छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ विकसित
- 24 Feb 2026
- 16 min read
चर्चा में क्यों?
छत्तीसगढ़ वन विभाग ने उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व में छह ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ स्थापित करके एक अनूठी वन्यजीव संरक्षण परियोजना की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के लिये भोजन-समृद्ध आवास उपलब्ध कराना तथा वन पुनर्जनन को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु:
- संरक्षण पहल: वन विभाग ने छह हॉर्नबिल रेस्टोरेंट स्थापित करने की शुरुआत की है—ये वास्तविक भोजनालय नहीं, बल्कि फलदार वृक्षों के समूह हैं।
- उद्देश्य: इन रोपणों का उद्देश्य हॉर्नबिल पक्षियों के लिये पूरे वर्ष फल उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें स्थिर खाद्य संसाधन मिलें और वे इस क्षेत्र में बसने तथा प्रजनन के लिये प्रेरित हों।
- प्रजाति पर ध्यान: मालाबार पाइड हॉर्नबिल (Anthracoceros coronatus) एक वन पक्षी है, जिसकी पहचान काले-सफेद पंखों और बड़े कैस्क (चोंच के ऊपर उभार) से होती है।
- IUCN स्थिति: इसे IUCN रेड लिस्ट में ‘निकट संकटग्रस्त’ श्रेणी में रखा गया है और मध्य भारत के वनों में इसकी उपस्थिति को पारिस्थितिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम स्थिति: यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित है।
- पारिस्थितिक महत्त्व: हॉर्नबिल ‘कीस्टोन’ बीज-प्रसारक होते हैं। फल खाने और बीजों को दूर-दूर तक फैलाने के माध्यम से ये वनों के पुनर्जनन, पौधों की जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं।
- टाइगर रिज़र्व के भीतर आवास गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ, गाँवों के निकट भी वृक्ष लगाए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय निवासी और पर्यटक सुरक्षित रूप से हॉर्नबिल देख सकें, जिससे इको-टूरिज़्म को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
- महत्त्व: छत्तीसगढ़ की हॉर्नबिल रेस्टोरेंट पहल वन्यजीव संरक्षण के प्रति एक अभिनव और पारिस्थितिकी-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन, संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण तथा टाइगर रिज़र्वों के आसपास पारिस्थितिक संतुलन एवं इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
|
और पढ़ें: उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व, जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र |