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छत्तीसगढ़ स्टेट पी.सी.एस.

  • 16 Apr 2026
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छत्तीसगढ़ ने अटल आरोग्य लैब लॉन्च किया

चर्चा में क्यों?

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर क्षेत्र में अटल आरोग्य लैब का उद्घाटन किया, ताकि विशेष रूप से दूरदराज और पूर्व में नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में निशुल्क डायग्नोस्टिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा सके।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: अटल आरोग्य लैब का उद्घाटन बस्तर क्षेत्र के सुकमा में किया गया, जो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
    • इस कार्यक्रम के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नागरिकों को 133 प्रकार की डायग्नोस्टिक जाँचें निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
  • साझेदार: इस कार्यक्रम को HLL लाइफकेयर लिमिटेड के सहयोग से लागू किया जा रहा है।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य रोगों की शीघ्र पहचान, तीव्र उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करना है, विशेषकर राज्य के दूरदराज तथा वंचित क्षेत्रों में।
  • कवरेज: यह पहल पूरे राज्य में 1,046 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संचालित होगी, जिनमें ज़िला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs) शामिल हैं।
    • इस योजना में एक पूर्णतः डिजिटल प्रणाली शामिल है, जिसमें जाँच रिपोर्ट सीधे मरीजों को SMS और व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजी जाएंगी।

और पढ़ें: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs)


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छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे के लिये समिति को स्वीकृति दी

चर्चा में क्यों?

15 अप्रैल, 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल की बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति के गठन को स्वीकृति दी गई।

मुख्य बिंदु:

  • मसौदा समिति का नेतृत्व: इस समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई करेंगी, जो सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं और उत्तराखंड में भी UCC मसौदा समिति का नेतृत्व कर चुकी हैं।
    • कार्यादेश: समिति का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण से संबंधित विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को सरल बनाना है, ताकि धार्मिक एवं लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया जा सके।
    • जन परामर्श: अंतिम मसौदा राज्य विधानसभा को सौंपने से पहले समिति नागरिकों, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त करेगी, जिसके लिये एक समर्पित वेब पोर्टल सहित विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।
  • संवैधानिक और विधिक आधार: राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्त्व) का हवाला दिया है, जो राज्य को सभी नागरिकों के लिये समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
    • एकरूपता का लक्ष्य: अधिकारियों के अनुसार, धर्म-आधारित विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों की मौजूदगी से न्यायिक प्रक्रिया में जटिलता और असमानता उत्पन्न होती है।
  • राजनीतिक विवाद: जनजातीय अधिकारों पर खतरा: विपक्षी कांग्रेस और जनजातीय संगठनों, जैसे छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज (CSAS) ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है।
    • संवैधानिक संरक्षण: राज्य कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के अनुसार, UCC लागू होने से राज्य की 32% से अधिक जनजातीय आबादी, जो पाँचवीं अनुसूची और PESA अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित है, के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
    • पारंपरिक कानून: आलोचकों का तर्क है कि जनजातीय पहचान जन्म, विवाह और संपत्ति अधिकारों से जुड़े विशिष्ट परंपरागत नियमों से जुड़ी होती है, जिन्हें एक समान कानून से कमज़ोर किया जा सकता है।
    • औद्योगिक हितों का आरोप: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि UCC लागू करने का प्रयास बस्तर जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक हितों को लाभ पहुँचाने के लिये जनजातीय भूमि अधिकारों को कमज़ोर करने की ‘साजिश’ है।
  • महिला सशक्तीकरण हेतु समानांतर नीति: UCC के निर्णय के साथ ही मंत्रिमंडल ने महिलाओं के नाम पर पंजीकृत संपत्तियों के लिये रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50% की छूट देने की घोषणा की है।
    • उद्देश्य: इस कदम का उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व के लिये प्रोत्साहित करना और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में उनकी वित्तीय सुरक्षा को मज़बूत करना है।

और पढ़ें: समान नागरिक संहिता


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

C-DAC ने ‘e-SafeHER’ साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम लॉन्च किया

चर्चा में क्यों?

‘e-SafeHER’ साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम को शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की एक मिलियन महिलाओं को डिजिटल व्यवस्था में सुरक्षित रूप से भाग लेने में सक्षम बनाना है।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: इस पहल को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत वैज्ञानिक संस्था C-DAC हैदराबाद द्वारा रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से शुरू किया गया है।
  • उद्देश्य: इस कार्यक्रम का लक्ष्य ग्रामीण भारत की महिलाओं में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, ताकि वे वित्तीय लेन-देन, आजीविका और ऑनलाइन सेवाओं तक पहुँच जैसी डिजिटल गतिविधियों में सुरक्षित रूप से भाग ले सकें।
    • यह पहल अगले तीन वर्षों में ग्रामीण भारत में 1 मिलियन ‘साइबर सखियों’ को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखती है।
  • कार्यक्रम: यह पहल इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (ISEA) कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित की जा रही है।
  • क्रियान्वयन:
    • C-DAC हैदराबाद साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण सामग्री का विकास और स्थानीयकरण करेगा।
    • रिलायंस फाउंडेशन ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से पहुँच और प्रशिक्षण को सुगम बनाएगा।
    • इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रारंभिक रूप से मध्य प्रदेश और ओडिशा में साइबर सखियों के प्रशिक्षण के साथ की जाएगी।

और पढ़ें: C-DAC, साइबर सुरक्षा, स्वयं सहायता समूह (SHGs)


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