उत्तर प्रदेश Switch to English
उत्तर प्रदेश के पहले आर्थिक सर्वेक्षण में 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का रोडमैप पेश किया
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य विधानमंडल में अपना पहला आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया, जिसमें निवेश-प्रेरित विकास, सुदृढ़ अवसंरचना, क्षेत्रीय विस्तार और नीतिगत सुधारों के माध्यम से देश के सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने के लिये डेटा-आधारित रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
मुख्य बिंदु:
समष्टि-आर्थिक परिदृश्य
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संकेतक |
आँकड़ा/मूल्य |
प्रवृत्ति / टिप्पणी |
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GSDP (वर्तमान 2024-25) |
₹30.25 लाख करोड़ |
वर्ष 2016-17 (₹13.30 लाख करोड़) से अर्थव्यवस्था दोगुनी। |
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GSDP लक्ष्य (2025-26) |
₹36.00 लाख करोड़ |
लगभग 12% की अनुमानित वृद्धि दर। |
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वृद्धि दर (CAGR) |
10.8% |
वर्ष 2016-17 से 2024-25 के बीच गणना की गई। |
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भारत में योगदान |
9.1% (2024-25) |
वर्ष 2016-17 के 8.6% से वृद्धि। |
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प्रति व्यक्ति आय |
₹1,09,844 (2024-25) |
वर्ष 2016-17 के ₹54,564 से दोगुनी। |
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लक्षित प्रति व्यक्ति आय |
₹1,20,000 |
वित्तीय वर्ष 2025-26 का लक्ष्य। |
- लक्षित अर्थव्यवस्था का आकार: सर्वेक्षण के अनुसार, निवेश, अवसंरचना और उत्पादकता को सुदृढ़ करते हुए मध्यम अवधि में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹83 लाख करोड़) तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- GSDP वृद्धि: उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 10.8% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है, जो वर्ष 2016-17 में ₹13.30 लाख करोड़ से बढ़कर वर्ष 2024-25 में ₹30.25 लाख करोड़ हो गया है और वर्ष 2025-26 में ₹36 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
- निवेश पाइपलाइन: राज्य ने औद्योगिक प्रस्तावों के माध्यम से ₹50 लाख करोड़ से अधिक की निवेश पाइपलाइन तैयार की है, जो घरेलू और वैश्विक निवेशकों की मज़बूत रुचि को दर्शाती है।
- अवसंरचना पर ध्यान:
- उत्तर प्रदेश स्वयं को भारत के एक्सप्रेसवे हब के रूप में स्थापित कर रहा है, जहाँ 22 एक्सप्रेसवे हैं। राज्य के पास देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और वह अपने विमानन पारितंत्र का विस्तार कर 24 हवाई अड्डों तक पहुँचाने की योजना बना रहा है, जिनमें पाँच अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल होंगे।
- औद्योगिक विविधीकरण:
- पंजीकृत कारखानों की संख्या 30,000 से अधिक हो गई है, जबकि औद्योगिक सकल मूल्य संवर्द्धन (GVA) में 25% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो प्रमुख राज्यों में सर्वाधिक है।
- क्षेत्रीय हब विकसित किये जा रहे हैं (जैसे—लखनऊ में AI, कानपुर में ड्रोन निर्माण, नोएडा में IT और इलेक्ट्रॉनिक्स)।
- डिजिटल क्षेत्र में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप पारितंत्र में चौथे स्थान पर है।
- क्लस्टर-आधारित विकास:
- लखनऊ: AI सिटी एवं कैपिटल रीजन।
- कानपुर: ड्रोन निर्माण एवं परीक्षण हब।
- नोएडा: IT, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं डेटा सेंटर हब।
- बुंदेलखंड: रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर।
- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि:
- कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश अग्रणी बना हुआ है और राज्य देश का सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक है। सिंचाई, फसल विविधीकरण और सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से उत्पादकता तथा किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
- दूध उत्पादन: भारत के कुल दूध उत्पादन में 15.66% योगदान (देश में सर्वाधिक)।
- राष्ट्रीय हिस्सेदारी: भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश का 20.6% योगदान।
- रैंकिंग: उत्तर प्रदेश देश में गन्ना, दूध और आलू का सबसे बड़ा उत्पादक है।
- विशेष ध्यान: लखनऊ में सीड पार्क (बीज पार्क) की स्थापना और फसल विविधीकरण (दलहन/तिलहन मिशन) पर ज़ोर।
- उत्पादकता: प्रति हेक्टेयर सकल मूल्य संवर्द्धन (GVA) वर्ष 2017-18 के ₹0.98 लाख से बढ़कर 2024-25 में ₹1.73 लाख हो गया है।
- फसल तीव्रता बढ़कर 193.7% हो गई है।
- सिंचाई: वर्ष 2024-25 में सिंचित क्षेत्र बढ़कर 2.76 करोड़ हेक्टेयर हो गया है।
- सार्वजनिक वित्त एवं राजकोषीय स्थिति:
- राज्य का बजट नौ वर्षों में दोगुने से अधिक बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹8.33 लाख करोड़ हो गया है। स्वयं के कर राजस्व में 2.5 गुना वृद्धि हुई है तथा ऋण-GSDP अनुपात अनुकूल 28% पर है।
- राजकोषीय घाटा: GSDP के 3% पर सफलतापूर्वक सीमित रखा गया है।
- राजस्व अधिशेष: GSDP का 2.6% अनुमानित, जो सुदृढ़ वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।
- कर राजस्व: राज्य का स्वयं का कर राजस्व 2.5 गुना बढ़कर ₹2.09 लाख करोड़ हो गया है।
- विशेष रूप से उत्पाद शुल्क राजस्व में एक दशक से कम समय में तीन गुना वृद्धि हुई है।
- ऋण स्थिति: ऋण-GSDP अनुपात 28% है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है और पूंजीगत व्यय के लिये पर्याप्त अवसर प्रदान करता है।
- मानव विकास संकेतक:
- प्रति व्यक्ति आय बढ़कर वर्ष 2024-25 में ₹1,09,844 हो गई है और वर्ष 2025-26 में ₹1,20,000 तक पहुँचने का अनुमान है।
- उत्तर प्रदेश आयुष्मान भारत और जन-धन खातों के कवरेज में भी अग्रणी है, जो सामाजिक समावेशन में सुधार को दर्शाता है।
- निर्यात एवं डिजिटल प्रदर्शन:
- राज्य ने निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में चौथा स्थान प्राप्त किया है, भू-आवेष्ठित (Landlocked) राज्यों में प्रथम स्थान पर रहा है तथा ई-प्रॉसिक्यूशन में राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है। साथ ही प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली का विस्तार किया गया है।
- ऊर्जा एवं शहरी नियोजन:
- स्थापित क्षमता में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है। लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन और 100 नए टाउनशिप विकसित करने की योजनाएँ तीव्र शहरीकरण तथा भावी जनसांख्यिकीय चुनौतियों के प्रबंधन हेतु बनाई गई हैं।
- ट्रिपल ‘S’ फ्रेमवर्क: सरकार की निवेश रणनीति सुरक्षा, स्थिरता और गति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था में सुधार, नीतिगत सुनिश्चितता तथा निवेश मित्र (Nivesh Mitra) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से त्वरित स्वीकृतियाँ प्रदान करना है।
- भविष्य की रूपरेखा एवं शहरीकरण:
- शहरीकरण: वर्ष 2046 तक शहरी जनसंख्या 35.8% तक पहुँचने का अनुमान है।
- नए विकास कार्य:
- लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन का गठन।
- शहरी विस्तार को प्रबंधित करने के लिये 100 नए टाउनशिप विकसित करने की योजना।
- विकास की कार्ययोजना: आर्थिक सर्वेक्षण वार्षिक आर्थिक मूल्यांकन को संस्थागत रूप प्रदान करता है और सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये नीतिगत योजना, राजकोषीय प्रबंधन तथा प्रदर्शन निगरानी हेतु एक व्यापक, डेटा-आधारित रूपरेखा प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
IIT मद्रास ने डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिये ₹600 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड बनाया
चर्चा में क्यों?
IIT मद्रास रिसर्च पार्क ने भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम में प्रारंभिक चरण और प्रौद्योगिकी-गहन स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ₹600 करोड़ का डीप-टेक वेंचर कैपिटल फंड लॉन्च किया है।
मुख्य बिंदु:
- फंड: IIT मद्रास रिसर्च पार्क (IITMRP) ने यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स के सहयोग से ₹600 करोड़ के डीप-टेक वेंचर कैपिटल फंड की स्थापना की घोषणा की है, जिसका नाम IITM यूनिकॉर्न फ्रंटियर फंड I रखा गया है।
- इस फंड में अतिरिक्त ₹400 करोड़ का ‘ग्रीनशू विकल्प’ भी शामिल है, जिससे डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश हेतु इसकी संभावित कुल निवेश क्षमता ₹1,000 करोड़ तक पहुँच सकती है।
- यह फंड प्रारंभिक चरण की डीप-टेक कंपनियों को लक्षित करता है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, रक्षा प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स और उन्नत अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
- रणनीतिक दृष्टि: यह पहल प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता पर बल देती है, ताकि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी समाधान विकसित करने वाले भारतीय उपक्रमों को समर्थन देकर आयातित प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम की जा सके।
- नवाचार समर्थन: यह फंड ‘धैर्यशील पूंजी’ (Patient Capital) उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखता है, क्योंकि डीप-टेक स्टार्टअप्स को गहन अनुसंधान एवं विकास (R&D), प्रोटोटाइप निर्माण और नियामकीय चुनौतियों के कारण प्रायः अधिक समय की आवश्यकता होती है।
- प्रभाव: इस पहल से बौद्धिक संपदा-आधारित उपक्रमों की वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा और अनुसंधान संस्थानों तथा उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करते हुए भारत के डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को मज़बूती मिलने की अपेक्षा है।
- IITMRP: यह भारत के प्रमुख विश्वविद्यालय-आधारित अनुसंधान पार्कों में से एक है, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करना और अपनी परिसंपत्ति में अनुसंधान एवं विकास इकाइयों को स्थान प्रदान कर अकादमिक जगत तथा उद्योग के बीच के अंतर को कम करना है।
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और पढ़ें: भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम, AI, सेमीकंडक्टर, बौद्धिक संपदा |
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गुजरात ने हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिये स्टारलिंक के साथ LoI एक्सचेंज किया
चर्चा में क्यों?
गुजरात सरकार ने पूरे राज्य में उच्च-गति सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार के लिये एलन मस्क की स्पेसएक्स की सहायक कंपनी स्टारलिंक के साथ एक आशय पत्र (Letter of Intent – LoI) पर हस्ताक्षर किये हैं।
मुख्य बिंदु:
- हस्ताक्षरकर्त्ता: यह दस्तावेज़ गांधीनगर में राज्य उद्योग आयुक्त पी. स्वरूप और स्टारलिंक इंडिया के प्रमुख प्रभाकर जयकुमार के बीच आदान-प्रदान किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी उपस्थित थे।
- लक्षित क्षेत्र: यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ, सीमावर्ती, जनजातीय और वंचित क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहाँ पारंपरिक दूरसंचार अवसंरचना या तो अपर्याप्त है अथवा स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है।
- प्राथमिकता वाले ज़िले: नर्मदा और दाहोद जैसे ‘आकांक्षी ज़िलों’ पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
- पायलट परियोजना का दायरा: प्रारंभिक चरण में निम्नलिखित प्रमुख सार्वजनिक अवसंरचनाओं को जोड़ने का लक्ष्य है—
- शिक्षा: स्मार्ट कक्षाओं हेतु राज्य विद्यालय।
- स्वास्थ्य: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs) और टेलीमेडिसिन सेवाएँ।
- सुरक्षा: तटीय पुलिस चौकियाँ और राजमार्ग सुरक्षा प्रणाली।
- लोक सेवाएँ: कॉमन सर्विस सेंटर (CSCs) और ई-गवर्नेंस केंद्र।
- लॉजिस्टिक्स एवं पर्यावरण: बंदरगाह, GIDC औद्योगिक पार्क और वन्यजीव अभयारण्य।
- संयुक्त कार्यदल: पायलट आकलन की निगरानी एवं क्रियान्वयन के समन्वय हेतु गुजरात सरकार और स्टारलिंक के प्रतिनिधियों का एक संयुक्त कार्यदल गठित किया जाएगा।
- नियामकीय स्थिति: यद्यपि स्टारलिंक को आशय पत्र (LoI) जारी किया गया है, किंतु अंतिम वाणिज्यिक शुरुआत भारत की केंद्रीय प्राधिकरणों (दूरसंचार विभाग/IN-SPACe) से लाइसेंस और सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियों के अधीन होगी।
- महत्त्व: यह रणनीतिक पहल गुजरात के डिजिटल कनेक्टिविटी मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में डिजिटल अंतर को पाटना है जहाँ भौगोलिक या लागत संबंधी कारणों से स्थलीय दूरसंचार नेटवर्क कमज़ोर या अव्यवहार्य हैं।
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भारत लगाएगा लद्दाख में दो नए टेलीस्कोप
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सरकार ने लद्दाख में अपनी भू-आधारित खगोल विज्ञान अवसंरचना के व्यापक विस्तार को स्वीकृति दी है, जिसमें दो नए मेगा-टेलीस्कोप की स्थापना तथा एक मौजूदा सुविधा के उन्नयन को शामिल किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- नई टेलीस्कोप परियोजनाएँ: नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप और नेशनल लार्ज ऑप्टिकल–नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप की स्थापना।
- नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST): सूर्य की सतह और वायुमंडल का उच्च-रिज़ॉल्यूशन में अवलोकन करने हेतु।
- स्थान: पैंगोंग त्सो झील के निकट, लद्दाख।
- वैज्ञानिक फोकस: सौर चुंबकीय क्षेत्र, सौर ज्वालाएँ (फ्लेयर), कोरोनल मास इजेक्शन तथा अंतरिक्ष मौसम संबंधी घटनाएँ।
- महत्त्व: पूर्ण होने पर NLST भारत की तीसरी भू-आधारित सौर वेधशाला होगी। यह तमिलनाडु स्थित कोडाइकनाल सौर वेधशाला और राजस्थान स्थित उदयपुर सौर वेधशाला जैसी मौजूदा सुविधाओं का पूरक बनेगी तथा भारत की आदित्य-L1 अंतरिक्ष वेधशाला से प्राप्त आँकड़ों को भी सुदृढ़ करेगी।
- नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT): गहन अंतरिक्ष अनुसंधान के लिये एक उन्नत ऑप्टिकल और निकट-अवरक्त टेलीस्कोप।
- वैज्ञानिक अनुप्रयोग: एक्सोप्लैनेट, तारकीय और आकाशगंगीय विकास, ब्रह्मांड विज्ञान, सुपरनोवा तथा दूरस्थ आकाशगंगाओं का अध्ययन।
- महत्त्व: अपने बड़े संग्रहण क्षेत्र और उच्च ऊँचाई वाले स्थान के कारण NLOT गहन अंतरिक्ष अवलोकन के लिये क्षेत्र की सबसे शक्तिशाली ऑप्टिकल टेलीस्कोप में से एक होगा।
- हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT) का उन्नयन: HCT को 3.7 मीटर के खंडित प्राथमिक दर्पण वाले टेलीस्कोप में उन्नत किया जाएगा, जिससे इसकी संवेदनशीलता और ऑप्टिकल-अवरक्त तरंगदैर्ध्य क्षेत्र में कवरेज में सुधार होगा।
- वैज्ञानिक प्रभाव: उन्नत HCT गहन अवलोकन को संभव बनाएगा तथा अंतर्राष्ट्रीय वेधशालाओं और इस कार्यक्रम के अंतर्गत निर्मित नए टेलीस्कोप का पूरक बनेगा।
- लद्दाख क्यों?: उच्च ऊँचाई, स्वच्छ और शुष्क आकाश तथा कम वायुमंडलीय विक्षोभ के कारण लद्दाख को खगोलीय अवलोकन के लिये एक आदर्श स्थल के रूप में पहचाना गया है। यहाँ पहले से ही कई महत्त्वपूर्ण ऑप्टिकल और उच्च-ऊर्जा खगोल विज्ञान सुविधाएँ स्थापित हैं।
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ‘पढ़ाई विद AI’ ऐप लॉन्च किया
चर्चा में क्यों?
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बिलासपुर ज़िले में ‘पढ़ाई विद AI’ नामक डिजिटल शिक्षा पहल की शुरुआत की।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य पूर्णतः डिजिटल शिक्षण वातावरण प्रदान करना है, जिसमें निरंतर शैक्षणिक परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन सुनिश्चित हो सके।
- यह पहल विशेष रूप से उन छात्रों के लिये तैयार की गई है जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और जिन्हें प्रौद्योगिकी-समर्थित शिक्षण सहयोग की आवश्यकता है।
- विज़न: मुख्यमंत्री ने इस तर्क पर ज़ोर दिया कि शिक्षा एक परिवर्तनकारी शक्ति है, जो सोच का विस्तार करती है और समाज के भविष्य का निर्माण करती है। राज्य सरकार नवाचार और समान अवसरों के माध्यम से शिक्षा को सशक्त बनाने के लिये प्रतिबद्ध है।
- इस पहल को NTPC का सहयोग प्राप्त है, जो इस मंच के माध्यम से छात्रों को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने में सहायता कर रहा है।
- समान पहुँच: यह मंच AI-आधारित प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए छात्रों की भौगोलिक या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किये बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिये बनाया गया है।
- महत्त्व: यह पहल सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण की दिशा में राज्य सरकार के व्यापक प्रयासों को दर्शाती है।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों के छात्रों के बीच शैक्षणिक असमानताओं को दूर करना और सीखने के परिणामों में सुधार करना है।
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नेशनल क्वांटम मिशन के तहत अमरावती क्वांटम वैली लॉन्च की गई
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत के महत्त्वाकांक्षी नेशनल क्वांटम मिशन के अंतर्गत आंध्र प्रदेश के अमरावती में अमरावती क्वांटम सेंटर की आधारशिला रखी।
मुख्य बिंदु:
- नेशनल क्वांटम मिशन: भारत के नेशनल क्वांटम मिशन के लिये लगभग ₹6,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है और यह 17 राज्यों तथा 2 केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 43 संस्थानों को सम्मिलित करता है।
- इसे चार प्रमुख क्षेत्रों के अंतर्गत संगठित किया गया है: क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी और क्वांटम सामग्री व उपकरण।
- नोडल मंत्रालय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय।
- विज़न: विभिन्न प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म (सुपरकंडक्टिंग और फोटोनिक) का उपयोग करते हुए 50-1,000 भौतिक क्यूबिट की श्रेणी में मध्यम-स्तरीय क्वांटम कंप्यूटरों का विकास।
- उद्देश्य: उपग्रह-आधारित सुरक्षित क्वांटम संचार और भू-आधारित क्वांटम नेटवर्क की स्थापना करना।
- अनुप्रयोग: रक्षा एवं अंतरिक्ष क्षेत्रों में उच्च-सटीकता समय-निर्धारण, नेविगेशन, इमेजिंग और डिटेक्शन करना।
- अमरावती क्वांटम वैली: इसे एक समर्पित क्वांटम नवाचार क्लस्टर के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसमें अनुसंधान संस्थान, उद्योग, स्टार्टअप और प्रतिभा विकास पारितंत्र का एकीकरण किया जाएगा।
- क्वांटम क्लाउड एक्सेस और नवाचार केंद्रों के लिये IBM तथा भारतीय IT कंपनी TCS जैसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ सहयोग करना।
- रणनीतिक महत्त्व: क्वांटम प्रौद्योगिकी को वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (CET) माना जाता है, जिसका राष्ट्रीय सुरक्षा और एन्क्रिप्शन प्रणालियों पर गहरा प्रभाव है।
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और पढ़ें: नेशनल क्वांटम मिशन, क्वांटम कंप्यूटिंग, सुपरकंडक्टिंग, क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (CET) |

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