राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
उत्तर पूर्व में नवाचार को बढ़ावा देने हेतु NEST को स्वीकृति दी गई
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (NER) में अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नॉर्थ ईस्टर्न साइंस एंड टेक्नोलॉजी क्लस्टर (NEST) की स्थापना हेतु एक परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है।
मुख्य बिंदु:
- परियोजना स्वीकृति: NEST परियोजना को जुलाई 2025 में उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) की योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृति दी गई। लगभग ₹22.98 करोड़ के परिव्यय के साथ इसका उद्देश्य उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (NER) में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अवसंरचना को सुदृढ़ करना है।
- कार्यान्वयन एजेंसी: इस परियोजना का क्रियान्वयन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी द्वारा किया जाएगा।
- चार विषयगत स्तंभ: NEST निम्नलिखित चार प्रमुख फोकस क्षेत्रों के माध्यम से कार्य करेगा—
- ग्रासरूट्स प्रौद्योगिकियों पर नवाचार केंद्र: स्थानीय समस्याओं के लिये तकनीकी समाधान को बढ़ावा देने हेतु।
- सेमीकंडक्टर एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिये प्रौद्योगिकी हब: भावी प्रौद्योगिकी प्रवृत्तियों के अनुरूप।
- बाँस-आधारित प्रौद्योगिकी के लिये उत्कृष्टता केंद्र: क्षेत्रीय संसाधनों का उपयोग करते हुए उत्पाद एवं प्रक्रिया नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु।
- जैव-अवक्रमणीय एवं पर्यावरण-अनुकूल प्लास्टिक के लिये कौशल विकास एवं नवाचार केंद्र: सतत प्रौद्योगिकी और उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु।
- उद्देश्य:NEST क्लस्टर का उद्देश्य उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के युवाओं विशेष रूप से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और दिव्यांगजनों को स्वरोज़गार तथा उद्यमिता के लिये सशक्त बनाना है। साथ ही क्षमता निर्माण, अनुसंधान हस्तक्षेप और उत्पादों के व्यावसायीकरण के माध्यम से MSMEs को सुदृढ़ करना है।
- यह अकादमिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, उद्योग भागीदारों और सरकारी एजेंसियों को जोड़ने के लिये हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर R&D हस्तक्षेप, नवोन्मेषी पारिस्थितिकी प्रणाली तथा कौशल विकास को बढ़ावा मिल सके।
- महत्त्व: नॉर्थ ईस्टर्न साइंस एंड टेक्नोलॉजी क्लस्टर (NEST) की स्वीकृति भारत सरकार की एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का उपयोग कर उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में समावेशी विकास, रोज़गार सृजन तथा उद्यमशील वृद्धि को प्रोत्साहित करना है। यह क्षेत्रीय सशक्तीकरण और प्रौद्योगिकी-आधारित आर्थिक रूपांतरण के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है।
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और पढ़ें: उत्तर पूर्वी क्षेत्र (NER), उत्तर पूर्वी परिषद (NEC), सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, MSME |

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थान्या नाथन केरल की पहली दृष्टिहीन महिला न्यायाधीश बनेंगी
चर्चा में क्यों?
थान्या नाथन इतिहास रचने जा रही हैं, क्योंकि वे केरल की पहली दृष्टिबाधित (पूर्णतः दृष्टिहीन) महिला न्यायाधीश बनने वाली हैं।
मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक उपलब्धि: थान्या नाथन केरल की न्यायपालिका में न्यायाधीश नियुक्त होने वाली पहली पूर्णतः दृष्टिहीन महिला होंगी।
- सफलता: उन्होंने केरल न्यायिक सेवा में प्रवेश हेतु आयोजित सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रतियोगी परीक्षा में बेंचमार्क दिव्यांग श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
- दृष्टिबाधा के बावजूद उन्होंने सुलभ शिक्षण उपकरणों और डिजिटल सहायता प्रणालियों के सहयोग से विधि शिक्षा पूरी की।
- न्यायिक समावेशन: उनकी उपलब्धि वर्ष 2025 के सर्वोच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक निर्णय के बाद संभव हुई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को न्यायिक सेवा की पात्रता से वंचित नहीं किया जा सकता।
- उनकी नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के अंतर्गत समता तथा भेदभाव-निषेध के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती है, जो लोक सेवाओं में समान अवसर सुनिश्चित करते हैं।
- महत्त्व: थान्या की सफलता न केवल दिव्यांग व्यक्तियों के लिये प्रेरणास्रोत है, बल्कि भारत के विधि पेशे को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने के सतत प्रयासों को भी सशक्त बनाती है।
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और पढ़ें: सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय संविधान, दिव्यांगजन |



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