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नतांज़ पर कथित हमले को लेकर IAEA–ईरान विवाद

  • 05 Mar 2026
  • 23 min read

स्रोत: द हिंदू 

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने अमेरिका-इज़रायल गुट और ईरान के बीच सैन्य झड़प के बाद रूस और ईरान के अनुरोध पर वियना में एक आपातकालीन बैठक आयोजित की।

  • IAEA का आकलन: IAEA के अनुसार, वर्तमान में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों (बुशहर और तेहरान अनुसंधान रिएक्टर सहित) को किसी प्रकार की क्षति के संकेत नहीं मिले हैं, साथ ही एजेंसी ने पुष्टि की कि क्षेत्र में विकिरण स्तर सामान्य बना हुआ है।
  • ईरान की प्रतिक्रिया: ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी और इज़रायली हवाई हमलों ने नतांज़ यूरेनियम संवर्द्धन केंद्र को निशाना बनाया।
    • हालाँकि, ईरान ने अब तक किसी भी प्रकार का सार्वज़निक या तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है जो क्षति की पुष्टि करता हो।
  • संभावित रणनीतिक उद्देश्य: ईरान ने पहले भी विदेशी हमलों का IAEA के साथ सहयोग निलंबित करने के औचित्य के रूप में उपयोग किया है
    • वर्ष 2025 के मध्य में हुए हमलों के बाद ईरान ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए IAEA निरीक्षणों के साथ सभी सहयोग को निलंबित करने वाला कानून पारित किया।
    • हमलों के दावे तेहरान को रूस और चीन जैसे सहयोगी देशों से समर्थन जुटाने में सहायक हो सकते हैं।
    • यदि ईरान की परमाणु अवसंरचना को खतरा होता है, तो वह “आत्म-रक्षा” के आधार पर यूरेनियम को उच्च स्तर तक समृद्ध करने को उचित ठहरा सकता है।
    • यह पारदर्शिता को भी सीमित कर सकता है तथा अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षकों के साथ सूचना साझा करने पर प्रतिबंध लगा सकता है।

  • ईरान–IAEA तनाव: ईरान लंबे समय से IAEA पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाता रहा है और दावा करता है कि पश्चिमी देश इसका उपयोग “राजनीतिक रूप से प्रेरित” रिपोर्ट जारी करने के लिये करते हैं।

    • कुछ ईरानी नेताओं ने तो IAEA को “इज़रायल का जासूस” तक कहा तथा आरोप लगाया कि एजेंसी ने परमाणु स्थलों के निर्देशांक और वैज्ञानिकों की पहचान से संबंधित जानकारी लीक की।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)

  • अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइज़नहावर द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिये गए "शांति के लिये परमाणु" भाषण (1953) के बाद, वर्ष 1957 में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत IAEA की स्थापना की गई थी। 
  • IAEA के नियमों को वर्ष 1956 में 81 देशों द्वारा अनुमोदित किया गया, जिसमें भारत एक संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल था। दिसंबर 2025 तक इस एजेंसी के 181 सदस्य देश हैं।
  • यह संगठन विश्व की "शांति के लिये परमाणु" एजेंसी के रूप में कार्य करता है, जिसे परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने और सैन्य उद्देश्यों के लिये इसके दुरुपयोग को रोकने का कार्य सौंपा गया है। 
  • IAEA का मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना में स्थित है। यह एक वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था के रूप में कार्य करते हुए परमाणु सुरक्षा उपायों, निरीक्षणों तथा ऊर्जा, चिकित्सा और कृषि क्षेत्रों में परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण अनुप्रयोगों को बढ़ावा देती है।

और पढ़ें: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA),अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमला

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