रैपिड फायर
भारत में बोत्सवाना से चीता स्थानांतरण
- 02 Mar 2026
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नौ चीते बोत्सवाना से कुनो राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश में स्थानांतरित किये गए जो भारत की महत्त्वाकांक्षी चीता पुर्नवास परियोजना में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
- वर्तमान संख्या स्थिति: इस जोड़ के साथ भारत में चीते की संख्या अब 48 हो गई है, जिसमें कुनो राष्ट्रीय उद्यान में जन्मे 29 शावक शामिल हैं।
- पूर्व में किये गए पुर्नवास के प्रयास: सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीते का पहला बैच पुर्नवासित किया गया था, इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे।
- बोत्सवाना में चीतों का महत्त्व: लगभग 7,100 की वैश्विक चीता आबादी का लगभग 24% हिस्सा बोत्सवाना में निवास करता है। विशेष रूप से, बोत्सवाना के 76.9% चीते संरक्षित क्षेत्रों के बजाय सामुदायिक और वाणिज्यिक फार्म क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जिससे वे मानव गतिविधि और पशुधन के साथ परिदृश्य साझा करने के लिये विशिष्ट रूप से अनुकूलित हैं।
प्रोजेक्ट चीता
- परिचय: इसका आरंभ वर्ष 2022 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत किया गया था। प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य उन चीताओं को भारत में पुनः लाना है जो 1952 में विलुप्त हो गए थे। यह विश्व की पहली ऐसी अंतरमहाद्वीपीय पुनर्स्थापन परियोजना है जिसके अंतर्गत जंगली माँसाहारी जीवों का पुनःपरिचय किया जा रहा है।
- संचालन ढाँचा: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करती है, जो मध्य प्रदेश वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के साथ मिलकर कार्य करती है। वर्ष 2023 में परियोजना के कार्यान्वयन की निगरानी और मार्गदर्शन के लिये एक स्टियरिंग कमेटी का गठन किया गया।
- चीता आवास निर्धारण: वर्तमान में कुनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य (मध्य प्रदेश) पुर्नवासित चीतों के मुख्य आवास हैं, जबकि नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य (मध्य प्रदेश) को भविष्य में चीता परिदृश्य के विस्तार के लिये चिह्नित किया गया है।
- सामुदायिक सहभागिता: परियोजना को 350 से अधिक 'चीता मित्रों' का समर्थन प्राप्त है, जो स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिये कार्य कर रहे हैं।
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