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प्रिलिम्स फैक्ट्स

प्रारंभिक परीक्षा

आयुष्मान भारत

स्रोत: PIB

चर्चा में क्यों? 

आयुष्मान भारत ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण, स्वास्थ्य बीमा कवरेज, डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण और स्वास्थ्य अवसंरचना विकास में सरकार द्वारा महत्त्वपूर्ण प्रगति की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर से ध्यान आकर्षित किया है।

आयुष्मान भारत के बारे में मुख्य बिंदु क्या हैं?

  • परिचय: आयुष्मान भारत, भारत सरकार का एक प्रमुख स्वास्थ्य क्षेत्र सुधार कार्यक्रम है, जिसे वर्ष 2018 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के अनुरूप (विशेष रूप से ‘किसी को भी पीछे न छोड़ें’ के सिद्धांत के अनुरूप) सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज़ (UHC) प्राप्त करना है।
    • इसका उद्देश्य खंडित और क्षेत्रीय दृष्टिकोण से हटकर एक व्यापक, आवश्यकता-आधारित निरंतर देखभाल प्रणाली की ओर बढ़ते हुए भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को बदलना है।
    • इसमें प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तरों पर स्वास्थ्य देखभाल संबंधी निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक और प्रशामक सेवाएँ शामिल हैं।

आयुष्मान भारत के घटक:

आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM)

  • परिचय: AAM आयुष्मान भारत का प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तंभ है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा समुदाय सुलभ बनाने के लिये शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उप स्वास्थ्य केंद्रों (SHC) और ग्रामीण एवं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) का उन्नयन किया जाएगा।
    • AAM, जिन्हें पहले स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (HWC) के नाम से जाना जाता था, का उद्देश्य समुदायों के लिये व्यापक स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ बनाना है।
  • उद्देश्य: देखभाल की निरंतरता के दृष्टिकोण के माध्यम से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना, जो किसी व्यक्ति की जीवनभर की लगभग 80-90% स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को प्राथमिक स्तर पर ही पूरा करता है।
  • सेवाओं का दायरा: एएएम प्रजनन, बाल स्वास्थ्य और संक्रामक रोग सेवाओं को मज़बूत करते हैं, साथ ही उच्च रक्तचाप , मधुमेह और सामान्य कैंसर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों के लिये देखभाल का विस्तार करते हैं, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, वृद्धावस्था देखभाल, प्रशामक देखभाल, आघात देखभाल और योग जैसी कल्याण सेवाओं का धीरे-धीरे एकीकरण शामिल है।
  • सेवा वितरण तंत्र: एएएम (AAM) सामुदायिक संपर्क और जनसंख्या-आधारित स्क्रीनिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे शीघ्र निदान, समय पर रेफरल, उपचार का पालन, अनुवर्ती देखभाल और आवश्यक दवाओं और निदान उपकरणों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
  • उपलब्धियाँ: नवंबर 2025 तक लगभग 1.82 लाख AAM (आयुर्वेदिक आपातकालीन केंद्र) कार्यरत हैं, जो वर्ष 2022 में निर्धारित 1.5 लाख केंद्रों के लक्ष्य को पहले ही पूरा कर चुके हैं। 
    • इन केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार की पुष्टि होती है, जहाँ अब तक 495 करोड़ मरीजों का उपचार किया जा चुका है। साथ ही डिजिटल स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हुए 42 करोड़ टेलीकंसल्टेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं।
    • प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' (निवारक स्वास्थ्य सेवा) को सुदृढ़ करते हुए 65 लाख से अधिक योग और वेलनेस सत्र भी आयोजित किये गए हैं।

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (AB PM-JAY):.

  • परिचय: AB PM-JAY आयुष्मान भारत का दूसरा स्तंभ है, जिसे वर्ष 2018 में रॉंची, झारखंड में लॉन्च किया गया था, और यह विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है।
    • मूल रूप से राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के रूप में शुरू की गई इस योजना ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को अपने में समाहित कर लिया और मौजूदा लाभार्थियों को एक ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य कवरेज ढाँचे में एकीकृत कर दिया।
  • उद्देश्य और कवरेज: PM-JAY का उद्देश्य प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष उच्च और तृतीयक देखभाल हेतु अस्पताल में भर्ती के लिये 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करना है। 
    • यह योजना 12 करोड़ से अधिक निर्धन और वंचित परिवारों को लक्षित करती है, जिसके अंतर्गत लगभग 55 करोड़ लाभार्थियों को कवर किया गया है। यह संख्या भारत की कुल जनसंख्या के निचले 40% हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है, जो इसकी व्यापक सामाजिक पहुँच को रेखांकित करती है। इन परिवारों की पहचान सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना 2011 (SECC 2011) के तहत वंचना और पेशेवर मानदंडों के आधार पर की गई है।
  • मुख्य विशेषताएँ: यह योजना पूरे देश में सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस और पेपरलेस इलाज की सुविधा प्रदान करती है।
    • इसमें परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई प्रतिबंध नहीं है और यह पहले दिन से पूर्व-स्थित बीमारियों को कवर करता है।
    • सार्वभौमिक पोर्टेबिलिटी के तहत लाभार्थी भारत में कहीं भी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।
  • उपलब्धियाँ: दिसंबर 2025 तक 42 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किये जा चुके हैं, जिससे लगभग 11 करोड़ अस्पताल में भर्ती हुए।
    • इस योजना ने लिंग समानता को बढ़ावा दिया है, जिसमें सभी कार्ड और अस्पताल में भर्ती लगभग आधे से ज़्यादा महिलाऍं हैं।
    • इसके अलावा आयुष्मान वय वंदना कार्ड के लॉन्च से PM-JAY के लाभ 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों तक पहुँचाए गए हैं, जिससे लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को कवर करने की संभावना है।
    • डिजिटल पहलें, जैसे कि आयुष्मान ऐप, आत्म-सत्यापन और कार्ड बनाने की प्रक्रिया को सरल बना चुकी हैं।
    • वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) का विस्तार दिल्ली और ओडिशा तक होने से इसकी राष्ट्रीय पहुँच और मज़बूत हुई है।

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)

  • परिचय: पीएम-अभिम (PM-ABHIM) एक केंद्रीय वित्त पोषित योजना (Centrally Sponsored Scheme - CSS) है, जो आयुष्मान भारत का तीसरा स्तंभ है। इसे वर्ष 2021 में लॉन्च किया गया था, और इसके लिये लगभग ₹64,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य वर्ष 2021–26 के दौरान पूरे देश में स्वास्थ्य ढाँचा और प्रणाली की क्षमता को मज़बूत करना है।
  • मुख्य उद्देश्य: यह योजना स्वास्थ्य सेवा के त्रि-स्तरीय ढांचे (प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक) में व्यापक क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के पूरक के रूप में कार्य करते हुए, यह योजना विशेष रूप से महामारी और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सुदृढ़ बनाने तथा मौजूदा स्वास्थ्य प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर बल देती है।
    • पीएम-अभिम के तहत AAMs, झुग्गी-झोंपड़ी क्षेत्रों में शहरी स्वास्थ्य और वेलनेस केंद्र, ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स, ज़िला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ और क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक्स बनाने का प्रावधान है।
    • यह Covid-19 और अन्य संक्रामक रोगों पर जैव चिकित्सा अनुसंधान का समर्थन भी करता है और वन हेल्थ दृष्टिकोण के तहत जानवरों से फैलने वाले रोगों को रोकने, पहचानने और उनका सामना करने की क्षमता को मज़बूत बनाता है।
  • उपलब्धियाँ: PM-ABHIM ने प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिये सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े पैमाने पर उन्नयन और निर्माण को मंज़ूरी दी है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

  • परिचय: वर्ष 2021 में लॉन्च किया गया आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), भारत में नागरिक-केंद्रित और इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य रखता है।
    • यह व्यक्तियों को अपनी मेडिकल रिकॉर्ड्स (जैसे कि प्रिस्क्रिप्शन, डायग्नोस्टिक रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी) को सुरक्षित रूप से संग्रहित, एक्सेस और साझा करने की सुविधा प्रदान करता है और यह सब जानकारी पर आधारित सहमति के आधार पर होता है। इससे लंबी अवधि का स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनता है और देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित होती है।
    • आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) नागरिकों के लिये, हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR), हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) और ड्रग रजिस्ट्री
    • इंटरऑपरेबिलिटी और डेटा आदान-प्रदान को तीन गेटवे हेल्थ इन्फॉर्मेशन कंसेंट मैनेजर (HIE-CM), नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX) और यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI) के माध्यम से सक्षम बनाया गया है। ये मिलकर निर्बाध, सुरक्षित और सहमति-आधारित डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का समर्थन करते हैं।
  • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा: ABDM स्वास्थ्य डेटा की सुरक्षा, गोपनीयता और निजता पर विशेष ज़ोर देता है, जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDPA) 2023 के अनुरूप है।
    • इसकी संघीय संरचना बिना केंद्रीकृत डेटा भंडारण के रोगियों की स्वास्थ्य जानकारी को सुरक्षित और सहमति-आधारित तरीके से साझा करना सुनिश्चित करती है।
    • डिजिटल संरचना और घटक: ABDM का प्रौद्योगिकी ढाँचा चार मुख्य रजिस्ट्री के इर्द-गिर्द बनाया गया है, जो स्वास्थ्य इकोसिस्टम में विश्वसनीय डिजिटल पहचान स्थापित करती है:
  • उपलब्धियाँ: वर्ष 2024 तक 67 करोड़ से अधिक ABHA आईडी बनाई जा चुकी हैं, जिनसे 42 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य अभिलेख जुड़े हुए हैं।
    • राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्रियों पर लगभग 3.3 लाख स्वास्थ्य सुविधाएँ और 4.7 लाख स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत हो चुके हैं।

Ayushman Bharat Digital Mission

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. आयुष्मान भारत क्या है?
आयुष्मान भारत : भारत का प्रमुख स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम है, जिसे वर्ष 2018 में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया। यह प्राथमिक देखभाल, स्वास्थ्य बीमा, अवसंरचना तथा डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण पर आधारित है।

2. आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका क्या है?
ये समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करते हैं और निवारक, प्रोत्साहक तथा उपचारात्मक सेवाओं के माध्यम से जीवनभर की लगभग 80–90% स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

3. PM-JAY वित्तीय सुरक्षा कैसे प्रदान करता है?
PM-JAY के तहत प्रति परिवार प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक का कवरेज उपलब्ध कराया जाता है, जिससे सूचीबद्ध अस्पतालों में द्वितीयक एवं तृतीयक अस्पताल में भर्ती के लिये कैशलेस और पेपरलेस सुविधा मिलती है।

4. PM-ABHIM सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?
PM-ABHIM स्वास्थ्य अवसंरचना, रोग निगरानी, गंभीर देखभाल क्षमता तथा महामारी से निपटने की तैयारी को सभी स्तरों पर सुदृढ़ करता है।

5. ABDM का क्या महत्त्व है?
ABDM एक अंतःक्रियाशील डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र का निर्माण करता है, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य अभिलेखों, सहमति-आधारित डेटा साझा करने और निरंतर देखभाल को सक्षम बनाता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स 

प्रश्न. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2022)

  1. प्राइवेट अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों को इसे अवश्य अपनाना चाहिये।
  2.  चूँकि इसका लक्ष्य स्वास्थ्य की सर्वजनीन व्याप्ति है, अंततोगत्वा भारत के हर नागरिक को इसका हिस्सा हो जाना चाहिये।
  3.  यह पूरे देश में निर्बाध रूप से लागू किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

प्रश्न. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के संदर्भ में, प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता 'आशा (ASHA)' के कार्य निम्नलिखित में से कौन-से हैं? (2012)

  1. स्त्रियों को प्रसव-पूर्व देखभाल जाँच के लिये स्वास्थ्य सुविधा केंद्र साथ ले जाना
  2.  गर्भावस्था के प्रारंभिक संसूचन के लिये गर्भावस्था परीक्षण किट प्रयोग करना
  3.  पोषण एवं प्रतिरक्षण के विषय में सूचना देना।
  4.  बच्चे का प्रसव कराना

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 2 और 4
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (a)


मेन्स 

प्रश्न. सार्विक स्वास्थ्य संरक्षण प्रदान करने में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की अपनी परिसीमाएँ हैं। क्या आपके विचार में खाई को पाटने में निजी क्षेत्रक सहायक हो सकता है? आप अन्य कौन-से व्यवहार्य विकल्प सुझाएंगे? (2015)


रैपिड फायर

सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर

स्रोत: द हिंदू

भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद ढाँचे के तहत त्वरित अधिग्रहण को सक्षम बनाते हुए स्वदेशी ‘सूर्यास्त्र’ लंबी दूरी की रॉकेट लॉन्चर प्रणाली के लिये NIBE लिमिटेड के साथ एक आपातकालीन खरीद अनुबंध पर हस्ताक्षर किये हैं।

  • यह प्रणाली एल्बिट सिस्टम के साथ तकनीकी सहयोग के तहत देश में ही निर्मित की जा रही है, जबकि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने अनुबंध हस्ताक्षर की अनुमति देने के लिये आपातकालीन खरीद शक्तियों को 15 जनवरी, 2026 तक बढ़ा दिया है।

सूर्यास्त्र

  • परिचय: सूर्यास्त्र भारत की पहली ‘मेड-इन-इंडिया’ बहु-कैलिबर, लंबी दूरी की रॉकेट लॉन्चर प्रणाली है, जिसे पुणे स्थित NIBE लिमिटेड ने इज़राइल की एल्बिट सिस्टम्स के सहयोग से विकसित किया है।
    • यह एल्बिट की PULS (प्रिसाइज़ एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) संरचना का उपयोग करता है, जिससे 150 किमी. और 300 किमी. तक की दूरी पर सटीक सतह-से-सतह हमले किये जा सकते हैं और 300 किमी मारक क्षमता वाले उच्च-सटीकता रॉकेट लॉन्चर के पहले घरेलू उत्पादन का मार्ग प्रशस्त होता है।"
    • परीक्षणों में इसने पाँच मीटर से कम सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) की उच्च सटीकता प्रदर्शित की है और यह 100 किमी तक लोइटर (लोइटरिंग) म्यूनिशन भी दाग सकता है।
  • मुख्य क्षमताएँ:
    • बहु-कैलिबर क्षमता: एक ही लॉन्चर कई प्रकार के रॉकेट और निर्देशित गोला-बारूद दाग सकता है, जिससे संचालन में लचीलापन बढ़ता है और लॉजिस्टिक बोझ कम होता है।
    • उच्च सामरिक गतिशीलता: BEML उच्च गतिशीलता वाहन (HMV) पर स्थापित यह प्रणाली त्वरित तैनाती, ‘शूट-एंड-स्कूट’ संचालन, काउंटर-बैटरी फायर के प्रति कम संवेदनशीलता और विभिन्न भू-भागों में प्रभावी संचालन को सक्षम बनाती है।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह इज़राइली रॉकेट तकनीक को भारतीय विनिर्माण के साथ जोड़ता है, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है।
    • यह गहरी मारक प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करता है और लंबी दूरी, उच्च सटीकता तथा गतिशील तोपखाने की ओर एक सिद्धांतगत बदलाव का संकेत देता है।

अधिक पढ़ें: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता


रैपिड फायर

सनराइज़ फेस्टिवल 2025-26

स्रोत: ET

अरुणाचल प्रदेश ने अंजॉ ज़िले के डोंग गाँव में सनराइज़ फेस्टिवल 2025–26 का उद्घाटन संस्करण मनाया। यह भारत का सबसे पूर्वी बिंदु है, जहाँ सूर्योदय सबसे पहले होता है।

सनराइज़ फेस्टिवल

  • परिचय: यह एक साहस-आधारित सांस्कृतिक पर्यटन उत्सव है, जिसका उद्देश्य सूर्योदय को केंद्र में रखकर अरुणाचल प्रदेश को प्रकृति, संस्कृति, साहसिक गतिविधियों और विरासत उत्सवों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: डोंग, स्वदेशी मेयोर (ज़ाखरिंग) जनजाति का निवास स्थल है, जिन्हें सनराइज़ पीपल (सूर्योदय के लोग) कहा जाता है। इनकी संस्कृति, परंपराएँ और विश्वास प्रणालियाँ सूर्य उपासना में गहराई से निहित हैं।
  • जनजातीय विविधता का प्रदर्शन: इस उत्सव में अरुणाचल प्रदेश की अनेक जनजातियों मिश्मी, सिंगफो, गालो, वांचो, नोक्टे आदि, अपतानी, न्यिशी और मोनपा की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं, जो राज्य की समृद्ध तथा विविध स्वदेशी विरासत का जीवंत प्रदर्शन करती हैं।

डोंग गाँव

  • स्थान एवं रणनीतिक महत्त्व: यह अंजॉ ज़िले की डोंग घाटी में भारत, चीन और म्याँमार के त्रि-संधि क्षेत्र पर स्थित है। यह वर्ष 1962 के चीनी आक्रमण के प्रमुख युद्धक्षेत्र वॉलोंग से मात्र 7 किमी दूर है।
  • भौतिक भूगोल: यह लोहित नदी के बाएँ तट पर स्थित है, जो ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली की एक प्रमुख सहायक नदी है।
  • वैश्विक पहचान: 1 जनवरी, 2000 को मिलेनियम सनराइज़ के साक्षी बनने के लिये पूरे विश्व से आए पर्यटकों के कारण इसे वैश्विक पहचान मिली।

Northeast_India

और पढ़ें: पूर्वोत्तर भारत की विविधता को पहचान


रैपिड फायर

सावित्रीबाई फुले की जयंती

स्रोत: पी.आई.बी

हाल ही में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने 3 जनवरी, 2026 को सावित्रीबाई फुले की 194वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

परिचय

  • सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी, 1831 को सतारा (महाराष्ट्र) में हुआ था। वे निरक्षरता की स्थिति से उठकर भारत की पहली महिला शिक्षिका बनीं और माली समुदाय से आने वाली एक अग्रणी नारीवादी-सामाजिक सुधारक के रूप में उभरीं।
  • 9 वर्ष की आयु में उनका विवाह ज्योतिबा फुले से हुआ, जिन्होंने उनकी शिक्षा की ज़िम्मेदारी सॅंभाली। 
  • योगदान:
    • महिलाओं के अधिकारों हेतु सामाजिक जागरण:  वर्ष 1848 में उन्होंने पुणे के भिडे वाडा में भारत का पहला भारतीयों द्वारा संचालित बालिका विद्यालय स्थापित किया। इसके साथ ही 1850 के दशक में नेटिव फीमेल स्कूल, पुणे तथा सोसाइटी फॉर प्रमोटिंग द एजुकेशन ऑफ महार्स, मंग्स (Mangs) एंड एटसेटेराज़ जैसे सुधारवादी ट्रस्टों के माध्यम से समावेशी शिक्षा को संस्थागत रूप दिया।
      • वर्ष 1852 में उन्होंने महिला सेवा मंडल की स्थापना की, जिसके माध्यम से महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाई। साथ ही उन्होंने बाल विवाह के विरुद्ध अभियान चलाया और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया।
      • वर्ष 1863 में ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले ने बालहत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की, जो भारत का पहला ऐसा आश्रय था, जिसका उद्देश्य कन्या भ्रूण/शिशु हत्या को रोकना, गर्भवती और शोषित ब्राह्मण विधवाओं को संरक्षण देना तथा उनके बच्चों का पालन-पोषण करना था।
    • जाति और लैंगिक समानता की अग्रदूत: उन्होंने वंचित और तथाकथित ‘अछूत’ समुदायों के लिये विद्यालय खोलकर सामाजिक समानता को संस्थागत रूप दिया। साथ ही उन्होंने पहला सत्यशोधक विवाह प्रारंभ किया, जो दहेज-मुक्त, पुरोहित-मुक्त और गैर-ब्राह्मणवादी था तथा इस प्रकार औपनिवेशिक भारत में जाति एवं पितृसत्तात्मक पदानुक्रमों को चुनौती दी।
    • साहित्यिक योगदान: उन्होंने काव्य फुले (1854) और बावन काशी सुबोध रत्नाकर (1892) की रचना की, जिनमें कविता के माध्यम से शिक्षा तथा सामाजिक मुक्ति का संदेश देकर शोषित समुदायों को सशक्त किया।
    • करुणा की शहीद: वर्ष 1897 में ब्यूबोनिक प्लेग से पीड़ित एक रोगी की सेवा करते हुए सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया, जो निस्वार्थ जनसेवा का प्रतीक है।

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और पढ़ें: सावित्रीबाई फुले


रैपिड फायर

रानी वेलु नाचियार की जयंती

स्रोत: पी. आई. बी.

प्रधानमंत्री ने 3 जनवरी, 2026  को रानी वेलु नाचियार की 296वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।  

  • परिचय: रानी वेलु नाचियार, जिन्हें ‘वीरमंगाई’ के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 3 जनवरी, 1730 को वर्तमान तमिलनाडु के रामनाथपुरम के रामनाथराजम साम्राज्य में हुआ था।
  • औपनिवेशिक प्रतिरोध की अग्रणी: उन्हें पहली भारतीय रानी के रूप में सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ संगठित सशस्त्र प्रतिरोध की शुरुआत की और राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन से बहुत पहले स्वदेशी शासन की स्थापना का दावा किया।
    • उनका विद्रोह दक्षिण भारत में संगठित औपनिवेशिक विरोध के प्रारंभिक चरण का प्रतिनिधित्व करता है।
  • शिवगंगा की शासक: अपने पति मुथुवदुगनाथापेरिया उदैयाथेवर के निधन के बाद उन्होंने वर्ष 1780 में शिवगंगा के सिंहासन को सॅंभाला और वर्ष 1790 तक शासन किया। इस क्षेत्र में देशी राजनीतिक सत्ता को पुनर्स्थापित किया।
    • उनकी मृत्यु 25 दिसंबर, 1796 को हुई, जो उनके शासनकाल के खत्म होने के कुछ वर्ष बाद था।
  • सैन्य नवाचार: उन्होंने भारतीय सैन्य इतिहास में दर्ज मानव बम का उपयोग औपनिवेशिक सेनाओं के खिलाफ रणनीतिक हथियार के रूप में किया।
    • उन्होंने पहली प्रशिक्षित महिला सैन्य इकाई का भी गठन किया, जिससे अठारहवीं सदी के अंत में महिलाओं की युद्ध में भागीदारी को संस्थागत रूप दिया गया।
  • विशेषज्ञता: एक बहुभाषी शासक, वह फ्रेंच, अंग्रेज़ी और उर्दू में निपुण थीं, जो उनकी बौद्धिक गहराई और कूटनीतिक कौशल को दर्शाता है।

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