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वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026

  • 05 Mar 2026
  • 54 min read

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 को वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन द्वारा विश्व मोटापा दिवस (4 मार्च) के अवसर पर जारी किया गया। यह भारत के लिये चिंताजनक आँकड़े प्रस्तुत करता है, जो एक उभरती हुई सार्वज़निक स्वास्थ्य आपात स्थिति को रेखांकित करते हैं।

मोटापा (ओबेसिटी) क्या है?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मोटापा ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में असामान्य अथवा अत्यधिक वसा का संचय हो जाता है, जो स्वास्थ्य के लिये जोखिम उत्पन्न करता है।
  • बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के आधार पर 25 या उससे अधिक स्कोर को अधिक वज़न (ओवरवेट) तथा 30 या उससे अधिक को मोटापा (ओबेसिटी) की श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • मोटापे की व्यापकता:
    • वैश्विक परिप्रेक्ष्य: चीन, भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका—इन तीनों देशों में 1 करोड़ से अधिक बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं। इनमें चीन अग्रणी है (उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले 6.2 करोड़, जिनमें 3.3 करोड़ मोटापे से ग्रस्त), इसके पश्चात भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका (उच्च BMI वाले 2.7 करोड़, जिनमें 1.3 करोड़ मोटापे के मामले) आते हैं। 15–49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में 13.4% का BMI उच्च है तथा 4.2% महिलाएँ टाइप-2 मधुमेह से ग्रस्त हैं।
      • विश्व भर में 5 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 200 मिलियन से अधिक स्कूल-आयु के बच्चे, जो अधिक वज़न अथवा मोटापे से ग्रस्त हैं, केवल 10 देशों में केंद्रित हैं।
    • भारत: भारत में वर्ष 2025 में 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 15 मिलियन बच्चे तथा 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 26 मिलियन से अधिक बच्चे अधिक वज़न या मोटापे से ग्रस्त थे। इस प्रकार उच्च BMI वाले बच्चों (लगभग 4.1 करोड़) की संख्या के आधार पर भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है।
      • वर्ष 2025 से 2040 के बीच भारत में 5 से 19 वर्ष आयु वर्ग के उन बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है, जिनमें उच्च BMI से संबंधित रोग संकेतक पाए जाते हैं।
  • स्वास्थ्य संबंधी परिणाम (2025–2040): BMI से संबंधित उच्च रक्तचाप के मामलों में 2.99 मिलियन से बढ़कर 4.21 मिलियन तक वृद्धि होने का अनुमान है। इसी प्रकार हाइपरग्लाइसीमिया (उच्च रक्त शर्करा) के मामले 1.39 मिलियन से बढ़कर 1.91 मिलियन, उच्च ट्राइग्लिसराइड्स के मामले 4.39 मिलियन से बढ़कर 6.07 मिलियन तथा मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिज़ीज़ (MASLD) के मामले 8.39 मिलियन से बढ़कर 11.88 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
  • रोकथाम योग्य जोखिम कारक: मुख्य योगदानकारी कारकों में 11–17 वर्ष आयु वर्ग के 74% किशोरों का अनुशंसित शारीरिक गतिविधि स्तर पूरा न कर पाना, केवल 35.5% बच्चों को विद्यालयीय भोजन प्राप्त होना, 1–5 माह आयु के 32.6% शिशुओं में अपर्याप्त स्तनपान तथा 6–10 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों द्वारा प्रतिदिन लगभग 50 मिलीलीटर तक शर्करायुक्त पेयों का सेवन शामिल हैं।
  • वैश्विक प्रवृत्तियाँ एवं चेतावनियाँ: विश्व स्तर पर बाल्यावस्था में मोटापे की वृद्धि को आधा करने के वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सका है, जिसे अब वर्ष 2030 तक के लिये विस्तारित किया गया है।
  • वर्तमान में विश्व भर में 5–19 वर्ष आयु वर्ग के 20.7% बच्चे अधिक वज़न या मोटापे से ग्रस्त हैं, जो वर्ष 2010 में 14.6% थे। अनुमान है कि वर्ष 2040 तक 507 मिलियन बच्चे इससे प्रभावित होंगे तथा 57 मिलियन से अधिक बच्चों में हृदय-धमनी रोगों के प्रारंभिक संकेत दिखाई दे सकते हैं।

नीतिगत सिफारिशें

  • रिपोर्ट में सरकारों से तत्काल हस्तक्षेप का आह्वान किया गया है। इसके अंतर्गत शर्करायुक्त पेयों पर कर लगाना, लक्षित विपणन (डिजिटल मंचों सहित) पर प्रतिबंध लगाना, वैश्विक शारीरिक गतिविधि मानकों का कार्यान्वयन, स्तनपान को प्रोत्साहन, विद्यालयी भोजन मानकों को अधिक स्वास्थ्यकर बनाना तथा निवारण एवं उपचार उपायों को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली में समेकित करने जैसी नीतिगत पहलों को अपनाने की अनुशंसा की गई है।

बॉडी मास इंडेक्स (BMI)

  • परिचय: बॉडी मास इंडेक्स (BMI) एक स्क्रीनिंग उपकरण है, जिसका उपयोग ऊँचाई तथा वज़न के आधार पर शरीर में वसा के अनुमान हेतु किया जाता है। इसके माध्यम से व्यक्तियों को विभिन्न वज़न श्रेणियों में वर्गीकृत करने में सहायता मिलती है।.
  • गणना की विधि: BMI की गणना इस सूत्र से की जाती है; BMI = वज़न (किलोग्राम) ÷ [ऊँचाई (मीटर)]².
  • BMI वर्गीकरण (WHO मानक):
    • वयस्क BMI: 20 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्कों के लिये मानक श्रेणियाँ इस प्रकार हैं— कम वज़न (<18.5), स्वस्थ/सामान्य वज़न (18.5–24.9), अधिक वज़न (25.0–29.9) तथा मोटापा (≥30.0)।
    • मोटापे को आगे तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है: क्लास I (30.0–34.9), क्लास II (35.0–39.9) तथा क्लास III (≥40.0), जो अत्यधिक उच्च स्वास्थ्य जोखिम को दर्शाते हैं।
    • बच्चे एवं किशोर: 20 वर्ष से कम आयु के बच्चों तथा किशोरों में BMI की व्याख्या आयु तथा लिंग-विशिष्ट प्रतिशतकों के आधार पर की जाती है।
    • श्रेणियाँ इस प्रकार हैं— कम वज़न (<5वाँ प्रतिशतक), स्वस्थ वज़न (5वें से <85वें प्रतिशतक), अधिक वज़न (85वें से <95वें प्रतिशतक), मोटापा (≥95वाँ प्रतिशतक) तथा गंभीर मोटापा (95वें प्रतिशतक के ≥120% या BMI ≥35)।
  • स्वास्थ्य प्रभाव एवं उपयोग: BMI श्रेणियाँ स्वास्थ्य जोखिमों से संबंधित होती हैं। उच्च BMI होने पर हृदय-धमनी रोग, टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा अन्य चयापचय संबंधी विकारों का जोखिम बढ़ जाता है।
    • हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ समग्र स्वास्थ्य मूल्यांकन के लिये BMI के साथ-साथ कमर परिधि मापन, शरीर संरचना विश्लेषण तथा अन्य चिकित्सकीय परीक्षणों के उपयोग की भी अनुशंसा करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. बॉडी मास इंडेक्स (BMI) क्या है?
बॉडी मास इंडेक्स (BMI) एक स्क्रीनिंग उपकरण है, जिसकी गणना वज़न (किलोग्राम) ÷ [ऊँचाई (मीटर)]² के सूत्र से की जाती है। इसका उपयोग विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के आधार पर व्यक्तियों को कम वज़न, सामान्य वज़न, अधिक वज़न तथा मोटापा श्रेणियों में वर्गीकृत करने के लिये किया जाता है।

2. उच्च BMI से संबंधित संभावित स्वास्थ्य जोखिम क्या हैं?
उच्च BMI के कारण उच्च रक्तचाप, हाइपरग्लाइसीमिया (उच्च रक्त शर्करा), उच्च ट्राइग्लिसराइड्स तथा मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिज़ीज़ (MASLD) के मामलों में वृद्धि होने की आशंका है, जिससे भविष्य में हृदय-धमनी तथा चयापचय संबंधी रोगों का बोझ बढ़ सकता है।

3. वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के अनुसार बाल्यावस्था मोटापे के संदर्भ में भारत की क्या स्थिति है?
वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के अनुसार उच्च BMI वाले लगभग 4.1 करोड़ बच्चों के साथ भारत विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2025 में लगभग 1.4 करोड़ बच्चों को मोटापे की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया, जिससे भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों को पीछे छोड़ दिया है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)  

प्रिलिम्स

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा/से वह/वे सूचक है/हैं, जिसका/जिनका IFPRI द्वारा वैश्विक भुखमरी सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) रिपोर्ट बनाने में उपयोग किया गया है?  (2016) 

  1. अल्प-पोषण 
  2.  शिशु वृद्धिरोधन
  3.  शिशु मृत्यु-दर

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 1 और 3

उत्तर: (C)

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