दूरी में वृद्धि होती है।
- रणनीतिक महत्त्व: आधुनिक नौसैनिक युद्ध में टॉरपीडो अत्यंत महत्त्वपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि वे गोपनीय, सटीक और अत्यधिक विनाशकारी होते हैं। पानी के अंदर इनका पता लगाना मुश्किल होने के कारण पनडुब्बियाँ छुपकर टॉरपीडो हमले कर सकती हैं, जिससे यह समुद्री संघर्षों में अत्यंत प्रभावी हथियार बन जाते हैं।
- भारत में टॉरपीडो प्रौद्योगिकी:
- वरुणास्त्र (Varunastra): भारत का पहला स्वदेशी उन्नत हेवीवेट पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो, जिसे सतही युद्धपोतों तथा पनडुब्बियों दोनों से प्रक्षेपित किया जा सकता है।
- श्येना/टॉरपीडो एडवांस्ड लाइट (TAL): भारत का पहला स्वदेशी उन्नत लाइटवेट पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो। यह बहु-उपयोगी है और इसे जहाज़ों, पनडुब्बियों तथा हेलीकॉप्टरों से प्रक्षेपित किया जा सकता है।
- मारीच (Maareech): यह आक्रामक टॉरपीडो नहीं है बल्कि एक उन्नत टॉरपीडो प्रतिरक्षा प्रणाली (Advanced Torpedo Defence System – ATDS) है, जो शत्रु टॉरपीडो का पता लगाकर उन्हें भटकाती है तथा टो किये गए डिकॉय के माध्यम से उन्हें नष्ट कर देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1. समुद्री खोज एवं बचाव (SAR) पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन क्या है?
समुद्री खोज एवं बचाव पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (1979) एक अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की संधि है, जो समुद्र में संकटग्रस्त व्यक्तियों के लिये खोज एवं बचाव कार्यों के समन्वय हेतु वैश्विक व्यवस्था स्थापित करती है।
प्रश्न 2. भारत में समुद्री खोज एवं बचाव का समन्वय कौन-सी एजेंसी करती है?
भारत के भारतीय खोज एवं बचाव क्षेत्र (ISRR) में भारतीय तटरक्षक बल खोज एवं बचाव अभियानों का समन्वय करता है तथा तटरक्षक महानिदेशक राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव समन्वय प्राधिकरण (NMSARCA) के रूप में कार्य करते हैं
प्रश्न 3. SAR अभिसमय का महत्त्व क्या है?
यह समुद्र में मानवीय सहायता सुनिश्चित करता है, वैश्विक समुद्री सुरक्षा को मज़बूत बनाता है तथा खोज एवं बचाव अभियानों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
प्रश्न 4. अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) क्या है?
अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित एक नौसैनिक आयोजन है, जिसका उद्देश्य वैश्विक नौसेनाओं के मध्य नौसैनिक सहयोग, अंतरसंचालनीयता तथा समुद्री कूटनीति को सुदृढ़ करना है।
प्रश्न 5. टॉरपीडो क्या है?
टॉरपीडो एक स्व-प्रणोदित जल-आधारित मिसाइल है, जिसे प्रणोदन प्रणालियों, ध्वनिक मार्गदर्शन तथा विस्फोटक वारहेड की सहायता से जहाज़ों अथवा पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिये विकसित किया जाता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2022)
- किसी तटीय राज्य को अपने प्रादेशिक समुद्र की चौड़ाई को आधार-रेखा से मापित, 12 समुद्री मील से अनधिक सीमा तक अभिसमय के अनुरूप सुस्थापित करने का अधिकार है।
- सभी राज्यों, चाहे वे तटीय हों अथवा भूमिबद्ध भाग हों, के जहाज़ों को प्रादेशिक समुद्र से होकर बिना किसी रोकटोक यात्रा का अधिकार होता है।
- अनन्य आर्थिक क्षेत्र का विस्तार उस आधार रेखा से 200 समुद्री मील से अधिक नहीं होगा, जहाँ से प्रादेशिक समुद्र की चौड़ाई मापी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
प्रारंभिक परीक्षा
वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026
चर्चा में क्यों?
वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 को वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन द्वारा विश्व मोटापा दिवस (4 मार्च) के अवसर पर जारी किया गया। यह भारत के लिये चिंताजनक आँकड़े प्रस्तुत करता है, जो एक उभरती हुई सार्वज़निक स्वास्थ्य आपात स्थिति को रेखांकित करते हैं।
मोटापा (ओबेसिटी) क्या है?
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मोटापा ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में असामान्य अथवा अत्यधिक वसा का संचय हो जाता है, जो स्वास्थ्य के लिये जोखिम उत्पन्न करता है।
- बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के आधार पर 25 या उससे अधिक स्कोर को अधिक वज़न (ओवरवेट) तथा 30 या उससे अधिक को मोटापा (ओबेसिटी) की श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है।
प्रमुख निष्कर्ष
- मोटापे की व्यापकता:
- वैश्विक परिप्रेक्ष्य: चीन, भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका—इन तीनों देशों में 1 करोड़ से अधिक बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं। इनमें चीन अग्रणी है (उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले 6.2 करोड़, जिनमें 3.3 करोड़ मोटापे से ग्रस्त), इसके पश्चात भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका (उच्च BMI वाले 2.7 करोड़, जिनमें 1.3 करोड़ मोटापे के मामले) आते हैं। 15–49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में 13.4% का BMI उच्च है तथा 4.2% महिलाएँ टाइप-2 मधुमेह से ग्रस्त हैं।
- विश्व भर में 5 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 200 मिलियन से अधिक स्कूल-आयु के बच्चे, जो अधिक वज़न अथवा मोटापे से ग्रस्त हैं, केवल 10 देशों में केंद्रित हैं।
- भारत: भारत में वर्ष 2025 में 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 15 मिलियन बच्चे तथा 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 26 मिलियन से अधिक बच्चे अधिक वज़न या मोटापे से ग्रस्त थे। इस प्रकार उच्च BMI वाले बच्चों (लगभग 4.1 करोड़) की संख्या के आधार पर भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है।
- वर्ष 2025 से 2040 के बीच भारत में 5 से 19 वर्ष आयु वर्ग के उन बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है, जिनमें उच्च BMI से संबंधित रोग संकेतक पाए जाते हैं।
- वैश्विक परिप्रेक्ष्य: चीन, भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका—इन तीनों देशों में 1 करोड़ से अधिक बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं। इनमें चीन अग्रणी है (उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले 6.2 करोड़, जिनमें 3.3 करोड़ मोटापे से ग्रस्त), इसके पश्चात भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका (उच्च BMI वाले 2.7 करोड़, जिनमें 1.3 करोड़ मोटापे के मामले) आते हैं। 15–49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में 13.4% का BMI उच्च है तथा 4.2% महिलाएँ टाइप-2 मधुमेह से ग्रस्त हैं।
- स्वास्थ्य संबंधी परिणाम (2025–2040): BMI से संबंधित उच्च रक्तचाप के मामलों में 2.99 मिलियन से बढ़कर 4.21 मिलियन तक वृद्धि होने का अनुमान है। इसी प्रकार हाइपरग्लाइसीमिया (उच्च रक्त शर्करा) के मामले 1.39 मिलियन से बढ़कर 1.91 मिलियन, उच्च ट्राइग्लिसराइड्स के मामले 4.39 मिलियन से बढ़कर 6.07 मिलियन तथा मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिज़ीज़ (MASLD) के मामले 8.39 मिलियन से बढ़कर 11.88 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
- रोकथाम योग्य जोखिम कारक: मुख्य योगदानकारी कारकों में 11–17 वर्ष आयु वर्ग के 74% किशोरों का अनुशंसित शारीरिक गतिविधि स्तर पूरा न कर पाना, केवल 35.5% बच्चों को विद्यालयीय भोजन प्राप्त होना, 1–5 माह आयु के 32.6% शिशुओं में अपर्याप्त स्तनपान तथा 6–10 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों द्वारा प्रतिदिन लगभग 50 मिलीलीटर तक शर्करायुक्त पेयों का सेवन शामिल हैं।
- वैश्विक प्रवृत्तियाँ एवं चेतावनियाँ: विश्व स्तर पर बाल्यावस्था में मोटापे की वृद्धि को आधा करने के वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सका है, जिसे अब वर्ष 2030 तक के लिये विस्तारित किया गया है।
- वर्तमान में विश्व भर में 5–19 वर्ष आयु वर्ग के 20.7% बच्चे अधिक वज़न या मोटापे से ग्रस्त हैं, जो वर्ष 2010 में 14.6% थे। अनुमान है कि वर्ष 2040 तक 507 मिलियन बच्चे इससे प्रभावित होंगे तथा 57 मिलियन से अधिक बच्चों में हृदय-धमनी रोगों के प्रारंभिक संकेत दिखाई दे सकते हैं।
नीतिगत सिफारिशें
- रिपोर्ट में सरकारों से तत्काल हस्तक्षेप का आह्वान किया गया है। इसके अंतर्गत शर्करायुक्त पेयों पर कर लगाना, लक्षित विपणन (डिजिटल मंचों सहित) पर प्रतिबंध लगाना, वैश्विक शारीरिक गतिविधि मानकों का कार्यान्वयन, स्तनपान को प्रोत्साहन, विद्यालयी भोजन मानकों को अधिक स्वास्थ्यकर बनाना तथा निवारण एवं उपचार उपायों को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली में समेकित करने जैसी नीतिगत पहलों को अपनाने की अनुशंसा की गई है।
बॉडी मास इंडेक्स (BMI)
- परिचय: बॉडी मास इंडेक्स (BMI) एक स्क्रीनिंग उपकरण है, जिसका उपयोग ऊँचाई तथा वज़न के आधार पर शरीर में वसा के अनुमान हेतु किया जाता है। इसके माध्यम से व्यक्तियों को विभिन्न वज़न श्रेणियों में वर्गीकृत करने में सहायता मिलती है।.
- गणना की विधि: BMI की गणना इस सूत्र से की जाती है; BMI = वज़न (किलोग्राम) ÷ [ऊँचाई (मीटर)]².
- BMI वर्गीकरण (WHO मानक):
- वयस्क BMI: 20 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्कों के लिये मानक श्रेणियाँ इस प्रकार हैं— कम वज़न (<18.5), स्वस्थ/सामान्य वज़न (18.5–24.9), अधिक वज़न (25.0–29.9) तथा मोटापा (≥30.0)।
- मोटापे को आगे तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है: क्लास I (30.0–34.9), क्लास II (35.0–39.9) तथा क्लास III (≥40.0), जो अत्यधिक उच्च स्वास्थ्य जोखिम को दर्शाते हैं।
- बच्चे एवं किशोर: 20 वर्ष से कम आयु के बच्चों तथा किशोरों में BMI की व्याख्या आयु तथा लिंग-विशिष्ट प्रतिशतकों के आधार पर की जाती है।
- श्रेणियाँ इस प्रकार हैं— कम वज़न (<5वाँ प्रतिशतक), स्वस्थ वज़न (5वें से <85वें प्रतिशतक), अधिक वज़न (85वें से <95वें प्रतिशतक), मोटापा (≥95वाँ प्रतिशतक) तथा गंभीर मोटापा (95वें प्रतिशतक के ≥120% या BMI ≥35)।
- स्वास्थ्य प्रभाव एवं उपयोग: BMI श्रेणियाँ स्वास्थ्य जोखिमों से संबंधित होती हैं। उच्च BMI होने पर हृदय-धमनी रोग, टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा अन्य चयापचय संबंधी विकारों का जोखिम बढ़ जाता है।
- हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ समग्र स्वास्थ्य मूल्यांकन के लिये BMI के साथ-साथ कमर परिधि मापन, शरीर संरचना विश्लेषण तथा अन्य चिकित्सकीय परीक्षणों के उपयोग की भी अनुशंसा करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. बॉडी मास इंडेक्स (BMI) क्या है?
बॉडी मास इंडेक्स (BMI) एक स्क्रीनिंग उपकरण है, जिसकी गणना वज़न (किलोग्राम) ÷ [ऊँचाई (मीटर)]² के सूत्र से की जाती है। इसका उपयोग विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के आधार पर व्यक्तियों को कम वज़न, सामान्य वज़न, अधिक वज़न तथा मोटापा श्रेणियों में वर्गीकृत करने के लिये किया जाता है।
2. उच्च BMI से संबंधित संभावित स्वास्थ्य जोखिम क्या हैं?
उच्च BMI के कारण उच्च रक्तचाप, हाइपरग्लाइसीमिया (उच्च रक्त शर्करा), उच्च ट्राइग्लिसराइड्स तथा मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिज़ीज़ (MASLD) के मामलों में वृद्धि होने की आशंका है, जिससे भविष्य में हृदय-धमनी तथा चयापचय संबंधी रोगों का बोझ बढ़ सकता है।
3. वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के अनुसार बाल्यावस्था मोटापे के संदर्भ में भारत की क्या स्थिति है?
वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के अनुसार उच्च BMI वाले लगभग 4.1 करोड़ बच्चों के साथ भारत विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2025 में लगभग 1.4 करोड़ बच्चों को मोटापे की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया, जिससे भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों को पीछे छोड़ दिया है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा/से वह/वे सूचक है/हैं, जिसका/जिनका IFPRI द्वारा वैश्विक भुखमरी सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) रिपोर्ट बनाने में उपयोग किया गया है? (2016)
- अल्प-पोषण
- शिशु वृद्धिरोधन
- शिशु मृत्यु-दर
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 1 और 3
उत्तर: (C)
रैपिड फायर
विश्व वन्यजीव दिवस 2026
स्रोत: PIB
- विश्व वन्यजीव दिवस 3 मार्च, 2026 को ‘Medicinal and Aromatic Plants: Conserving Health, Heritage and Livelihoods’ अर्थात औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका का संरक्षण” विषय के साथ मनाया गया। यह दिवस वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) को अपनाने की स्मृति में मनाया जाता है।
- इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने अपनी 68वीं बैठक में 20 दिसंबर, 2013 को आधिकारिक रूप से घोषित किया था, जिसमें 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।
भारत में औषधीय पौधों का संरक्षण
- भारत में पादप विविधता: भारत एक मेगा-जैव विविधता संपन्न राष्ट्र है, जिसके पास विश्व की कुल जैव विविधता का लगभग 7% भाग है, जिसमें 45,000 पादप प्रजातियाँ शामिल हैं, जिनमें से 15,000 औषधीय पौधे हैं और लगभग 8,000 प्रजातियों का उपयोग भारतीय चिकित्सा प्रणालियों (आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी) और लोक चिकित्सा में किया जाता है।
- भारत के लगभग 70% औषधीय पौधे पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, हिमालय और अरावली पर्वतमाला में पाए जाते हैं।
- संरक्षण के तरीके: भारत में औषधीय पौधों के संरक्षण हेतु इन-सीटू (प्राकृतिक आवास में) तथा एक्स-सीटू (प्राकृतिक आवास के बाहर) दोनों प्रकार की रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं।
- इन-सीटू संरक्षण: प्राकृतिक आवासों में 115 औषधीय पौधा संरक्षण क्षेत्र (MPCA) स्थापित किये गए हैं।
- एक्स-सीटू संरक्षण: राष्ट्रीय बीज जीन बैंक, नई दिल्ली में औषधीय पौधों का संरक्षण किया जाता है।
- राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB): आयुष मंत्रालय के अधीन यह नोडल संस्था औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास तथा सतत प्रबंधन हेतु केंद्रीय क्षेत्रक योजना का क्रियान्वयन करती है तथा संरक्षण, खेती, अनुसंधान एवं विपणन अवसंरचना को समर्थन प्रदान करती है।
- सरकार की प्रमुख पहलें:
- राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) वर्ष 2014 तथा बागवानी के एकीकृत विकास के लिये मिशन (MIDH) कृषि प्रणालियों के साथ औषधीय पौधों की खेती के एकीकरण को प्रोत्साहित करते हैं।
- ई-चरक प्लेटफॉर्म 25 हर्बल बाज़ारों से 100 औषधीय पौधों की कीमतों को अनेक स्थानीय भाषाओं में पाक्षिक रूप से अद्यतन कर बाज़ार तक पहुँच को सुलभ बनाता है।
- औषधि वनस्पति मित्र कार्यक्रम (AVMP) औषधीय पौधों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता प्रदान करता है।
- औषधीय पादप व्यापार केंद्र घटक (MPBC) फसल कटाई के बाद के प्रबंधन, वैज्ञानिक भंडारण तथा गुणवत्ता परीक्षण अवसंरचना को समर्थन देता है।
- GI टैग प्राप्त औषधीय पौधे: भारत ने पंचकर्म चिकित्सा के लिये नवारा चावल (केरल), हरी इलायची (केरल और कर्नाटक), गंजाम केवड़ा फूल (ओडिशा), केसर (जम्मू-कश्मीर) और हाल ही में नवंबर 2025 में पंजीकृत "नागौरी अश्वगंधा" (राजस्थान) सहित GI टैग के माध्यम से अपनी औषधीय पौधों की विरासत को संरक्षित किया है।
| और पढ़ें: भारत में जैव विविधता के प्रमुख केंद्र |
रैपिड फायर
नतांज़ पर कथित हमले को लेकर IAEA–ईरान विवाद
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने अमेरिका-इज़रायल गुट और ईरान के बीच सैन्य झड़प के बाद रूस और ईरान के अनुरोध पर वियना में एक आपातकालीन बैठक आयोजित की।
- IAEA का आकलन: IAEA के अनुसार, वर्तमान में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों (बुशहर और तेहरान अनुसंधान रिएक्टर सहित) को किसी प्रकार की क्षति के संकेत नहीं मिले हैं, साथ ही एजेंसी ने पुष्टि की कि क्षेत्र में विकिरण स्तर सामान्य बना हुआ है।
- ईरान की प्रतिक्रिया: ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी और इज़रायली हवाई हमलों ने नतांज़ यूरेनियम संवर्द्धन केंद्र को निशाना बनाया।
- हालाँकि, ईरान ने अब तक किसी भी प्रकार का सार्वज़निक या तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है जो क्षति की पुष्टि करता हो।
- संभावित रणनीतिक उद्देश्य: ईरान ने पहले भी विदेशी हमलों का IAEA के साथ सहयोग निलंबित करने के औचित्य के रूप में उपयोग किया है।
- वर्ष 2025 के मध्य में हुए हमलों के बाद ईरान ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए IAEA निरीक्षणों के साथ सभी सहयोग को निलंबित करने वाला कानून पारित किया।
- हमलों के दावे तेहरान को रूस और चीन जैसे सहयोगी देशों से समर्थन जुटाने में सहायक हो सकते हैं।
- यदि ईरान की परमाणु अवसंरचना को खतरा होता है, तो वह “आत्म-रक्षा” के आधार पर यूरेनियम को उच्च स्तर तक समृद्ध करने को उचित ठहरा सकता है।
- यह पारदर्शिता को भी सीमित कर सकता है तथा अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षकों के साथ सूचना साझा करने पर प्रतिबंध लगा सकता है।
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ईरान–IAEA तनाव: ईरान लंबे समय से IAEA पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाता रहा है और दावा करता है कि पश्चिमी देश इसका उपयोग “राजनीतिक रूप से प्रेरित” रिपोर्ट जारी करने के लिये करते हैं।
- कुछ ईरानी नेताओं ने तो IAEA को “इज़रायल का जासूस” तक कहा तथा आरोप लगाया कि एजेंसी ने परमाणु स्थलों के निर्देशांक और वैज्ञानिकों की पहचान से संबंधित जानकारी लीक की।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)
- अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइज़नहावर द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिये गए "शांति के लिये परमाणु" भाषण (1953) के बाद, वर्ष 1957 में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत IAEA की स्थापना की गई थी।
- IAEA के नियमों को वर्ष 1956 में 81 देशों द्वारा अनुमोदित किया गया, जिसमें भारत एक संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल था। दिसंबर 2025 तक इस एजेंसी के 181 सदस्य देश हैं।
- यह संगठन विश्व की "शांति के लिये परमाणु" एजेंसी के रूप में कार्य करता है, जिसे परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने और सैन्य उद्देश्यों के लिये इसके दुरुपयोग को रोकने का कार्य सौंपा गया है।
- IAEA का मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना में स्थित है। यह एक वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था के रूप में कार्य करते हुए परमाणु सुरक्षा उपायों, निरीक्षणों तथा ऊर्जा, चिकित्सा और कृषि क्षेत्रों में परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण अनुप्रयोगों को बढ़ावा देती है।
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रैपिड फायर
हेक्सागॉन गठबंधन
मध्य पूर्व तथा हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में तीव्र भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा के मध्य, इज़रायल ने “हेक्सागॉन गठबंधन (Hexagon of Alliances)” नामक प्रस्तावित रणनीतिक फ्रेमवर्क की घोषणा की है। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत, पूर्वी भूमध्यसागर, खाड़ी क्षेत्र तथा अफ्रीका की उन उदारवादी शक्तियों को एकजुट करना है, जो सुरक्षा चुनौतियों पर समान विचार साझा करती हैं।
- उद्देश्य: यह फ्रेमवर्क समान विचारधारा वाले राष्ट्रों के छह-पक्षीय नेटवर्क की परिकल्पना करता है ताकि निम्नलिखित का सामना किया जा सके:
- ईरान के नेतृत्व वाली प्रतिरोधी शक्तियों, जिसमें हिज़्बुल्लाह, हमास, हौथी तथा इराकी मिलिशिया शामिल हैं।
- कट्टरपंथी सुन्नी गुट (जिसमें ISIS से संबद्ध समूह शामिल हैं और मुस्लिम ब्रदरहुड (जिसकी स्थापना 1928 में मिस्र में हुई थी)।
- मुख्य साझेदार: प्रस्तावित “हेक्सागॉन गठबंधन” में भारत को एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित किया गया है, जबकि इज़रायल, ग्रीस और साइप्रस इसके अन्य प्रमुख सदस्य हैं। इसके अतिरिक्त अरब, अफ्रीकी और एशियाई देशों (जैसे– इथियोपिया, UAE) के भी इसमें शामिल होने की संभावना है।
- मुख्य कार्यक्षेत्र: प्रस्तावित गठबंधन का मुख्य फोकस प्रतिभागी देशों के बीच रक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने, प्रौद्योगिकी, कूटनीति और सुरक्षा समन्वय में रणनीतिक सहयोग पर केंद्रित रहेगा।
- रणनीतिक महत्त्व: यह गठबंधन मौजूदा समूहों, जैसे– अब्राहम समझौते, भारत–इज़रायल रणनीतिक संबंध और I2U2 (भारत–इज़रायल–UAE–अमेरिका) फ्रेमवर्क का स्वाभाविक विस्तार माना जा रहा है। इससे हिंद-प्रशांत से भूमध्यसागर तक मध्यमार्गी देशों की एक निरंतर रणनीतिक कड़ी बनने की संभावना है।
- भू-राजनीतिक निहितार्थ: समर्थक इसे कट्टरपंथ के विरुद्ध एक रणनीतिक संतुलनकारी व्यवस्था के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक विभिन्न देशों के अलग-अलग राष्ट्रीय हितों के कारण इसकी व्यावहारिकता पर संदेह व्यक्त करते हैं।
- तुर्किये और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देश इसे संभावित रूप से तुर्किये-विरोधी या मुस्लिम उम्मा-विरोधी संगठन मानते हैं। पाकिस्तान की सीनेट ने भी भारत और अन्य देशों के साथ इज़रायल के प्रस्तावित गठबंधन की निंदा करते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है।
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रैपिड फायर
ALH Mk-III तथा Shtil मिसाइल प्रणाली
रक्षा मंत्रालय ने ₹5,083 करोड़ मूल्य के अनुबंध पर हस्ताक्षर किये, जिनके अंतर्गत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से भारतीय तटरक्षक बल के लिये छह एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) Mk-III तथा रूस की जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट से भारतीय नौसेना के लिये सतह से हवा में मार करने वाली वर्टिकल लॉन्च मिसाइल प्रणाली (Shtil) एवं मिसाइल होल्डिंग फ्रेम्स की खरीद की जाएगी।
- एएलएच एमके-III का अधिग्रहण: यह अनुबंध खरीद (इंडियन–इंडिजिनसली डिज़ाइंड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड) श्रेणी के अंतर्गत आता है।
- ALH Mk-III दो इंजन वाले हेलीकॉप्टर हैं, जो समुद्री सुरक्षा अभियानों को सुदृढ़ करते हैं, जैसे- अपतटीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, मछुआरों की सहायता तथा समुद्री पर्यावरण का संरक्षण। इसके साथ ही यह परियोजना मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत पहल को भी प्रोत्साहित करती है, क्योंकि इसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी है तथा लगभग 65 लाख मानव-घंटों के रोज़गार का सृजन होगा।
- सतह से हवा में मार करने वाली वर्टिकल लॉन्च मिसाइल प्रणाली (Shtil): यह एक जहाज़-आधारित मध्यम-दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे विमान, हेलीकॉप्टर, मानवरहित हवाई वाहन (UAV) तथा नौसैनिक पोतों को लक्ष्य बनाने वाली एंटी-शिप मिसाइलों को अवरोधित करने के लिये विकसित किया गया है।
- यह प्रणाली रूसी रक्षा उद्योगों द्वारा विकसित बुक मिसाइल प्रणाली पर आधारित है।
- इसमें वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) का उपयोग किया जाता है, जो सभी मौसम परिस्थितियों में अनेक हवाई खतरों के विरुद्ध तीव्र अवरोधन की क्षमता प्रदान करता है तथा इसे नौसैनिक रडार एवं फायर-कंट्रोल प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जा सकता है।
- भारतीय नौसेना के लिये यह प्रणाली बहु-स्तरीय समुद्री वायु रक्षा को सुदृढ़ करती है तथा हिंद महासागर क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की बचे रहने की क्षमता (survivability) को बढ़ाती है।
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