विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026
प्रिलिम्स के लिये: इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंडिया AI मिशन, पैक्स सिलिका पहल, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर।
मेन्स के लिये: समावेशी विकास और शासन में AI की भूमिका, भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना, ग्लोबल साउथ में AI और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन।
चर्चा में क्यों?
इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 की शुरुआत नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुई, जिसका आयोजन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने किया। यह ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला प्रमुख वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सम्मेलन है, जो समावेशी और विकास-केंद्रित AI में भारत की नेतृत्व भूमिका को प्रदर्शित करता है।
- इस समिट का आयोजन इंडिया AI मिशन के अंतर्गत किया गया है, जो वैश्विक दृष्टिकोण को “AI सुरक्षा” से बदलकर “विकास और प्रभाव के लिये AI” की दिशा में ले जाता है।
सारांश
- इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 भारत को ग्लोबल साउथ में अग्रणी नेतृत्वकारी देश के रूप में स्थापित करता है, जहाँ फोकस AI सुरक्षा से बदलकर विकास और प्रभाव के लिये AI पर केंद्रित है। यह पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस के सिद्धांतों से संचालित है तथा समावेशी एवं ज़िम्मेदार AI शासन को प्रोत्साहित करता है।
- इंडिया-AI मिशन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से यह समिट स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु सहनशीलता, शासन तथा आर्थिक विकास के लिये AI-संचालित समाधान को आगे बढ़ाता है, साथ ही डिजिटल संप्रभुता एवं कार्यबल की तैयारियों को भी मज़बूत करता है।
इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
- विषयवस्तु एवं दार्शनिक आधार: यह समिट भारतीय मूल्यों पर आधारित है, विशेष रूप से “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” (सभी के कल्याण और सभी की खुशी) के आदर्श पर। इसे दो सैद्धांतिक ढाँचों के आधार पर संरचित किया गया है:
- तीन सूत्र (स्तंभ): पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस।
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- सात चक्र (कार्य समूह): स्वास्थ्य, कृषि, सुरक्षित और विश्वसनीय AI, विज्ञान, समावेशन, AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण तथा आर्थिक विकास सहित विशेष विषयों पर केंद्रित।
- तीन सूत्र (स्तंभ): पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस।
- मुख्य संस्थागत ढाँचे: इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 को प्रमुख संस्थागत ढाँचे द्वारा समर्थित किया गया है, जिसमें MeitY, इंडियाAI मिशन, भारतीय सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क (STPI) और डिजिटल इंडिया पहल शामिल हैं।
- ये सभी मिलकर नीति निर्धारण, ईकोसिस्टम समर्थन, नवाचार अवसंरचना और डिजिटल आधार प्रदान करते हैं, ताकि AI को अपनाना राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, समावेशी शासन तथा स्केलेबल कार्यान्वयन के अनुरूप हो सके।
- अपेक्षित परिणाम: AI शासन, नवाचार और समावेशी विकास पर केंद्रित कम-से-कम 15 ठोस परिणाम हासिल किये जाने की उम्मीद है।
- भारत का US-नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में प्रवेश, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक लचीली आपूर्ति शृंखला का निर्माण करना है।
- AI शासन और नैतिकता पर वैश्विक सहयोग, संभवतः बहु-पक्षीय ढाँचों के माध्यम से, बजाय किसी औपचारिक संधि निकाय के।
- नौकरियों और सार्वजनिक सेवा वितरण के लिये AI को सुदृढ़ करना जिसमें रोज़गार सृजन तथा शासन दक्षता में AI की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
- भारत के AI सुरक्षा संस्थान मॉडल का विस्तार, जो AI सुरक्षा और मानकों पर सहयोगात्मक शोध को बढ़ावा देता है।
भारत-AI इंपैक्ट समिट 2026 का महत्त्व
- ग्लोबल साउथ की आवाज़: पहले के वैश्विक AI सम्मेलनों के विपरीत, जो विकसित देशों के लिये जोखिम और नियमन पर केंद्रित थे, भारत का समिट विकासात्मक परिणामों पर ज़ोर देता है। यह प्रदर्शित करता है कि AI कैसे ग्लोबल साउथ की चुनौतियों, जैसे– स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, कृषि उत्पादन तथा भाषा बाधाओं को दूर करने में सहायक हो सकता है।
- प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण: भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल (जैसे– UPI और आधार) को AI के लिये ब्लूप्रिंट के रूप में प्रदर्शित कर रहा है।
- समिट “AI कॉमंस” को बढ़ावा देता है—जिसका उद्देश्य है कि कंप्यूटिंग शक्ति, डेटा सेट और मॉडल केवल कुछ टेक दिग्गजों के पास न रहकर विकासशील देशों के लिये उपलब्ध हों।
- ‘नियमन’ से ‘नवाचार’ की ओर बदलाव: नई दिल्ली समिट में Applied AI पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
- ध्यान उपयोग के मामलों पर है—कैसे AI को वास्तव में ज़मीन पर उतारा जा सकता है ताकि मानव विकास सूचकांक (HDI) के संकेतकों में सुधार हो सके।
- रणनीतिक कूटनीति: इस समिट की मेज़बानी करके भारत स्वयं को विकसित पश्चिम (जिसके पास टेक्नोलॉजी है) और विकासशील दक्षिण (जिसे टेक्नोलॉजी की आवश्यकता है) के बीच एक ब्रिज पावर के रूप में स्थापित करता है, जिससे प्रौद्योगिकी शासन में उसके कूटनीतिक प्रभाव को सुदृढ़ किया जाता है।
नोट: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मशीनों की वह क्षमता है, जो सामान्यतः मानव बुद्धि की आवश्यकता वाले कार्यों को संपन्न करने में सक्षम बनाती है। यह प्रणालियों को अनुभव से सीखने, नई परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित होने और जटिल समस्याओं का स्वतंत्र समाधान खोजने में सक्षम बनाती है।
- AI डेटासेट, एल्गोरिद्म और लार्ज लैंग्वेज मॉडल का उपयोग करके जानकारी का विश्लेषण करती है, पैटर्न की पहचान करती है और प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करती है।
- समय के साथ, ये प्रणालियाँ अपनी कार्यकुशलता में सुधार करती हैं, जिससे वे तर्क कर सकती हैं, निर्णय ले सकती हैं और मानवों के समान संवाद कर सकती हैं।
भारत के लिये AI का क्या महत्त्व है?
फॉर पीपल: ब्रिजिंग सोशल इन्क्विटीज़
- स्वास्थ्य सेवा: AI-संचालित निदान प्रणाली डॉक्टर-रोगी अनुपात (वर्तमान में भारत में लगभग 1:834) को संतुलित करने में सहायता कर रही है।
- उपकरण: Qure.ai (रेडियोलॉजी) और स्वचालित रक्त/मूत्र विश्लेषण जैसे उपकरण ग्रामीण क्लिनिकों में ‘लैब-ग्रेड’ परिणाम प्रदान कर रहे हैं।
- शिक्षा: DIKSHA जैसे प्लेटफॉर्म और अनुकूलनशील लर्निंग सिस्टम विभिन्न गति से सीखने वाले छात्रों के लिये पाठ्यक्रम को व्यक्तिगत बनाते हैं, जबकि AI अनुवाद ग्रामीण शिक्षार्थियों के लिये ‘अंग्रेज़ी बाधा’ (इंग्लिश बैरियर) को समाप्त करता है।
- YUVAi: यूथ फॉर उन्नति एंड विकास विद एआई एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को AI और सामाजिक कौशल के साथ समावेशी ढंग से सक्षम बनाना है।
- भाषायी समावेशन: भाषिणी के माध्यम से AI 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में वास्तविक समय अनुवाद सक्षम करता है, जिससे डिजिटल शासन भाषा द्वारा प्रतिबंधित नहीं रहता।
- सर्वम विज़न स्वदेशी मॉडल है, जिसे भारतीय भाषाओं और उच्च-सटीकता दस्तावेज़ प्रसंस्करण (OCR) के लिये अनुकूलित किया गया है, जो विदेशी स्वामित्व वाले मॉडलों पर निर्भरता को कम करता है।
फॉर द प्लैनेट: प्रिसीज़न एंड सस्टेनेबिलिटी
- Kisan E-Mitra (AI चैटबॉट) किसानों को उर्वरक उपयोग अनुकूलित करने में सहायता करता है, जिससे लागत और पर्यावरणीय बहाव कम होता है।
- MausamGPT, एक AI-संचालित चैटबॉट, वर्तमान में विकासाधीन है, जो किसानों को क्षेत्रीय भाषाओं में व्यक्तिगत और संवादात्मक जलवायु तथा मौसम चेतावनी प्रदान करेगा।
- कृषि: AI मॉडल उपग्रह चित्र और मृदा डेटा का विश्लेषण करके स्थानीय मौसम चेतावनी और कीट-भक्षण पूर्वानुमान प्रदान करते हैं।
- ऊर्जा प्रबंधन: AI ‘क्लाइमेट-स्मार्ट’ विकास के लिये एक उपकरण के रूप में कार्य करता है, जो भारत के 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- AI स्मार्ट ग्रिड के साथ एकीकृत होकर चरम भार का पूर्वानुमान लगाता है और अक्षय ऊर्जा (सौर/पवन) की अस्थिरता को प्रबंधित करता है, जिससे भारत के हरित ऊर्जा संक्रमण की दक्षता बढ़ती है।
- बाढ़ पूर्वानुमान: BrahmaSATARK जैसे सिस्टम AI-संयुक्त भौतिक मॉडलिंग का उपयोग करके ब्रह्मपुत्र और गंगा बेसिन के लिये प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान प्रदान करते हैं।
फॉर प्रोग्रेस: इकोनॉमिक एंड गवर्नेंस ट्रांसफॉर्मेशन
- शासन: अनुमानित है कि AI उत्पादकता बढ़ोतरी के माध्यम से वर्ष 2030 तक भारत की GDP में 500-600 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देगा।
- भारत अपने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Aadhaar, UPI, DigiLocker) में AI को एकीकृत कर रहा है।
- उदाहरण के लिये, MuleHunter.AI बैंकिंग में ‘मूल खाते’ (Mule Accounts) की पहचान करके धोखाधड़ी को रोकता है और जटिल न्यायालयीन निर्णयों का अनुवाद स्वचालित रूप से करता है, जिससे कानूनी पहुँच में सुधार होता है।
- डिजिटल संप्रभुता: IndiaAI मिशन के माध्यम से भारत अपनी स्वयं की कंप्यूट क्षमता (38,000+ GPU) और स्वदेशी मॉडल, जैसे– भारतजेन का निर्माण कर रहा है, यह विश्व की पहली सरकारी वित्तपोषित मल्टीमॉडल LLM पहल है, जो AI-संचालित सार्वजनिक सेवाओं के लिये है।
- इससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत का डेटा उसकी सीमाओं के भीतर रहे और AI मॉडल सांस्कृतिक रूप से प्रतिनिधित्वशील हों।
भारत में वर्तमान AI ईकोसिस्टम
- तकनीक और AI ईकोसिस्टम में 6 मिलियन से अधिक लोग कार्यरत हैं। अनुमान है कि भारत में AI दक्ष कार्यबल वर्ष 2027 तक 12.5 लाख से अधिक हो जाएगा, जो डेटा साइंस, AI इंजीनियरिंग और एनालिटिक्स के क्षेत्र में मज़बूत मांग को दर्शाता है।
- MeitY के फ्यूचर स्किल्स प्राइम कार्यक्रम में 18.56 लाख से अधिक पंजीकरण इस दिशा में सहयोग को रेखांकित करते हैं और 3.37 लाख से अधिक लोगों द्वारा इस कोर्स को पूर्ण कर लिया गया है, जिससे भारत की AI-दक्ष कार्यशक्ति सुदृढ़ हुई है।
- वर्ष 2025 तक भारत में 1,800+ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) हैं, जिनमें से 500 से अधिक AI पर केंद्रित हैं।
- देश में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप्स हैं और पिछले वर्ष लॉन्च हुए नए स्टार्टअप्स में लगभग 89% ने अपने उत्पादों या सेवाओं में AI का उपयोग किया।
- NASSCOM AI Adoption Index में भारत का स्कोर 2.45/4 है, जो दर्शाता है कि 87% उद्यम सक्रिय रूप से AI समाधानों का उपयोग कर रहे हैं।
- AI को अपनाने में अग्रणी क्षेत्र हैं: औद्योगिक और ऑटोमोटिव, उपभोक्ता वस्तुएँ और रिटेल, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ और बीमा तथा स्वास्थ्य सेवा। ये क्षेत्र मिलकर AI के कुल मूल्य का लगभग 60% योगदान करते हैं।
- बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 26% कंपनियों ने बड़े पैमाने पर AI परिपक्वता प्राप्त कर ली है।
इंडिया AI मिशन क्या है?
- परिचय: मार्च 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10,371 करोड़ रुपये के बजट के साथ स्वीकृत इंडिया AI मिशन, "मेकिंग AI इन इंडिया एंड मेकिंग AI वर्क फॉर इंडिया" के विज़न के माध्यम से भारत को AI में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से एक परिवर्तनकारी पहल है।
- यह मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन एक स्वतंत्र व्यवसाय प्रभाग, इंडिया AI, द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
- इंडिया AI मिशन के सात स्तंभ:
- इंडिया AI कंप्यूट: उच्च-स्तरीय GPU तक किफायती पहुँच प्रदान करता है, इसके अंतर्गत 38,000 से अधिक GPU शामिल किये गए हैं और पात्र उपयोगकर्त्ता इंडिया AI मिशन के तहत 40% तक कम लागत पर AI कंप्यूट प्राप्त कर सकते हैं।
- इंडिया AI अनुप्रयोग के विकास: हैकथॉन और स्वीकृत अनुप्रयोगों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शासन, जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत-विशिष्ट चुनौतियों हेतु AI के समाधानों को बढ़ावा देता है।
- AI कोश (डेटासेट प्लेटफॉर्म): डेटासेट और AI मॉडलों का एक राष्ट्रीय भंडार प्रदान करता है, जो AI के विकास में तेज़ी लाने हेतु 20 क्षेत्रों में 3,000+ डेटासेट और 243 मॉडल होस्ट करता है।
- इंडिया AI आधारभूत मॉडल: भारतीय भाषाओं और डेटा का उपयोग करते हुए स्वदेशी बहु-विधा AI मॉडल के विकास का समर्थन करता है, जिसके प्रथम चरण में सर्वम AI और ज्ञानी AI जैसे स्टार्टअप का चयन किया गया है।
- इंडिया AI फ्यूचरस्किल्स: फेलोशिप, शैक्षणिक कार्यक्रमों और टियर 2 एवं टियर 3 शहरों में AI लैब्स के माध्यम से AI दक्ष कार्यबल का विस्तार होता है।
- इंडिया AI स्टार्टअप वित्तपोषण: AI स्टार्टअप को वित्तपोषण और वैश्विक विस्तार के लिये सहायता प्रदान करता है, जिसमें यूरोप में बाज़ार पहुँच पहल शामिल हैं।
- सुरक्षित और विश्वसनीय AI: यह 'इंडिया AI सुरक्षा संस्थान' और पूर्वाग्रह कम करने, गोपनीयता, स्पष्टीकरण तथा शासन परीक्षण से संबंधित परियोजनाओं के माध्यम से ज़िम्मेदार AI अपनाने को सुनिश्चित करता है।
निष्कर्ष
इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 अस्तित्व संबंधी जोखिमों के बजाय विकासात्मक परिणामों को प्राथमिकता देकर वैश्विक प्रौद्योगिकी शासन को परिभाषित करती है, जो ग्लोबल साउथ की ओर से इस प्रकार का पहला नेतृत्व है। अंततः यह भारत को एक "सेतु शक्ति" के रूप में स्थापित करती है जो AI नवाचार को 'पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस' के मानव-केंद्रित सिद्धांतों के साथ जोड़ता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. "इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 'AI सुरक्षा' से 'AI फॉर डेवलपमेंट' की ओर एक बदलाव का प्रतीक है।" ग्लोबल साउथ के लिये इसके निहितार्थों की चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 का मूल उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य विकास, समावेशी वृद्धि और उत्तरदायी शासन के लिये AI को बढ़ावा देना है, जो जोखिम-केंद्रित विनियमन से हटकर व्यावहारिक कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करता है।
2. सम्मेलन के "तीन सूत्र" क्या हैं?
पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस — AI के माध्यम से सामाजिक सशक्तीकरण, स्थिरता और आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित।
3. इंडिया AI मिशन क्या है?
स्वदेशी AI क्षमताओं के निर्माण हेतु 10,371 करोड़ रुपए के लागत वाली पहल (2024), जो कंप्यूट एक्सेस, डेटासेट, स्वदेशी मॉडल, कौशल विकास और उत्तरदायी AI ढाँचों के माध्यम से कार्य करती है।
4. AI भारत में समावेशी विकास का समर्थन कैसे करता है?
AI डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा निदान, व्यक्तिगत शिक्षा, भाषा अनुवाद और वित्तीय समावेशन में सुधार करता है।
5. वैश्विक दक्षिण के लिये भारत का AI दृष्टिकोण क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह किफायती पहुँच, AI कॉमंस और विकासात्मक उपयोग के मामलों पर बल देता है, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिये एक विस्तार योग्य मॉडल प्रदान करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
Q. विकास की वर्तमान स्थिति में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है?
- औद्योगिक इकाइयों में विद्युत् की खपत कम करना
- सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना
- रोगों का निदान
- टेक्स्ट से स्पीच (Text-to-Speech) में परिवर्तन
- विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1,2, 3 और 5
(b) केवल 1,3 और 4
(c) केवल 2,4 और 5
(d) 1,2,3,4 और 5
उत्तर: (b)
प्रश्न. 'वानाक्राई, पेट्या और इटरनलब्लू', जो हाल ही में समाचारों में उल्लिखित थे, निम्नलिखित में से किससे संबंधित हैं? (2018)
(a) एक्सोप्लैनेट्स
(b) क्रिप्टोकरेंसी
(c) साइबर आक्रमण
(d) लघु उपग्रह
उत्तर: (c)
मेन्स:
प्रश्न. कृत्रिम बुद्धि (एआई) की अवधारणा का परिचय दीजिये। एआई क्लिनिकल निदान में कैसे मदद करता है? क्या आप स्वास्थ्य सेवा में एआई के उपयोग में व्यक्ति की निजता को कोई खतरा महसूस करते हैं? (2023)
प्रश्न. भारत के प्रमुख शहरों में आईटी उद्योगों के विकास से उत्पन्न होने वाले मुख्य सामाजिक-आर्थिक प्रभाव क्या हैं ? (2022)
प्रश्न. “चौथी औद्योगिक क्रांति (डिजिटल क्रांति) के प्रादुर्भाव ने ई-गवर्नेंस को सरकार अविभाज्य अंग बनाने में पहल की है।” विवेचना कीजिये। (2020)
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत-बांग्लादेश संबंध
प्रिलिम्स के लिये: 1971 का मुक्ति युद्ध, अगरतला-अखौरा रेलवे लिंक, भारत-बांग्लादेश मित्रता पाइपलाइन, मैत्री सेतु
मेन्स के लिये: भारत-बांग्लादेश संबंध, प्रमुख मुद्दे, इन मुद्दों के समाधान हेतु उपाय।
चर्चा में क्यों?
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जिसका नेतृत्व तारिक रहमान कर रहे हैं, ने फरवरी 2026 में हुए आम चुनावों में भारी जीत हासिल की है। यह बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का द्योतक है और अगस्त 2024 में शेख हसीना शासन (अवामी लीग) के हटाए जाने के बाद की अंतरिम अवधि
को समाप्त करता है।
- भारत के प्रधानमंत्री ने तारिक रहमान को बधाई दी, जो यह संकेत है कि भारत पुराने मतभेदों के बावजूद नई सरकार के साथ संवाद करने के लिये तैयार है।
सारांश
- बांग्लादेश में वर्ष 2026 में हुए आम चुनावों में BNP की जीत बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाती है, इससे भारत के लिये सुरक्षा संबंधी चिंताएँ जैसे- विद्रोहियों का खतरा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, चीन का बढ़ता प्रभाव और भारत-विरोधी रुझान आदि और बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी हेतु भी एक चुनौती प्रस्तुत करती है।
- चुनौतियों के बावजूद, गहरी आर्थिक, ऊर्जा और कनेक्टिविटी परस्पर निर्भरता के कारण संवाद आवश्यक है। इसके लिये भारत को व्यावहारिक कूटनीति अपनानी होगी, जनता-से-जनता संबंध मज़बूत करने होंगे तथा द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के लिये सुरक्षा संबंधी स्पष्ट सीमाएँ निर्धारित करनी होंगी।
BNP का शासन और भारत-बांग्लादेश संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है?
- BNP: इसकी स्थापना जनरल ज़ियाउर रहमान ने की थी, जिन्होंने बांग्लादेश को उसके प्रारंभिक धर्मनिरपेक्ष स्वरूप से हटाकर अपेक्षाकृत अधिक इस्लामी पहचान की ओर उन्मुख किया तथा पाकिस्तान के साथ संबंधों के सामान्यीकरण में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
- वर्ष 2001-2006 का दौर (तनावपूर्ण संबंध): पिछली BNP-जमात गठबंधन सरकार को अक्सर द्विपक्षीय संबंधों में “सबसे निचले स्तर” के रूप में देखा जाता है।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: भारत ने इस शासन पर आरोप लगाया कि वह पूर्वोत्तर विद्रोही समूहों [असम का यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (ULFA), बोडोलैंड का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (NDFB)] को शरण दे रहा था।
- सांप्रदायिकता और आतंकवाद: बढ़ती कट्टरता और सीमा-पार आतंकवादी खतरे।
- चीन की भूमिका: रक्षा और अवसंरचना विकास के क्षेत्र में चीन की ओर स्पष्ट झुकाव।
- ‘गोल्डन चैप्टर’ (2009-2024): शेख हसीना के कार्यकाल में द्विपक्षीय संबंध मज़बूत हुए, जिसमें भूमि सीमा समझौते (2015) का निष्पादन, संपर्क परियोजनाओं का विकास और भारत-विरोधी समूहों के विरुद्ध कड़े कदम शामिल थे।
- भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय व्यापार वित्तीय वर्ष 2023–24 में 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जिससे बांग्लादेश उपमहाद्वीप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया।
- हसीना के प्रशासन के दौरान दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) समझौते के तहत अधिकांश शुल्क-लाइनों पर शुल्क-मुक्त प्रवेश प्रदान किया गया।
- अंतरिम अवधि (2024-2026): छात्र-आंदोलन और हसीना के भारत आगमन के पश्चात, बांग्लादेश में भारत-विरोधी रुझान बढ़ गए, क्योंकि यह धारणा बन गई कि भारत ने बिना शर्त एक “तानाशाही” शासन का समर्थन किया था।
भारत-बांग्लादेश संबंध
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत–बांग्लादेश संबंध 1971 मुक्ति युद्ध के दौरान मज़बूत आधार पर स्थापित हुए, जब भारत ने निर्णायक सैन्य और कूटनीतिक समर्थन प्रदान किया, जिससे विश्वास तथा साझा धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बढ़ावा मिला।
- इस साझेदारी को वर्ष 1972 की मित्रता संधि और 1974 के भूमि सीमा समझौते के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया, जिसने द्विपक्षीय संबंधों के लिये प्रारंभिक कानूनी ढाँचा तैयार किया।
- व्यापार: वित्तीय वर्ष 2025 में कुल व्यापार 13.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें भारत का निर्यात 11.46 बिलियन डॉलर और आयात 2.05 बिलियन डॉलर था।
- भारत मुख्यतः ईंधन, पेट्रोलियम उत्पाद और कपास सामग्री का निर्यात करता है, जबकि परिधान, जूते और वस्त्र उत्पाद का आयात करता है, जो मज़बूत आर्थिक संबंधो को दर्शाता है।
- विद्युत एवं ऊर्जा सहयोग: बांग्लादेश भारत से 1160 मेगावाट बिजली आयात करता है। इस हेतु भारतीय सहयोग से निर्मित मैत्री सुपर थर्मल पॉवर प्लांट (1320 मेगावाट) एक प्रमुख परियोजना है।
- हाई-स्पीड डीज़ल आपूर्ति हेतु भारत–बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन स्थापित की गई है; तेल अन्वेषण और आपूर्ति में भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) की भागीदारी महत्त्वपूर्ण है।
- विकास में साझेदारी: भारत ने सड़कों, रेलमार्गों, बंदरगाहों जैसी अवसंरचना परियोजनाओं के लिये लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर के तीन लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) प्रदान किये हैं, साथ ही रक्षा क्षेत्र के लिये विशेष रूप से 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की 'डिफेंस लाइन ऑफ क्रेडिट' भी प्रदान की है।
- अखौरा–अगरतला रेल लिंक तथा ड्रेजिंग जैसी विशिष्ट परियोजनाओं के लिये अनुदान सहायता भी प्रदान की गई है।
- कनेक्टिविटी एवं परिवहन: अगरतला–अखौरा जैसी सीमापार रेल कनेक्टिविटी परियोजनाएँ, भारतीय माल के लिये चिटगाँव और मोंगला बंदरगाहों का उपयोग, हल्दीबाड़ी–चिलाहाटी और पेट्रापोल–बेनापोल जैसे पुराने रेल मार्गों का पुनरुद्धार, अंतर्देशीय जल पारगमन एवं व्यापार प्रोटोकॉल के अंतर्गत विस्तारित अंतर्देशीय जलमार्ग व्यापार तथा फेनी नदी पर निर्मित मैत्री सेतु (जो भारत के त्रिपुरा राज्य के सबरूम को बांग्लादेश के रामगढ़ से जोड़ता है) — इन सभी ने मिलकर संपर्क और परिवहन को सुदृढ़ किया है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में उभरती चुनौतियाँ क्या हैं?
- "हसीना" कारक और प्रत्यर्पण: शेख हसीना वर्ष 2024 से भारत की शरण में हैं।
- नवीन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार, अपने सामाजिक-राजनीतिक आधार तथा गठबंधन सहयोगियों के दबाव में, वर्ष 2024 के विद्रोह के दौरान कथित रूप से किये गये “मानवता के विरुद्ध अपराधों” के अभियोजन हेतु उनके प्रत्यर्पण की मांग कर सकती है।
- सुरक्षा और उग्रवाद: भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों में यह आशंका है कि यदि नवीन शासन पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी समूहों पर निगरानी एवं दमनात्मक सतर्कता शिथिल करता है अथवा पाकिस्तान को अपना सामरिक प्रभाव विस्तार करने की अनुमति देता है, तो तथाकथित "चिकन नेक" कॉरिडोर (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) पुनः अत्यंत संवेदनशील एवं रणनीतिक दृष्टि से अस्थिर क्षेत्र के रूप में उभर सकता है।
- एक शत्रुतापूर्ण शासन (BNP-जमात) की वापसी पूर्वोत्तर उग्रवादियों (जैसे- ULFA आदि) के लिये "सुरक्षित पनाहगाह" के भय को पुनर्जीवित करती है।
- सीमा नियंत्रण: उल्लेखनीय है कि जमात-ए-इस्लामी ने पश्चिम बंगाल, असम और सिलिगुड़ी कॉरिडोर के सीमावर्ती ज़िलों में महत्त्वपूर्ण सीटों पर जीत हासिल की है। यह घुसपैठ और तस्करी के संबंध में एक सीधा सामरिक सुरक्षा खतरा उत्पन्न करता है।
- इस्लामी राजनीति का उदय: ऐतिहासिक रूप से, बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन (2001, 2024) धार्मिक अल्पसंख्यकों (जिन्हें अवामी लीग के वोट बैंक के रूप में देखा जाता है) के खिलाफ व्यापक हिंसा का कारण बना है।
- बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदुओं) की सुरक्षा और कट्टरपंथ के संभावित उदय को लेकर चिंता व्यक्त की गई है, जिसका प्रभाव सीमावर्ती भारतीय राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम) पर पड़ सकता है।
- वर्ष 1971 की तरह शरणार्थियों की आमद असम और पश्चिम बंगाल की संवेदनशील जनसांख्यिकी को अस्थिर कर सकती है।
- भू-राजनीतिक संतुलन: BNP ने ऐतिहासिक रूप से भारत के प्रभाव को संतुलित करने के लिये "लुक ईस्ट" (चीन की ओर) नीति और इस्लामी दुनिया (पाकिस्तान सहित) के साथ घनिष्ठ संबंधों का समर्थन किया है।
- बीजिंग इस बदलाव का लाभ उठाकर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा सकता है।
- "इंडिया आउट" की भावना: विश्वविद्यालयों और छात्र आंदोलनों में भारत विरोधी बयानबाजी अभी भी प्रबल है।
- भले ही BNP के घोषणापत्र में इसे स्पष्ट रूप से न कहा गया हो, लेकिन यह भावना नई सरकार की भारत के प्रति "मैत्रीपूर्ण" दिखने की क्षमता को सीमित करती है।
भारत और बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्स्थापित करने हेतु कौन-से कदम उठाए जा सकते हैं?
- अवामी लीग से धारणा-निर्वियोजन: भारत को स्वयं को केवल अवामी लीग-समर्थक सहयोगी के रूप में देखे जाने की धारणा से निर्णायक रूप से परे स्थापित करना होगा, ताकि उसकी बांग्लादेश नीति को किसी एक राजनीतिक दल से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई न माना जाए।
- व्यापक राजनीतिक व सामाजिक संवाद: जनसद्भावना की पुनर्स्थापना हेतु BNP तथा बांग्लादेश के व्यापक नागरिक समाज के साथ सक्रिय संवाद आवश्यक है।
- भारत को शासन-से-शासन आधारित समझौतों से आगे बढ़कर जन-से-जन संपर्क को प्राथमिकता देनी चाहिये। चिकित्सा पर्यटन एवं शिक्षा हेतु वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाना सॉफ्ट पावर के प्रभावी सेतु के रूप में कार्य कर सकता है।
- व्यावहारिक सहभागिता: BNP के साथ संवाद स्थापित करना एक सामरिक आवश्यकता है। नई सरकार को अंतर्राष्ट्रीय वैधता प्रदान करने के लिये उच्च-स्तरीय यात्राएँ (संभवतः प्रधानमंत्री स्तर पर) की जा सकती है, किंतु यह ठोस सुरक्षा आश्वासनों के बदले ही होनी चाहिये।
- स्थिरता हेतु आर्थिक पारस्परिकता: भारत अपने व्यापार अधिशेष का उपयोग सहयोगात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करने हेतु कर सकता है, साथ ही भारत को बांग्लादेशी वस्तुओं के लिये न्यायसंगत बाज़ार पहुँच सुनिश्चित करनी चाहिये।
- कपास सूत, विद्युत तथा आवश्यक वस्तुओं की भारत द्वारा निरंतर आपूर्ति बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर सकती है तथा पारस्परिक निर्भरता को और सुदृढ़ बना सकती है।
- CEPA एवं LDC श्रेणी से उन्नयन: वर्ष 2026 में अल्प विकसित देश (LDC) के दर्जे से बाहर होने के बाद बांग्लादेश को पश्चिमी बाज़ारों में मिलने वाली शुल्क-मुक्त पहुँच समाप्त हो जाएगी।
- भारत, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को शीघ्रता से अग्रसर करते हुए, राजनीतिक स्थिरता की पूर्वशर्त के साथ अपने विशाल घरेलू बाज़ार में शुल्क-मुक्त पहुँच प्रदान कर सकता है, जो एक प्रभावी आर्थिक सुरक्षा-कवच के रूप में कार्य करेगा।
- स्पष्ट ‘रेड लाइंस’ की स्थापना: भारत को नई सरकार के समक्ष अपने अपरिवर्तनीय हितों को स्पष्ट और निर्विवाद रूप से व्यक्त करना चाहिये:
- बांग्लादेश की भूमि पर भारतीय उग्रवादी तत्त्वों के लिये शून्य सहिष्णुता।
- सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिये अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अनिवार्य शर्त हो।
- मोंगला बंदरगाह और पायरा बंदरगाह पर किसी भी चीनी परियोजना को ऐसे द्वैध-उपयोग सैन्य ढाँचे (जैसे पनडुब्बी ठहराव सुविधा) में विकसित न होने दिया जाए, जो पूर्वी नौसैनिक कमान की सुरक्षा के लिये चुनौती बनें।
- घरेलू समन्वय: केंद्र को सीमा से सटे राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम) के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित कर एकीकृत राजनीतिक सहमति विकसित करनी चाहिये।
- सीमा सुरक्षा का राजनीतिकरण समाप्त कर उसे राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखा और संचालित किया जाना चाहिये।
निष्कर्ष
BNP की वर्ष 2026 की विजय भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के लिये एक संरचनात्मक परीक्षा है और यह सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्रबल करती है। भारत को अपने सुरक्षा हितों की रक्षा हेतु आर्थिक एवं भौगोलिक लाभों का उपयोग करते हुए एक व्यावहारिक एवं हित-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिये।
एक स्थिर, तटस्थ और समृद्ध बांग्लादेश भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति तथा उसके पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के लिये बांग्लादेश किस प्रकार महत्त्वपूर्ण है?
बांग्लादेश अपनी भौगोलिक स्थिति, पूर्वोत्तर भारत से संपर्क (कनेक्टिविटी) तथा क्षेत्रीय स्थिरता एवं ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में अपनी भूमिका के कारण भारत के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
2. BNP शासन के तहत भारत की प्रमुख सुरक्षा चिंताएँ क्या हैं?
चिंताओं में विद्रोही सुरक्षित ठिकाने, आईएसआई का प्रभाव, अल्पसंख्यकों की असुरक्षा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर को खतरे शामिल हैं।
3. भारत-बांग्लादेश व्यापार कितना महत्त्वपूर्ण है?
लगभग 13-14 अरब अमेरिकी डॉलर के वार्षिक व्यापार के साथ बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो सुदृढ़ आर्थिक पारस्परिक निर्भरता को दर्शाता है।
4. द्विपक्षीय संबंधों में ऊर्जा सहयोग की क्या भूमिका है?
भारत बांग्लादेश को विद्युत निर्यात करता है, फ्रेंडशिप पाइपलाइन के माध्यम से डीज़ल की आपूर्ति करता है तथा मैत्री तापीय विद्युत परियोजना जैसे उपक्रमों में सहयोग देकर पारस्परिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
5. वर्ष 2026 में बांग्लादेश के LDC श्रेणी से उन्नयन का संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
पश्चिमी बाज़ारों में शुल्क-मुक्त पहुँच समाप्त होने से बांग्लादेश भारत के साथ CEPA की ओर अग्रसर हो सकता है, जिससे आर्थिक एकीकरण और अधिक गहरा होगा।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स:
प्रश्न. तीस्ता नदी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2017)
- तीस्ता नदी का उद्गम वही है जो ब्रह्मपुत्र का है, लेकिन यह सिक्किम से होकर बहती है।
- रंगीत नदी की उत्पत्ति सिक्किम में होती है और यह तीस्ता नदी की एक सहायक नदी है।
- तीस्ता नदी भारत एवं बांग्लादेश की सीमा पर बंगाल की खाड़ी में जा मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. आतंरिक सुरक्षा खतरों तथा नियंत्रण रेखा सहित म्याँमार, बांग्लादेश और पाकिस्तान सीमाओं पर सीमा-पार अपराधों का विश्लेषण कीजिये। विभिन्न सुरक्षा बलों द्वारा इस संदर्भ में निभाई गई भूमिका की विवेचना कीजिये। (2020)
जैव विविधता और पर्यावरण
NGT ने ग्रेट निकोबार परियोजना को स्वीकृति प्रदान की
प्रिलिम्स के लिये: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), ग्रेट निकोबार परियोजना, प्रवाल भित्तियाँ, नीति आयोग, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST), विशेष आर्थिक क्षेत्र, संयुक्त राष्ट्र सामुद्री कानून अभिसमय, 1982 (UNCLOS), दस डिग्री चैनल, उष्णकटिबंधीय वर्षावन, वन अधिकार अधिनियम, 2006 ।
मेन्स के लिये: ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना का अवलोकन, इसका रणनीतिक महत्त्व, प्रमुख चुनौतियाँ और सतत कार्यान्वयन का मार्ग।
चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने ₹81,000 करोड़ की ग्रेट निकोबार परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। अधिकरण ने कहा कि उसे इस मामले में हस्तक्षेप करने का "कोई ठोस आधार" नहीं मिला, साथ ही पर्यावरण की रक्षा के लिये कुछ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं।
- NGT ने "परियोजना के रणनीतिक महत्त्व" को स्वीकार किया और उल्लेख किया कि पारिस्थितिक प्रभावों को कम करने के लिये पर्यावरणीय स्वीकृति में "पर्याप्त सुरक्षा उपाय" शामिल किये गए हैं।
सारांश
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण ग्रेट निकोबार परियोजना को, तटरेखाओं एवं प्रवाल भित्तियों और संकटापन्न प्रजातियों की सुरक्षा के लिये कड़ी शर्तें लागू करते हुए, स्वीकृति प्रदान की है।
- वनों की कटाई, जनजातीय विस्थापन और भूकंपीय संवेदनशीलता संबंधी चिंताएँ जारी हैं।
- सफल कार्यान्वयन के लिये सुरक्षा उपायों का कठोर प्रवर्तन और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत शोंपेन एवं निकोबारी जैसे सुभेद्य जनजातीय समूहों (PVTG) के साथ वास्तविक परामर्श आवश्यक है।
NGT द्वारा पर्यावरण के लिये क्या सुरक्षा उपाय लागू किये गए हैं?
- अपरदन को रोकना: राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने निर्देश दिया कि निर्माण (जिसमें अग्र तट का विकास शामिल है) से परियोजना क्षेत्र के निकट या किसी भी द्वीप की तटरेखा पर अपरदन या प्रतिकूल तटरेखा निर्मित नहीं होनी चाहिये।
- रेतीले समुद्र तटों का संरक्षण: इसके लिये विशेष रूप से आदेश दिया कि "रेतीले समुद्र तटों का कोई नुकसान नहीं होगा", इन तटों को कछुओं और पक्षियों के लिये महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल और द्वीपों के लिये प्राकृतिक सुरक्षा के रूप में मान्यता दी गई है।
- प्रवाल भित्तियों का संरक्षण: इसने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को तटीय क्षेत्र के साथ प्रवाल भित्तियों की रक्षा के लिये "सभी उपाय" करने और "सिद्ध वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से प्रवाल पुनर्जनन" सुनिश्चित करने का आदेश दिया। किसी भी मौज़ूदा बिखरे हुए प्रवाल को भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के सुझावों के अनुसार "स्थानांतरित" किया जाना चाहिये।
- संकटापन्न प्रजातियों का संरक्षण: पर्यावरणीय स्वीकृति में लेदरबैक सी टर्टल, निकोबार मेगापोड, खारे जल के मगरमच्छ, रोबेर क्रैब, निकोबार मकाक और ग्रेट निकोबार द्वीप की अन्य स्थानिक पक्षी प्रजातियों के संरक्षण के लिये विशिष्ट शर्तें शामिल हैं।
- शर्तों की बाध्यकारी प्रकृति: राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने यह निर्धारित किया कि सरकार पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों से बाध्य है और उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि परियोजना कार्यान्वयन के किसी भी चरण में इनका उल्लंघन न हो।
ग्रेट निकोबार परियोजना क्या है?
- परिचय: ग्रेट निकोबार द्वीप (GNI) परियोजना वर्ष 2021 में प्रारंभ की गई थी। इसकी संकल्पना नीति आयोग द्वारा की गई थी। यह एक व्यापक अवसंरचनात्मक पहल है, इसका उद्देश्य अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के दक्षिणतम द्वीप को एक रणनीतिक एवं आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। यह भारत के मैरीटाइम विज़न 2030 तथा अमृत काल विज़न 2047 के अनुरूप है।
- परियोजना का अवलोकन: इस परियोजना के अंतर्गत गैलेथिया खाड़ी, पेम्माया खाड़ी तथा नंजप्पा खाड़ी में विकास कार्य प्रस्तावित हैं। ये द्वीप कोलंबो (श्रीलंका), पोर्ट क्लांग (मलेशिया) तथा सिंगापुर से लगभग समान दूरी पर स्थित हैं, जिससे भारत क्षेत्रीय समुद्री व्यापार के केंद्र में स्थापित हो सकता है।
- परियोजना के प्रमुख घटक:
- अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT): इसका उद्देश्य ग्रेट निकोबार को क्षेत्रीय एवं वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट केंद्र के रूप में स्थापित करना है, ताकि भारत माल-परिवहन में सक्रिय भागीदारी कर सके।
- ग्रीनफील्ड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: सिविलियन कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देने तथा डुअल-यूज़ रक्षा क्षमता प्रदान करने के लिये।
- ग्रीनफील्ड टाउनशिप: अनुमानित जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करने के लिये।
- गैस और सौर आधारित पावर प्लांट: नई अवसंरचना की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये।
- जनजातीय सुरक्षा उपाय: विकास कार्य के लिये जनजातीय कल्याण संस्थाओं [जैसे– अंडमान आदिम जनजाति विकास समिति (AAJVS), जनजातीय कार्य मंत्रालय] के साथ अनिवार्य परामर्श आवश्यक है, जैसा कि जारवा (2004) और शॉम्पेन (2015) नीतियों में निर्दिष्ट है। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 338A(9) के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के साथ परामर्श यह सुनिश्चित करता है कि जनजातीय हितों की रक्षा की जाएगी।
- पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय: परियोजना में सुरक्षित वन्यजीव आवाजाही के लिये 8 वन्यजीव कॉरिडोर शामिल हैं। कटे हुए पेड़ों के लिये क्षतिपूर्ति वनीकरण हरियाणा में किया जाएगा, क्योंकि इन द्वीपों में पहले ही 75% से अधिक वन क्षेत्र मौजूद है।
ग्रेट निकोबार परियोजना का रणनीतिक महत्त्व क्या है?
- संकीर्ण जलमार्ग निकटता: इस द्वीप का स्थान मलक्का, सुंदर और लोंबोक जलसंधियों के पास है, ये महत्त्वपूर्ण जलमार्ग हैं जो भारतीय महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ते हैं। इससे भारत को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिये आवश्यक समुद्री मार्गों की निगरानी करने की सुविधा मिलती है।
- यह भारत को साबांग (इंडोनेशिया) और प्रस्तावित क्रा नहर (थाईलैंड) के निकट होने की सुविधा भी देता है, जिससे यह इंडो-प्रशांत समुद्री मार्गों में भारत की केंद्रीय भूमिका को उजागर करता है।
- मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस: यह भारत की क्षमता को मज़बूत करता है कि वह नौसैनिक गतिविधियों पर निगरानी रख सके, विशेषकर चीन की भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती उपस्थिति और कोको द्वीपों (म्याँमार) पर स्थापित हो रही सैन्य सुविधा, जो भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से केवल 55 किमी. उत्तर में है, पर ध्यान केंद्रित कर सके।
- रक्षा की अग्रिम पंक्ति: अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भारत की समुद्री रक्षा की अग्रिम पंक्ति के रूप में कार्य करता है और म्याँमार, थाईलैंड, इंडोनेशिया एवं बांग्लादेश के साथ समुद्री सीमाएँ साझा करता है। इससे भारत को संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन, 1982 (UNCLOS) के तहत एक विशाल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और महाद्वीपीय शेल्फ का अधिकार प्राप्त होता है।
- सैन्य निवारक क्षमता: यह परियोजना अतिरिक्त सैन्य बलों, बड़े युद्धपोतों, विमानों, मिसाइल बैटरी और सैनिकों की तैनाती को सक्षम बनाती है, जिससे सघन निगरानी संभव होती है और दृढ़ सैन्य निवारक क्षमता का निर्माण होता है।
- आर्थिक महत्त्व: ICTT का उद्देश्य भारत की सिंगापुर और कोलंबो जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट पोर्ट्स पर निर्भरता को कम करना है तथा भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में सम्मिलित करना है।
ग्रेट निकोबार द्वीप
- अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह: इसमें 836 द्वीप शामिल हैं, जो भौगोलिक रूप से अंडमान समूह (उत्तर में) और निकोबार समूह (दक्षिण में) में विभाजित हैं। इन दोनों समूहों को टेन डिग्री चैनल (~150 किमी. चौड़ा) अलग करता है।
- ग्रेट निकोबार द्वीप: यह निकोबार समूह का सबसे बड़ा द्वीप है और अधिकांशतः उष्णकटिबंधीय वर्षावन से आच्छादित है। यहाँ स्थित इंदिरा प्वाइंट भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु है, जो सुमात्रा, इंडोनेशिया से केवल 90 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है।
- पारिस्थितिक महत्त्व: इस द्वीप में दो राष्ट्रीय उद्यान हैं- कैंपबेल बे नेशनल पार्क और गलाथिया बे नेशनल पार्क। इसके अलावा इसमें ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिज़र्व भी है, जिसे वर्ष 2013 में UNESCO के मानव और बायोस्फीयर कार्यक्रम में शामिल किया गया।
- जनसांख्यिक प्रोफाइल: द्वीप पर स्थानीय जनजातीय समुदायों की छोटी जनसंख्या रहती है, जिनमें शॉम्पेन और निकोबारी शामिल हैं, साथ ही कुछ गैर-आदिवासी बसने वाले भी हैं। ऐतिहासिक रूप से क्षेत्र से जुड़े अन्य आदिवासी समूहों में ओंगे और अंडमानीज़ शामिल हैं।
ग्रेट निकोबार परियोजना से जुड़ी चिंताएँ क्या हैं?
- स्थानीय जनजातियों पर प्रभाव: यह परियोजना निकोबारी लोगों को उनकी पारंपरिक ज़मीन से वंचित कर सकती है, जो वर्ष 2004 के भारतीय महासागर सुनामी के दौरान पहले ही काफी प्रभावित हो चुकी थी और जिससे गहन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों वाले समुदायों का विस्थापन होगा।
- पर्यावरणीय और पारिस्थितिक चिंताएँ:
- अत्यधिक वनों की कटाई: इस परियोजना के तहत 130 वर्ग किमी. प्राथमिक उष्णकटिबंधीय वर्षावन (ग्रेट निकोबार द्वीप की भूमि का लगभग 15%) को साफ किया जाएगा। वास्तविक पेड़ कटाई 1 करोड़ से अधिक हो सकती है।
- वन्यजीवों के लिये जोखिम: यह परियोजना गलाथिया बे वन्यजीव अभयारण्य में पाए जाने वाले लेदरबैक समुद्री कछुओं के लिये जोखिम उत्पन्न करती है। यह अभयारण्य वर्ष 1997 में उनके संरक्षण हेतु स्थापित किया गया था, लेकिन वर्ष 2021 में बंदरगाह के लिये इसे निरस्त कर दिया गया।
- ICRZ उल्लंघनों का आरोप: याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि प्रस्तावित परियोजना का 700 हेक्टेयर हिस्सा ICRZ क्षेत्रों में आता है, जहाँ ICRZ अधिसूचना, 2019 के तहत विकास सख्ती से प्रतिबंधित है।
- प्रतिपूरक वनीकरण के मुद्दे: निर्मल निकोबार वनों के विचलन की भरपाई के लिये हरियाणा और मध्य प्रदेश में भूमि का उपयोग किया जा रहा है, जिसे आलोचक कहते हैं कि यह विशिष्ट द्वीपीय पारिस्थितिक तंत्र की खोई हुई जैव विविधता की पुनरावृत्ति नहीं कर पाता।
- भूवैज्ञानिक चिंताएँ: इस द्वीप की भूविज्ञान संरचना में टर्शियरी सैंडस्टोन, चूना पत्थर और शेल शामिल हैं, जो ज्वालामुखीय चट्टानों पर स्थित हैं। ये भूकंप के दौरान झटकों को बढ़ा सकते हैं और लिक्विफैक्शन के लिये संवेदनशील हैं।
- कानूनी चिंताएँ: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2002 में नियुक्त शेखर सिंह समिति (आयोग) ने आदिवासी आरक्षित क्षेत्रों और राष्ट्रीय उद्यानों में वृक्षों की कटाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने तथा कटाई से पहले वनीकरण करने की सिफारिश की थी—जो वर्तमान में लागू नहीं की जा रही है।
ग्रेट निकोबार परियोजना की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये क्या आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है?
- पारिस्थितिक संरक्षण रणनीतियाँ: ग्रेट निकोबार पारिस्थितिक तंत्र को 'विधिक व्यक्तित्व' (Legal Personhood) का दर्जा देने जैसे नवोन्मेषी कानूनी उपायों पर विचार करना, ताकि सभी निर्णय संरक्षण-केंद्रित हों।
- दीर्घकालिक पारिस्थितिक निगरानी: मृदा की गुणवत्ता, तटीय कटाव और कार्बन उत्सर्जन जैसे पारिस्थितिक मापदंडों हेतु लंबे समय तक निगरानी स्थापित करना, साथ ही कछुए के घोंसले के स्थलों की सुरक्षा और आवासीय खंडन को रोकने के लिये अनुकूलनीय उपाय लागू करना।
- आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा: पुनर्वास पैकेज इस तरह डिज़ाइन करना चाहिये कि सुनामी से पहले के आवास पैटर्न को मान्यता मिले और निर्माण के दौरान आदिवासी समुदायों की सुरक्षा के लिये सीमित पहुँच प्रोटोकॉल लागू किये जाएँ।
- आदिवासी परिषदों को शामिल करना: ग्रेट और लिटिल निकोबार द्वीपों की आदिवासी परिषदों को परियोजना से संबंधित निर्णयों में शामिल करना अनिवार्य करें और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत उनके कानूनी अधिकारों का पालन सुनिश्चित करना।
- संस्थागत निगरानी और पारदर्शिता: एक बहु-पक्षीय स्वतंत्र निगरानी प्राधिकरण स्थापित करना, जिसमें पर्यावरण विशेषज्ञ, आदिवासी प्रतिनिधि और सरकारी नामांकित सदस्य शामिल हों, ताकि पर्यावरण तथा सामाजिक सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित किया जा सके एवं पारदर्शिता व जवाबदेही बनी रहे।
- सतत आर्थिक अवसर: नवीकरणीय ऊर्जा, पारिस्थितिक रूप से ज़िम्मेदार पर्यटन और कम प्रभाव वाली ऑफशोर गतिविधियों जैसे क्षेत्रों में हरित रोज़गार को बढ़ावा देना। परियोजना के परिणामों को भारत की जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु कार्रवाई की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप बनाना।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा ग्रेट निकोबार परियोजना को कड़े पर्यावरणीय शर्तों के साथ मंज़ूरी देना राष्ट्रीय रणनीतिक हितों और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का एक संतुलित प्रयास है। हालाँकि परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन, स्थानीय आदिवासी PVTGs के साथ वास्तविक परामर्श तथा पारदर्शी संस्थागत निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास स्थायी क्षति पर न हो।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. भारत के समुद्री सुरक्षा ढाँचे में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के रणनीतिक महत्त्व का परीक्षण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना क्या है?
यह एक महा-अवसंरचना परियोजना है, जिसका उद्देश्य ग्रेट निकोबार द्वीप पर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, टाउनशिप और पावर प्लांट विकसित करना है, ताकि इसे रणनीतिक तथा आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
2. ग्रेट निकोबार द्वीप का रणनीतिक महत्त्व क्या है?
इसकी मलक्का जलडमरूमध्य और अन्य समुद्री चोक प्वाइंट्स के पास की निकटता भारत को महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी, चीनी प्रभाव (जैसे– कोको द्वीप) को संतुलित करने तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य शक्ति प्रदर्शन करने की सुविधा देती है।
3. परियोजना के खिलाफ उठाई गई प्रमुख पर्यावरणीय चिंताएँ क्या थीं?
मुख्य चिंताओं में शामिल थीं: विशाल वनक्षेत्र की कटाई (130 वर्ग किमी.), लैदरबैक कछुओं जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों को खतरा, कथित ICRZ उल्लंघन और कोरल रीफ तथा गलाथिया बे वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी पर पारिस्थितिक प्रभाव।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)
- बैरेन द्वीप ज्वालामुखी भारतीय क्षेत्र में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है।
- बैरेन द्वीप ग्रेट निकोबार से लगभग 140 किमी. पूर्व में स्थित है।
- पिछली बार वर्ष 1991 में बैरेन द्वीप ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था और तब से यह निष्क्रिय है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 3
(d) केवल 1 और 3
उत्तर: (a)
प्रश्न. निम्नलिखित द्वीपों के युग्मों में से कौन-सा एक 'दश अंश जलमार्ग' द्वारा आपस में पृथक् किया जाता है? (2014)
(a) अंडमान एवं निकोबार
(b) निकोबार एवं सुमात्रा
(c) मालदीव एवं लक्षद्वीप
(d) सुमात्रा एवं जावा
उत्तर: (a)
मेन्स
प्रश्न. सरकार द्वारा किसी परियोजना को अनुमति देने से पूर्व, अधिकाधिक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अध्ययन किये जा रहे हैं। कोयला गर्त-शिखरों (पिटहेड्स) पर अवस्थित कोयला-अग्नित तापीय संयंत्रों के पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा कीजिये। (2014)
प्रश्न. परियोजना 'मौसम' को भारत सरकार की अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों की सुदृढ़ करने की एक अद्वितीय विदेश नीति पहल माना जाता है। क्या इस परियोजना का एक रणनीतिक आयाम है? चर्चा कीजिये। (2015)

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