रैपिड फायर
आर्कटिक सेंट्री मिशन
- 12 Feb 2026
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NATO ने आर्कटिक में अपनी उपस्थिति को सुदृढ़ करने हेतु ‘आर्कटिक सेंट्री’ नामक मिशन शुरू करने की घोषणा की।
- परिचय: ‘आर्कटिक सेंट्री’ एक बहु-क्षेत्रीय मिशन है, जिसका उद्देश्य रणनीतिक रूप से संवेदनशील आर्कटिक क्षेत्र में सामूहिक रक्षा, समन्वय और स्थिरता को सुदृढ़ करना है।
- उद्देश्य: यह नया मिशन नाटो की सामूहिक क्षमता का उपयोग करते हुए उसके क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आर्कटिक एवं हाई नॉर्थ, जो आर्कटिक वृत्त तथा उससे सटे उत्तरतम क्षेत्रों को संदर्भित करता है, को सुरक्षित बनाए रखने का लक्ष्य रखता है।
- विशेषता: इसका उद्देश्य क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। यह नाटो की मौजूदा पहलों, जैसे– बाल्टिक सेंट्री और ईस्टर्न सेंट्री के अनुरूप विकसित की जा रही है।
- सैन्य अभ्यास एवं तत्परता: इस पहल के अंतर्गत एक्सरसाइज़ कोल्ड रिस्पॉन्स तथा यूनाइटेड किंगडम के नेतृत्व में लायन प्रोटेक्टर जैसे प्रमुख सैन्य अभ्यास सम्मिलित हैं। इनका उद्देश्य सहयोगी सेनाओं को आर्कटिक अभियानों के लिये प्रशिक्षित करना, महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा को सुदृढ़ करना तथा नॉर्वे, आइसलैंड और डेनिश जलडमरूमध्य क्षेत्र में तोड़फोड़ संबंधी खतरों का प्रतिरोध करना है।
आर्कटिक क्षेत्र
- यह क्षेत्र आर्कटिक वृत्त (66°34′ उत्तरी अक्षांश) के उत्तर में स्थित है, जिसका केंद्र उत्तरी ध्रुव है। इसमें आर्कटिक महासागर तथा आठ देशों– कनाडा, डेनमार्क (ग्रीनलैंड), फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन और संयुक्त राज्य अमेरिका के कुछ भाग सम्मिलित हैं, जो मिलकर आर्कटिक परिषद का गठन करते हैं।
- यह क्षेत्र खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्त्वों के महत्त्वपूर्ण भंडारों से संपन्न है तथा उभरते समुद्री मार्गों, संसाधन क्षमता और प्रमुख शक्तियों के सामरिक निकटता के कारण इसकी भू-राजनीतिक महत्ता निरंतर बढ़ रही है।
