रैपिड फायर
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026
- 06 Mar 2026
- 16 min read
भारत ने 28 फरवरी को भौतिकी वैज्ञानिक सी,वी. रमन के रमन इफेक्ट (1928) की खोज की स्मृति में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया। वर्ष 2026 का विषय है– "विज्ञान में महिलाएँ: विकसित भारत को उत्प्रेरित करना"।
- भारत सरकार ने वर्ष 1986 में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस घोषित किया, इसका पहला आयोजन वर्ष 1987 में हुआ।
सी.वी. रमन
- परिचय: सर चंद्रशेखर वेंकट रमन (CV रमन) भारत के महान भौतिकशास्त्रियों में से एक हैं, जिन्हें रमन इफेक्ट की खोज के लिये वर्ष 1930 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। उनके कार्य ने प्रकाश की क्वांटम प्रकृति को सिद्ध किया।
- नोबेल पुरस्कार का महत्त्व: वर्ष 1930 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करके रमन किसी भी वैज्ञानिक क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई और पहले गैर-श्वेत व्यक्ति बने।
- अन्य सम्मान एवं मान्यताएँ: उन्हें वर्ष 1929 में नाइट की उपाधि मिली, वर्ष 1924 में रॉयल सोसाइटी के फेलो (FRS) चुने गए, भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न (1954) एवं लेनिन शांति पुरस्कार (1957) प्राप्त हुआ।
- संस्थागत योगदान: उन्होंने तीन स्थायी वैज्ञानिक संस्थाएँ स्थापित कीं: बंगलूरू में रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (1948), इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स (1926) तथा इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज़ (1934), जो भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये स्थायी आधारभूत ढाँचा प्रदान करती हैं।
रमन इफेक्ट
- के.एस. कृष्णन के सहयोग से यह खोज तब हुई जब पारदर्शी पदार्थ से गुज़रने वाला प्रकाश अणुओं के कंपन के साथ अंतःक्रिया के कारण तरंगदैर्घ्य में परिवर्तन से गुज़रता है।
- रमन इफेक्ट अणुओं की संरचना का विश्लेषण करने का एक नॉन-डिस्ट्रक्टिव मेथड है, जो रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का आधार बनाता है।
- रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का आज रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, सामग्री विज्ञान, अपराध वैज्ञानिक जाँच एवं चिकित्सा में व्यापक स्तर पर उपयोग होता है, जो मुहरबंद साक्ष्य थैलियों (Sealed Evidence Bags) में औषधियों का पता लगाने, सुरक्षित परमाणु अपशिष्ट का विश्लेषण करने एवं गैर-विनाशकारी सामग्री की पहचान करने जैसे अनुप्रयोगों को सक्षम बनाता है।
| और पढ़ें: विज्ञान क्षेत्र के नोबेल पुरस्कारों में भारत का निम्न प्रदर्शन |
