दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

राजस्थान स्टेट पी.सी.एस.

  • 05 Mar 2026
  • 1 min read
  • Switch Date:  
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

निधि छिब्बर ने नीति आयोग के CEO का अतिरिक्त कार्यभार सॅंभाला

चर्चा में क्यों?

निधि छिब्बर ने नीति आयोग (NITI Aayog) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया है। यह दायित्व उन्होंने BVR सुब्रह्मण्यम के कार्यकाल पूर्ण होने के बाद सॅंभाला है, जो भारत की प्रमुख सार्वजनिक नीति संस्था में एक महत्त्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन को दर्शाता है।

मुख्य बिंदु:

  • नियुक्ति: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने एक अधिसूचना जारी कर नीति आयोग (NITI Aayog) के CEO पद का अतिरिक्त प्रभार निधि छिब्बर को सौंपा है।
    • निधि छिब्बर छत्तीसगढ़ कैडर की 1994 बैच की IAS अधिकारी हैं।
    • नियुक्ति के समय वह नीति आयोग में डेवलपमेंट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस (DMEO) की महानिदेशक के रूप में कार्यरत थीं।
  • पूर्ववर्ती: BVR सुब्रह्मण्यम ने फरवरी 2026 में नीति आयोग के CEO के रूप में अपना विस्तारित तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा किया।
  • भूमिका: CEO नीति-निर्माण एवं योजना प्रक्रिया की देखरेख, सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने, केंद्र के मंत्रालयों तथा राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करने और राष्ट्रीय विकास पहलों के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने के लिये उत्तरदायी होता है।
    • नीति आयोग के CEO के रूप में (अतिरिक्त प्रभार) निधि छिब्बर की नियुक्ति सरकार के उच्च नेतृत्व पदों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाती है।
  • नीति आयोग: वर्ष 2015 में स्थापित नीति आयोग ने योजना आयोग का स्थान लिया और यह सहकारी संघवाद, सतत विकास तथा दीर्घकालिक रणनीतिक योजना को बढ़ावा देने हेतु भारत की प्रमुख नीति सलाहकार संस्था है।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह नियुक्ति उस संस्था में नेतृत्व की निरंतरता को दर्शाती है जो आर्थिक सुधार, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों में नीति निर्माण एवं प्रभावी शासन के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • CEO की प्रमुख भूमिका: CEO PM गतिशक्ति, राष्ट्रीय पोषण मिशन, निपुण भारत तथा AI और प्रौद्योगिकी आधारित परियोजनाओं जैसे प्रमुख कार्यक्रमों की निगरानी में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

और पढ़ें:  नीति आयोग, सतत विकास, पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय पोषण मिशन, निपुण भारत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

प्रधानमंत्री ने गुजरात में माइक्रोन सेमीकंडक्टर सुविधा का उद्घाटन किया

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में अत्याधुनिक माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) संयंत्र का उद्घाटन किया। यह भारत की सेमीकंडक्टर विनिर्माण यात्रा तथा वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखला में एकीकृत होने के प्रयासों में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्य बिंदु:

  • उद्घाटन: प्रधानमंत्री ने गुजरात के साणंद में माइक्रोन ATMP सुविधा का उद्घाटन किया, जहाँ मेमोरी चिप्स और उन्नत सेमीकंडक्टर घटकों का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो गया है।
  • रणनीतिक निवेश: यह परियोजना लगभग ₹22,516 करोड़ के निवेश का प्रतिनिधित्व करती है, जो भारत में किसी वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनी द्वारा किये गए सबसे बड़े निवेशों में से एक है।
    • यह सुविधा DRAM, NAND एवं SSD जैसे महत्त्वपूर्ण मेमोरी घटकों का निर्माण करती है, जो AI प्रणालियों, डेटा सेंटरों, स्मार्टफोन और डिजिटल अवसंरचना को संचालित करते हैं।
  • भारत का प्रौद्योगिकी अभियान: प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि 21वीं सदी माइक्रोचिप्स द्वारा संचालित होगी, जो भारत के मुख्यतः सॉफ्टवेयर-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर हार्डवेयर विनिर्माण में भी मज़बूत बनने की दिशा को रेखांकित करता है।
  • प्रभाव: साणंद स्थित यह परिसर चिप पैकेजिंग और परीक्षण के लिये समर्पित विश्व के सबसे बड़े एकल-मंजिला क्लीनरूम में से एक है।
  • महत्त्व: यह सुविधा भारत के सेमिकॉन इंडिया मिशन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य एक समग्र सेमीकंडक्टर परितंत्र का निर्माण, निवेश आकर्षित करना और महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देना है।
और पढ़ें:  कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, मेक इन इंडिया पहल


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

प्रधानमंत्री मोदी को इज़राइल के सर्वोच्च संसदीय सम्मान से सम्मानित किया

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इज़राइल की संसद (केनेस्सेट) में उनके ऐतिहासिक संबोधन के बाद ‘स्पीकर ऑफ द केनेस्सेट मेडल’ से सम्मानित किया गया है, जो इज़राइल की संसद का सर्वोच्च सम्मान है।

मुख्य बिंदु:

  • ऐतिहासिक क्षण: प्रधानमंत्री मोदी केनेस्सेट (इज़राइल की संसद) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने, जो एक राजनयिक उपलब्धि और घनिष्ठ द्विपक्षीय जुड़ाव का एक महत्त्वपूर्ण प्रदर्शन है।
    • यह सम्मान रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी, नवाचार, कृषि तथा आर्थिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत-इज़राइल साझेदारी के विस्तार को दर्शाता है।
  • साझा मूल्य: प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-इज़राइल संबंधों को दिशा देने वाले लोकतांत्रिक मूल्यों और पारस्परिक विश्वास के मज़बूत आधार पर प्रकाश डाला तथा इस पुरस्कार को दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता को समर्पित किया।
    • प्रधानमंत्री मोदी उन कुछ वैश्विक अभिकर्त्ताओं में शामिल हैं जिन्हें इज़राइल और फिलिस्तीन दोनों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुए हैं, जो पश्चिम एशिया में भारत की संतुलित एवं सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है।
  • द्विपक्षीय वार्ता: दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA), प्रौद्योगिकी साझेदारी, असैन्य परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष सहयोग और भावी कृषि समाधानों पर सहयोग बढ़ाने के लिये चर्चा हुई, जो भारत-इज़राइल सहयोग हेतु व्यापक रोडमैप का संकेत देता है।
  • महत्त्व: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘स्पीकर ऑफ द केनेस्सेट मेडल’ प्रदान किया जाना भारत-इज़राइल संबंधों में एक ऐतिहासिक अध्याय को दर्शाता है। 
    • यह न केवल कूटनीतिक सद्भावना का उत्सव है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच रणनीतिक सहयोग की दिशा को और मज़बूत करता है, जिससे वैश्विक साझेदारी और साझा हितों को बल मिलता है।
और पढ़ें: मुक्त व्यापार समझौता, भारत-इज़राइल संबंध


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राज्य अमेरिका ने फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) नामक एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। यह अभियान इज़राइल के सहयोग से किया गया और मध्य पूर्व में तनाव के स्तर को गंभीर रूप से बढ़ा दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सैन्य और रणनीतिक ढाँचे को लक्षित करते हुए एक वृहद् पैमाने का सैन्य अभियान घोषित किया, जिसका कथित उद्देश्य ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को निष्क्रिय करना तथा शासन करने वाले तंत्र को कमज़ोर करना था।
    • इन हमलों को इज़राइल के सहयोग से संपन्न किया गया।
    • खबरों के अनुसार, विमानों, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन के माध्यम से ईरान के कई शहरों में मिसाइल ठिकानों, कमांड केंद्रों तथा अन्य रणनीतिक सुविधाओं सहित सैकड़ों लक्ष्यों पर हमला किया गया।
  • उद्देश्य: अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि इस अभियान का लक्ष्य है ईरान की परमाणु हथियार महत्त्वाकांक्षाओं को रोकना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को कमज़ोर करना और ईरान के क्षेत्रीय सैन्य प्रभाव को घटाना है
  • क्षेत्रीय तनाव: ईरान ने प्रतिक्रिया स्वरूप कई मध्य पूर्वी देशों में अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किये, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष के बढ़ने का डर बढ़ गया।
  • वैश्विक कूटनीतिक प्रतिक्रियाएँ: इस संघर्ष ने वैश्विक शक्तियों के बीच गहरी चिंता उत्पन्न की है, जिसके फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधानों की तलाश पर गहन चर्चा शुरू हो गई है।
    • इस सैन्य कार्रवाई की अमेरिका के सांसदों और विश्लेषकों द्वारा आलोचना की गई, जिन्होंने इसकी कानूनी वैधता तथा दीर्घकालिक रणनीति या निकासी योजना की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए।
  • प्रभाव: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से इस क्षेत्र में तेल आपूर्ति मार्ग बाधित हो सकते हैं, विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास, जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
  • महत्त्व: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का आरंभ पश्चिम एशिया में एक महत्त्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटना है, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को बढ़ाया है तथा क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा एवं अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के संबंध में गंभीर चिंताएँ उत्पन्न की हैं।
और पढ़ें: ईरान पर US-इज़राइल का हमला, मध्य पूर्वी देश, होर्मुज़ जलडमरूमध्य, ईरान के परमाणु हथियार

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

फिन एलन ने T20 वर्ल्ड कप में सबसे तेज़ शतक का रिकॉर्ड तोड़ा

चर्चा में क्यों?

न्यूज़ीलैंड राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के फिन एलन ने ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे तेज़ शतक बनाया, यह उपलब्धि उन्होंने वर्ष 2026 के सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ हासिल की।

मुख्य बिंदु:

  • रिकॉर्ड शतक: फिन एलन ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए सेमीफाइनल मैच में केवल 33 गेंदों में 100 रन बनाकर T20 वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे तेज़ शतक का रिकॉर्ड बनाया।
  • पिछला रिकॉर्ड: इससे पहले यह रिकॉर्ड वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के क्रिस गेल के पास था, जिन्होंने वर्ष 2016 T20 वर्ल्ड कप में मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ 47 गेंदों में शतक बनाया था।
  • अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज़ शतक के रिकॉर्ड:
    • T20 अंतर्राष्ट्रीय: साहिल चौहान ने 2024 में सायप्रस राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ 27 गेंदों में सबसे तेज़ T20I शतक बनाया।
    • वन डे इंटरनेशनल (ODI): एबी डीविलियर्स ने वर्ष 2015 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ 31 गेंदों में सबसे तेज़ ODI शतक बनाया।
    • ODI वर्ल्ड कप: ग्लेन मैक्सवेल ने ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप में 40 गेंदों में सबसे तेज़ शतक बनाया।
    • टेस्ट क्रिकेट: ब्रेंडन मैक्कुलम ने वर्ष 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 54 गेंदों में सबसे तेज़  टेस्ट शतक बनाया।
  • महत्त्व: फिन एलन ने 10 वर्ष पुराना रिकॉर्ड तोड़ा और अंतर्राष्ट्रीय T20 क्रिकेट में सबसे तेज़  शतकों में से एक बन गए, जो आधुनिक T20 फॉर्मेट में आक्रामक बल्लेबाजी के विकास को दर्शाता है।
और पढ़ें: ICC


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

विश्व दिवस 2026

चर्चा में क्यों?

विश्व वन्यजीव दिवस प्रतिवर्ष 3 मार्च को मनाया जाता है, ताकि जंगली जीव-जंतु और वनस्पतियों का संरक्षण किया जा सके तथा जैव विविधता की सुरक्षा की आवश्यकता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके।

मुख्य बिंदु:

  • प्रस्तावना: यह दिवस संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा वर्ष 2013 में घोषित किया गया था, जो वर्ष 1973 में अपनाए गए विनिर्देशित प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन (CITES) को चिह्नित करता है।
  • 3 मार्च क्यों?: यह तिथि जंगली जीव-जंतु और पौधों की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संधि (CITES) के हस्ताक्षर को स्मरण करती है, जो यह सुनिश्चित करने के लिये एक वैश्विक समझौता है कि जंगली जानवरों और पौधों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उनकी जीवित रहने की क्षमता को खतरे में न डाले।
  • थीम: विश्व वन्यजीव दिवस 2026 की आधिकारिक थीम है – "औषधीय और सुगंधित पौधे: स्वास्थ्य, धरोहर एवं आजीविका का संरक्षण (Medicinal and Aromatic Plants: Conserving Health, Heritage and Livelihoods)"।
  • उच्च प्राथमिकता वाली अति-संवेदनशील प्रजातियाँ (2026 फोकस): हालाँकि संरक्षण समग्र है, वर्ष 2026 की रिपोर्ट में कुछ विशेष ‘फ्लैगशिप प्रजातियाँ’ को उजागर किया गया है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेत देती हैं:

    • एशियाई हाथी (Elephas maximus): दक्षिण एशिया में मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) और आवासीय विखंडन का सामना कर रहे हैं। इसका फोकस ‘हाथी गलियारों’ पर है।
    • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB): गंभीर रूप से संकटग्रस्त, केवल 150 से भी कम व्यक्ति शेष। संरक्षण प्रयास राजस्थान और गुजरात में ‘पावर लाइन राहत’ पर केंद्रित हैं।
    • स्नो लेपर्ड (Panthera uncia): ‘घोस्ट ऑफ माउंटेन्स’ कहलाने वाला यह प्राणी हिमालयी अल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के खतरे में है। 
    • गिद्ध (Gyps प्रजातियाँ): स्वच्छता के लिये महत्त्वपूर्ण; ध्यान डाइक्लोफेनाक को समाप्त करने और ‘गिद्ध सुरक्षा क्षेत्रों’ का निर्माण करने पर है।
    • डुगोंग (समुद्री गाय): भारत का पहला डुगोंग संरक्षण क्षेत्र पाल्क खाड़ी में स्थित है, जो समुद्री जैव विविधता के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • महत्त्व: 15,000 औषधीय पादप प्रजातियों से समृद्ध भारत ने अपनी 'हरित संपदा' का प्रदर्शन करते हुए इस दिवस का आयोजन किया, जिसमें हिमालय और पश्चिमी घाट जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) के संरक्षण प्रयासों पर विशेष बल दिया गया।
और पढ़ें: CITES, एशियाई हाथी, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, डुगोंग

close
Share Page
images-2
images-2