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दुर्लभ रोग दिवस 2026

  • 02 Mar 2026
  • 23 min read

स्रोत: द हिंदू

दुर्लभ रोग दिवस (Rare Disease Day) वैश्विक स्तर पर 28 फरवरी (या लीप वर्ष में 29 फरवरी, जो प्रतीकात्मक रूप से सबसे दुर्लभ दिन है) को मनाया जाता है, ताकि पीड़ित समुदाय द्वारा सामना की जाने वाली विशिष्ट चुनौतियों को रेखांकित किया जा सके।

  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य दुर्लभ रोगियों के लिये सामाजिक अवसरों, स्वास्थ्य सेवाओं तथा निदान और उपचार तक पहुँच में समानता सुनिश्चित करना है।
  • उत्पत्ति और समन्वय: वर्ष 2008 में स्थापित, इसका समन्वय EURORDIS (दुर्लभ रोगों के लिये यूरोपीय संगठन) द्वारा 70 से अधिक नेशनल एलायंस पेशेंट ऑर्गेनाइज़ेशन्स के साथ साझेदारी में किया जाता है।

दुर्लभ रोग

  • परिचय: दुर्लभ रोगों/बीमारियों की कोई एक सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। इसे मुख्य रूप से इसके प्रसार के आधार पर परिभाषित किया जाता है। एक उभरती वैश्विक सहमति के अनुसार, दुर्लभ रोग को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा परिभाषित क्षेत्र में प्रति 2,000 व्यक्तियों में से ≤ 1 व्यक्ति को प्रभावित करने वाली बीमारी के रूप में माना जाता है।
  • आनुवंशिकी: दुर्लभ रोगों का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 50-75%) बचपन में या जन्म के तुरंत बाद ही दिखाई देने लगता है। इनमें से लगभग 80% रोग आनुवंशिक कारणों से उत्पन्न होते हैं (उदाहरण के लिये, लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर)। शेष मामलों में दुर्लभ स्थितियाँ अन्य कारणों से विकसित होती हैं, जिनमें दुर्लभ कैंसर, ऑटोइम्यून रोग और संक्रामक रोग शामिल हैं:
  • दुर्लभ/बीमारियों की वैश्विक स्थिति और उपचार: विश्व स्तर पर, लगभग 6,000 से 10,000 दुर्लभ बीमारियों की पहचान की गई है, जिनसे अनुमानित 300 से 450 मिलियन लोग प्रभावित हैं। यह एक महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है क्योंकि वर्तमान में लगभग 95% दुर्लभ बीमारियों के लिये कोई स्वीकृत उपचार उपलब्ध नहीं है।
  • भारत की स्थिति: भारत में दुर्लभ रोगों/बीमारियों की कोई औपचारिक प्रसार-आधारित परिभाषा नहीं है, क्योंकि सीमित महामारी विज्ञान संबंधी आँकड़े उपलब्ध हैं। इसके बजाय, राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (NPRD) 2021 विकारों को नैदानिक ​​अनुभव और उपचार योग्यता के आधार पर वर्गीकृत करती है (अर्थात् समूह 1, समूह 2, और समूह 3), न कि सख्त संख्यात्मक सीमाओं के आधार पर।
    • परिभाषा के अभाव के बावजूद, भारत में अनुमानित 72-96 मिलियन लोग दुर्लभ बीमारियों से प्रभावित हैं। 
  • भारत में नीतिगत सहायता: राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (NPRD) 2021 के अंतर्गत, नामित उत्कृष्टता केंद्रों में इलाज करा रहे 63 दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीज़ों को 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
    • केंद्रीय बजट 2026-27 के अंतर्गत, विशिष्ट चिकित्सा आवश्यकताओं हेतु दवाओं, औषधियों तथा खाद्य पदार्थों के व्यक्तिगत आयात को शुल्क मुक्त करने के लिये, आयात शुल्क से छूट प्राप्त दुर्लभ बीमारियों की सूची में 7 अतिरिक्त बीमारियों को शामिल किया गया है।
    • दुर्लभ बीमारियों को फार्मास्युटिकल्स के लिये उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत एक फोकस क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया था।
और पढ़ें…  राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (NPRD)
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