रैपिड फायर
कपाटा गुड्डा वन्यजीव अभयारण्य
- 06 Mar 2026
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्नाटक के गडग ज़िले में स्थित कपाटा गुड्डा वन्यजीव अभयारण्य में मनमाने ढंग से छोड़े गए 55 वर्ग किमी. आरक्षित वन क्षेत्र को औपचारिक रूप से सम्मिलित किया जाए, जिससे इसे मूल स्वीकृत आकार में बहाल किया जाए।
- न्यायालय ने अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) में संचालित स्टोन-क्रशिंग यूनिट से संबंधित याचिकाओं को खारिज कर पारिस्थितिक संरक्षण को प्राथमिकता दी।
- वन्यजीव अभयारण्य: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत, वन्यजीव अभयारण्य एक ऐसा सुरक्षित क्षेत्र है जिसे वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा के लिये बनाया जाता है। इसे इसकी विशेष पारिस्थितिकी, वनस्पतियों या भू-आकृति के महत्त्व के कारण आरक्षित वन या जलक्षेत्र के भीतर घोषित किया जाता है।
कपाटा गुड्डा वन्यजीव अभयारण्य
- विशिष्ट संरक्षण उद्देश्य: इसे राज्य का एकमात्र ऐसा वन्यजीव अभयारण्य होने का विशिष्ट दर्जा प्राप्त है, जिसे विशेष रूप से वनस्पतियों के संरक्षण के लिये समर्पित किया गया है, जिससे औषधीय जड़ी-बूटियों और घासों के समृद्ध स्थानिक जीन भंडार की रक्षा होती है।
- पारिस्थितिकी तंत्र और परिदृश्य: समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक महत्त्व के कारण इसे अक्सर ‘उत्तर कर्नाटक का पश्चिमी घाट’ कहा जाता है।
- कपाटा गुड्डा वन्यजीव अभयारण्य शुष्क पारितंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ मुख्य रूप से झाड़ीदार वन और घास के मैदान पाए जाते हैं। इसके साथ ही निचले भागों तथा घाटियों में शुष्क पर्णपाती तथा नदी-तटीय वनों के कुछ क्षेत्र भी मौजूद हैं।
- जलवैज्ञानिक महत्त्व: यह एक महत्त्वपूर्ण जलागम क्षेत्र के रूप में कार्य करता है और तुंगभद्रा नदी के लिये प्रमुख कैचमेंट क्षेत्र है।
- जीव-जंतु विविधता: शुष्क भूभाग होने के बावजूद यहाँ तेंदुए, भारतीय भेड़िये, धारीदार लकड़बग्घे, काले हिरण और चार-सींग वाले मृग सहित वन्यजीवों की समृद्ध विविधता पाई जाती है, जो छोटे तथा बड़े माँसाहारी जीवों के बीच पारिस्थितिक सेतु का कार्य करती है।
- पारिस्थितिक खतरे: यह आवास काफी हद तक खंडित हो चुका है और आवास पर अतिक्रमण, अत्यधिक चराई, अवैध रूप से जलाऊ लकड़ी का संग्रह तथा शिकार जैसे गंभीर मानवजनित दबावों से प्रभावित है।
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