रैपिड फायर
लोकसभा की विशेषाधिकार समिति
- 06 Mar 2026
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लोकसभा अध्यक्ष ने आधिकारिक रूप से विशेषाधिकार समिति का पुनर्गठन किया, जो सदन एवं उसके सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करने वाली एक महत्त्वपूर्ण संसदीय समिति है।
- संसदीय विशेषाधिकार: यह संसद को एक संस्था के रूप में तथा सांसदों को व्यक्तिगत रूप से प्राप्त विशेष अधिकारों और शक्तियों को संदर्भित करता है।
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ये विशेषाधिकार सुनिश्चित करते हैं कि विधायिका बिना बाहरी हस्तक्षेप के अपने संवैधानिक कर्त्तव्यों का स्वतंत्र एवं प्रभावी निर्वहन कर सकें।
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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 105 संसद एवं उसके सदस्यों को विशेषाधिकार प्रदान करता है, जबकि संविधान का अनुच्छेद 194 राज्य विधानमंडलों को समान विशेषाधिकार प्रदान करता है।
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विशेषाधिकार हनन: जब कोई कार्य संसद या उसके सदस्यों के अधिकारों या विशेषाधिकारों का उल्लंघन करता है, उसे विशेषाधिकार का हनन माना जाता है।
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विशेषाधिकार समिति: यह संसदीय विशेषाधिकार के हनन संबंधी मामलों की जाँच करने वाली संसद की स्थायी समिति है।
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संघटन:
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लोकसभा समिति: लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा नामित 15 सदस्य।
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राज्यसभा समिति: राज्यसभा के सभापति द्वारा नामित 10 सदस्य।
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कार्य: सदन और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों की जाँच करती है। गवाहों को बुलाकर और दस्तावेज़ो की जाँच करके मामले की पड़ताल करती है।
- विशेषाधिकार के हनन या सदन की अवमानना के घटित होने का निर्धारण करती है।
- विशेषाधिकार समिति अपनी रिपोर्ट सदन को प्रस्तुत करती है, जिसे स्वीकार, अस्वीकार या संशोधित किया जा सकता है।
- हालाँकि अधिकांश विशेषाधिकार संबंधी आसूचनाओं को सामान्यतः अस्वीकार कर दिया जाता है, दंडात्मक कार्रवाई केवल कुछ मामलों में की जाती है।
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- दलबदल संबंधी मामले: भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची तथा लोकसभा सदस्य (दलबदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1985 के अंतर्गत अध्यक्ष दलबदल के आधार पर सांसदों की अयोग्यता संबंधी याचिकाओं को अंतिम निर्णय लेने से पूर्व प्रारंभिक अन्वेषण हेतु समिति को प्रेषित कर सकते हैं।
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महत्त्व: विशेषाधिकार समिति संसद की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करती है तथा संसदीय कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न करने वाली कार्रवाइयों के लिये उत्तरदायित्व सुनिश्चित करती है।
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यह समिति विधायी कार्यवाहियों में अनुशासन और अखंडता बनाए रखने में सहायक है।
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