उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश ने पहली बार आबकारी निर्यात नीति 2026-29 पेश की
- 13 Feb 2026
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चर्चा में क्यों?
13 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026–27 से 2028–29 की अवधि के लिये एक समर्पित आबकारी निर्यात नीति को मंज़ूरी दी, जिससे वह भारत का पहला राज्य बन गया जिसने अपने आबकारी तंत्र के लिये अलग से निर्यात-उन्मुख नीति तैयार की है।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य शराब और एथेनॉल के निर्यात को बढ़ाना, उत्तर प्रदेश में निर्मित ब्रांडों की वैश्विक उपस्थिति को सुदृढ़ करना, निवेश आकर्षित करना तथा सामाजिक-आर्थिक लाभों को बढ़ावा देना है।
- लक्ष्य: आबकारी निर्यात नीति निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों के साथ तैयार की गई है:
- निर्यात को प्रोत्साहन: राज्य के सशक्त कृषि आधार का लाभ उठाते हुए अनाज और फल-आधारित कच्चे माल से एथेनॉल तथा अन्य मदिरा-संबंधित उत्पादों के उत्पादन व निर्यात में वृद्धि करना।
- औद्योगिक विकास: डिस्टिलरी, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना, जिससे विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र मज़बूत हो तथा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हों।
- नीति की प्रमुख विशेषताएँ: यह नीति निर्यात को प्रतिस्पर्द्धी और प्रोत्साहन-आधारित बनाने के लिये उपायों का एक समूह शामिल करती है:
- शुल्क में कमी: बोतलिंग शुल्क, निर्यात पास शुल्क, फ्रैंचाइज़ शुल्क और विशेष शुल्क की दरों को निर्यात के लिये न्यूनतम स्तर तक घटाया गया है, जो पेय क्षमता के 25% के बराबर है।
- निर्यात शुल्क में कटौती: अन्य राज्यों को गुड़-आधारित एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) के निर्यात पर शुल्क घटाकर ₹0.50 प्रति बल्क लीटर कर दिया गया है।
- सरलीकृत अनुपालन: निर्यात-उन्मुख शराब के लिये ब्रांड पंजीकरण और लेबल स्वीकृति प्रक्रियाओं में ढील दी गई है तथा शुल्क में उल्लेखनीय कमी की गई है।
- विरासत एवं विशिष्ट बाज़ार: पहली बार, निर्यात के लिये विशेष रूप से हेरिटेज वाइन के निर्माण हेतु डिस्टिलरी को प्रावधान दिये गए हैं, साथ ही टेस्टिंग टैवर्न्स की अनुमति भी प्रदान की गई है।
- अवधि: पहली बार तीन वर्षों (2026–29) की अवधि के लिये एक अलग आबकारी निर्यात नीति लागू की गई है, जिससे निवेशकों को दीर्घकालिक नियामकीय स्थिरता मिलेगी।
- महत्त्व: उत्तर प्रदेश ने विदेशी और अंतर-राज्यीय बाज़ारों पर केंद्रित आबकारी निर्यात नीति अपनाकर भारतीय राज्यों में एक मिसाल कायम की है।
- कृषि से जुड़ाव: अनाज एवं फलों जैसे कच्चे माल को एथेनॉल और शराब के निर्यात से जोड़कर यह नीति कृषि-औद्योगिक मूल्य शृंखलाओं को सुदृढ़ करती है, जिससे किसानों तथा प्रसंस्करणकर्ताओं दोनों को लाभ होता है।