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औद्योगिक गलियारे एवं एनआईसीडीपी

  • 28 Feb 2026
  • 56 min read

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों? 

संघीय बजट वर्ष 2026–27 में  राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) को प्राथमिकता देते हुए भारत के अवसंरचनात्मक प्रोत्साहन को तीव्र किया गया है तथा ‘पूर्वोदय’ पहल को सुदृढ़ करने हेतु पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे की घोषणा की गई है।

  • वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों में राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन न्यास (NICDIT) के लिये ₹3,000 करोड़ के आवंटन द्वारा समर्थित यह कार्यक्रम स्मार्ट औद्योगिक नगरों के सृजन, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी तथा भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के अंतर्गत एकीकृत करने का उद्देश्य रखता है।

औद्योगिक गलियारे क्या होते हैं?

  • परिचय: औद्योगिक गलियारे ऐसे सामरिक रैखिक विकास क्षेत्र हैं, जो प्रमुख आर्थिक केंद्रों को सड़कों, रेलमार्गों, बंदरगाहों तथा हवाई अड्डों जैसी समेकित बहु-माध्यमीय अवसंरचना के माध्यम से परस्पर जोड़ते हैं। इनका उद्देश्य माल एवं यात्री आवागमन को निर्बाध, कुशल तथा त्वरित बनाना है।
    • ये औद्योगिक विकास को गति देते हैं, लॉजिस्टिक दक्षता में वृद्धि करते हैं तथा निवेश आकर्षित करने और विनिर्माण को प्रोत्साहित करने हेतु वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी, व्यवसाय-अनुकूल पारितंत्र का निर्माण करते हैं।
    • औद्योगिक क्लस्टरिंग को बढ़ावा देकर, क्षेत्रीय सामर्थ्यों का लाभ उठाकर तथा प्रमुख परिवहन गलियारों के अनुरूप विकास करते हुए, ये गलियारे क्षेत्रीय विकास का समर्थन करते हैं, आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करते हैं तथा भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से एकीकृत करते हैं।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये महत्त्व:
    • प्लग-एंड-प्ले पारितंत्र: तैयार-उपयोग योग्य भूमि तथा सुनिश्चित उपयोगिताएँ उपलब्ध होने से उद्यम तत्काल प्रारंभ कर सकते हैं, जिससे अनावश्यक प्रशासनिक जटिलताएँ (‘लालफीताशाही’) एवं स्थापना में विलंब कम होता है।
    • सततता: “लो-कार्बन सिटी” रूपरेखाओं का अनुसरण करते हुए ये हब नवीकरणीय ऊर्जा, जल पुनर्चक्रण तथा व्यापक हरित क्षेत्रों का समावेशन करते हैं।
    • वॉक-टू-वर्क संस्कृति: आधुनिक नगरीय नियोजन आवागमन समय को कम करता है, जिससे श्रमिकों के जीवन-स्तर में सुधार तथा निवेशकों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
    • रोज़गार सृजन: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, NICDP के चरण-I नगरों ने पहले ही 2.02 लाख करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित किये हैं, जिससे ईवी तथा सेमीकंडक्टर जैसे उच्च-विकासशील क्षेत्रों में हज़ारों रोज़गार सृजित हुए हैं।
    • निवेश आकर्षण तथा निर्यात प्रोत्साहन: विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) कर प्रोत्साहन एवं विनियामक लाभ प्रदान करते हैं, जो विदेशी निवेश को आकर्षित करते हुए वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करते हैं।

राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) क्या है?

  • NICDP: यह भारत की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स तथा वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को सुदृढ़ करने के लिये एकीकृत औद्योगिक गलियारों तथा ग्रीनफील्ड (हरित-क्षेत्र) स्मार्ट औद्योगिक नगरों का नेटवर्क विकसित करना है।
    • PM गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम भविष्य के लिये तैयार आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण हेतु बहुआयामी कनेक्टिविटी, प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढाँचे और टिकाऊ शहरी नियोजन पर केंद्रित है।
    • यह कार्यक्रम वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) के अधीन एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) द्वारा कार्यान्वित किया जाता है
  • प्रमुख औद्योगिक गलियारे: राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) समग्र देश के 11 प्रमुख औद्योगिक गलियारों को सम्मिलित करता है, जिनमें दिल्ली–मुंबई, चेन्नई–बंगलुरु तथा अमृतसर–कोलकाता कॉरिडोर प्रमुख हैं। प्रत्येक कॉरिडोर में समर्पित माल ढुलाई गलियारों, राष्ट्रीय राजमार्गों, बंदरगाहों तथा विस्तृत रेल नेटवर्क की सुविधा होगी।
    • इन 11 औद्योगिक गलियारों के अंतर्गत परियोजनाएँ निम्न-कार्बन नगर ढाँचा के अंतर्गत विकसित की जा रही हैं, जिनमें सतत औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने के लिये हरित क्षेत्र, सार्वजनिक परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग और जल एवं अपशिष्ट पुनर्चक्रण जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
    • वर्ष 2024 में सरकार ने NICDP के अंतर्गत विनिर्माण को प्रोत्साहित करने, निवेश आकर्षित करने तथा भविष्य-उन्मुख अवसंरचना के निर्माण हेतु 12 अतिरिक्त ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को अनुमोदन प्रदान किया।

NICDP

राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम लिमिटेड (NICDC)

  • NICDC की स्थापना वर्ष 2008 में (पूर्व में दिल्ली–मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम लिमिटेड—DMICDC) की गई थी। यह NICDP के योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन के लिये उत्तरदायी है।
  • टोक्यो–ओसाका तथा बोस्टन–वॉशिंगटन डीसी जैसे वैश्विक कॉरिडोर मॉडलों से प्रेरित होकर NICDC स्मार्ट सिटी, औद्योगिक क्लस्टर तथा बहुआयामी लॉजिस्टिक्स हब के विकास के माध्यम से आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करता है। इसके साथ ही, यह प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना, निर्बाध कनेक्टिविटी तथा आधुनिक नगरीय मानकों सहित व्यवसाय-अनुकूल एवं सतत पारितंत्र का निर्माण कर विनिर्माण को सुदृढ़ करने तथा निर्यात को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।

राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन न्यास (NICDIT)

  • NICDIT, जिसे पूर्व में DMIC ट्रस्ट के नाम से जाना जाता था, NICDC के लिये प्रमुख वित्तपोषण तंत्र एवं निवेश माध्यम के रूप में कार्य करता है।
  • यह परियोजनाओं के वित्तपोषण को सुगम बनाता है, ऋण प्रबंधन करता है तथा अवसंरचना विकास हेतु संसाधनों का संकलन करता है, साथ ही औद्योगिक स्मार्ट सिटी की स्थापना के लिये मध्यस्थ की भूमिका निभाता है।
  • वर्ष 2026–27 के बजट में आवंटित 3,000 करोड़ रुपये की राशि इसी न्यास के माध्यम से प्रबंधित की जाएगी, ताकि ट्रंक अवसंरचना की समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम (NICDP) क्या है? 
NICDP भारत की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य विनिर्माण, रसद दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ावा देने हेतु एकीकृत औद्योगिक कॉरिडोर और हरित स्मार्ट शहरों का विकास करना है।

2. औद्योगिक कॉरिडोर विकास में NICDC की क्या भूमिका है?
NICDC द्वारा NICDP परियोजनाओं की योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन किया जाता है। यह स्मार्ट सिटी, औद्योगिक क्लस्टर तथा लॉजिस्टिक्स हब विकसित कर निर्यात संवर्द्धन एवं आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करता है।

3. NICDIT औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं को किस प्रकार सहायता प्रदान करता है?
NICDIT  NICDP के लिये वित्तपोषण तंत्र के रूप में कार्य करता है। यह निधियों का संकलन करता है तथा बजटीय आवंटनों के माध्यम से समयबद्ध अवसंरचना विकास सुनिश्चित करता है।

4. भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये औद्योगिक कॉरिडोर क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
ये लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाते हैं, निवेश आकर्षित करते हैं, रोज़गार सृजन करते हैं, निर्यात को प्रोत्साहित करते हैं तथा भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से एकीकृत करते हैं।

5. वर्ष 2026–27 के बजट में घोषित पूर्वी तट औद्योगिक कॉरिडोर का क्या महत्त्व है?
यह पूर्वोदय पहल को सुदृढ़ करता है, पूर्वी भारत के औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित करता है तथा बंदरगाह-आधारित विकास एवं निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

मेन्स:

प्रश्न. भारत में औद्योगिक गलियारों का क्या महत्त्व है? औद्योगिक गलियारों को चिह्नित करते हुए उनके प्रमुख अभिलक्षणों को समझाइये। (2018)

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