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अमेरिकी टॉरपीडो ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को डुबोया

  • 05 Mar 2026
  • 72 min read

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

एक अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट पर गॉल के निकलगभग 40 नॉटिकल मील की दूरी पर ईरान के फ्रिगेट IRIS डेना को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। इस घटना ने अमेरिका–इज़रायल–ईरान संघर्ष को हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region – IOR) के और निकट ला दिया है तथा यह द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार है जब अमेरिका ने टॉरपीडो द्वारा किसी शत्रु जहाज़ को डुबोया है।

  • घटना के पश्चात श्रीलंका ने इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन मैरिटाइम सर्च एंड रेस्क्यू (SAR कन्वेंशन 1979) के अंतर्गत अपने दायित्वों के अनुरूप नाविकों को बचाने के लिये नौसैनिक पोत तैनात किये।

इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन मैरिटाइम सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) क्या है?

  • परिचय: SAR कन्वेंशन एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिसे वर्ष 1979 में इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइज़ेशन (IMO) के अंतर्गत अपनाया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्र में संकटग्रस्त व्यक्तियों को शीघ्र खोज एवं बचाव सहायता प्राप्त हो।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • वैश्विक खोज एवं बचाव प्रणाली: विश्व के महासागरों को विभिन्न SAR क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जहाँ प्रत्येक तटीय देश अपने क्षेत्र में बचाव अभियानों के समन्वय के लिये उत्तरदायी होता है।
    • बचाव का दायित्व: इस अभिसमय के अनुसार जहाज़ों तथा तटीय राज्यों को समुद्र में संकटग्रस्त व्यक्तियों की सहायता करना अनिवार्य है, चाहे उनकी राष्ट्रीयता या स्थिति कुछ भी हो।
    • समन्वय तंत्र: खोज एवं बचाव अभियानों के संगठन तथा प्रबंधन हेतु रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर्स (RCCs) की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
    • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: त्वरित बचाव एवं निकासी के लिये पड़ोसी देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • भारत और SAR:
    • भारत SAR कन्वेंशन, 1979 का हस्ताक्षरकर्त्ता है तथा भारत ने इसे वर्ष 2001 में अनुमोदित किया था। भारत में भारतीय तटरक्षक बल (ICG), इंडियन सर्च एंड रेस्क्यू रीजन (ISRR) में बचाव अभियानों का समन्वय करता है, जहाँ डायरेक्टर जनरल, ICG नेशनल मेरिटाइम सर्च एंड रेस्क्यू कोऑर्डिनेटिंग अथॉरिटी (NMSARCA) के रूप में कार्य करते हैं।
    • ICG द्वारा INDSAR नामक एक स्वैच्छिक जहाज़ रिपोर्टिंग प्रणाली भी संचालित की जाती है, जो जहाज़ों की निगरानी करने तथा समुद्री संकट की स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सहायता करती है।.
  • महत्त्व: SAR समुद्र में मानवीय सहायता सुनिश्चित करता है तथा समुद्री सुरक्षा एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ बनाता है।

नोट:  IRIS डेना पर हमला तब किया गया जब यह विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 में भाग लेने के बाद वापस लौट रहा था।

  • IFR का आयोजन इंडियन नेवी द्वारा वैश्विक स्तर पर नौसेनाओं के मध्य विश्वास, इंटरऑपरेबिलिटी, तथा “ब्रिजेज ऑफ फ्रेंडशिप” स्थापित करने के उद्देश्य से किया जाता है।
  • भारतीय जलक्षेत्र छोड़ने के तुरंत बाद किसी भागीदार पोत पर हमला नई दिल्ली को एक संवेदनशील कूटनीतिक स्थिति में डाल देता है, जहाँ उसे अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी तथा ईरान के साथ अपने सभ्यतागत एवं ऊर्जा संबंधों के बीच संतुलन साधना पड़ता है।

टॉरपीडो क्या है?

  • परिचय: टॉरपीडो एक स्व-प्रेरित जलमग्न मिसाइल है, जिसे जहाज़ों या पनडुब्बियों को नष्ट करने के उद्देश्य से बनाया गया है। नौसैनिक खानों के विपरीत, यह पानी में स्वतंत्र रूप से गतिशील रहता है, लक्ष्य का पीछा करता है और सबसे प्रभावशाली बिंदु पर विस्फोट करता है, आमतौर पर जहाज़ के पतवार के नीचे
  • टॉरपीडो का विकास:
    • प्रारंभिक उत्पत्ति: 'टॉरपीडो' शब्द मूल रूप से पानी के भीतर उपयोग किये जाने वाले विस्फोटक उपकरणों और समुद्री सुरंगों को संदर्भित करता था।
      • नेपोलियन युद्धों (1803–1815) के दौरान आविष्कारक रॉबर्ट फुलटन ने इलेक्ट्रिक रे फिश से प्रेरित होकर पानी के भीतर विस्फोटक उपकरणों पर प्रयोग किया।
    • स्पार टॉरपीडो: शुरुआती नौसैनिक सेनाएँ 'स्पार टॉरपीडो' का उपयोग करती थीं, जिसमें एक विस्फोटक को एक लंबे खंभे पर लगाया जाता था और उसे दुश्मन के जहाज़ों से टकराकर विस्फोट किया जाता था।
      • ये हथियार प्रभावी थे, लेकिन हमले करने वाले दल के लिये अत्यंत खतरनाक थे।
    • आधुनिक टॉरपीडो का आविष्कार: वर्ष 1866 में इंजीनियर रॉबर्ट व्हाइटहेड ने पहला स्वयं-प्रेरित टॉरपीडो विकसित किया। यह संपीडित वायु द्वारा संचालित था और इसमें स्वचालित गहराई नियंत्रण की सुविधा थी, जिससे यह पानी के भीतर स्वतंत्र रूप से यात्रा कर सकता था तथा दुश्मन के जहाज़ों पर दूर से हमला कर सकता था।
      • इस आविष्कार ने टॉरपीडो को वास्तविक जलमग्न मार्गदर्शित हथियार में बदल दिया।
  • कार्यप्रणाली:  आधुनिक टॉरपीडो विद्युत बैटरी या तापीय प्रणोदन प्रणालियों का उपयोग करते हैं और 50 समुद्री मील से अधिक की गति से 50 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकते हैं। इनमें लक्ष्य का पता लगाने और उपयुक्त आक्रमण गहराई बनाए रखने के लिये उन्नत मार्गदर्शन प्रणालियाँ, ऑनबोर्ड सेंसर तथा कंप्यूटर लगे होते हैं।
    • आधुनिक टॉरपीडो मुख्य रूप से ध्वनिक होमिंग (Acoustic Homing) प्रौद्योगिकी पर आधारित होते हैं।
      • सक्रिय ध्वनिक टॉरपीडो सोनार सिग्नल उत्सर्जित करते हैं और लक्ष्यों से आने वाली प्रतिध्वनियों का पता लगाते हैं, जबकि निष्क्रिय ध्वनिक टॉरपीडो इंजन या प्रोपेलर द्वारा उत्पन्न शोर का अनुसरण करते हैं।
  • विश्व युद्धों में टॉरपीडो: विश्व युद्धों के दौरान पनडुब्बियाँ टॉरपीडो हमलों के लिये सबसे प्रभावी मंच बनकर उभरीं हैं। 
    • द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी के यू-बोट बेड़े ने मित्र राष्ट्रों के हज़ारों जहाज़ों को डुबो दिया, जिसके परिणामस्वरूप कन्वॉय प्रणाली, सोनार पहचान तकनीक तथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) रणनीतियों का विकास हुआ।
  • आधुनिक टॉरपीडो के प्रकार: आधुनिक टॉरपीडो मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:
    • हेवीवेट टॉरपीडो: प्रायः पनडुब्बियों से प्रक्षेपित किये जाते हैं और बड़े युद्धपोतों को नष्ट करने के लिये उपयोग किये जाते हैं।
    • लाइटवेट टॉरपीडो: पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिये जहाजों, विमानों या हेलीकॉप्टरों से लॉन्च किया जाता है। 
      • कुछ प्रणालियाँ मिसाइल तथा टॉरपीडो प्रौद्योगिकी का संयोजन करती हैं जिससे आक्रमण की दूरी में वृद्धि होती है।
    • रणनीतिक महत्त्व: आधुनिक नौसैनिक युद्ध में टॉरपीडो अत्यंत महत्त्वपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि वे गोपनीय, सटीक और अत्यधिक विनाशकारी होते हैं। पानी के अंदर इनका पता लगाना मुश्किल होने के कारण पनडुब्बियाँ छुपकर टॉरपीडो हमले कर सकती हैं, जिससे यह समुद्री संघर्षों में अत्यंत प्रभावी हथियार बन जाते हैं।
    • भारत में टॉरपीडो प्रौद्योगिकी:
      • वरुणास्त्र (Varunastra): भारत का पहला स्वदेशी उन्नत हेवीवेट पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो, जिसे सतही युद्धपोतों तथा पनडुब्बियों दोनों से प्रक्षेपित किया जा सकता है।
      • श्येना/टॉरपीडो एडवांस्ड लाइट (TAL): भारत का पहला स्वदेशी उन्नत लाइटवेट पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो। यह बहु-उपयोगी है और इसे जहाज़ों, पनडुब्बियों तथा हेलीकॉप्टरों से प्रक्षेपित किया जा सकता है।
      • मारीच (Maareech): यह आक्रामक टॉरपीडो नहीं है बल्कि एक उन्नत टॉरपीडो प्रतिरक्षा प्रणाली (Advanced Torpedo Defence System – ATDS) है, जो शत्रु टॉरपीडो का पता लगाकर उन्हें भटकाती है तथा टो किये गए डिकॉय के माध्यम से उन्हें नष्ट कर देती है।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    प्रश्न 1. समुद्री खोज एवं बचाव (SAR) पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन क्या है? 

    समुद्री खोज एवं बचाव पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (1979) एक अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की संधि है, जो समुद्र में संकटग्रस्त व्यक्तियों के लिये खोज एवं बचाव कार्यों के समन्वय हेतु वैश्विक व्यवस्था स्थापित करती है।

    प्रश्न 2. भारत में समुद्री खोज एवं बचाव का समन्वय कौन-सी एजेंसी करती है? 

    भारत के भारतीय खोज एवं बचाव क्षेत्र (ISRR) में भारतीय तटरक्षक बल खोज एवं बचाव अभियानों का समन्वय करता है तथा तटरक्षक महानिदेशक राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव समन्वय प्राधिकरण (NMSARCA) के रूप में कार्य करते हैं

    प्रश्न 3. SAR अभिसमय का महत्त्व क्या है?

    यह समुद्र में मानवीय सहायता सुनिश्चित करता है, वैश्विक समुद्री सुरक्षा को मज़बूत बनाता है तथा खोज एवं बचाव अभियानों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करता है।

    प्रश्न 4. अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) क्या है?

    अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित एक नौसैनिक आयोजन है, जिसका उद्देश्य वैश्विक नौसेनाओं के मध्य नौसैनिक सहयोग, अंतरसंचालनीयता तथा समुद्री कूटनीति को सुदृढ़ करना है।

    प्रश्न 5. टॉरपीडो क्या है?

    टॉरपीडो एक स्व-प्रणोदित जल-आधारित मिसाइल है, जिसे प्रणोदन प्रणालियों, ध्वनिक मार्गदर्शन तथा विस्फोटक वारहेड की सहायता से जहाज़ों अथवा पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिये विकसित किया जाता है।

    UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

    प्रिलिम्स:

    प्रश्न. समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2022)

    1. किसी तटीय राज्य को अपने प्रादेशिक समुद्र की चौड़ाई को आधार-रेखा से मापित, 12 समुद्री मील से अनधिक सीमा तक अभिसमय के अनुरूप सुस्थापित करने का अधिकार है।
    2.   सभी राज्यों, चाहे वे तटीय हों अथवा भूमिबद्ध भाग हों, के जहाज़ों को प्रादेशिक समुद्र से होकर बिना किसी रोकटोक यात्रा का अधिकार होता है।
    3.   अनन्य आर्थिक क्षेत्र का विस्तार उस आधार रेखा से 200 समुद्री मील से अधिक नहीं होगा, जहाँ से प्रादेशिक समुद्र की चौड़ाई मापी जाती है।

    उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

    (a) केवल 1 और 2
    (b) केवल 2 और 3
    (c) केवल 1 और 3
    (d) 1, 2 और 3

    उत्तर: (d)

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