रैपिड फायर
हेक्सागॉन गठबंधन
- 05 Mar 2026
- 17 min read
मध्य पूर्व तथा हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में तीव्र भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा के मध्य, इज़रायल ने “हेक्सागॉन गठबंधन (Hexagon of Alliances)” नामक प्रस्तावित रणनीतिक फ्रेमवर्क की घोषणा की है। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत, पूर्वी भूमध्यसागर, खाड़ी क्षेत्र तथा अफ्रीका की उन उदारवादी शक्तियों को एकजुट करना है, जो सुरक्षा चुनौतियों पर समान विचार साझा करती हैं।
- उद्देश्य: यह फ्रेमवर्क समान विचारधारा वाले राष्ट्रों के छह-पक्षीय नेटवर्क की परिकल्पना करता है ताकि निम्नलिखित का सामना किया जा सके:
- ईरान के नेतृत्व वाली प्रतिरोधी शक्तियों, जिसमें हिज़्बुल्लाह, हमास, हौथी तथा इराकी मिलिशिया शामिल हैं।
- कट्टरपंथी सुन्नी गुट (जिसमें ISIS से संबद्ध समूह शामिल हैं और मुस्लिम ब्रदरहुड (जिसकी स्थापना 1928 में मिस्र में हुई थी)।
- मुख्य साझेदार: प्रस्तावित “हेक्सागॉन गठबंधन” में भारत को एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित किया गया है, जबकि इज़रायल, ग्रीस और साइप्रस इसके अन्य प्रमुख सदस्य हैं। इसके अतिरिक्त अरब, अफ्रीकी और एशियाई देशों (जैसे– इथियोपिया, UAE) के भी इसमें शामिल होने की संभावना है।
- मुख्य कार्यक्षेत्र: प्रस्तावित गठबंधन का मुख्य फोकस प्रतिभागी देशों के बीच रक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने, प्रौद्योगिकी, कूटनीति और सुरक्षा समन्वय में रणनीतिक सहयोग पर केंद्रित रहेगा।
- रणनीतिक महत्त्व: यह गठबंधन मौजूदा समूहों, जैसे– अब्राहम समझौते, भारत–इज़रायल रणनीतिक संबंध और I2U2 (भारत–इज़रायल–UAE–अमेरिका) फ्रेमवर्क का स्वाभाविक विस्तार माना जा रहा है। इससे हिंद-प्रशांत से भूमध्यसागर तक मध्यमार्गी देशों की एक निरंतर रणनीतिक कड़ी बनने की संभावना है।
- भू-राजनीतिक निहितार्थ: समर्थक इसे कट्टरपंथ के विरुद्ध एक रणनीतिक संतुलनकारी व्यवस्था के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक विभिन्न देशों के अलग-अलग राष्ट्रीय हितों के कारण इसकी व्यावहारिकता पर संदेह व्यक्त करते हैं।
- तुर्किये और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देश इसे संभावित रूप से तुर्किये-विरोधी या मुस्लिम उम्मा-विरोधी संगठन मानते हैं। पाकिस्तान की सीनेट ने भी भारत और अन्य देशों के साथ इज़रायल के प्रस्तावित गठबंधन की निंदा करते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है।
| और पढ़ें: भारत-पश्चिम एशिया संबंधों का सुदृढ़ीकरण |