रैपिड फायर
विश्व वन्यजीव दिवस 2026
- 05 Mar 2026
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स्रोत: PIB
- विश्व वन्यजीव दिवस 3 मार्च, 2026 को ‘Medicinal and Aromatic Plants: Conserving Health, Heritage and Livelihoods’ अर्थात औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, विरासत और आजीविका का संरक्षण” विषय के साथ मनाया गया। यह दिवस वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) को अपनाने की स्मृति में मनाया जाता है।
- इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने अपनी 68वीं बैठक में 20 दिसंबर, 2013 को आधिकारिक रूप से घोषित किया था, जिसमें 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।
भारत में औषधीय पौधों का संरक्षण
- भारत में पादप विविधता: भारत एक मेगा-जैव विविधता संपन्न राष्ट्र है, जिसके पास विश्व की कुल जैव विविधता का लगभग 7% भाग है, जिसमें 45,000 पादप प्रजातियाँ शामिल हैं, जिनमें से 15,000 औषधीय पौधे हैं और लगभग 8,000 प्रजातियों का उपयोग भारतीय चिकित्सा प्रणालियों (आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी) और लोक चिकित्सा में किया जाता है।
- भारत के लगभग 70% औषधीय पौधे पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, हिमालय और अरावली पर्वतमाला में पाए जाते हैं।
- संरक्षण के तरीके: भारत में औषधीय पौधों के संरक्षण हेतु इन-सीटू (प्राकृतिक आवास में) तथा एक्स-सीटू (प्राकृतिक आवास के बाहर) दोनों प्रकार की रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं।
- इन-सीटू संरक्षण: प्राकृतिक आवासों में 115 औषधीय पौधा संरक्षण क्षेत्र (MPCA) स्थापित किये गए हैं।
- एक्स-सीटू संरक्षण: राष्ट्रीय बीज जीन बैंक, नई दिल्ली में औषधीय पौधों का संरक्षण किया जाता है।
- राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB): आयुष मंत्रालय के अधीन यह नोडल संस्था औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास तथा सतत प्रबंधन हेतु केंद्रीय क्षेत्रक योजना का क्रियान्वयन करती है तथा संरक्षण, खेती, अनुसंधान एवं विपणन अवसंरचना को समर्थन प्रदान करती है।
- सरकार की प्रमुख पहलें:
- राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) वर्ष 2014 तथा बागवानी के एकीकृत विकास के लिये मिशन (MIDH) कृषि प्रणालियों के साथ औषधीय पौधों की खेती के एकीकरण को प्रोत्साहित करते हैं।
- ई-चरक प्लेटफॉर्म 25 हर्बल बाज़ारों से 100 औषधीय पौधों की कीमतों को अनेक स्थानीय भाषाओं में पाक्षिक रूप से अद्यतन कर बाज़ार तक पहुँच को सुलभ बनाता है।
- औषधि वनस्पति मित्र कार्यक्रम (AVMP) औषधीय पौधों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता प्रदान करता है।
- औषधीय पादप व्यापार केंद्र घटक (MPBC) फसल कटाई के बाद के प्रबंधन, वैज्ञानिक भंडारण तथा गुणवत्ता परीक्षण अवसंरचना को समर्थन देता है।
- GI टैग प्राप्त औषधीय पौधे: भारत ने पंचकर्म चिकित्सा के लिये नवारा चावल (केरल), हरी इलायची (केरल और कर्नाटक), गंजाम केवड़ा फूल (ओडिशा), केसर (जम्मू-कश्मीर) और हाल ही में नवंबर 2025 में पंजीकृत "नागौरी अश्वगंधा" (राजस्थान) सहित GI टैग के माध्यम से अपनी औषधीय पौधों की विरासत को संरक्षित किया है।
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